Rabindranath Tagore के जन्मदिन को लेकर क्यों रहता है कन्फ्यूजन, साल में 2 दिन क्यों मनाई जाती है 'गुरुदेव' की जयंती? जानें वजह

Rabindranath Tagore Jayanti 2026: रवींद्रनाथ टैगोर की जयंती 2026 दो तिथियों पर मनाई जाती है, जो उनके साहित्य, संस्कृति और विश्वव्यापी योगदान को याद करती है।

Akriti Pandey
Published on: 9 May 2026 6:00 AM IST
Rabindranath Tagore Jayanti 2026
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Rabindranath Tagore Jayanti 2026

Rabindranath Tagore Jayanti 2026: भारत और विश्वभर में रवींद्रनाथ टैगोर को एक महान साहित्यिक और सांस्कृतिक व्यक्तित्व के रूप में याद किया जाता है। रोचक बात यह है कि उनकी जयंती साल में दो बार मनाई जाती है। यह दोहरा उत्सव ग्रेगोरियन कैलेंडर और बंगाली पंचांग के सह-अस्तित्व को दर्शाता है। टैगोर जयंती का यह अनोखा स्वरूप न केवल उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित करता है, बल्कि पूर्वी भारत और बांग्लादेश में उनके क्षेत्रीय सांस्कृतिक योगदान को भी उजागर करता है।

टैगोर की जन्मतिथि: ग्रेगोरियन और बंगाली कैलेंडर

रवींद्रनाथ टैगोर का जन्म 7 मई 1861 को कोलकाता के जोरासांको ठाकुरबाड़ी में हुआ था। यह तारीख वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त है और पूरे भारत में 7 मई को उनकी जयंती मनाई जाती है। वहीं पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और बांग्लादेश में यह उत्सव बंगाली पंचांग के अनुसार बोइशाख माह की 25 तारीख, यानी पोचीशे बोइशाख को मनाया जाता है। चूंकि बंगाली पंचांग चंद्र-सौर आधारित है, यह तिथि हर साल बदलती रहती है और आमतौर पर 8 या 9 मई को पड़ती है।

टैगोर: साहित्य और संस्कृति में अविस्मरणीय योगदान

टैगोर को “बंगाल के कवि” के रूप में जाना जाता है। उन्होंने गीतांजलि के लिए 1913 में साहित्य का नोबेल पुरस्कार जीतकर यह प्रतिष्ठा हासिल की कि वे पहले गैर-यूरोपीय व्यक्ति थे। इसके अलावा उन्होंने भारत का राष्ट्रगान “जन गण मन” और बांग्लादेश का “अमर सोनार बांग्ला” लिखा। टैगोर ने शिक्षा, कला और दर्शन के क्षेत्र में भी योगदान दिया और भारतीय संस्कृति पर अमिट छाप छोड़ी। विश्वभारती विश्वविद्यालय की स्थापना उनके दूरदर्शी दृष्टिकोण और समग्र शिक्षा के लिए समर्पण का प्रतीक है।

जयंती पर उत्सव और कार्यक्रम

टैगोर की जयंती विशेष रूप से पश्चिम बंगाल में बड़े उत्साह के साथ मनाई जाती है। इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रम, संगीत, नृत्य, रंगमंच और कविता पाठ आयोजित किए जाते हैं। ये आयोजन टैगोर की रचनात्मकता और सांस्कृतिक विरासत को युवाओं और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का माध्यम हैं।

टैगोर से जुड़े रोचक तथ्य

टैगोर ने महात्मा गांधी को “महात्मा” की उपाधि प्रदान की।

उन्होंने 60 वर्ष की आयु में चित्रकला शुरू की और उसे पहचान दिलाई।

उनका काम श्रीलंका के राष्ट्रगान सहित अन्य देशों के संगीत और साहित्य को भी प्रभावित कर चुका है।

टैगोर ने अल्बर्ट आइंस्टीन के साथ बौद्धिक विचारों का आदान-प्रदान किया।

Akriti Pandey

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