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Mother’s Day 2026: 10 मई को मनाया जाएगा Mother’s Day 2026, लेकिन हर साल क्यों बदल जाती है डेट?
Mother’s Day 2026: हर साल क्यों बदल जाती है मदर्स डे की तारीख? इस बार 10 मई को मनाया जाएगा खास दिन
Mother’s Day 2026
Mother’s Day 2026 Date: मां… यह सिर्फ एक शब्द नहीं, बल्कि हर इंसान की जिंदगी की सबसे मजबूत कड़ी है। बचपन में गिरने पर सबसे पहले जो हाथ संभालता है, मुश्किल में जो बिना कुछ कहे समझ जाता है और हर हाल में जो अपने बच्चों के लिए खड़ा रहता है, वही मां होती है। शायद यही वजह है कि दुनिया भर में मां के सम्मान और प्यार को समर्पित एक खास दिन मनाया जाता है, जिसे हम मदर्स डे के नाम से जानते हैं। हर साल जैसे ही मई का महीना शुरू होता है, लोग इंटरनेट पर एक सवाल सबसे ज्यादा सर्च करने लगते हैं कि, 'इस बार मदर्स डे कब है?' सोशल मीडिया पोस्ट तैयार होने लगते हैं, गिफ्ट्स की तलाश शुरू हो जाती है और परिवार के साथ समय बिताने की योजनाएं बनने लगती हैं। लेकिन दिलचस्प बात यह है कि लोग मदर्स डे की तारीख अक्सर भूल जाते हैं, क्योंकि इसकी डेट हर साल बदल जाती है।
मदर्स डे सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि मां के प्रति आभार जताने का अवसर है। यह दिन बड़े आयोजनों से ज्यादा उन छोटी-छोटी बातों का होता है, जिनसे मां को यह एहसास हो कि उनकी मौजूदगी हमारे जीवन में कितनी खास है।
साल 2026 में कब मनाया जाएगा मदर्स डे?
साल 2026 में मदर्स डे रविवार, 10 मई को मनाया जाएगा। भारत में हर साल मई के दूसरे रविवार को मदर्स डे सेलिब्रेट किया जाता है। यही परंपरा अमेरिका, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया और कई अन्य देशों में भी अपनाई जाती है। चूंकि यह किसी निश्चित तारीख पर नहीं बल्कि मई के दूसरे रविवार के आधार पर तय होता है, इसलिए इसकी डेट हर साल बदल जाती है। कभी यह 8 मई को पड़ता है तो कभी 14 मई के आसपास। यही कारण है कि लोग हर साल इसकी तारीख दोबारा चेक करते हैं।
हर साल क्यों बदल जाती है मदर्स डे की तारीख?
मदर्स डे की तारीख बदलने के पीछे कैलेंडर का सीधा गणित है। यह त्योहार किसी एक तय तारीख जैसे 25 दिसंबर या 15 अगस्त की तरह नहीं मनाया जाता। इसे मई महीने के दूसरे रविवार को मनाने की परंपरा है।
उदाहरण के तौर पर यदि मई का पहला रविवार 3 मई को पड़ता है, तो दूसरा रविवार 10 मई होगा। लेकिन अगर पहला रविवार 1 मई को हो, तो मदर्स डे 8 मई को मनाया जाएगा। इसी वजह से हर साल इसकी तारीख बदलती रहती है। यह बदलाव लोगों को भ्रमित जरूर करता है, लेकिन इससे इस दिन का महत्व कम नहीं होता। बल्कि लोग हर साल इसे नए उत्साह के साथ मनाते हैं।
क्या पूरी दुनिया में एक ही दिन मनाया जाता है मदर्स डे?
ऐसा नहीं है कि हर देश में मदर्स डे एक ही दिन मनाया जाता हो। अलग-अलग देशों में इसकी तारीख और परंपराएं अलग हैं। भारत समेत कई देशों में यह मई के दूसरे रविवार को मनाया जाता है, लेकिन कुछ देशों में इसकी तारीख अलग होती है।
ब्रिटेन में मदर्स डे को मदरिंग संडे कहा जाता है और यह ईस्टर से पहले चौथे रविवार को मनाया जाता है। वहीं कुछ देशों में इसे मार्च या फरवरी में भी मनाने की परंपरा है।
हालांकि तारीखें अलग हो सकती हैं, लेकिन भावना हर जगह एक जैसी होती हैमां के प्रति सम्मान, प्रेम और कृतज्ञता।
मदर्स डे की शुरुआत कैसे हुई?
