TRENDING TAGS :
Navratri-Diwali Property Buying Tips: नवरात्रि-दिवाली पर खरीद रहे हैं नया घर? रजिस्ट्री से पहले जरूर
Navratri-Diwali Property Buying Tips: त्योहारों पर नया घर खरीदने से पहले RERA रजिस्ट्रेशन, जमीन के मालिकाना हक, कारपेट एरिया, स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्री से जुड़ी जरूरी बातें जानें।
Navratri-Diwali Property Buying Tips: 7 Things to Check Before Property Registration
Navratri-Diwali Property Buying Tips: नवरात्रि और दिवाली ऐसे शुभ अवसर होते हैं, जब बहुत से लोग अपने नए आशियाने में गृह प्रवेश करना पसंद करते हैं। त्योहारों के इस मौसम में बिल्डर भी ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए आकर्षक ऑफर, डिस्काउंट और आसान भुगतान योजनाएं पेश करते हैं। ऐसे में अगर आप भी इस नवरात्रि या दिवाली पर फ्लैट, मकान या जमीन खरीदने की योजना बना रहे हैं, तो केवल कीमत और लोकेशन देखकर फैसला न करें। प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री किसके नाम पर होगी, बिल्डर के पास जमीन का वैध मालिकाना हक है या नहीं और फ्लैट का वास्तविक कारपेट एरिया कितना है, इन बातों की जांच करना भी उतना ही जरूरी है। थोड़ी-सी सावधानी आपको भविष्य में होने वाले बड़े आर्थिक नुकसान और कानूनी विवाद से बचा सकती है। खास बात यह है कि महिला के नाम पर या संयुक्त स्वामित्व में प्रॉपर्टी खरीदने से कुछ राज्यों में स्टांप ड्यूटी की बचत भी हो सकती है।
महिला के नाम पर प्रॉपर्टी खरीदने से हो सकती है बचत
घर खरीदते समय अक्सर परिवार होम लोन और कमाई के आधार पर यह तय कर लेते हैं कि संपत्ति पति के नाम पर दर्ज होगी। लेकिन रजिस्ट्री से पहले यह विकल्प भी देखना चाहिए कि घर पत्नी के नाम पर खरीदा जाए या दोनों को संयुक्त मालिक बनाया जाए। कई राज्यों में महिलाओं को संपत्ति की रजिस्ट्री पर पुरुषों के मुकाबले कम स्टांप ड्यूटी देनी पड़ती है। उदाहरण के लिए, दिल्ली में सामान्य दरों के अनुसार महिलाओं के लिए स्टांप ड्यूटी 4 प्रतिशत और पुरुषों के लिए 6 प्रतिशत है। हरियाणा में भी कुछ श्रेणियों में महिलाओं को कम दर का लाभ मिलता है। उत्तर प्रदेश में पात्र महिला खरीदारों को निर्धारित शर्तों के तहत स्टांप ड्यूटी में छूट मिल सकती है। अगर 60 लाख रुपये की संपत्ति पर एक प्रतिशत की छूट लागू होती है, तो सीधे 60 हजार रुपये की बचत हो सकती है। वास्तविक छूट राज्य के मौजूदा नियमों, संपत्ति के स्थान और स्वामित्व की श्रेणी पर निर्भर करती है। हिला के नाम पर संपत्ति होने का फायदा केवल स्टांप ड्यूटी की बचत तक सीमित नहीं है। कानूनी रूप से मालिक होने पर महिला को संपत्ति में अपने स्वामित्व के अनुसार अधिकार मिलते हैं। पति का केवल सह-ऋणी या गवाह होना पत्नी को अपने आप संपत्ति का मालिक नहीं बनाता। इसलिए रजिस्ट्री से पहले स्वामित्व तय करने के इस फैसले पर परिवार में स्पष्ट बातचीत होनी चाहिए।
प्रॉपर्टी खरीदने से पहले RERA रजिस्ट्रेशन जांचें
त्योहारों पर बिल्डर के आकर्षक ऑफर देखकर फ्लैट बुक करने से पहले उसका RERA रजिस्ट्रेशन जरूर जांचें। रियल एस्टेट (रेगुलेशन एंड डेवलपमेंट) एक्ट, 2016 के तहत निर्धारित शर्तों को पूरा करने वाली परियोजनाओं का संबंधित राज्य के RERA प्राधिकरण में पंजीकरण जरूरी होता है। सामान्य तौर पर 500 वर्ग मीटर से अधिक जमीन पर विकसित होने वाली या आठ से अधिक अपार्टमेंट वाली परियोजनाएं इसके दायरे में आती हैं, हालांकि कानून में कुछ छूट भी हैं। खरीदार संबंधित राज्य के RERA पोर्टल पर जाकर प्रोजेक्ट का रजिस्ट्रेशन नंबर, बिल्डर का विवरण, निर्माण की स्थिति और पजेशन की प्रस्तावित तारीख जांच सकते हैं। कानून के तहत बिल्डर को खरीदारों से प्राप्त राशि का 70 प्रतिशत निर्धारित अलग खाते में रखना होता है, जिसका इस्तेमाल संबंधित परियोजना की जमीन और निर्माण लागत के लिए किया जाता है। ध्यान रखें कि RERA रजिस्ट्रेशन होने का मतलब यह नहीं है कि संपत्ति के सभी कानूनी दस्तावेजों की जांच पूरी हो गई है।
