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Married Couples Sex Life: शादी के बाद सेक्स कम क्यों होता है? नवीनता और यौन इच्छा का विज्ञान
Married Couples Sex Lifestyle: शादी के कुछ साल बाद सेक्स की इच्छा क्यों बदलने लगती है? जानिए नवीनता, आदत, प्यार, आकर्षण, तनाव, भावनात्मक निकटता और दिमाग के काम करने के तरीके का यौन इच्छा पर असर और लंबे रिश्ते में सेक्स लाइफ को बेहतर रखने के वैज्ञानिक तरीके।
Married Couples Sex Lifestyle Health Explained in Hindi
Married Couples Sex Lifestyle: शादी के शुरुआती दिनों या महीनों में जिस व्यक्ति का एक मैसेज पूरे दिन का मूड बदल देता है, कुछ साल बाद उसी व्यक्ति का मैसेज जैसे रोज आने वाला कोई सामान्य मैसेज लगता है। पहले उस व्यक्ति के पास बैठने का बहाना चाहिए होता था, लेकिन कुछ साल बीतने के बाद बाद दोनों एक ही कमरे में बैठे रहते हैं और फिर भी उनके बीच वह पुरानी बेचैनी नहीं होती। कभी स्पर्श से दिल तेज धड़कता था, अब वही स्पर्श अपनापन तो देता है, लेकिन जरूरी नहीं कि यौन इच्छा भी जगा दे। तब एक सवाल अक्सर रिश्ते के बीच आ खड़ा होता है कि क्या प्यार कम हो गया है?
ऐसा जरूरी नहीं, और शायद यही सबसे दिलचस्प बात है। किसी इंसान से प्यार करना और उसके साथ सेक्स करने की इच्छा महसूस करना एक ही मानसिक प्रक्रिया नहीं है। लंबे रिश्ते में प्रेम, भरोसा, सुरक्षा और अपनापन बढ़ सकते हैं, जबकि यौन इच्छा का वह अचानक उठने वाला उफान कम हो सकता है जो रिश्ते के शुरुआती दिनों में बहुत स्वाभाविक लगता है। इसका एक हिस्सा उम्र, तनाव, नींद, बच्चे, स्वास्थ्य और रिश्ते की गुणवत्ता से जुड़ा है, लेकिन एक बड़ा हिस्सा उस चीज से भी जुड़ा है जिसे हमारा दिमाग बहुत पसंद करता है यानी ‘नवीनता।‘
शुरुआत में आपका साथी आपके लिए लगभग एक रहस्य होता है। आपको पता नहीं होता कि वह अगले पल क्या कहेगा, कैसे छुएगा, कितना करीब आएगा और यह रिश्ता कहाँ जाएगा। वर्षों बाद आप उसके चेहरे के भाव पढ़ लेते हैं, उसकी आवाज से उसका मूड समझ लेते हैं, उसकी आदतें जानते हैं और कई बार वह क्या कहेगा, यह कहने से पहले ही समझ जाते हैं। जिस व्यक्ति को जानना कभी रोमांच था, वही धीरे-धीरे पूरी तरह परिचित हो जाता है।
यहीं से असली सवाल शुरू होता है। क्या हमारा दिमाग उस चीज की ओर ज्यादा खिंचता है जिसे वह पहले से जानता है, या उस चीज की ओर जिसमें अभी भी कुछ अनजान बचा हुआ है? और अगर ऐसा है तो क्या लंबे विवाह में यौन इच्छा को वापस लाने के लिए नया साथी चाहिए, या पुराने साथी को नए तरीके से देखना ही काफी हो सकता है?