मदर्स डे का आधुनिक स्वरूप 20वीं सदी की शुरुआत में अमेरिका से शुरू हुआ था। इसकी शुरुआत का श्रेय एना जार्विस नाम की महिला को दिया जाता है।
1908 में एना जार्विस ने अपनी मां की याद में वेस्ट वर्जीनिया में एक विशेष कार्यक्रम आयोजित किया था। उनकी मां सामाजिक कार्यों में काफी सक्रिय थीं और महिलाओं के स्वास्थ्य तथा परिवारों की मदद के लिए काम करती थीं।
एना चाहती थीं कि समाज मां के योगदान को औपचारिक रूप से सम्मान दे। उन्होंने लगातार अभियान चलाया और लोगों को इस दिन के महत्व के बारे में जागरूक किया। धीरे-धीरे उनके प्रयासों को समर्थन मिलने लगा।
आखिरकार साल 1914 में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति वुडरो विल्सन ने मदर्स डे को आधिकारिक राष्ट्रीय अवकाश घोषित कर दिया। इसके बाद यह परंपरा दुनिया के कई देशों में फैल गई।
भारत में कैसे मनाया जाता है मदर्स डे?
भारत में मदर्स डे का चलन पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ा है। पहले यह केवल शहरी इलाकों तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब छोटे शहरों और कस्बों में भी लोग इसे उत्साह से मनाने लगे हैं।
इस दिन बच्चे अपनी मां को कार्ड, फूल, गिफ्ट या सरप्राइज देकर उन्हें खास महसूस कराने की कोशिश करते हैं। कई परिवार बाहर लंच या डिनर पर जाते हैं, जबकि कुछ लोग घर पर ही मां के लिए उनका पसंदीदा खाना बनाते हैं।
सोशल मीडिया ने भी मदर्स डे को काफी लोकप्रिय बनाया है। लोग अपनी मां के साथ तस्वीरें साझा करते हैं और भावुक संदेश लिखकर उन्हें धन्यवाद कहते हैं। हालांकि, इस दिन का असली महत्व महंगे गिफ्ट्स या सोशल मीडिया पोस्ट में नहीं, बल्कि मां के साथ बिताए गए सच्चे समय में होता है।
क्या मदर्स डे पर सार्वजनिक अवकाश होता है?
भारत समेत ज्यादातर देशों में मदर्स डे पर कोई सरकारी छुट्टी नहीं होती। स्कूल, ऑफिस, दुकानें और सरकारी संस्थान सामान्य दिनों की तरह खुले रहते हैं।
इसके बावजूद यह दिन भावनात्मक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। लोग अपनी व्यस्त जिंदगी से थोड़ा समय निकालकर मां के साथ रहने की कोशिश करते हैं।
कई लोग जो घर से दूर रहते हैं, वे इस दिन मां को फोन या वीडियो कॉल जरूर करते हैं। कुछ लोग सिर्फ एक छोटा-सा संदेश भेजकर भी अपने प्यार का एहसास कराते हैं।
बदलते समय में क्यों और खास हो गया है मदर्स डे?
आज की तेज रफ्तार जिंदगी में लोग काम और जिम्मेदारियों में इतने व्यस्त हो चुके हैं कि परिवार के लिए समय निकालना मुश्किल होता जा रहा है। ऐसे में मदर्स डे एक ऐसा मौका बन जाता है, जब लोग रुककर अपनी मां के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।
मां अक्सर बिना किसी शिकायत के पूरे परिवार की जिम्मेदारी निभाती हैं। बच्चों की पढ़ाई से लेकर घर की छोटी-बड़ी जरूरतों तक, वह हर भूमिका निभाती हैं। लेकिन कई बार उनके योगदान को सामान्य मान लिया जाता है।
मदर्स डे लोगों को यह याद दिलाता है कि मां का प्यार और त्याग अनमोल है और उन्हें सिर्फ एक दिन नहीं, बल्कि हर दिन सम्मान मिलना चाहिए।
क्या सिर्फ गिफ्ट्स से खास बनता है यह दिन?
विशेषज्ञ भी मानते हैं कि मदर्स डे को खास बनाने के लिए महंगे उपहार जरूरी नहीं हैं। कई बार छोटी-छोटी बातें सबसे ज्यादा मायने रखती हैं।
मां के साथ बैठकर चाय पीना, उनकी बातें सुनना, पुरानी यादें ताजा करना या सिर्फ दिल से थैंक यू कहना भी उन्हें बेहद खुशी दे सकता है।
आज के डिजिटल दौर में जहां लोग अक्सर भावनाओं को व्यक्त करने में पीछे रह जाते हैं, वहां यह दिन रिश्तों को मजबूत करने का एक खूबसूरत अवसर बन जाता है।


