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Mother's Day Special: घर,किचन,मंदिर के बाद सियासत को भी मां की जरूरत
Mother's Day Special: हर नारी में मातृत्व, करुणा, संस्कार और शक्ति का अद्भुत स्वरूप होता है। यह भावनात्मक लेख मां और नारी शक्ति के महत्व, सम्मान और समाज में उनकी अनमोल भूमिका को दर्शाता है।
Motherhood
Mother's Day Special: सिर्फ मां ही मां नहीं, हर नारी मां है। प्रत्येक नारी में मातृत्व है।प्रेम,करुणा, साहस, संस्कार, अथाह जिम्मेदारियां और जिम्मेदारियों के निर्वहन का नाम मां है। और ये खूबियां हर नारी में होती हैं। मां जैसी खूबियां कई रिश्तों में मिलेंगी। कभी पत्नी, कभी बहन,बेटी, मौसी,दादी,नानी... ये घर से लेकर किचन की जिम्मेदारियां ही नहीं अच्छे-बुरे की पहचान कराने से लेकर सही रास्ता दिखाने का मार्ग प्रशस्त करते हैं।
नारी का हर रिश्ता मां जैसा सुखद एहसास है।
ये कोमल है पर कमजोर नहीं है, इसमें करुणा है पर इसके रौद्र रूप से बड़ी से बड़ी शक्तियां स्वाहा हो जाती हैं।
केवल वही मां नहीं जो संतान को जन्म दे, हर नारी संस्कार, सभ्यता और संस्कृति और गृहस्थी की जन्मदाता है।
घर, परिवार की ही रौनक नहीं होती, समाज, देश, सियासत व प्रत्येक संस्थान की शान और शक्ति होती है नारी।
अब बरसों पुराने इस एहसास को भी बल मिलने लगा है कि महिलाओं के अभाव में सियासत भी सिसकने लगी है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम इसका प्रमाण है।
जिसने भी नारी को सियासत और सदन में आरक्षण देने में रुकावट पैदा की, ऐसे दलों को भुगतना पड़ा और जिसने आधी आबादी को राजनीतिक और सदन में अधिक से अधिक लाने के मजबूत इरादे दिखाए ऐसी कोशिश करने वालों को मां के आर्शीवाद ने सफलताएं दिलाईं।
महिला सशक्तिकरण के वादे-इरादे,प्रयास और भाव के बिना तो अब चुनाव जीतना भी मुश्किल है। ये बढ़ता रिवाज बताता है कि मां का आशीर्वाद या आधी आबादी का साथ पाए बिना ना चुनाव जीता जा सकता है और ना ही सत्ता पाने का तसव्वुर किया जा सकता है।
हम सियासत में हों या संस्था,संस्थान या परिवार में हों,मां सी अद्भुत खूबियां लिए नारी का सम्मान कीजिए। वैसे ही जैसे कहते हैं भगवान हर जगह नहीं हो सकते इसलिए भगवान ने मां बनाया।
Seema Chaturvedi: लेखिका सीमा चतुर्वेदी (Social Media).jpg
मां धूप होती है, मां छांव होती है। मां कवच होती, मां ढाल होती है। मां सुरक्षा चक्र होती। मां जो खाने की थाली पर बुलाए। मां जो सिर पर हाथ फेरते हुए बालों को बनाए।
कौन कहता है मां की याद कब कब आती है ! मां की याद तब तक आती है जब तक हम सांस लेते हैं।
मां जब छूटती है तो यूं लगता है दुनिया के मेले से किसी का हाथ छूट गया। सुरक्षा चक्र टूट गया। हर क्षण आंखें मां को खोजतीं है। अगर मां जैसा मिलता जुलता चेहरा दिख जाए तो सीने में ऐसी हूक उठती है मानो कोई दर्द के सौ सूई सीने में चुभ रही हो। मां सिर्फ एक बार नहीं बिछड़ती मां तो हर समय हर क्षण दिन हर सप्ताह हर महीने हर साल भर हर एक पर्व पर बिछड़ती है।
मां की हाथों की महक, उसकी साड़ी की महक, उसकी चूड़ियों की खनक सबकुछ बिछड़ जाता है।
इसीलिए कहते हैं मां की उपस्थिति को सौभाग्य समझें। मां ना रहे तो मां जैसी खूबियों वाली नारी का सम्मान कीजिए। मां सी खूबियां आपसे दूर कभी नहीं हो सकतीं, घर में परिवार में, रिश्तों में, देश, समाज, संस्थान, सियासत और मंदिर या किसी भी धार्मिक स्थल में मां जरूर दिखेगी।


