दो साल में मोटर बीमा कमीशन 259% बढ़ा, अब कार खरीदते समय डीलर के बीमा पर निर्भर नहीं रहेगा ग्राहक

Motor Insurance Commission: IRDAI के अनुसार 2022-23 से 2024-25 के बीच मोटर बीमा कमीशन 259% बढ़ा, जबकि प्रीमियम 34% बढ़ा। नए प्रस्ताव में डीलर से अलग बीमा विकल्प और थर्ड पार्टी बीमा पर शून्य कमीशन की बात है।

Newstrack Network
Published on: 26 Sept 2026 1:14 AM IST
Motor Insurance Commission
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Motor Insurance Commission (Image Credit-Social Media)

नई दिल्ली। नई कार या दोपहिया वाहन खरीदते समय शोरूम से मिलने वाले बीमा को लगभग अनिवार्य मान लेने वाले ग्राहकों के लिए आने वाले समय में व्यवस्था काफी बदल सकती है। भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण यानी IRDAI ने बीमा वितरण व्यवस्था में बड़े सुधार का प्रस्ताव रखा है। इसके पीछे नियामक के सामने आया एक चौंकाने वाला आंकड़ा है—वित्त वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच मोटर बीमा प्रीमियम करीब 34 प्रतिशत बढ़ा। लेकिन इसी अवधि में वितरकों को मिलने वाला कमीशन लगभग 259 प्रतिशत बढ़ गया। IRDAI ने इसे मोटर बीमा वितरण में पारदर्शिता की कमी और ग्राहक के पास वास्तविक विकल्प सीमित होने से जोड़ा है। नियामक ने 23 सितंबर 2026 को ‘Recalibrating Economics of Insurance Distribution’ शीर्षक से व्यापक परामर्श पत्र जारी किया है और प्रस्तावों पर 25 अक्टूबर तक सार्वजनिक टिप्पणियां मांगी हैं। इसलिए अभी ये नियम लागू नहीं हुए हैं, बल्कि अंतिम नियम बनाने से पहले प्रस्ताव के स्तर पर हैं।

इस प्रस्ताव का सीधा असर उस व्यवस्था पर पड़ सकता है जिसमें ग्राहक नई गाड़ी खरीदते समय वाहन की कीमत पर तो काफी मोलभाव करता है। लेकिन बीमा के मामले में अक्सर डीलर द्वारा सुझाई गई कंपनी और कीमत स्वीकार कर लेता है। IRDAI का कहना है कि मोटर बीमा की बिक्री का बिंदु आम तौर पर वाहन डीलर अथवा वाहन निर्माता से जुड़े बीमा ब्रोकर के नियंत्रण में रहता है। उस समय ग्राहक नई गाड़ी खरीदने की प्रक्रिया पूरी करने में लगा होता है और अलग-अलग बीमा कंपनियों की कीमत, सुविधाओं और कमीशन की तुलना करने की स्थिति में अक्सर नहीं होता। नियामक के अनुसार इसी वितरण नियंत्रण ने ऐसी स्थिति पैदा की है जिसमें कमीशन वास्तविक परामर्श या प्रतिस्पर्धा की तुलना में बिक्री तक पहुंच के नियंत्रण से अधिक प्रभावित होता दिखाई देता है।

₹29,000 करोड़ प्रीमियम में करीब ₹7,050 करोड़ कमीशन

IRDAI के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में वाहन निर्माता कंपनियों से जुड़े बीमा ब्रोकर और Motor Insurance Service Providers यानी MISP ने मिलकर करीब ₹29,000 करोड़ का मोटर बीमा प्रीमियम जुटाया और इसके बदले लगभग ₹7,050 करोड़ कमीशन प्राप्त किया। इसका सीधा अनुपात निकालें तो हर ₹100 के प्रीमियम पर औसतन करीब ₹24.31 वितरण कमीशन में गया। नियामक के मुताबिक इन माध्यमों की नए और पुराने वाहनों को मिलाकर मोटर बीमा बाजार में लगभग 30 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

औसत 24%, कुछ मामलों में 50% तक कमीशन

IRDAI के परामर्श पत्र में मोटर बीमा कमीशन की सीमा को लेकर और भी महत्वपूर्ण तथ्य सामने आया है। उपलब्ध विश्लेषण के अनुसार मोटर बीमा में औसत कमीशन लगभग 24 प्रतिशत रहा। लेकिन अलग-अलग वितरण व्यवस्थाओं में यह करीब 13 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक पाया गया। नई गाड़ियों के मामले में वाहन निर्माता से जुड़े ब्रोकरों का औसत कमीशन करीब 27 प्रतिशत और MISP का औसत लगभग 38 प्रतिशत बताया गया है। पुराने वाहनों पर MISP का औसत कमीशन करीब 12 प्रतिशत था।

