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Sadhguru Quotes: बहस बनाम बुद्धिमत्ता, तर्क के जाल से मुक्त होकर सत्य को देखने का विज्ञान
Sadhguru Quotes: अक्सर लोग यह मान बैठते हैं कि वे किसी विषय पर बहस (Debate) करके किसी अंतिम और सार्थक निष्कर्ष तक पहुँच सकते हैं।
Sadhguru Quotes Debate vs Wisdom
Sadhguru Quotes: अक्सर लोग यह मान बैठते हैं कि वे किसी विषय पर बहस (Debate) करके किसी अंतिम और सार्थक निष्कर्ष तक पहुँच सकते हैं। लेकिन सत्य यह है कि बहस से निष्कर्ष तभी निकल सकता है जब उसमें शामिल लोगों में से कम-से-कम एक व्यक्ति अज्ञानी या मूर्ख हो; क्योंकि अज्ञानी व्यक्ति बहुत जल्दी किसी भी सतही बात को अंतिम सच मानकर बैठ जाता है। इसके विपरीत, यदि दो सचमुच के प्रज्ञावान और बुद्धिमान लोग किसी विषय पर चर्चा करें, तो वे जीवन के सबसे छोटे पहलू पर भी अनंत काल तक विचार कर सकते हैं—यहाँ तक कि एक साधारण 'खिचड़ी' कैसे बनाई जाए, इस पर भी। ऐसा इसलिए है क्योंकि जैसे-जैसे आप सृष्टि के किसी भी कार्य को गहराई से देखना शुरू करते हैं, उसकी जटिलता और उसके आयाम असीम होते चले जाते हैं।
आधुनिक शिक्षा और कुंद होती बुद्धि
दुर्भाग्य से, हमारी आधुनिक शिक्षा व्यवस्था ने बुद्धि को केवल 'बहस करने का एक साधन' बना दिया है। आजकल लोग समझते हैं कि हर बात पर नुक्स निकालना, कुतर्क करना या प्रश्न उठाना ही बुद्धिमत्ता की निशानी है। लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है; अधिकांश समय यह केवल एक 'बौद्धिक मनोरंजन' (Intellectual Entertainment) और अहंकार की तुष्टि भर होता है।
वास्तव में, प्रकृति ने आपको बुद्धि इसलिए दी है ताकि वह एक तेज़ धार वाले चाकू की तरह काम कर सके। लेकिन यदि आप उस चाकू को अपनी रूढ़िवादी पहचानों, पूर्वाग्रहों और अहम् से कुंद (Blunt) न होने दें—तो इसी बुद्धि में संपूर्ण सृष्टि के पार देखने और परम सत्य को भेदने की अद्भुत क्षमता है।
सीमित जानकारी का अहंकार
जब आप किसी से बहस करते हैं, तो आप केवल उसी डेटा या जानकारी के आधार पर तर्क करते हैं जो आपके पास पहले से मौजूद है। लेकिन इस अनंत ब्रह्मांड के बारे में आपकी जानकारी कितनी है? धूल के एक कण के बराबर भी नहीं! सच्चाई तो यह है कि आधुनिक विज्ञान आज भी पूरी तरह यह नहीं जान पाया है कि एक परमाणु (Atom) वास्तव में क्या है। आप चौबीस घंटे जिस शरीर में रहते हैं, उसकी एक अकेली कोशिका (Cell) के पूर्ण रहस्य को भी आप नहीं समझते। जब आपकी जानकारी इतनी सीमित है, तो उस अधकचरे ज्ञान के साथ बहस करना केवल अज्ञानता का प्रदर्शन है। इस तरह आप अपनी दिव्य बुद्धि का सदुपयोग नहीं, बल्कि दुरुपयोग कर रहे होते हैं।
यदि आप अपनी बुद्धि को बिल्कुल निर्मल और तटस्थ रखें, उसे अपने शरीर, मन या किसी भी सामाजिक पहचान से न जोड़ें, और हर चीज को पूर्णतः निष्पक्ष भाव से देखें, तो वह तेज धारदार चाकू की तरह अज्ञानता के हर आवरण को चीर देगी। तब आपको वस्तुएँ वैसी ही दिखाई देंगी, जैसी वे वास्तव में हैं।
इंद्रियों का चमत्कार और हमारी अंधता
बुद्धि का मूल उद्देश्य आपकी पाँचों ज्ञानेंद्रियों (Senses) की सहायता करना और उनकी क्षमता को बढ़ाना है। ये पाँचों इंद्रियाँ अपने-आप में प्रकृति का सबसे अद्भुत चमत्कार हैं। महाभारत के धृतराष्ट्र के पास तो केवल चार ही इंद्रियाँ थीं (वे नेत्रहीन थे), इसलिए उनके जीवन की भूलों के लिए उन्हें कुछ हद तक क्षमा किया जा सकता है। लेकिन हमारे पास ऐसी कोई छूट नहीं है। हम पाँचों इंद्रियों के पूर्ण वैभव के साथ जन्मे हैं, फिर भी यदि हम जीवन के सत्य और सहजता को नहीं देख पाते, तो हमारी यह मानसिक अंधता धृतराष्ट्र की शारीरिक अंधता से कहीं अधिक खतरनाक और अक्षम्य है।
जीवन सूत्र: बुद्धि का काम दूसरों को परास्त करना नहीं, बल्कि स्वयं के भीतर के अंधकार को मिटाना है। बहस बंद कीजिए, बोध को जगाइए।
(साभार सद्गुरु जग्गी वासुदेव के विचारों का संपादन व संवर्धन)


