सुबह उठते ही यौन उत्तेजना क्यों होती है? सिर्फ हार्मोन नहीं, दिमाग और नींद की अवस्था की भी है बड़ी भूमिका

Morning Erection: सुबह उठते समय पुरुषों में स्तंभन क्यों होता है? जानिए REM नींद, दिमाग, नाइट्रिक ऑक्साइड, टेस्टोस्टेरोन और स्वायत्त तंत्रिका तंत्र की भूमिका।

Yogesh Mishra
Published on: 25 Aug 2026 11:59 PM IST (Updated on: 25 Aug 2026 11:59 PM IST)
Morning Erection
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Morning Erection (Image Credit-Social Media)

Morning Erection: सुबह उठते समय पुरुषों में होने वाला स्तंभन (erection) अक्सर गलत ढंग से केवल ‘सुबह टेस्टोस्टेरोन ज्यादा होता है’ कहकर समझा दिया जाता है। टेस्टोस्टेरोन इसमें भूमिका निभाता जरूर है, लेकिन पूरी कहानी उससे कहीं बड़ी है। असल कारण है नींद की अवस्था, मस्तिष्क के नियंत्रण में बदलाव, स्वायत्त तंत्रिका तंत्र का संतुलन, नाइट्रिक ऑक्साइड से रक्तवाहिकाओं का फैलना और रातभर कई बार होने वाला स्वाभाविक स्तंभन। सुबह जो दिखाई देता है, वह कई बार रात के अंतिम नींद-चक्र का अंतिम हिस्सा होता है।

सुबह का स्तंभन हमेशा यौन विचारों की वजह से नहीं होता

सबसे पहले एक महत्वपूर्ण बात यह है कि सुबह का स्तंभन जरूरी नहीं कि उस समय व्यक्ति कोई यौन सपना देख रहा हो या सचेत रूप से सेक्स के बारे में सोच रहा हो। यह अक्सर पूरी तरह अनैच्छिक शारीरिक घटना होती है।

स्वस्थ पुरुषों में नींद के दौरान बार-बार स्तंभन होता है। इसका सबसे मजबूत संबंध नींद की उस अवस्था से है, जिसमें आँखें तेजी से चलती हैं और सपने अधिक जीवंत होते हैं। चिकित्सा साहित्य में इसे नींद-संबंधी स्तंभन कहा जाता है। यह केवल युवाओं में नहीं, शैशवावस्था से वृद्धावस्था तक देखा जा सकता है। हालांकि उम्र के साथ इसकी तीव्रता और अवधि कम हो सकती है।

नींद के आखिरी हिस्से में क्यों ज्यादा दिखता है?

रात की नींद एक जैसी नहीं होती। हम लगभग डेढ़ घंटे के चक्रों में अलग-अलग अवस्थाओं से गुजरते हैं। इनमें गहरी नींद और तीव्र नेत्र-गति वाली नींद बार-बार आती हैं।

रात के शुरुआती हिस्से में गहरी नींद अधिक होती है, जबकि सुबह के करीब तीव्र नेत्र-गति वाली नींद की अवधि लंबी होने लगती है। इसी अवस्था में पुरुषों में स्तंभन बार-बार देखा जाता है।

इसलिए यदि आपकी नींद सुबह उसी अवस्था के दौरान या उसके तुरंत बाद खुलती है, तो आप पहले से चल रहे स्तंभन के साथ जाग सकते हैं। इसीलिए इसे केवल ‘सुबह होने वाला स्तंभन’ कहना थोड़ा भ्रामक है। कई बार यह वास्तव में रात के अंतिम नींद-चक्र का स्तंभन होता है।

सोते समय दिमाग में क्या बदलता है?