कमीशन आम तौर पर बीमा कंपनी द्वारा वितरण माध्यम को दिया जाने वाला भुगतान है। लेकिन अंततः बीमा कंपनी की वितरण लागत उसके उत्पाद की समग्र लागत का हिस्सा होती है, इसलिए अत्यधिक कमीशन ग्राहक के लिए उपलब्ध मूल्य और बीमा उद्योग की लागत दोनों को प्रभावित कर सकता है।

केवल दो साल में कमीशन 259% कैसे बढ़ा?

यही IRDAI की सबसे बड़ी चिंता है। वित्त वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच मोटर प्रीमियम में करीब 34 प्रतिशत वृद्धि हुई, जबकि मोटर बीमा कमीशन करीब 259 प्रतिशत बढ़ा। IRDAI के नमूने में औसत कमीशन दर लगभग 9 प्रतिशत से बढ़कर करीब 25 प्रतिशत तक पहुंच गई। अनिवार्य थर्ड पार्टी बीमा में औसत कमीशन वित्त वर्ष 2022-23 के करीब 4.3 प्रतिशत से बढ़कर 2024-25 में लगभग 22 प्रतिशत हो गया।

यह अंतर इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि थर्ड पार्टी मोटर बीमा सामान्य स्वैच्छिक उत्पाद नहीं है। वाहन को सड़क पर चलाने के लिए इसका होना कानूनी रूप से आवश्यक है और इसकी प्रीमियम दर भी नियामकीय व्यवस्था के तहत निर्धारित होती है। ऐसे उत्पाद को बेचने में ग्राहक को मनाने के लिए उतने विपणन प्रयास की जरूरत नहीं होती जितनी किसी पूरी तरह स्वैच्छिक बीमा उत्पाद में हो सकती है। इसी आधार पर IRDAI ने नई गाड़ियों के थर्ड पार्टी बीमा को लगभग ‘nil-effort product’, यानी ऐसा उत्पाद माना है जिसे बेचने के लिए वितरण स्तर पर बहुत कम प्रयास की जरूरत है।

नई कार पर तीन साल का थर्ड पार्टी बीमा अनिवार्य

नई निजी कार के लिए तीन वर्ष का दीर्घकालिक थर्ड पार्टी बीमा लेना आवश्यक है। दोपहिया वाहन के लिए दीर्घकालिक थर्ड पार्टी कवर पांच वर्ष का होता है। लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि ग्राहक को वही बीमा उस वाहन डीलर से खरीदना अनिवार्य है जहां से वह कार या बाइक खरीद रहा है।

ग्राहक वैध बीमा कंपनी या अधिकृत माध्यम से पॉलिसी ले सकता है। समस्या यह है कि व्यवहार में शोरूम में वाहन खरीदते समय वित्तपोषण, पंजीकरण और बीमा को एक पैकेज की तरह प्रस्तुत किए जाने से बहुत से ग्राहक यह मान लेते हैं कि डीलर द्वारा दिया गया बीमा लेना ही पड़ेगा। IRDAI का नया प्रस्ताव इसी व्यावहारिक निर्भरता को तोड़ने की दिशा में है।

शोरूम में लगेगा QR कोड, ग्राहक सीधे बीमा मंच पर जा सकेगा

IRDAI ने प्रस्ताव किया है कि नई और पुरानी दोनों गाड़ियों के मोटर बीमा उत्पाद Market Infrastructure Institution यानी MII जैसे डिजिटल मंचों पर उपलब्ध हों। बीमा सुगम इसी प्रकार का प्रमुख मंच है। नई गाड़ी बेचने वाले डीलरों को अपने शोरूम में इस डिजिटल विकल्प को प्रमुखता से प्रदर्शित करना होगा और QR कोड देना होगा, जिसे स्कैन करके ग्राहक सीधे डिजिटल बीमा मंच पर पहुंच सकेगा। डीलर के लिए ग्राहक को इस विकल्प के बारे में जानकारी देना भी प्रस्तावित रूप से अनिवार्य होगा।