विज्ञान का जवाब कहीं ज्यादा दिलचस्प है। लंबे रिश्ते में इच्छा खत्म होना कोई तय नियम नहीं है, लेकिन इच्छा को जिंदा रखने के लिए वही चीजें जरूरी हो सकती हैं जो शुरुआती प्रेम में अपने आप मौजूद थीं, जिज्ञासा, नवीनता, थोड़ी व्यक्तिगत स्वतंत्रता, भावनात्मक सुरक्षा और यह एहसास कि सामने वाला व्यक्ति सिर्फ ‘मेरा पति’ या ‘मेरी पत्नी’ नहीं, बल्कि एक ऐसा इंसान भी है जिसे मैं अभी पूरी तरह जान नहीं पाया हूँ।
सबसे पहले समझिए, यौन इच्छा कोई स्थायी चीज नहीं
यौन इच्छा कोई ऐसी स्थिर चीज नहीं है जो शादी के दिन जितनी थी, बीस साल बाद भी बिल्कुल उतनी ही रहनी चाहिए। वह जीवन के साथ बदलती रहती है। स्ट्रेस, नींद, बच्चे, स्वास्थ्य, दवाएँ, काम का दबाव, अपने शरीर को लेकर धारणा, उम्र, हार्मोन, रिश्ते की गुणवत्ता, प्राइवेसी, आपसी नाराजगी और सेक्स का पिछला अनुभव, ये सब इच्छा को प्रभावित कर सकते हैं।
इसलिए सप्ताह में तीन बार से महीने में तीन बार सेक्स हो जाना अपने आप यह साबित नहीं करता कि रिश्ता खराब हो गया है। इसके उलट, किसी दंपती में सेक्स कम हो लेकिन दोनों उससे संतुष्ट हों, तो जरूरी नहीं कि वहाँ कोई समस्या हो। समस्या मुख्य रूप से तब बनती है जब दोनों की इच्छाओं में बड़ा अंतर हो, उससे किसी एक को लगातार तकलीफ हो या सेक्स कम होने के कारण रिश्ते में अस्वीकृति, दबाव और झगड़े बढ़ने लगें। लंबे रिश्तों में इच्छा का अंतर इतना आम है कि शोधकर्ता इसे कोई असाधारण स्थिति नहीं, बल्कि रिश्तों की सामान्य चुनौती मानते हैं।
शुरुआती प्रेम में दिमाग के लिए साथी एक ‘नई दुनिया’ होता है
नए प्रेम की सबसे बड़ी खासियत सिर्फ आकर्षक साथी होना नहीं, बल्कि नवीनता और अनिश्चितता भी है। अभी आपको पूरी तरह पता नहीं होता कि दूसरा व्यक्ति क्या सोचता है, अगली मुलाकात कब होगी, वह आपको कितना चाहता है, पहला चुंबन कब होगा और यह रिश्ता आखिर कहाँ जाएगा। हर मुलाकात में कुछ नया खोजने को होता है। साथी का संदेश भी महत्वपूर्ण घटना लगता है, उसकी आवाज सुनने की प्रतीक्षा रहती है, शरीर नया है, स्पर्श नया है, उसकी गंध नई है और उसके बारे में मिलने वाली लगभग हर जानकारी नई होती है।
इसे सिर्फ ‘डोपामिन का नशा’ कह देना आसान जरूर है, लेकिन यह बहुत साधारण और अधूरी व्याख्या होगी। मस्तिष्क की ‘पुरस्कार और प्रेरणा’ (Reward and Motivation) से जुड़ी प्रणालियाँ रोमांटिक आकर्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं, लेकिन किसी एक केमिकल को पूरे प्रेम का कारण मानना ठीक नहीं। ज्यादा उपयोगी बात यह है कि इंसानी मस्तिष्क नई, महत्वपूर्ण और पुरस्कार से जुड़ी चीजों पर ज्यादा ध्यान देता है। शादी के कुछ वर्षों बाद वही साथी अनजान नहीं रहता। उसकी चाल, आवाज, आदतें, पसंद, शरीर, गंध, स्पर्श और प्रतिक्रियाएँ बहुत परिचित हो जाती हैं। यह परिचय प्रेम के लिए बहुत अच्छी चीज है, लेकिन नवीनता के लिए चुनौती बन सकता है।
यहीं एक महत्वपूर्ण मनोवैज्ञानिक प्रक्रिया आती है, जिसे आदत पड़ना या अभ्यस्त होना (habituation) कहा जाता है। बार-बार एक ही उत्तेजना मिलने पर उसकी नवीनता और उस पर होने वाली प्रतिक्रिया धीरे-धीरे कम हो सकती है। साथी की नवीनता और यौन प्रतिक्रिया पर हुई रिसर्च में पुरुषों और महिलाओं दोनों में परिचित साथी के प्रति यौन इच्छा या उत्तेजना घटने और नए साथी से जुड़े संकेतों पर प्रतिक्रिया बढ़ने के प्रमाण मिले हैं। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि मानव मस्तिष्क ‘एक ही साथी से ऊबने के लिए बना है’ या विवाह जैविक रूप से अस्वाभाविक है। मामला इससे कहीं ज्यादा जटिल है। मनुष्य में लंबे समय तक लगाव बनाने और जोड़ी के रूप में रहने की भी बहुत मजबूत क्षमता है। सही निष्कर्ष केवल इतना है कि लगाव और नवीनता दो अलग मनोवैज्ञानिक जरूरतें हो सकती हैं और लंबे रिश्ते को दोनों के बीच संतुलन बनाना पड़ता है।