अब समझिए कि उस समय दिमाग में क्या बदलता है। जागते समय हमारे मस्तिष्क का एक बड़ा हिस्सा शरीर के व्यवहार पर निरंतर नियंत्रण रखता है। हम आसपास के वातावरण पर ध्यान देते हैं, निर्णय लेते हैं, शरीर की मुद्रा नियंत्रित करते हैं और स्वायत्त तंत्रिका तंत्र में भी एक विशेष संतुलन बना रहता है।

नींद की तीव्र नेत्र-गति अवस्था में यह नियंत्रण-पद्धति बदल जाती है। कई मस्तिष्कीय केंद्रों की सक्रियता का ढंग बदलता है और स्तंभन को दबाने वाले तथा बढ़ाने वाले तंत्रों के बीच संतुलन अलग हो जाता है।

विशेष रूप से हाइपोथैलेमस और उसके प्रीऑप्टिक क्षेत्र को नींद-संबंधी स्तंभन के नियंत्रण में महत्वपूर्ण माना जाता है। पशु-अध्ययनों और तंत्रिका-विज्ञान संबंधी शोध ने दिखाया है कि मस्तिष्क के ये क्षेत्र रीढ़ की हड्डी और स्वायत्त तंत्रिका तंत्र से जुड़े उन रास्तों को प्रभावित करते हैं, जो जननांगों में रक्त प्रवाह नियंत्रित करते हैं।

इसका मतलब है कि सुबह का स्तंभन केवल स्थानीय रक्तवाहिका की घटना नहीं है। उसके पीछे मस्तिष्क से रीढ़ और वहाँ से जननांग तक फैला पूरा तंत्रिका-जाल काम कर रहा होता है।

स्वायत्त तंत्रिका तंत्र भी निभाता है बड़ी भूमिका

यहाँ स्वायत्त तंत्रिका तंत्र का फर्क महत्वपूर्ण है। हमारे शरीर में मोटे तौर पर दो प्रमुख स्वचालित नियंत्रण-प्रणालियाँ होती हैं। एक शरीर को सतर्कता, तनाव और कार्रवाई के लिए तैयार करती है। दूसरी विश्राम, पाचन और कई प्रकार की शारीरिक पुनर्बहाली से जुड़ी है।

स्तंभन में दूसरी प्रणाली, यानी पैरासिम्पेथेटिक तंत्र, महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके सक्रिय होने पर जननांग की रक्तवाहिकाओं में ऐसी रासायनिक प्रक्रियाएँ बढ़ती हैं, जिनसे चिकनी मांसपेशियाँ ढीली होती हैं और रक्त का प्रवाह बढ़ता है।

जागृत अवस्था की तुलना में नींद की विशेष अवस्थाओं में यह संतुलन स्तंभन के पक्ष में जा सकता है।

नाइट्रिक ऑक्साइड कैसे पैदा करता है स्तंभन?

इस प्रक्रिया में एक अत्यंत महत्वपूर्ण अणु है नाइट्रिक ऑक्साइड। यह तंत्रिकाओं और रक्तवाहिकाओं से जुड़े संकेतों के माध्यम से जननांग की चिकनी मांसपेशियों को ढीला करने में सहायता करता है।

जैसे ही वे मांसपेशियाँ ढीली होती हैं, अधिक रक्त भीतर आता है और बाहर निकलने वाला रक्त कुछ समय के लिए कम हो जाता है। परिणाम है स्तंभन।

नींद-संबंधी स्तंभन की शरीर-क्रिया में नाइट्रिक ऑक्साइड प्रणाली को महत्वपूर्ण माना जाता है।

क्या टेस्टोस्टेरोन की वजह से होता है सुबह का स्तंभन?

अब टेस्टोस्टेरोन पर आइए। यह सच है कि पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर नींद से गहराई से जुड़ा है। रात में सोने के बाद इसका स्तर बढ़ सकता है और सुबह के आसपास अपेक्षाकृत ऊँचा हो सकता है।

शोध यह भी दिखाता है कि टेस्टोस्टेरोन का रात्रिकालीन बढ़ना केवल घड़ी के समय से नहीं, बल्कि सोने की प्रक्रिया और नींद की गुणवत्ता से संबंधित है। खराब या बहुत कम नींद टेस्टोस्टेरोन को कम कर सकती है।

लेकिन यह कहना कि ‘सुबह टेस्टोस्टेरोन बढ़ा और इसलिए स्तंभन हो गया’ बहुत अधूरा है।

यदि केवल टेस्टोस्टेरोन कारण होता तो हर सुबह एक निश्चित स्तर पर पहुँचते ही स्तंभन होना चाहिए था। वास्तविकता में नींद-संबंधी स्तंभन का सबसे स्पष्ट संबंध नींद की विशेष अवस्था से है।

