Petroleum Jelly: पेट्रोलियम जेली क्या होता है, त्वचा पर लगाने से क्या फायदा और नुकसान?

Petroleum Jelly Ke Fayde Nuksan: पेट्रोलियम जेली आखिर किस चीज से बनती है और त्वचा के लिए क्यों उपयोगी है?

Neel Mani Lal
Published on: 30 Sept 2026 2:50 PM IST
Petroleum Jelly Ke Fayde Nuksan
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Petroleum Jelly Ke Fayde Nuksan

Petroleum Jelly Ke Fayde Nuksan: सर्दियों में होंठ फट गए, एड़ियां सूख गईं, हाथों की त्वचा खुरदरी हो गई या बच्चे की त्वचा पर रगड़ से लाल निशान पड़ गए, तो घर में रखी छोटी सी पेट्रोलियम जेली तुरंत काम आती है। बहुत से लोग इसे बस “वैसलीन” के नाम से जानते हैं। किसी के लिए यह फटे होंठों की दवा है, किसी के लिए सूखी एड़ियों का इलाज और किसी के लिए मामूली कट या खरोंच पर लगाने वाली चीज।

लेकिन इसके नाम में ही एक ऐसा शब्द है जो अक्सर लोगों को चौंका देता है, पेट्रोलियम।

आखिर त्वचा पर लगाई जाने वाली इस सफेद या हल्की पीली जेली में पेट्रोलियम क्या कर रहा है? क्या यह वही पेट्रोलियम है जिससे पेट्रोल और डीजल बनते हैं? अगर हां, तो फिर इसे शरीर पर लगाना सुरक्षित कैसे है? और अगर यह इतनी सुरक्षित है तो इसके नुकसान की बातें क्यों सुनने को मिलती हैं?

असल कहानी थोड़ी अलग और काफी दिलचस्प है। पेट्रोलियम जेली का मुख्य पदार्थ पेट्रोलाटम होता है। यह पेट्रोलियम से मिलने वाले पदार्थों को बहुत अच्छी तरह साफ और शुद्ध करने के बाद तैयार किया जाता है। यानी इसका स्रोत पेट्रोलियम जरूर है, लेकिन पेट्रोलियम जेली कच्चा पेट्रोलियम नहीं है और न ही यह पेट्रोल है। अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन के दस्तावेजों में पेट्रोलाटम को पेट्रोलियम जेली, मुलायम पैराफिन जैसे नामों से भी दर्ज किया गया है। यहीं से पेट्रोलियम जेली का सबसे बड़ा रहस्य खुलता है। नाम पेट्रोलियम का है, लेकिन त्वचा पर लगाने वाली जेली में वह कच्चा तेल नहीं होता जिसे हम जमीन से निकालते हैं।

पेट्रोलियम जेली आखिर बनती किस चीज से है?

पेट्रोलियम धरती के भीतर लाखों साल में बने ऐसे प्राकृतिक पदार्थों का मिश्रण है जिसमें अलग-अलग तरह के हाइड्रोकार्बन होते हैं। जब कच्चे पेट्रोलियम को साफ करने और अलग-अलग हिस्सों में बांटने की प्रक्रिया से गुजारा जाता है, तो उससे कई तरह के पदार्थ मिलते हैं। इनमें से कुछ को आगे और ज्यादा साफ किया जाता है। इसी प्रक्रिया से मिलने वाले कुछ भारी और अर्धठोस हाइड्रोकार्बन के मिश्रण को बहुत अच्छी तरह शुद्ध करके पेट्रोलाटम बनाया जाता है। अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन के एक चिकित्सकीय दस्तावेज के अनुसार पेट्रोलाटम अलग-अलग हाइड्रोकार्बन का मिश्रण है, जिसमें संतृप्त हाइड्रोकार्बन की अलग-अलग किस्में शामिल हो सकती हैं। इसकी गुणवत्ता उसके स्रोत और शुद्ध करने की प्रक्रिया पर निर्भर करती है।

इसलिए पेट्रोलियम जेली को समझने का आसान तरीका यह है कि यह पेट्रोलियम से निकला, बहुत ज्यादा शुद्ध किया हुआ, गाढ़ा और अर्धठोस पदार्थ है। यह पेट्रोल नहीं है। इसे पेट्रोल की तरह जलाने या इंजन में डालने के लिए नहीं बनाया जाता। इसके गुण भी पूरी तरह अलग हैं। यही वजह है कि “पेट्रोलियम से बना है” और “पेट्रोल जैसा है” दोनों बातें एक नहीं हैं।

इसे त्वचा पर लगाने से फायदा क्या होता है?