प्यार बढ़ सकता है और वासना घट सकती है
मान लीजिए शादी के दस साल बाद पति-पत्नी एक-दूसरे पर पहले से ज्यादा भरोसा करते हैं, बीमारी में साथ रहते हैं, बच्चों की जिम्मेदारी साझा करते हैं, आर्थिक फैसले मिलकर लेते हैं और एक-दूसरे को अपना सबसे करीबी व्यक्ति मानते हैं। फिर भी सेक्स पहले से कम है। क्या यह संभव है? बिल्कुल।
क्योंकि प्रेम के कई हिस्से होते हैं, जैसे लगाव, देखभाल, सुरक्षा, दोस्ती, सम्मान, रोमांटिक आकर्षण और यौन इच्छा। ये सभी एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं, लेकिन एक ही चीज नहीं हैं। इसलिए कोई व्यक्ति अपने साथी से गहरा प्रेम करते हुए भी किसी खास दौर में कम यौन इच्छा महसूस कर सकता है।
लंबे प्रेमपूर्ण रिश्तों में महिलाओं पर हुए एक छोटे अध्ययन में प्रतिभागियों ने बताया कि अपने साथी के प्रति प्रेम और स्नेह कायम रहने के बावजूद शुरुआती वर्षों की तुलना में यौन इच्छा में तेज कमी आई। यही बात कई दंपतियों को समझ नहीं आती। कम इच्छा को तुरंत ‘तुम मुझसे प्यार नहीं करते’ में बदल दिया जाता है। इससे असली समस्या से बड़ी एक नई समस्या पैदा हो जाती है। सेक्स अब आनंद और निकटता का अवसर नहीं रहता, बल्कि प्रेम की परीक्षा बन जाता है।
एक साथी पूछता है, ‘अगर मुझसे प्यार है तो सेक्स क्यों नहीं?’
दूसरे को लगने लगता है, ‘अगर आज इच्छा नहीं है तो मुझे अपने प्यार का सबूत देना पड़ेगा।’
यहीं से दबाव शुरू होता है और दबाव इच्छा को और कम कर सकता है।
रिश्तों की सुरक्षा कामुक तनाव कम क्यों कर सकती है?
नए रिश्ते में दूरी होती है, रहस्य होता है और दूसरा व्यक्ति पूरी तरह ‘मेरा’ नहीं लगता। लंबे रिश्ते में सुरक्षा बढ़ती है। भावनात्मक स्वास्थ्य के लिए यह बहुत अच्छी बात है। लेकिन कुछ सिद्धांतों के अनुसार यौन इच्छा के लिए निकटता के साथ थोड़ी मनोवैज्ञानिक स्वतंत्रता भी महत्वपूर्ण हो सकती है। यदि दो लोगों का जीवन इतना पूरी तरह एक हो जाए कि दोनों की अलग पहचान, रुचियाँ, मित्र, अनुभव और निजी दुनिया लगभग खत्म हो जाएँ, तो साथी के भीतर ‘खोजने के लिए नया व्यक्ति’ कम बच सकता है। अंतरंगता और यौन इच्छा पर हुई रिसर्च में इसी तनाव पर चर्चा की गई है। बहुत ज्यादा आपसी विलय कुछ परिस्थितियों में इच्छा के लिए चुनौती बन सकता है, हालांकि इसे कोई सार्वभौमिक नियम नहीं माना जा सकता।
इसे आसान उदाहरण से समझिए - शादी के शुरुआती दिनों में आप शाम को अपने साथी से मिलते हैं और उसके पास आपको बताने के लिए पूरे दिन की बातें होती हैं। वर्षों बाद अगर दोनों चौबीस घंटे लगभग हर काम साथ करते हैं, एक ही सामाजिक दुनिया है और एक-दूसरे की हर गतिविधि पहले से मालूम है, तो रहस्य कम हो सकता है।
इसका समाधान जानबूझकर एक-दूसरे से दूरी बनाना नहीं है। असल बात यह है कि दोनों व्यक्तियों की अपनी पहचान और अपनी दुनिया भी बनी रहे। दिलचस्प शोध में पाया गया कि जब जोड़े साथ मिलकर नई और खुद को विकसित करने वाली गतिविधियाँ करते हैं, तो उनका संबंध अधिक यौन इच्छा और बेहतर रिश्ते से दिखाई देता है। तीन अध्ययनों में नए साझा अनुभवों से बढ़ा आत्म-विस्तार अधिक इच्छा, सेक्स की अधिक संभावना और अधिक यौन संतुष्टि से जुड़ा था। इसलिए लंबे रिश्ते में नवीनता का मतलब नया साथी होना जरूरी नहीं है। पुराने साथी के साथ नया अनुभव भी मस्तिष्क को नवीनता दे सकता है।
बच्चे आने के बाद सेक्स क्यों बदल सकता है?