टेस्टोस्टेरोन उस व्यवस्था को सहारा और संवेदनशीलता देता है, वह अकेला बटन नहीं है। कम टेस्टोस्टेरोन होने पर नींद-संबंधी स्तंभन कमजोर हो सकते हैं। लेकिन उन्हें नियंत्रित करने वाला तंत्र मस्तिष्क, स्वायत्त तंत्रिका तंत्र और रक्तवाहिकाओं का संयुक्त नेटवर्क है।

इसलिए सुबह के स्तंभन को समझने का बेहतर तरीका है—रात में मस्तिष्क की अवस्था बदली + तंत्रिका नियंत्रण बदला + रक्तवाहिकाएँ स्तंभन के पक्ष में गईं + टेस्टोस्टेरोन ने इस तंत्र को सहयोग दिया + उसी समय आपकी नींद खुल गई।

क्या भरा हुआ मूत्राशय भी इसकी वजह है?

एक और लोकप्रिय धारणा है कि सुबह मूत्राशय भर जाने से स्तंभन होता है। इसमें कुछ सीमित शारीरिक संबंध संभव है, क्योंकि भरा हुआ मूत्राशय श्रोणि और आसपास की तंत्रिका गतिविधि को प्रभावित कर सकता है।

लेकिन इसे मुख्य कारण मानना सही नहीं है। यदि भरा मूत्राशय ही मुख्य कारण होता तो नींद के अलग-अलग चरणों में बार-बार होने वाले स्तंभन की व्याख्या नहीं हो पाती।

वैज्ञानिक रूप से नींद की तीव्र नेत्र-गति अवस्था और मस्तिष्कीय नियंत्रण ज्यादा मजबूत व्याख्या है।

क्या यौन सपना आने पर ही होता है?

इसी तरह यौन सपना भी आवश्यक नहीं है। तीव्र नेत्र-गति नींद में सपने ज्यादा आते हैं और उसी अवस्था में स्तंभन भी सामान्य है, इसलिए दोनों एक साथ मिल सकते हैं। लेकिन एक का होना दूसरे का कारण सिद्ध नहीं करता।

आदमी बिना किसी याद रहने वाले कामुक सपने के भी सुबह पूर्ण स्तंभन के साथ जाग सकता है।

रात में एक बार नहीं, कई बार हो सकता है

असल में रात में यह प्रक्रिया कई बार हो सकती है। स्वस्थ पुरुष रातभर में अलग-अलग नींद-चक्रों के साथ कई नींद-संबंधी स्तंभन अनुभव कर सकता है।

हर बार वह जागता नहीं, इसलिए उसे उनका पता नहीं चलता। सुबह वाला इसलिए याद रहता है क्योंकि उसी समय चेतना लौट जाती है।

कुछ मिनट पहले नींद खुल जाए या बाद में, तो वही व्यक्ति सोच सकता है कि आज ‘सुबह का स्तंभन’ नहीं हुआ, जबकि रात में कई बार हो चुका हो सकता है।

क्या इसका शरीर के स्वास्थ्य से भी संबंध है?

यह घटना शरीर के लिए केवल यौन इच्छा से भी अधिक अर्थ रख सकती है। एक विचार यह है कि नींद के दौरान बार-बार होने वाला रक्त प्रवाह जननांग के ऊतकों को ऑक्सीजनयुक्त रक्त पहुँचाने और उनकी कार्यक्षमता बनाए रखने में भूमिका निभा सकता है।

इस विषय में कुछ जैविक तर्क और शोध हैं, हालांकि यह कहना कि यही इसका एकमात्र या सिद्ध विकासवादी उद्देश्य है, अभी जल्दबाजी होगी। नींद-संबंधी स्तंभन का पूरा उद्देश्य और उसका तंत्र आज भी पूरी तरह समझा नहीं गया है।

डॉक्टर रात के स्तंभन को क्यों देखते थे?