पेट्रोलियम जेली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह त्वचा के ऊपर एक बहुत पतली सुरक्षात्मक परत बना देती है। हमारी त्वचा से पानी लगातार बहुत थोड़ी मात्रा में बाहर निकलता रहता है। सामान्य स्थिति में यह कोई समस्या नहीं है। लेकिन जब त्वचा बहुत सूख जाती है, ठंडी हवा या कम नमी में रहती है, बार-बार साबुन और पानी के संपर्क में आती है या उसकी बाहरी सुरक्षा परत कमजोर हो जाती है, तो पानी तेजी से बाहर निकलने लगता है। त्वचा खिंचने लगती है, सफेद पड़ सकती है, फट सकती है और कभी-कभी उसमें दर्द भी होने लगता है।

पेट्रोलियम जेली यहां एक तरह की ढाल बना देती है। यह त्वचा के ऊपर ऐसी परत बनाती है जो पानी को बाहर निकलने से कम करती है। त्वचा विशेषज्ञ इसे ‘ओक्लूसिव’ पदार्थ कहते हैं, यानी ऐसा पदार्थ जो त्वचा के ऊपर परत बनाकर नमी के नुकसान को कम करता है। त्वचा विशेषज्ञों की अमेरिकी संस्था भी सूखी त्वचा के लिए पेट्रोलियम जेली को उपयोगी मानती है और इसे हल्की गीली त्वचा पर लगाने की सलाह देती है। ध्यान देने वाली बात यह है कि पेट्रोलियम जेली त्वचा के भीतर पानी भर नहीं देती। वह मुख्य रूप से त्वचा में मौजूद नमी को बाहर निकलने से रोकती है। यानी इसे पानी पैदा करने वाली चीज की बजाय पानी को बचाकर रखने वाली परत समझना ज्यादा सही होगा।

फटे होंठों पर यह इतनी असरदार क्यों लगती है

होंठों की त्वचा शरीर के दूसरे हिस्सों की तुलना में ज्यादा नाजुक होती है। ठंडी हवा, सूखी हवा, बार-बार होंठ चाटने की आदत और पानी की कमी जैसी स्थितियों में होंठ जल्दी सूख जाते हैं। पेट्रोलियम जेली होंठों पर एक चिकनी परत बना देती है। इससे आसपास की हवा और होंठों के बीच सीधा संपर्क कुछ कम हो जाता है और त्वचा की नमी तेजी से बाहर नहीं निकलती। इसी कारण फटे होंठों के लिए यह लंबे समय से इस्तेमाल होती रही है। अमेरिकी त्वचा विशेषज्ञ भी सूखे होंठों और सूखी पलकों जैसी जगहों पर पेट्रोलियम जेली के इस्तेमाल को उपयोगी मानते हैं। यानी इसका काम कोई जादुई उपचार करना नहीं है। यह मूल रूप से त्वचा को सूखने से बचाने और उसकी सुरक्षा परत को बनाए रखने में मदद करती है।

मामूली कट और खरोंच पर भी क्यों लगाई जाती है?

अगर त्वचा पर हल्की खरोंच या छोटा सा कट है और उसे अच्छी तरह साफ कर दिया गया है, तो पेट्रोलियम जेली उस जगह को बहुत ज्यादा सूखने से रोक सकती है। जब घाव बहुत जल्दी सूखकर मोटी पपड़ी बना लेता है, तो उसके नीचे नई त्वचा बनने की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। पेट्रोलियम जेली घाव को नम बनाए रखने में मदद करती है। अमेरिकी त्वचा विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार साफ किए गए छोटे कट और खरोंच पर पेट्रोलियम जेली घाव को नम रखने और ठीक होने की प्रक्रिया में मदद कर सकती है। लेकिन यहां एक जरूरी फर्क समझना चाहिए। पेट्रोलियम जेली संक्रमण खत्म करने वाली दवा नहीं है। यह कोई जीवाणुरोधी दवा भी नहीं है। गहरे घाव, गंभीर जलने, बहुत गंदे घाव या संक्रमित घाव में केवल पेट्रोलियम जेली पर निर्भर रहना ठीक नहीं है। और जलने के तुरंत बाद भी घर में पड़ी पेट्रोलियम जेली लगाने की जरूरत नहीं है। ताजा जलने पर पहले उचित प्राथमिक उपचार जरूरी है। गंभीर जलन में चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

एड़ियां फटने पर इसका इस्तेमाल क्यों किया जाता है?