Carpet Area और Super Built-up Area का अंतर समझें
फ्लैट खरीदते समय विज्ञापन में लिखे क्षेत्रफल को देखकर तुरंत फैसला न करें। बिल्डर कई बार सुपर बिल्ट-अप एरिया के आधार पर फ्लैट का आकार बताता है, जबकि कारपेट एरिया वह क्षेत्र होता है, जिसका इस्तेमाल घर के भीतर वास्तव में किया जा सकता है। सुपर बिल्ट-अप एरिया में साझा सुविधाओं का आनुपातिक हिस्सा भी शामिल हो सकता है।
मान लीजिए, किसी फ्लैट का विज्ञापित क्षेत्रफल 1,200 वर्ग फीट है, तो उसका वास्तविक कारपेट एरिया इससे काफी कम हो सकता है। इसलिए बिल्डर से लिखित में कारपेट एरिया पूछें और प्रति वर्ग फीट कीमत की तुलना उसी आधार पर करें। इससे आपको समझने में मदद मिलेगी कि त्योहारों पर मिलने वाला डिस्काउंट वास्तव में फायदेमंद है या नहीं।
बिल्डर एग्रीमेंट पढ़े बिना न करें हस्ताक्षर
प्रॉपर्टी बुक करते समय जल्दबाजी में एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर करना भारी पड़ सकता है। दस्तावेज में पजेशन की तारीख, भुगतान की शर्तें, देरी होने पर लागू ब्याज या मुआवजे, पार्किंग, रखरखाव शुल्क और फ्लैट में मिलने वाली सुविधाओं का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए। फ्लोरिंग, बिजली के पॉइंट, दरवाजे, खिड़कियां और सैनिटरी फिटिंग जैसी चीजों की जानकारी भी लिखित रूप में होनी चाहिए।
यदि बिल्डर ने किसी खास सुविधा का वादा किया है, तो उसे एग्रीमेंट में शामिल कराएं। केवल मौखिक आश्वासन के आधार पर बड़ी रकम देना जोखिम भरा हो सकता है।
जमीन के मालिकाना हक की भी कराएं जांच
RERA रजिस्ट्रेशन के साथ जमीन के टाइटल यानी मालिकाना हक की स्वतंत्र जांच कराना जरूरी है। यह पता करें कि जमीन का वैध मालिक कौन है, उस पर कोई मुकदमा या बंधक तो नहीं है और निर्माण के लिए जरूरी मंजूरियां प्राप्त हैं या नहीं। इसके लिए पुराने संपत्ति दस्तावेजों, संबंधित राजस्व रिकॉर्ड और स्वीकृत नक्शे की जांच कराएं। किसी अनुभवी प्रॉपर्टी वकील की मदद लेना उपयोगी हो सकता है।
होम लोन और अतिरिक्त खर्चों का बनाएं पूरा बजट
घर की कीमत के अलावा स्टांप ड्यूटी, रजिस्ट्रेशन शुल्क, लागू होने पर जीएसटी, पार्किंग, रखरखाव और अन्य शुल्क भी बजट में शामिल करें। निर्माणाधीन फ्लैट के मामले में बैंक आम तौर पर निर्माण की प्रगति के अनुसार लोन की राशि किस्तों में जारी कर सकते हैं। जारी हो चुकी रकम पर लागू शर्तों के अनुसार ब्याज या प्री-ईएमआई देय हो सकती है। इसलिए लोन की शर्तों को अच्छी तरह समझें और अपनी मासिक आय के हिसाब से ईएमआई तय करें।
बेटियों के पुश्तैनी संपत्ति अधिकार को न करें नजरअंदाज
प्रॉपर्टी खरीदने या परिवार में संपत्ति का बंटवारा करने से पहले उत्तराधिकार के नियमों की जानकारी भी जरूरी है। हिंदू उत्तराधिकार (संशोधन) अधिनियम, 2005 के तहत मिताक्षरा संयुक्त हिंदू परिवार की पैतृक संपत्ति में बेटियों को बेटों के समान सहदायिक अधिकार दिए गए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने 2020 में *विनीता शर्मा बनाम राकेश शर्मा* मामले में स्पष्ट किया कि इन अधिकारों के लिए पिता का 9 सितंबर 2005 को जीवित होना जरूरी नहीं है। नवरात्रि और दिवाली पर नया घर खरीदना परिवार के लिए खुशी और नई शुरुआत का मौका होता है। लेकिन शुभ मुहूर्त में रजिस्ट्री कराने के साथ दस्तावेजों की जांच करना भी उतना ही जरूरी है। बुकिंग से पहले स्वामित्व, RERA रजिस्ट्रेशन, कारपेट एरिया, बिल्डर एग्रीमेंट और कुल खर्चों की पुष्टि करें। सही जानकारी के साथ लिया गया फैसला आपके नए आशियाने को भविष्य की मजबूत आर्थिक संपत्ति बनाने में मदद कर सकता है।