यहाँ एक बहुत रोचक चिकित्सकीय तथ्य भी है। पहले डॉक्टर रात या सुबह के स्वाभाविक स्तंभन का इस्तेमाल यह समझने के लिए करते थे कि किसी पुरुष की स्तंभन समस्या मुख्यतः शारीरिक है या मनोवैज्ञानिक।

विचार यह था कि यदि जागते समय स्तंभन में कठिनाई है लेकिन नींद में सामान्य स्तंभन हो रहा है, तो जननांग की रक्तवाहिकाएँ और तंत्रिका तंत्र कम-से-कम कुछ हद तक काम कर रहे हैं।

आज यह परीक्षण पहले जितना सामान्य नहीं है, क्योंकि निदान और उपचार के अन्य साधन उपलब्ध हैं। लेकिन नींद-संबंधी स्तंभन अभी भी शरीर की स्तंभन-क्षमता के बारे में उपयोगी जानकारी दे सकता है।

अगर सुबह स्तंभन न हो तो क्या बीमारी है?

अब इसका उलटा प्रश्न—यदि किसी पुरुष को सुबह स्तंभन नहीं होता तो क्या यह बीमारी है?

जरूरी नहीं। हर दिन इसका होना आवश्यक नहीं है। उम्र, नींद की अवधि, तनाव, थकान, शराब, दवाएँ, नींद की गुणवत्ता और यह कि व्यक्ति किस नींद-अवस्था में जागा—सभी असर डाल सकते हैं।

आपने यदि तीव्र नेत्र-गति वाली अवस्था से पहले या बाद में आँख खोली तो स्तंभन नजर नहीं आएगा, जबकि रात में वह हुआ हो सकता है।

लेकिन यदि किसी व्यक्ति में पहले नियमित सुबह के स्तंभन होते थे और लंबे समय तक वे लगभग समाप्त हो गए हैं, साथ ही जागते समय भी स्तंभन में लगातार कठिनाई है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

मधुमेह, उच्च रक्तचाप, रक्तवाहिका रोग, कम टेस्टोस्टेरोन, कुछ दवाएँ, अवसाद और नींद संबंधी विकार नींद-संबंधी स्तंभन को प्रभावित कर सकते हैं।

खराब नींद से भी प्रभावित हो सकता है यौन स्वास्थ्य

खास तौर पर खराब नींद महत्वपूर्ण है। यदि नींद बार-बार टूटती है या तीव्र नेत्र-गति वाली नींद पर्याप्त नहीं मिलती, तो रात के सामान्य स्तंभन चक्र भी प्रभावित हो सकते हैं।

कम नींद टेस्टोस्टेरोन को भी प्रभावित कर सकती है। इसीलिए स्वस्थ यौन कार्य केवल जननांग का प्रश्न नहीं है—नींद, मस्तिष्क, हार्मोन, रक्तवाहिकाएँ और समग्र चयापचयी स्वास्थ्य आपस में जुड़े हैं।

क्या महिलाओं में भी नींद के दौरान ऐसी शारीरिक प्रतिक्रिया होती है?

यह बात महिलाओं पर भी एक दिलचस्प रोशनी डालती है। नींद के दौरान स्वायत्त तंत्रिका तंत्र में होने वाले बदलाव केवल पुरुषों तक सीमित नहीं हैं।

महिलाओं में भी तीव्र नेत्र-गति नींद के दौरान जननांगों में रक्त प्रवाह बढ़ सकता है और शारीरिक यौन प्रतिक्रिया हो सकती है। इसलिए सुबह की शारीरिक यौन उत्तेजना को केवल पुरुषों का ‘टेस्टोस्टेरोन-प्रभाव’ समझना अधूरा है।

नींद स्वयं यौन शरीर-क्रिया को बदलती है।

यौन इच्छा और स्तंभन एक ही चीज नहीं हैं

और यहीं “सुबह यौन इच्छा अधिक क्यों महसूस हो सकती है?” और “सुबह स्तंभन क्यों होता है?”—इन दोनों प्रश्नों को अलग करना चाहिए।

स्तंभन एक शारीरिक प्रतिक्रिया है। इच्छा एक मानसिक अनुभव।

सुबह दोनों साथ हो सकते हैं। लेकिन जरूरी नहीं। कोई व्यक्ति पूर्ण स्तंभन के साथ जाग सकता है और उसे सेक्स की कोई खास इच्छा न हो। दूसरी ओर किसी को मानसिक यौन इच्छा हो सकती है, लेकिन स्पष्ट स्तंभन न हो।

मस्तिष्क के इच्छा-तंत्र और जननांग की रक्तवाहिका प्रतिक्रिया आपस में जुड़े जरूर हैं, पर बिल्कुल एक ही चीज नहीं।

