सोशल मीडिया पर क्यों बढ़ रहा सुसाइड से पहले वीडियो बनाने का खौफनाक ट्रेंड, जानें एक्सपर्ट्स से कितना खरतनाक है ये

Mental Health Support: मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि यह ट्रेंड युवाओं के बीच तेजी से बढ़ रहा है और यह मानसिक बीमारियों को और बढ़ावा दे सकता है।

Ragini Sinha
Published on: 4 Aug 2025 2:30 PM IST
Mental Health Support
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Mental Health Support (SOCIAL MEDIA)

Mental Health Support: आजकल एक बेहद चिंताजनक ट्रेंड सोशल मीडिया पर देखने को मिल रहा है। कई लोग आत्महत्या से पहले अपना वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया पर पोस्ट कर रहे हैं। ऐसा करना न केवल खुद के लिए खतरनाक है, बल्कि यह औरों को भी मानसिक रूप से प्रभावित करता है। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि यह ट्रेंड युवाओं के बीच तेजी से बढ़ रहा है और यह मानसिक बीमारियों को और बढ़ावा दे सकता है।

आत्महत्या और वीडियो का कनेक्शन

देश में कई ऐसे मामलों में लोगों ने आत्महत्या से पहले वीडियो बनाकर पोस्ट किए है। खंडवा में एक व्यक्ति ने वीडियो में अपनी पत्नी और परिवार वालों पर आरोप लगाते हुए ज़हरीला पदार्थ खा लिया। वहीं, बेंगलुरु के एक इंजीनियर ने वीडियो और सुसाइड नोट छोड़कर जान दे दी। इन वीडियोज़ को देखकर कई बार दूसरे लोग भी ऐसा कदम उठाने की सोचने लगते हैं। इसे "कॉपीकैट बिहेवियर" कहा जाता है, जो मानसिक रूप से कमजोर लोगों पर गहरा असर डाल सकता है।


क्या सोशल मीडिया जिम्मेदार है?

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स जैसे फेसबुक, इंस्टाग्राम और यूट्यूब ने आत्महत्या से जुड़े कंटेंट पर रोक लगाने की कुछ कोशिशें की हैं। जैसे कि AI टूल्स के ज़रिए संदिग्ध पोस्ट की पहचान करना और लोकल अथॉरिटी को अलर्ट भेजना, लेकिन अभी भी यह काफी नहीं है। वीडियो बनाकर आत्महत्या करने की घटनाएं कम नहीं हो रही हैं।

एक्सपर्ट्स की राय

डॉ. सत्यकांत त्रिवेदी कहते हैं कि सोशल मीडिया पर लाइमलाइट पाने की चाह और मानसिक तनाव लोगों को यह कदम उठाने पर मजबूर कर रहे हैं। आत्महत्या से पहले वीडियो बनाना कई बार "कॉल फॉर हेल्प" होता है, जिसे लोग समझ नहीं पाते। डॉ. विध‍ि पिलन‍िया कहती हैं कि सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग और नकारात्मकता से डिप्रेशन बढ़ता है, जो खतरनाक साबित हो सकता है।


क्या किया जा सकता है?

  • AI सिस्टम को बेहतर बनाएं, ताकि आत्महत्या से जुड़े पोस्ट जल्दी पहचाने जा सकें।
  • हेल्पलाइन नंबर तुरंत दिखाए जाएं, जैसे भारत में 1800-233-3330।
  • मानव मॉडरेटर्स की टीम बढ़ाई जाए, खासकर लाइव वीडियो पर नजर रखने के लिए।
  • मेंटल हेल्थ जागरूकता कैंपेन चलाए जाएं, ताकि लोग मदद मांगने में संकोच न करें।
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Ragini Sinha is a Former News Publisher at Newstrack.com.

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