Dal Banane ka Sahi Tarika: आपकी एक गलती दाल का पूरा पोषण कर सकती है खत्म, जानिए इसे बनाने का सही तरीका

Dal Banane ka Sahi Tarika: दाल प्रोटीन, फाइबर और आवश्यक पोषक तत्वों का बेहतरीन स्रोत है, लेकिन गलत तरीके से पकाने पर इसके पोषक तत्व कम हो सकते हैं। जानिए दाल पकाने का सही तरीका ।

Vineeta Pandey
Published on: 21 Jun 2026 3:26 PM IST (Updated on: 21 Jun 2026 3:27 PM IST)
Dal Recipe
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Dal Banane ka Sahi Tarika: आमतौर पर दाल भारतीय घरों में रोज़ के भोजन का एक अहम हिस्सा है। यह प्रोटीन का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है। शाकाहारी लोगों के लिए दाल प्रोटीन का प्रमुख स्रोत होती है, और वे अपनी प्रोटीन आवश्यकता का आधे से अधिक भाग दालों से ही प्राप्त करते हैं। दाल में पाए जाने वाले प्रोटीन, विटामिन, फाइबर और कई तरह के पोषक तत्व हमारे शरीर को पोषण प्रदान करते हैं, लेकिन अधिकतर लोगों को दाल बनाने का सही तरीका नहीं पता होता, जिसकी वजह से उसमें मौजूद पोषक तत्वों में कमी आ जाती है। चलिए जानते हैं कि दाल को बनाते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए, जिससे इसके पोषक तत्व सुरक्षित रहें।

दाल भिगोकर बनाएं

हमेशा दाल को भिगोकर ही पकाना चाहिए। दाल को कम से कम 5–6 घंटे भिगोना चाहिए। दाल में एंटी-न्यूट्रिएंट्स मौजूद होते हैं, जो पोषक तत्वों के अवशोषण में बाधा बनते हैं। दाल को भिगोने से ये तत्व कम हो जाते हैं, जिससे खाना सुपाच्य होता है और पेट से संबंधित समस्याएं नहीं होती हैं।

दाल पकाने का सही तरीका

भारत में दाल हर किसी के खाने का एक अहम हिस्सा है और इसे अधिकतर लोग बनाना जानते हैं, लेकिन इसे पकाने का सही तरीका बहुत कम लोगों को पता होता है। आमतौर पर लोग दाल को ज्यादा देर तक पका देते हैं, जिससे वह बहुत अधिक गल जाती है। अधिक समय तक तेज आंच पर दाल पकाने से उसमें मौजूद पोषक तत्व कम हो जाते हैं, इसलिए दाल को जरूरत से ज्यादा देर तक नहीं पकाना चाहिए।

तड़का लगाते समय सावधानी

दाल में हमेशा हल्का तड़का लगाना चाहिए और अधिक तेल का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। तड़का सादा होना चाहिए, और यदि संभव हो तो बिना तड़के की दाल खाना और भी बेहतर होता है। आजकल लोग दाल में बहुत ज्यादा मिर्च-मसाले डालकर तड़का लगाते हैं, जिससे पाचन प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और भोजन भारी लग सकता है।

प्रेशर कुकर का करें इस्तेमाल

दाल पकाने के लिए प्रेशर कुकर का उपयोग करना बेहतर होता है। इससे दाल कम समय में अच्छी तरह पक जाती है और गैस की भी बचत होती है। साथ ही दाल को लंबे समय तक आंच पर नहीं रखना पड़ता, क्योंकि जितनी अधिक देर तक दाल पकती है, उतने ही अधिक उसके पोषक तत्व प्रभावित हो सकते हैं।

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Vineeta Pandey is an News Publisher at Newstrack.com.

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