September Sky Events 2026: सितंबर में आसमान होगा अद्भुत! 23 को दिन-रात बराबर, 26 सितंबर को दिखेगा ‘Harvest Moon’

September Sky Events 2026: सितंबर 2026 में आसमान में कई खास खगोलीय घटनाएं देखने को मिलेंगी। 9 सितंबर को Epsilon Perseids उल्का वर्षा, 23 सितंबर को शरद विषुव और 26 सितंबर को Harvest Moon दिखाई देगा।

Newstrack Network
Published on: 7 Sept 2026 4:49 PM IST (Updated on: 7 Sept 2026 4:49 PM IST)
September Sky Events
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September Sky Events (Image Credit-Social Media)

प्रयागराज: सितंबर का महीना खगोल विज्ञान में रुचि रखने वालों और आकाश निहारने के शौकीनों के लिए बेहद खास रहने वाला है। इस माह पृथ्वी, सूर्य, चंद्रमा और उल्कापिंडों की कई दुर्लभ खगोलीय घटनाएं एक साथ देखने को मिलेंगी। 23 सितंबर को 'शरद विषुव' (ऑटमनल इक्विनॉक्स) के चलते दिन और रात की अवधि पूरी तरह 12-12 घंटे की होगी, जबकि 26 सितंबर को पूर्णिमा पर निकलने वाला 'हार्वेस्ट मून' अपनी अनोखी लाल आभा से रात के आसमान को जगमग करेगा। इसके साथ ही ग्रहों की जुगलबंदी और तेज रफ्तार उल्कापात (मीटियोर शावर) पूरे महीने आकाश में दिलचस्पी बनाए रखेंगे।

23 सितंबर को शरद विषुव: 12 घंटे का दिन, 12 घंटे की रात

सीधी किरणें: 23 सितंबर को सूर्य की किरणें सीधे पृथ्वी की भूमध्य रेखा (इक्वेटर) पर लंबवत पड़ेंगी। इस भौगोलिक स्थिति को शरद विषुव कहा जाता है।

समान संतुलन: इस दिन उत्तरी और दक्षिणी दोनों गोलार्द्धों में दिन और रात का समय लगभग ठीक 12-12 घंटे का होगा। साल में ऐसी संतुलन की स्थिति दो बार—21 मार्च (वसंत विषुव) और 23 सितंबर (शरद विषुव) को बनती है।

ऋतु परिवर्तन का संकेत: यह खगोलीय घटना उत्तरी गोलार्द्ध में आधिकारिक तौर पर शरद ऋतु के आगमन और दिन छोटे होने की शुरुआत का संकेत देती है।

26 सितंबर को 'हार्वेस्ट मून' और उसका लाल रंग

शरद विषुव के सबसे करीबी पूर्णिमा के चांद को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर 'हार्वेस्ट मून' या 'कॉर्न मून' कहा जाता है।

नामकरण का आधार: पारंपरिक रूप से यह समय पश्चिमी और उत्तरी देशों में फसलों (विशेषकर मक्के) की कटाई का होता है। शाम ढलते ही लगातार कई दिनों तक चांद जल्दी निकल आता है, जिससे किसानों को रात में भी कटाई के लिए प्राकृतिक रोशनी मिल जाती थी।

लाल आभा का वैज्ञानिक कारण: क्षितिज से उगते समय हार्वेस्ट मून हल्का लाल या नारंगी नजर आ सकता है। इसका कारण वायुमंडलीय अपवर्तन (रिफ्रैक्शन) और 'रेले स्कैटरिंग' है। क्षितिज के पास चंद्रमा की रोशनी को वायुमंडल की मोटी परत से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे नीली और बैंगनी रोशनी बिखर जाती है और केवल लंबी वेवलेंथ वाली लाल-नारंगी रोशनी ही हमारी आंखों तक पहुंचती है।

9 सितंबर को दिखेगी इप्साइलन उल्का वर्षा

सितंबर के पहले सप्ताह में 'ऑरिगिड्स' उल्कापात के बाद अब 9 सितंबर को 'इप्साइलन पर्सीड्स' (Epsilon Perseids) उल्का वर्षा अपने चरम पर होगी।

अभूतपूर्व गति: ये उल्कापिंड लगभग 64 किलोमीटर प्रति सेकंड (करीब 2.3 लाख किमी प्रति घंटा) की प्रचंड रफ्तार से पृथ्वी के ऊपरी वायुमंडल में प्रवेश करेंगे।

देखने का सही समय: भोर होने से ठीक पहले, प्रदूषण मुक्त और साफ आसमान वाले इलाकों में बिना किसी दूरबीन के भी इन 'टूटते तारों' की चमकीली लकीरों को देखा जा सकेगा।

ग्रहों की स्थिति और चंद्रमा संग जुगलबंदी

जवाहर तारामंडल की पूर्व विज्ञानी सुरूर फातिमा के अनुसार, सौरमंडल के ग्रह इस माह अलग-अलग कोणों पर दिखाई देंगे:

चंद्रमा संग मुलाकात: चंद्रमा 8 सितंबर को देवगुरु बृहस्पति, 12 को बुध और 14 सितंबर को सबसे चमकदार ग्रह शुक्र के करीब नजर आएगा। 27 सितंबर को चंद्रमा और छल्लेदार शनि ग्रह एक साथ दृष्टिगोचर होंगे।

सूर्य और बुध का गोचर: सूर्य वर्तमान में सिंह राशि में संचरण कर रहा है, जो 18 सितंबर को कन्या राशि में प्रवेश करेगा। वहीं, कन्या राशि में मौजूद बुध ग्रह माह के शुरुआती दिनों में शाम करीब 6:15 बजे पश्चिमी क्षितिज में अस्त हो रहा है।

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