शादी के शुरुआती वर्षों में जिस समय सेक्स कम होता है, उसी समय बहुत से दंपतियों के जीवन में बच्चे भी आते हैं। इसलिए लोग बदलाव को केवल ‘शादी पुरानी हो गई’ मान लेते हैं, जबकि असली कारणों में नींद की कमी, प्रसव के बाद शारीरिक बदलाव, स्तनपान, हार्मोन में परिवर्तन, बच्चे की लगातार मौजूदगी, काम का बोझ और निजता का लगभग खत्म हो जाना शामिल हो सकता है। कल्पना कीजिए - एक व्यक्ति पांच घंटे की टूटी हुई नींद के बाद उठा, पूरे दिन नौकरी की, शाम को बच्चे की जिम्मेदारी निभाई, घर का काम किया और रात 11 बजे पहली बार बिस्तर पर पहुँचा। ऐसे में उसका शरीर बिस्तर को सेक्स से पहले नींद से जोड़ सकता है। यह साथी के प्रति आकर्षण का फैसला नहीं, बल्कि शरीर की प्राथमिकताओं का परिणाम हो सकता है।
अगर घर और बच्चों की जिम्मेदारियों का बोझ एक व्यक्ति पर असमान रूप से पड़ा हो तो स्थिति और जटिल हो सकती है। दिनभर जिस साथी के प्रति मन में शिकायत और थकान जमा हुई हो, उसी के प्रति रात में सहज कामुकता पैदा करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए कभी-कभी ‘सेक्स की समस्या’ वास्तव में बेडरूम के बाहर की समस्या होती है।
साथी का व्यवहार बेडरूम के बाहर के जीवन से होकर यौन जीवन को प्रभावित कर सकता है। जिस व्यक्ति को अपना साथी समझने वाला, ध्यान रखने वाला और उसकी जरूरतों के प्रति संवेदनशील लगता है, वहाँ अंतरंगता और इच्छा के लिए ज्यादा अनुकूल माहौल बन सकता है।
‘जवाबी इच्छा’ (responsive desire), इच्छा हमेशा पहले नहीं आती
यौन संबंधों को लेकर एक लोकप्रिय धारणा है कि सही सेक्स का क्रम हमेशा ऐसा होना चाहिए: पहले अचानक इच्छा पैदा होगी, फिर दोनों सेक्स करेंगे। शुरुआती प्रेम में ऐसा अक्सर होता है, इसलिए लोग इसे यौन इच्छा का एकमात्र ‘असली’ रूप मान लेते हैं। लेकिन लंबे रिश्ते में कई लोगों का अनुभव अलग हो सकता है। दिनभर व्यक्ति सेक्स के बारे में नहीं सोच रहा होता, लेकिन साथी का स्पर्श, बातचीत, चुंबन, निकटता और पर्याप्त उत्तेजना शुरू होने के बाद इच्छा पैदा हो सकती है।
यानी हर बार क्रम इच्छा → उत्तेजना → सेक्स ही हो, ऐसा जरूरी नहीं।
कभी क्रम निकटता → उत्तेजना → इच्छा भी हो सकता है।
इसलिए वर्षों बाद अपने आप उठने वाली इच्छा कम होने का मतलब यह नहीं कि यौन क्षमता खत्म हो गई है। हो सकता है कि व्यक्ति को पहले सही मानसिक और शारीरिक माहौल की जरूरत हो। लेकिन इसका अर्थ बिल्कुल यह नहीं है कि इच्छा न होने पर किसी व्यक्ति पर सेक्स का दबाव डाला जाए। सहमति हर चरण में जरूरी है। ‘इच्छा बाद में आ जाएगी’ किसी साथी को मजबूर करने का तर्क नहीं हो सकता।
क्या पुरुष हमेशा सेक्स चाहते रहते हैं और महिलाओं की इच्छा ही घटती है?
यह भी बहुत सरल बना दिया गया एक मिथक है। कुछ पुराने और छोटे अध्ययनों में रिश्ते की अवधि के साथ महिलाओं की इच्छा में ज्यादा गिरावट देखी गई। उदाहरण के लिए, 18 से 25 वर्ष की उम्र के 170 युवाओं पर हुए एक अध्ययन में रिश्ते की अवधि महिलाओं की यौन इच्छा में कमी से जुड़ी थी, जबकि पुरुषों में ऐसा स्पष्ट संबंध नहीं मिला।
एक अन्य सर्वे में भी रिश्ते की अवधि बढ़ने के साथ पुरुषों और महिलाओं दोनों में यौन गतिविधि तथा संतुष्टि कम होती दिखाई दी, लेकिन इच्छा में कमी मुख्य रूप से महिलाओं में मिली। हालांकि शोधकर्ताओं ने खुद सावधानी बरती कि यह अध्ययन एक ही समय पर लोगों से मिली जानकारी पर आधारित था, इसलिए इसे हर विवाह की पूरी जीवन-यात्रा का निश्चित नियम नहीं माना जा सकता।
दूसरी ओर, साथी की नवीनता पर हुई समीक्षा में पुरुषों और महिलाओं दोनों में परिचित साथी के साथ इच्छा या उत्तेजना घटने की संभावना मिली। कुछ प्रभाव पुरुषों में ज्यादा मजबूत दिखाई दिए। इसलिए ‘पुरुष की इच्छा स्थायी रहती है और महिला की घटती है’ विज्ञान का नियम नहीं है। पुरुषों में भी तनाव, डिप्रेशन, नींद की कमी, कम टेस्टोस्टेरोन, डायबिटीज, मोटापा, दवाएँ, स्तंभन संबंधी समस्या (erectile difficulty), रिश्ते का तनाव और सेक्सुअल परफॉरमेंस को लेकर चिंता यौन इच्छा को कम कर सकते हैं।
सेक्स कम होने के बाद और घटता क्यों चला जाता है?