एड़ियों की त्वचा मोटी होती है और जब उसमें नमी कम हो जाती है तो वह कठोर होकर फट सकती है। खासकर सर्दियों में यह समस्या ज्यादा दिखाई देती है। अगर एड़ियों को साफ करके थोड़ा नम रखा जाए और उसके बाद पेट्रोलियम जेली की पतली परत लगाई जाए, तो यह ऊपर से सुरक्षा परत बना सकती है। इससे त्वचा में मौजूद नमी लंबे समय तक बनी रह सकती है। रात में इसे लगाकर मोजे पहनने की आदत इसी वजह से लोकप्रिय है। इसका फायदा मुख्य रूप से उस समय मिलता है जब त्वचा को लगातार रगड़ और सूखी हवा से राहत मिलती है। लेकिन अगर एड़ियों में गहरी दरारें, खून, सूजन, दर्द या संक्रमण है, तो मामला केवल सूखी त्वचा का नहीं भी हो सकता है। ऐसे में डॉक्टर की सलाह जरूरी है।

बच्चों की त्वचा पर भी क्यों इस्तेमाल होती है?

पेट्रोलियम जेली का इस्तेमाल बच्चों में भी त्वचा की सुरक्षा के लिए किया जाता है। खासकर डायपर के कारण होने वाली जलन में यह त्वचा और नमी के बीच सुरक्षा परत बनाने में मदद कर सकती है। अमेरिकी त्वचा विशेषज्ञों के अनुसार डायपर बदलते समय साफ और सूखी त्वचा पर पेट्रोलियम जेली लगाने से डायपर के कारण होने वाली जलन को रोकने या कम करने में मदद मिल सकती है। लेकिन यहां भी वही नियम है। अगर बच्चे की त्वचा पर लाल चकत्ते लगातार बने रहें, फैलें, उनमें घाव या संक्रमण दिखाई दे या कुछ दिनों में सुधार न हो, तो डॉक्टर को दिखाना चाहिए।

क्या पेट्रोलियम जेली त्वचा के रोमछिद्र बंद कर देती है?

यह पेट्रोलियम जेली को लेकर सबसे आम सवालों में से एक है। लोग अक्सर कहते हैं कि इसे चेहरे पर लगाने से रोमछिद्र बंद हो जाते हैं और मुंहासे निकल आते हैं। लेकिन तस्वीर इतनी सीधी नहीं है। शुद्ध पेट्रोलाटम को लेकर हुए त्वचा संबंधी शोध में यह धारणा इतनी मजबूत नहीं है कि इसे सामान्य रूप से मुंहासे पैदा करने वाला पदार्थ कहा जाए। 2024 में प्रकाशित एक विस्तृत त्वचा विज्ञान समीक्षा ने भी पेट्रोलाटम से जुड़े मुंहासे पैदा करने वाले होने की धारणा और सुरक्षा से जुड़े कई मिथकों की समीक्षा की।

फिर भी हर व्यक्ति की त्वचा एक जैसी नहीं होती। बहुत तैलीय या मुंहासों वाली त्वचा पर बहुत मोटी परत लगाने से कुछ लोगों में समस्या बढ़ सकती है। अमेरिकी त्वचा विशेषज्ञ भी मुंहासे होने की प्रवृत्ति वाले लोगों को चेहरे पर पेट्रोलियम जेली लगाने में सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। इसलिए यह कहना गलत होगा कि “पेट्रोलियम जेली सभी के रोमछिद्र बंद कर देती है”, लेकिन यह भी सही नहीं कि हर व्यक्ति इसे चेहरे पर जितना चाहे लगा सकता है।

क्या इससे त्वचा काली पड़ जाती है?

पेट्रोलियम जेली खुद त्वचा को काला करने वाली चीज नहीं मानी जाती। इसका मुख्य काम त्वचा के ऊपर सुरक्षा परत बनाना है। हां, अगर किसी व्यक्ति को किसी उत्पाद से जलन, दाने या सूजन हो जाए और वह लंबे समय तक त्वचा को रगड़ता रहे, तो बाद में उस जगह रंग गहरा हो सकता है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि पेट्रोलियम जेली सीधे त्वचा का रंग काला करती है। कई बार जेली लगाने के बाद त्वचा चमकदार और गीली दिखाई देती है, जिससे भी लोगों को लगता है कि रंग बदल गया है। यह अस्थायी चमक होती है।