सुबह ने स्तंभन पैदा नहीं किया, आपने उसे महसूस किया

इसे एक सरल उदाहरण से समझिए। रात के अंतिम हिस्से में आप तीव्र नेत्र-गति नींद में हैं। मस्तिष्क का जागृत नियंत्रण बदला हुआ है। स्वायत्त तंत्रिका तंत्र का संतुलन स्तंभन के अनुकूल है। नाइट्रिक ऑक्साइड से रक्तवाहिकाएँ फैल रही हैं। उसी दौरान टेस्टोस्टेरोन भी अपेक्षाकृत ऊँचे स्तर पर है।

जननांग में रक्त भरता है। तभी आपकी नींद खुल जाती है।

आप सोचते हैं—“सुबह होते ही शरीर यौन उत्तेजित हो गया।”

वास्तव में प्रक्रिया शायद पहले ही शुरू हो चुकी थी। सुबह ने स्तंभन पैदा नहीं किया। सुबह आपने उसे महसूस किया। और यही इस पूरी कहानी का सबसे महत्वपूर्ण वैज्ञानिक निष्कर्ष है।

सुबह का स्तंभन केवल ‘पुरुष हार्मोन अधिक होने’ का संकेत नहीं है। यह नींद और यौन शरीर-क्रिया के बीच गहरे संबंध का परिणाम है। मस्तिष्क रात में अपनी नियंत्रण व्यवस्था बदलता है, स्वायत्त तंत्रिका तंत्र का संतुलन बदलता है, रक्तवाहिकाओं में नाइट्रिक ऑक्साइड आधारित प्रतिक्रिया सक्रिय होती है और टेस्टोस्टेरोन इस पूरी प्रणाली को सहयोग देता है।

जब इन सबके बीच नींद खुलती है, तो हमें वह घटना ‘सुबह की यौन उत्तेजना’ के रूप में दिखाई देती है।

इसलिए इसे शरीर की कोई अश्लील, असामान्य या शर्म की बात समझने का वैज्ञानिक आधार नहीं है। अधिकांश स्वस्थ पुरुषों में यह स्वाभाविक, अनैच्छिक और सामान्य शरीर-क्रिया है। और दिलचस्प बात यह है कि इसका संबंध सेक्स के बारे में सोचने से उतना नहीं, जितना सोते हुए दिमाग के बदल जाने से है।

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Yogesh Mishra

Founder & CEO Mail ID - mishrayogesh5@gmail.commishrayogesh5@gmail.com

Journalism for Yogesh Mishra is not a profession but a mission. In his career, spanning over 26 years, he has served just not as journalist but an educationist and literary as well. Looking at journalism as an instrument of change, he has also highlighted corruption and problems faced in various sectors like education, health, water, sanitation and agriculture. The exposes to his credit which deserve mention include largest tax evasion in the country by Hasan Ali and the fraud committed by 25 Indians, while he was working for the Outlook magazine as the UP Bureau Head. The amount involved was whopping Rs 18,000 crores. He was the first to report the PMO’s involvement in the ‘2G Spectrum Scam’, during the UPA regime. Another commendable work by him is exposing the Commonwealth Games Scam along with the video footage of a meeting before the beginning of the tournament. The issue of banning the video is sub judice. His news item, “Uttar Pradesh ke sau gaon bhi Nirmal Gram Pusaraskar ke layak nahi” exposed how the state government wrongly claimed prizes for 1,269 villages. It led to the cancellation of the prizes. Even UNICEF research testified and led to discontinuation of the NIRMAL GRAM AWARDS. He is, presently Member of Fee Review committee set up by the government of Uttar Pradesh to fight menace of arbitrary fee structure in private schools across the state. Many of his suggestions concerning electoral reforms have been adopted and implemented by the Election Commission of India. He was a member of the ‘Navoday Vidyalaya Samiti’, review committee constituted by Govt. of India for the implementation of Sarv Siksha Abhiyaan in UP. Besides writing in national and international newspapers and magazines, he has taken up teaching assignments and served as a visiting faculty in about a dozen universities. Author of ten books, he has also received prestigious Madhu Limaye and Yash Bharti awards. His new goal is to set up a new media house. A beginning has been already made as he has launched a multi-lingual news portal and a weekly magazine, Apna Bharat.

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