कई दंपतियों में एक ऐसा चक्र बन सकता है जो खुद को लगातार मजबूत करता जाता है। शुरुआत काम और थकान के कारण सेक्स कम होने से हुई। फिर एक साथी ने इसे उदासीनता या अस्वीकृति समझ लिया। उसने ज्यादा बार पहल करनी शुरू की। इससे दूसरे को दबाव महसूस होने लगा। अब साधारण स्पर्श का अर्थ भी यह हो गया कि ‘इसके बाद सेक्स की मांग की जाएगी।’ अब साथी सामान्य आलिंगन से भी कतराने लगा।
पहले साथी को लगा कि अब तो प्यार भी खत्म हो रहा है। उसने और शिकायत करनी शुरू कर दी। कुछ महीनों में असली समस्या ‘हम बहुत थके हुए हैं’ से बदलकर ‘तुम मुझे चाहते/चाहती ही नहीं’ हो जाती है।
यहाँ समस्या सिर्फ यौन इच्छा की नहीं रहती, बल्कि सेक्स से जुड़ा अर्थ समस्या बन जाता है। जिस क्षण सेक्स प्रेम, मर्दानगी, स्त्रीत्व, निष्ठा या रिश्ते की गुणवत्ता का रोज का परीक्षण बन जाता है, सहजता कम हो सकती है।
बार-बार अस्वीकृति पाने वाले साथी के साथ क्या होता है?
कम इच्छा वाले व्यक्ति की परेशानी वास्तविक है, लेकिन ज्यादा इच्छा रखने वाले साथी की पीड़ा भी उतनी ही वास्तविक हो सकती है। लगातार पहल करना और बार-बार मना किया जाना व्यक्ति के आत्मसम्मान को चोट पहुँचा सकता है। वह सोच सकता है, ‘मैं अब आकर्षक नहीं रहा’, ‘वह किसी और को चाहता है’ या ‘मेरे साथ सिर्फ जिम्मेदारी निभाई जा रही है।’
अगर यह दर्द आरोप में बदल जाए तो दूसरा व्यक्ति और दूर जा सकता है। इसलिए लंबे रिश्ते में यौन इच्छा की समस्या के दौरान यह तय करना कि ‘गलती किसकी है’, अक्सर बहुत उपयोगी नहीं होता। समस्या कई बार दो लोगों के बीच बन चुकी उस गतिशीलता में होती है जिसमें दोनों अनजाने में एक-दूसरे की प्रतिक्रिया को और मजबूत कर रहे होते हैं। साथी की जरूरतों को समझने और उचित समझौता करने की इच्छा का संबंध यौन और रिश्ते की संतुष्टि से पाया गया है। लेकिन इसकी भी एक सीमा है। साथी की जरूरतों के प्रति संवेदनशील होना (responsiveness) का मतलब अपनी इच्छा, आराम या अपनी सीमा को लगातार दबाते रहना नहीं है। क्या सेक्स को कैलेंडर में रखना रोमांस की हत्या है?
बहुत से लोग कहते हैं, ‘अगर सेक्स भी तय करना पड़े तो उसमें रोमांस कहाँ रहा?’ लेकिन इसी तर्क से देखें तो डेट, छुट्टी, सालगिरह और साथ बिताया जाने वाला समय भी अक्सर पहले से तय होता है। फिर भी इसका मतलब यह नहीं कि उनका महत्व खत्म हो जाता है। दीर्घकालीन रिश्तों पर हुए शोध में जोड़ों ने नवीनता, साझा अनुभव, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और जानबूझकर किए गए प्रयास को इच्छा बनाए रखने वाले तत्वों में गिना। इस शोध ने उस आम धारणा को भी चुनौती दी कि ‘सच्ची इच्छा’ वही है जो बिना किसी योजना के अपने आप पैदा हो। लेकिन योजना का मतलब यह भी नहीं कि रात 9:15 बजे मशीन की तरह सेक्स करना ही है। इसका मतलब इतना हो सकता है कि उस शाम बच्चों की जिम्मेदारी किसी और के पास होगी, फोन अलग रखेंगे, दोनों साथ समय बिताएँगे और अंतरंगता के लिए जगह बनाएँगे। सेक्स हो भी सकता है और नहीं भी। असल में लंबे रिश्ते में अपने आप पैदा होने वाली इच्छा भी कई बार ऐसी परिस्थितियों में जन्म लेती है जिन्हें पहले से तैयार किया गया हो।
नया साथी आकर्षक क्यों लग सकता है जबकि पुराने साथी से प्यार ज्यादा है?