इसके वास्तविक नुकसान

पेट्रोलियम जेली आम त्वचा पर इस्तेमाल के लिए काफी सुरक्षित मानी जाती है और त्वचा विज्ञान में लंबे समय से इसका इस्तेमाल होता रहा है। लेकिन “सुरक्षित” का मतलब यह नहीं कि इसे शरीर के हर हिस्से में, किसी भी मात्रा में और किसी भी तरीके से इस्तेमाल किया जा सकता है।

सबसे महत्वपूर्ण सावधानी नाक के अंदर लंबे समय तक लगाने को लेकर है। अगर कोई व्यक्ति महीनों तक नाक के भीतर पेट्रोलियम जेली लगाता रहे, तो बहुत दुर्लभ स्थिति में इसका थोड़ा हिस्सा सांस के साथ फेफड़ों तक पहुंच सकता है। लंबे समय तक ऐसा होने पर फेफड़ों में तेल जैसे पदार्थ जमा होकर सूजन पैदा कर सकते हैं। इसे लिपॉइड निमोनिया कहा जाता है। मेयो क्लिनिक के अनुसार ऐसा दुर्लभ है, लेकिन लंबे समय तक नाक के अंदर पेट्रोलियम जेली लगाने से यह जोखिम पूरी तरह शून्य नहीं है। इसलिए नाक सूखने पर पेट्रोलियम जेली को अंदर गहराई तक लगाते रहना अच्छा तरीका नहीं माना जाता। नाक की सूखापन दूर करने के लिए नमक वाले पानी का नाक का स्प्रे या हवा में नमी बढ़ाने वाले उपकरण जैसे विकल्प इस्तेमाल किए जा सकते हैं।

आंखों के आसपास लगाने में भी सावधानी क्यों जरूरी है?

आंखों के आसपास की त्वचा बहुत पतली होती है। सूखी पलकों पर थोड़ी मात्रा में पेट्रोलियम जेली उपयोगी हो सकती है, लेकिन इसे आंख के अंदर डालना या आंखों के लिए बनी दवा की जगह सामान्य त्वचा वाली पेट्रोलियम जेली इस्तेमाल करना सही नहीं है।आंख में लगाने वाली दवाओं को खास तौर पर संक्रमण से बचाने के लिए तैयार किया जाता है। इसलिए अगर आंख में दवा चाहिए तो आंखों के लिए बनी दवा ही इस्तेमाल करनी चाहिए।

क्या पेट्रोलियम जेली जहरीली होती है?

“पेट्रोलियम से बनी है” सुनते ही कई लोगों को लगता है कि यह शरीर के लिए जहरीली होगी। लेकिन बहुत ज्यादा शुद्ध किए गए पेट्रोलाटम का त्वचा पर इस्तेमाल लंबे समय से होता रहा है और इसे त्वचा की सुरक्षा के लिए इस्तेमाल किया जाता है। अमेरिकी खाद्य एवं औषधि प्रशासन के दस्तावेजों में पेट्रोलाटम और सफेद पेट्रोलाटम को कई औषधीय और अन्य उपयोगों के संदर्भ में दर्ज किया गया है।

असल सवाल यह है कि किस गुणवत्ता का पेट्रोलाटम इस्तेमाल किया गया है और वह किस काम के लिए बनाया गया है। त्वचा पर लगाने के लिए बनी अच्छी गुणवत्ता वाली, शुद्ध की हुई पेट्रोलियम जेली और औद्योगिक इस्तेमाल वाले किसी पेट्रोलियम पदार्थ को एक जैसा नहीं समझना चाहिए। यही कारण है कि शरीर पर लगाने के लिए बने उत्पाद का इस्तेमाल करना चाहिए, न कि किसी औद्योगिक पेट्रोलियम पदार्थ को त्वचा पर लगाना।

क्या पेट्रोलियम जेली आग पकड़ सकती है?

पेट्रोलियम जेली को लेकर एक और दिलचस्प भ्रम है कि यह बहुत खतरनाक तरीके से आग पकड़ती है। वास्तव में पेट्रोलाटम जलने योग्य पदार्थ है और इसे आग या तेज गर्मी के स्रोत से दूर रखना चाहिए। त्वचा पर लगी जेली कपड़े या दूसरी ज्वलनशील चीजों के संपर्क में हो तो आग की स्थिति में खतरा बढ़ सकता है।

2024 की त्वचा विज्ञान समीक्षा ने भी पेट्रोलाटम की ज्वलनशीलता को इसकी सुरक्षा से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों में शामिल किया है। इसका मतलब यह नहीं कि पेट्रोलियम जेली अपने आप आग पकड़ लेती है। लेकिन इसे गैस चूल्हे, मोमबत्ती, सिगरेट, अंगीठी या किसी तेज गर्मी वाले स्रोत के आसपास इस्तेमाल करना समझदारी नहीं है।

क्या रोज पेट्रोलियम जेली लगाना ठीक है?