इस व्यवस्था का उद्देश्य केवल ऑनलाइन पॉलिसी बेचना नहीं है। असली बदलाव यह होगा कि ग्राहक उसी समय विभिन्न बीमा विकल्प देख सकेगा जब वह कार खरीद रहा हो। यदि अलग-अलग बीमा कंपनियों की कीमत, कवरेज और सुविधाएं एक जगह तुलना के लिए उपलब्ध होती हैं तो डीलर द्वारा पेश की गई एक या दो पॉलिसियों पर निर्भरता कम हो सकती है।

नई गाड़ी के थर्ड पार्टी बीमा पर वितरण संस्थाओं का कमीशन शून्य करने का प्रस्ताव

मौजूदा प्रस्ताव का सबसे बड़ा बदलाव कमीशन में है। IRDAI ने नई गाड़ियों के अनिवार्य थर्ड पार्टी बीमा को कम प्रयास वाला उत्पाद मानते हुए वितरण संस्थाओं के लिए इस हिस्से पर कमीशन शून्य करने का प्रस्ताव रखा है। व्यक्तिगत एजेंट या एसोसिएट जैसे कुछ माध्यमों के लिए अधिकतम करीब 2.5 प्रतिशत कमीशन की गुंजाइश प्रस्तावित की गई है।

यदि अंतिम नियम इसी रूप में लागू होते हैं तो नई गाड़ी के बीमा की लागत संरचना में बड़ा बदलाव आ सकता है। हालांकि इससे ग्राहक का अंतिम प्रीमियम ठीक कितने रुपये कम होगा, अभी निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता। थर्ड पार्टी प्रीमियम नियामकीय दरों से जुड़ा होता है, जबकि स्वयं के वाहन के नुकसान यानी ‘Own Damage’ कवर की कीमत बीमा कंपनियों के बीच अलग-अलग हो सकती है। इसलिए कमीशन घटने से होने वाली पूरी बचत अपने आप ग्राहक तक पहुंच जाएगी, यह अंतिम नियम और बीमा कंपनियों की मूल्य निर्धारण व्यवस्था पर निर्भर करेगा।

डीलर से बीमा नहीं लिया तो कैशलेस मरम्मत रोक नहीं सकेगा

वाहन खरीदारों के लिए एक और महत्वपूर्ण प्रस्ताव यह है कि डीलर इस आधार पर ग्राहक को कैशलेस मरम्मत सुविधा से इनकार नहीं कर सकेगा कि उसने बीमा उसी डीलर से नहीं खरीदा था। इसके साथ वाहन निर्माता कंपनियों की ऐसी प्रोत्साहन योजनाओं पर भी रोक प्रस्तावित है जिनमें डीलरों को बीमा बिक्री के आधार पर विशेष लाभ दिया जाता है और जिनसे ग्राहक के हित प्रभावित हो सकते हैं।

यह व्यवस्था महत्वपूर्ण है क्योंकि बहुत से वाहन खरीदार इस आशंका से डीलर का महंगा बीमा स्वीकार कर लेते हैं कि बाहर से पॉलिसी लेने पर दुर्घटना के बाद अधिकृत सर्विस सेंटर में कैशलेस दावा या मरम्मत मुश्किल हो सकती है। प्रस्तावित नियम इस दबाव को कम कर सकते हैं।

कार ऋण के साथ जबरन बीमा बेचने पर भी शिकंजा

IRDAI का परामर्श पत्र केवल वाहन डीलरों तक सीमित नहीं है। नियामक ने बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के माध्यम से ऋण के साथ बीमा को जबरन जोड़ने की प्रथा पर भी चिंता जताई है। प्रस्ताव के अनुसार ऋण के साथ केवल ऐसे बीमा पैकेज स्वीकार किए जाने चाहिए जिनसे ग्राहक को स्पष्ट और साबित होने वाला लाभ हो। कमीशन का खुलासा करना होगा, बीमा का भुगतान अलग दिखाना होगा और ग्राहक को किसी एक बीमा कंपनी की पॉलिसी लेने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए।

यह कार ऋण लेने वालों के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। अभी कई मामलों में ग्राहक वाहन की कीमत और ऋण की ब्याज दर पर तो बातचीत करता है, लेकिन बीमा प्रीमियम ऋण प्रक्रिया के साथ जुड़ जाने के कारण उसकी वास्तविक लागत पर पर्याप्त ध्यान नहीं देता।

बीमा सुगम क्या है?