यह सवाल असहज जरूर है, लेकिन वैज्ञानिक रूप से महत्वपूर्ण है। लंबे विवाह में रहते हुए किसी दूसरे व्यक्ति का आकर्षक लगना अपने आप यह साबित नहीं करता कि विवाह खत्म हो गया है। नया व्यक्ति मस्तिष्क के लिए अनिश्चित और अप्रत्याशित होता है। उसकी आदतें पता नहीं होतीं, उसके साथ घरेलू विवादों और बिलों का इतिहास नहीं होता और उसके बारे में जो बातें मालूम नहीं होतीं, उन्हें कल्पना अक्सर आदर्श तरीके से भर देती है।
पुराने साथी को आप वास्तविकता में जानते हैं, जबकि नए व्यक्ति को अक्सर संभावना और कल्पना में जानते हैं। इसलिए दोनों की तुलना बराबरी की तुलना नहीं होती।
साथी की नवीनता और यौन प्रतिक्रिया पर हुई समीक्षा में भी परिचय बढ़ने के साथ इच्छा कम होने और नवीनता के प्रति प्रतिक्रिया बढ़ने के प्रमाण मिले हैं। लेकिन इससे बेवफाई को ‘जैविक रूप से जरूरी’ साबित नहीं किया जा सकता। मनुष्य अपनी हर इच्छा या प्रेरणा पर व्यवहार करने के लिए मजबूर नहीं होता।
क्या पोर्न भी लंबे रिश्ते में आकर्षण कम कर सकता है?
पोर्न यानी अश्लील सामग्री का उपयोग, उसकी आवृत्ति, उसका प्रकार, व्यक्ति का पहले से मौजूद यौन व्यवहार, रिश्ते में उसके बारे में खुलापन और दोनों साथियों की उसके प्रति सोच, सब महत्वपूर्ण हैं।
कुछ लोगों में इसका कोई बड़ा नुकसान दिखाई नहीं देता, जबकि कुछ लोगों में अत्यधिक उपयोग, इसे छिपाना, अप्राकृतिक अपेक्षाएँ या वास्तविक सेक्स की तुलना लगातार बदलती डिजिटल उत्तेजना से करने की आदत समस्या बन सकती है। इसलिए यह कहना कि ‘पोर्न देखने से पत्नी या पति आकर्षक लगना बंद हो जाता है’, वैज्ञानिक रूप से उचित निष्कर्ष नहीं है।
लेकिन अगर वास्तविक साथी की तुलना लगातार बदलते और बहुत ज्यादा उत्तेजक डिजिटल संकेतों से होने लगे और वास्तविक अंतरंगता प्रभावित होने लगे, तो उस व्यवहार पर दोबारा विचार करना उचित है।
आकर्षण वापस लाने में ‘नई सेक्स पोजीशन’ ही समाधान क्यों नहीं?
ऐसा इसलिए कि यौन इच्छा सिर्फ शरीर के किसी एक हिस्से की घटना नहीं है। अगर रिश्ते में अपमान, नाराजगी, घर के काम का असमान बोझ, भावनात्मक दूरी, स्वास्थ्य समस्या या लगातार दबाव मौजूद है, तो सिर्फ नई यौन तकनीक समस्या हल नहीं कर सकती। कभी-कभी सबसे प्रभावी ‘कामोत्तेजक’ बेडरूम में नहीं होता। वह दिन के किसी साधारण पल में होता है, जब व्यक्ति को महसूस होता है कि उसका साथी उसे देखता है, समझता है और उसकी परवाह करता है।
साथी की संवेदनशीलता और प्रतिक्रिया (partner responsiveness) पर हुए तीन अध्ययनों में जिस व्यक्ति ने अपने साथी को ज्यादा संवेदनशील और समझने वाला महसूस किया, उसके प्रति अधिक यौन इच्छा का संबंध पाया गया। खासकर वहाँ, जहाँ इस संवेदनशीलता से व्यक्ति को अपने साथी के लिए खास और मूल्यवान महसूस हुआ। 2025 और 2026 के दंपती अध्ययनों में भी यौन इच्छा से जुड़ी कठिनाइयों का सामना कर रहे जोड़ों में साथी की संवेदनशीलता, साझा नए अनुभवों और बेहतर यौन संतुष्टि तथा इच्छा के बीच संबंध सामने आया है।
क्या छुट्टी पर जाते ही सेक्स बेहतर होना इसी कारण है?