अगर आपकी त्वचा बहुत सूखी है और पेट्रोलियम जेली लगाने से कोई जलन या दूसरी समस्या नहीं होती, तो सामान्य त्वचा पर इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। खासकर उन जगहों पर जहां त्वचा बार-बार सूखती या फटती है। इसे हल्की नम त्वचा पर बहुत पतली परत में लगाना अक्सर ज्यादा उपयोगी होता है, क्योंकि इसका काम त्वचा में पहले से मौजूद नमी को बंद करके रखना है। त्वचा विशेषज्ञ भी इसी तरह इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। लेकिन हर त्वचा पर हर जगह मोटी परत लगाने की जरूरत नहीं है। बहुत गर्म और पसीने वाली जगहों पर लगातार मोटी परत लगाने से कुछ लोगों में रोमकूपों के आसपास जलन या सूजन जैसी समस्या हो सकती है। त्वचा विज्ञान में ऐसी स्थिति को परत के कारण होने वाली रोमकूप सूजन से जोड़ा गया है।

पेट्रोलियम जेली में “पेट्रोलियम” आखिर कितना डरावना है?

कच्चा पेट्रोलियम एक जटिल मिश्रण है। उससे कई अलग-अलग पदार्थ निकाले जाते हैं। फिर कुछ पदार्थों को कई चरणों में साफ और शुद्ध किया जाता है। पेट्रोलाटम इसी तरह तैयार किया गया एक अत्यधिक शुद्ध किया हुआ अर्धठोस हाइड्रोकार्बन मिश्रण है।

इसलिए पेट्रोलियम जेली को देखकर यह सोचना कि “मैं त्वचा पर पेट्रोलियम लगा रहा हूं” वैसा ही अधूरा निष्कर्ष है जैसे किसी बहुत ज्यादा साफ किए गए पदार्थ को उसके मूल स्रोत के नाम से देखकर उसके अंतिम गुण तय कर देना। पेट्रोलियम जेली का असली कमाल उसकी उत्पत्ति में नहीं, उसके गुण में है। यह पानी में घुलती नहीं, त्वचा पर टिकती है और एक ऐसी परत बनाती है जो नमी को बाहर निकलने से रोकती है। इसी साधारण से गुण ने इसे दुनिया भर में त्वचा की देखभाल का इतना लोकप्रिय पदार्थ बना दिया है।

पेट्रोलियम जेली कोई चमत्कारी दवा नहीं है और न ही पेट्रोल जैसा खतरनाक पदार्थ। सही गुणवत्ता वाली पेट्रोलियम जेली मुख्य रूप से त्वचा के ऊपर सुरक्षा परत बनाकर नमी को बचाने का काम करती है। फटे होंठ, सूखी त्वचा, एड़ियों की दरार, रगड़ से होने वाली जलन और छोटे साफ घावों की देखभाल में यह उपयोगी हो सकती है।

लेकिन इसे हर समस्या की दवा समझना भी गलत है। गहरे या संक्रमित घाव, गंभीर जलन, लगातार बने रहने वाले चकत्ते या किसी त्वचा रोग में डॉक्टर की सलाह जरूरी है। नाक के अंदर इसे लंबे समय तक लगाते रहना भी ठीक नहीं, क्योंकि बहुत दुर्लभ मामलों में इसे सांस के साथ फेफड़ों तक पहुंचने से गंभीर सूजन हो सकती है।

यानी पेट्रोलियम जेली की कहानी कुछ ऐसी है जिसमें नाम सुनकर डर लगता है, लेकिन असली पदार्थ को समझने पर तस्वीर बदल जाती है। इसमें पेट्रोल नहीं है। इसमें कच्चा पेट्रोलियम नहीं है। यह पेट्रोलियम से प्राप्त पदार्थों को बहुत ज्यादा शुद्ध करके बनाया गया पेट्रोलाटम है। और इसका सबसे बड़ा काम त्वचा को कोई नया पानी देना नहीं, बल्कि त्वचा के अपने पानी को बाहर निकलने से रोकना है। यही साधारण सा काम इसे घर की छोटी सी डिब्बी से लेकर आधुनिक त्वचा चिकित्सा तक इतना उपयोगी बनाता है।

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