बीमा सुगम को बीमा क्षेत्र के लिए एक साझा डिजिटल बाजार के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां ग्राहक विभिन्न कंपनियों की जीवन, स्वास्थ्य, मोटर और दूसरी बीमा पॉलिसियों को देख, तुलना और खरीद सके। IRDAI के अध्यक्ष अजय सेठ ने जून में कहा था कि मंच पर शुरुआती मोटर, स्वास्थ्य और टर्म बीमा उत्पाद सितंबर 2026 के अंत तक उपलब्ध कराने का लक्ष्य है।

प्रस्तावित ढांचे में ऐसे गैर-लाभकारी डिजिटल बीमा मंचों की फीस पारंपरिक वितरण कमीशन की तुलना में काफी कम रखने का विचार है। नवीनतम प्रस्तावों के अनुसार ऐसे मंच प्रीमियम के 5 प्रतिशत से अधिक मंच शुल्क नहीं ले सकेंगे।

ग्राहक के लिए कितना बदल सकता है ₹50,000 का बीमा?

मौजूदा औसत को केवल समझने के लिए उदाहरण मानें। यदि किसी वाहन की बीमा पॉलिसी का प्रीमियम ₹50,000 है और वितरण लागत औसतन 24 प्रतिशत के आसपास है तो उसका गणितीय मूल्य लगभग ₹12,000 बैठता है। यदि किसी माध्यम में कमीशन 38 प्रतिशत है तो यही रकम लगभग ₹19,000 हो सकती है। यह उदाहरण यह नहीं बताता कि ग्राहक को नई व्यवस्था में सीधे ₹12,000 या ₹19,000 की छूट मिल जाएगी, क्योंकि प्रीमियम में जोखिम लागत, दावों का खर्च, कर, प्रशासनिक लागत और दूसरे घटक भी शामिल होते हैं। लेकिन यह जरूर बताता है कि IRDAI वितरण लागत को इतना महत्वपूर्ण क्यों मान रहा है।

इसी तरह ₹29,000 करोड़ प्रीमियम पर ₹7,050 करोड़ कमीशन का अर्थ लगभग 24.3 प्रतिशत है। यदि इतनी बड़ी वितरण लागत कम होती है और उसका लाभ प्रतिस्पर्धा के माध्यम से ग्राहकों तक पहुंचता है तो पूरे मोटर बीमा बाजार में हजारों करोड़ रुपये की लागत संरचना बदल सकती है।

अभी नियम लागू नहीं, 25 अक्टूबर तक मांगी गई हैं राय

वाहन खरीदारों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सावधानी यह है कि इन प्रस्तावों को अभी लागू नियम न माना जाए। IRDAI ने इन्हें परामर्श पत्र के रूप में जारी किया है और हितधारकों तथा आम लोगों से 25 अक्टूबर 2026 तक सुझाव और टिप्पणियां मांगी हैं। इसके बाद नियामक प्राप्त प्रतिक्रियाओं का अध्ययन करेगा और अंतिम नियमों में मौजूदा प्रस्तावों को यथावत रखा जा सकता है, बदला जा सकता है या कुछ हिस्सों को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा सकता है।

IRDAI के आंकड़ों में सबसे बड़ा संकेत ₹7,050 करोड़ कमीशन की रकम से भी अधिक दो वर्षों में उसकी 259 प्रतिशत वृद्धि है। जब उसी अवधि में मोटर बीमा प्रीमियम केवल 34 प्रतिशत बढ़ा तो नियामक ने यह सवाल उठाया कि अनिवार्य अथवा कम प्रयास वाले बीमा उत्पाद की वितरण लागत इतनी तेजी से क्यों बढ़ रही है। प्रस्तावित व्यवस्था लागू हुई तो नई कार खरीदते समय ग्राहक डीलर द्वारा सामने रखी पॉलिसी तक सीमित नहीं रहेगा, शोरूम में लगे QR कोड से बीमा सुगम जैसे मंच पर जाकर विकल्पों की तुलना कर सकेगा, डीलर से बीमा न लेने पर कैशलेस मरम्मत रोकना संभव नहीं होगा और नई गाड़ी के अनिवार्य थर्ड पार्टी बीमा पर वितरण संस्थाओं का कमीशन शून्य तक किया जा सकता है। यानी बदलाव केवल बीमा सस्ता करने का नहीं, कार शोरूम में बीमा बेचने की पूरी व्यवस्था को ग्राहक-केंद्रित और पारदर्शी बनाने का है।

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