कई दंपतियों का अनुभव होता है कि घर पर महीनों से इच्छा कम थी, लेकिन छुट्टी पर जाते ही सेक्स अचानक बढ़ गया। इसका एक संभावित कारण यह है कि वहाँ रोजमर्रा की भूमिकाएँ कुछ समय के लिए पीछे छूट जाती हैं। सामने वही पति या पत्नी है, लेकिन वातावरण नया है, काम का तनाव कम है, बच्चों या घरेलू जिम्मेदारियों से थोड़ी दूरी है, कपड़े अलग हैं, खाना अलग है, कमरा अलग है और साथ बिताने के लिए ज्यादा समय है। मतलब यह कि साथी नहीं बदला, संदर्भ बदल गया। यही बात उस धारणा को चुनौती देती है कि लंबे रिश्ते में कम इच्छा का मतलब हमेशा साथी के प्रति आकर्षण का स्थायी खत्म हो जाना है।
उम्र और शादी की अवधि को अलग करना क्यों जरूरी है?
दस साल की शादी का मतलब यह भी है कि दोनों दस साल बड़े हो चुके हैं। इसलिए समय के साथ सेक्स में आए बदलाव को केवल ‘एक ही साथी से ऊब’ कह देना सही नहीं है। इस दौरान हार्मोन बदल सकते हैं, मीनोपॉज से पहले का दौर (perimenopause) शुरू हो सकता है, पुरुषों में स्तंभन (इरेक्शन) संबंधी दिक्कतें आ सकती हैं, डायबिटीज या ब्लडप्रेशर की समस्या डेवलप हो सकती है, वजन बदल सकता है, नई दवाएँ शुरू हो सकती हैं और नींद की क्वालिटी गिर सकती है। डिप्रेशन और चिंता भी यौन इच्छा को प्रभावित कर सकते हैं। कुछ डिप्रेशनरोधी दवाएँ (antidepressants) यौन इच्छा और चरमसुख (orgasm) को प्रभावित कर सकती हैं। शराब का अधिक सेवन, लगातार तनाव और नींद की कमी भी भूमिका निभा सकते हैं। इसलिए अगर यौन इच्छा अचानक बहुत कम हुई है तो सिर्फ विवाह के मनोविज्ञान को दोष देना ठीक नहीं होगा। नया स्वास्थ्य परिवर्तन, नई दवा, हार्मोन में बदलाव या मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या भी देखनी चाहिए।
क्या कम सेक्स का मतलब खराब शादी है?
ऐसी कोई वैज्ञानिक संख्या ऐसी नहीं है कि ‘स्वस्थ विवाहित दंपती को सप्ताह में इतने बार सेक्स करना ही चाहिए।’ दो लोग महीने में एक बार सेक्स करके संतुष्ट हो सकते हैं, जबकि दूसरा दंपती सप्ताह में तीन बार सेक्स करके भी असंतुष्ट हो सकता है।
महत्वपूर्ण संख्या नहीं, दोनों का अनुभव है। अगर दोनों खुश हैं तो बाहर का औसत बहुत मायने नहीं रखता। लेकिन अगर एक व्यक्ति लगातार दुखी है और दूसरा बातचीत से बच रहा है, तो सेक्स चाहे जितनी बार हो, समस्या पर ध्यान देना जरूरी है। इसलिए ‘हम पहले सप्ताह में चार बार सेक्स करते थे, अब एक बार करते हैं, इसलिए हमारा विवाह खराब हो रहा है’, यह जरूरी निष्कर्ष नहीं है। जीवन के अलग-अलग चरणों में रिश्ते भी बदलते हैं।
इच्छा वापस लाने का विज्ञान क्या संकेत देता है?
सबसे पहले कम सेक्स को चरित्र की कमी या प्रेम की कमी मानना बंद करना उपयोगी हो सकता है। ‘तुम कभी पहल नहीं करते’ कहने के बजाय यह समझना ज्यादा उपयोगी है कि इच्छा किन परिस्थितियों में आती है और किन परिस्थितियों में चली जाती है। क्या समस्या थकान है, दर्द है, बच्चे हैं, निजता की कमी है, नाराजगी है, अपने शरीर को लेकर असहजता है, कोई दवा है, स्तंभन की समस्या है या सेक्स इतना अनुमानित हो चुका है कि उसमें खोज और नवीनता बची ही नहीं?
