TRENDING TAGS :
Ravan Effigy Price 2026: इस साल रावण पर भी महंगाई की मार, बांस से लेकर कागज तक महंगा, छोटे पुतलों की बढ़ी मांग
Ravan Effigy Price 2026: लखनऊ में दशहरे पर रावण के पुतलों की कीमत 100 रुपये से शुरू, जबकि बड़े पुतलों के दाम 20 हजार रुपये तक पहुंच रहे हैं। जानें महंगाई और छोटे पुतलों की बढ़ती मांग की वजह।
Ravan Effigy Price 2026: Rising Costs Push Demand for Smaller Dussehra Effigies in Lucknow
Ravan Effigy Price 2026: दशहरा आते ही लखनऊ की गलियों और बाजारों में रावण के पुतलों की रौनक बढ़ गई है। कहीं बच्चों के लिए छोटा-सा रावण तैयार किया जा रहा है, तो कहीं रामलीला समितियों के लिए 30 से 40 फीट तक के विशाल पुतले बन रहे हैं। इन पुतलों के पीछे सिर्फ बांस, रंगीन कागज और आतिशबाजी नहीं, बल्कि कारीगरों की कई दिनों की मेहनत भी शामिल है। इस बार राजधानी में छोटे पुतलों की कीमत करीब 100 रुपये से शुरू हो रही है, जबकि बड़े और विशेष ऑर्डर पर बनने वाले पुतलों के लिए 20 हजार रुपये या इससे अधिक खर्च करना पड़ सकता है। 20 अक्टूबर को विजयादशमी के अवसर पर रावण दहन की तैयारियां तेज हो गई हैं। पॉलिटेक्निक चौराहे से लेकर डालीगंज की बांस मंडी और पुरनिया तक कारीगर पुतलों को अंतिम रूप देने में जुटे हैं। खरीदार अपनी जरूरत, बजट और आयोजन के हिसाब से रावण की ऊंचाई चुन रहे हैं।
4 फीट से 40 फीट तक के पुतले, हर बजट के लिए विकल्प
लखनऊ के बाजारों में इस बार छोटे घरेलू आयोजनों से लेकर बड़े सार्वजनिक कार्यक्रमों तक के लिए पुतले उपलब्ध हैं। करीब 4 फीट ऊंचे पुतले कम जगह में होने वाले रावण दहन के लिए पसंद किए जा रहे हैं। वहीं, 20, 25, 32 और 40 फीट तक के पुतले बड़े आयोजनों की जरूरत के मुताबिक तैयार किए जा रहे हैं। कारीगर ग्राहकों की मांग के अनुसार आकार और सजावट में बदलाव भी करते हैं। कीमत केवल ऊंचाई से तय नहीं होती। पुतले की गोलाई, चेहरे की बनावट, मुकुट, रंगीन सजावट और उसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री भी दाम को प्रभावित करती है। यही वजह है कि एक ही ऊंचाई के दो पुतलों की कीमत अलग-अलग हो सकती है।
डालीगंज की बांस मंडी में पीढ़ियों से बन रहे पुतले
लखनऊ में डालीगंज की बांस मंडी रावण के पुतलों की खरीदारी के प्रमुख ठिकानों में शामिल है। यहां कई परिवार लंबे समय से इस काम से जुड़े हैं। दशहरे से पहले इन परिवारों के लिए यह कारोबार कमाई का अहम जरिया बन जाता है। बांस और तार से ढांचा तैयार करने के बाद उस पर कागज, रंग और सजावटी सामग्री लगाई जाती है। बड़े पुतलों में ढांचे को मजबूत बनाने और उसे खड़ा रखने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इस बार डालीगंज में 20, 24 और 25 फीट के पुतलों के साथ 32 फीट तक के पुतलों के ऑर्डर भी मिलने की जानकारी सामने आई है। बड़े पुतलों की कीमत करीब 2,000 रुपये से शुरू होकर 20,000 रुपये या उससे अधिक तक पहुंच सकती है। हालांकि, वास्तविक कीमत पुतले के डिजाइन और ऑर्डर की शर्तों पर निर्भर करती है।
कहीं 100 तो कहीं 20 हजार रुपये तक कीमत
रावण के पुतलों की कीमत में अंतर का अंदाजा बाजार में मिल रहे विकल्पों से लगाया जा सकता है। छोटे पुतले करीब 100 रुपये से शुरू हो रहे हैं। वहीं, पॉलिटेक्निक चौराहे के आसपास चार से 20 फीट तक के पुतलों की कीमत लगभग 200 रुपये से 10 हजार रुपये तक बताई गई है। पुरनिया क्षेत्र में कुछ कारीगर प्रति फीट के हिसाब से भी कीमत तय करते हैं। बड़े पुतले खरीदने वाले आयोजकों को अपने बजट के साथ परिवहन और आयोजन स्थल पर पुतला खड़ा करने जैसी जरूरतों का भी ध्यान रखना पड़ता है। इसलिए ऑर्डर देने से पहले पुतले की ऊंचाई, सजावट और पहुंचाने की व्यवस्था स्पष्ट कर लेना जरूरी है।
दशहरे से पहले कारीगरों के सामने समय पर डिलीवरी की चुनौती
विजयादशमी नजदीक आने के साथ कारीगरों के सामने सबसे बड़ी चुनौती सभी ऑर्डर समय पर पूरे करने की है। छोटे पुतले अपेक्षाकृत जल्दी बन जाते हैं, लेकिन बड़े आकार के पुतलों में ढांचा तैयार करने से लेकर सजावट तक अधिक समय लगता है। ग्राहकों की मांग के अनुसार डिजाइन बदलने पर मेहनत भी बढ़ जाती है।
इस साल रावण पर भी महंगाई की मार
बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक दशहरा इस बार महंगाई के बीच मनाया जा रहा है। लखनऊ में रावण के पुतले बनाने वाले कारीगरों के मुताबिक, बांस, कागज, पुआल और सजावट के सामान की कीमतें बढ़ने से पुतले तैयार करना महंगा हो गया है। पिछले साल जिस पुतले का ढांचा 50 से 60 रुपये प्रति फीट के हिसाब से तैयार होता था, इस बार उसके लिए 100 रुपये प्रति फीट तक खर्च करना पड़ रहा है। लागत बढ़ने का असर कारोबार पर भी दिख रहा है। बड़े पुतलों के मुकाबले छोटे आकार के रावण की मांग बढ़ गई है। इसके बावजूद भी मह महंगाई की मार हो या चाहे आकार घट कर चार फीट हो या फिर 40 फीट, इन पुतलों के स्वरूप को तैयार करने के पीछे कारीगरों की अथक मेहनत और दशहरे की इस वर्षों पुरानी परंपरा के उत्साह में कोई कमी नहीं नजर आ रही है।