दूसरी बात, नवीनता सिर्फ बेडरूम में पैदा नहीं होती। साथ किसी नई जगह जाना, कोई नई गतिविधि सीखना, यात्रा करना, नृत्य सीखना, नया शौक अपनाना या ऐसी बातचीत करना जो वर्षों से नहीं हुई, कभी-कभी साथी को फिर उस व्यक्ति के रूप में देखने में मदद कर सकता है जो सिर्फ पति, पत्नी, माता-पिता या घर की जिम्मेदारियों तक सीमित नहीं है। साझा रूप से खुद को विकसित करने वाली गतिविधियों का अधिक यौन इच्छा और यौन संतुष्टि से संबंध प्रयोगात्मक और लंबे समय तक किए गए अध्ययनों में पाया गया है।
तीसरी बात, अपनी व्यक्तिगत पहचान बचाए रखना महत्वपूर्ण हो सकता है। इसका मतलब हर समय दूरी बनाए रखना नहीं है, बल्कि इतना स्वतंत्र जीवन जरूर होना कि दोनों के पास एक-दूसरे के पास लौटकर लाने के लिए कुछ नया हो। दिलचस्प बात यह है कि शोध यह भी बताता है कि अगर व्यक्तिगत विकास लगातार साथी से अलग दुनिया में हो और दोनों के बीच साझा निकटता घटती जाए, तो वही चीज जुनून को कम भी कर सकती है। यानी स्वस्थ सूत्र केवल ‘दूरी’ नहीं है, बल्कि व्यक्तिगत विकास और साझा विकास के बीच संतुलन है।
चौथी बात, सेक्स को सिर्फ संभोग और चरमसुख की परीक्षा न बनाया जाए। स्पर्श, चुंबन, मालिश, आलिंगन और बिना किसी अनिवार्य अगले चरण के शारीरिक निकटता उस दबाव को कम कर सकती है जिसमें हर स्पर्श का मतलब ‘अब सेक्स करना ही पड़ेगा’ हो गया हो।
कब इसे सामान्य बदलाव मानने के बजाय मदद लेनी चाहिए?
अगर यौन इच्छा में अचानक और स्पष्ट गिरावट आई हो, सेक्स में दर्द हो, लगातार स्तंभन संबंधी समस्या हो, चरमसुख में नया बदलाव आया हो, अवसाद या गंभीर चिंता हो, नई दवा शुरू होने के बाद समस्या पैदा हुई हो या दोनों की यौन इच्छा में अंतर लगातार संघर्ष और पीड़ा पैदा कर रहा हो, तो चिकित्सक या योग्य यौन एवं दंपती चिकित्सक से बात करना उपयोगी हो सकता है। यहाँ लक्ष्य यह समझना है कि उसके शरीर, मन और रिश्ते में आखिर क्या बदल रहा है। और इस पूरे सवाल का शायद सबसे महत्वपूर्ण जवाब यही है कि शादी के कुछ साल बाद सेक्स कम होना अपने आप प्यार कम होने का प्रमाण नहीं है। शुरुआती प्रेम में नवीनता, अनिश्चितता और खोज अपने आप मौजूद रहती है। लंबे प्रेम में सुरक्षा, परिचय और दिनचर्या बढ़ जाती है। जो चीज पहले अपने आप मिलती थी, उसके लिए अब कभी-कभी जगह बनानी पड़ती है। यही वजह है कि लंबे रिश्ते का प्रेम और लंबे रिश्ते की कामुकता अलग तरह की समझ और कोशिश मांग सकते हैं। प्रेम कहता है, ‘मैं तुम्हें जानता हूँ, तुम मेरे अपने हो।’ यौन आकर्षण का एक हिस्सा कहता है, ‘तुम्हारे भीतर अभी भी कुछ ऐसा है जिसे मैं पूरी तरह नहीं जानता।’
स्वस्थ दीर्घकालीन संबंध शायद इन दोनों वाक्यों को एक साथ जिंदा रखने की कला है। एक ही साथी का परिचित हो जाना समस्या नहीं है। उसका पूरी तरह अनुमानित हो जाना कभी-कभी समस्या बन सकता है। इसलिए लंबे रिश्ते में इच्छा बनाए रखने का मतलब लगातार उत्तेजना पैदा करना नहीं है। असली बात है दो लोगों के बीच जिज्ञासा, व्यक्तिगत पहचान, बातचीत, सम्मान, नवीनता और बिना दबाव वाली शारीरिक निकटता के लिए जगह बचाए रखना। शोध भी यही संकेत देता है कि यौन इच्छा केवल शरीर के भीतर अपने आप उठने वाली लहर नहीं है। वह उस रिश्ते और उस माहौल से भी पैदा होती है जिसे दो लोग मिलकर बनाते हैं।


