Sharad Purnima:शरद पूर्णिमा पर खीर बनाने का रहस्य - क्यों रखी जाती है चाँद की रोशनी में?जानिए कारण

Why Kheer is kept under moonlight: शरद पूर्णिमा पर खीर बनाने की परंपरा पीढ़ियों से चली आ रही है।

Shivani Jawanjal
Published on: 6 Oct 2025 2:55 PM IST
Sharad Purnima:शरद पूर्णिमा पर खीर बनाने का रहस्य - क्यों रखी जाती है चाँद की रोशनी में?जानिए कारण
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Pic Credit - Social Media

Sharad Purnima Khir: भारतीय संस्कृति में त्योहारों का बहुत महत्व है। ये सिर्फ धार्मिक मौके नहीं होते, बल्कि परिवार और समाज के लोगों को जोड़ने का भी काम करते हैं। ऐसे ही खास त्योहारों में शरद पूर्णिमा भी शामिल है। शरद पूर्णिमा जिसे कृष्ण पूर्णिमा भी कहते हैं, आश्विन महीने की पूर्णिमा को मनाई जाती है। इस दिन चाँद की रोशनी के स्वास्थ्य और औषधीय लाभों को लेकर पुरानी मान्यताएँ प्रचलित हैं। शरद पूर्णिमा पर खीर बनाना और उसे चाँद की रोशनी में रखना इस पर्व की सबसे महत्वपूर्ण परंपरा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर क्यों इस दिन खीर चाँद की रोशनी में रखी जाती है? अगर नहीं, तो आइए हम आपको इसका कारण बताते हैं।

क्यों खीर चाँद की रोशनी में बनाई जाती है?

शरद पूर्णिमा का धार्मिक महत्व बहुत खास है। मान्यता है कि इस रात चंद्रमा अपनी पूरी चमक और सभी 16 कलाओं के साथ आकाश में होता है और अमृत की वर्षा करता है। इसलिए इस दिन खीर को खुले आसमान के नीचे चाँद की रोशनी में रखा जाता है, ताकि वह इस अमृत का प्रभाव ग्रहण कर सके। स्कंद पुराण में भी कहा गया है कि इस रात बनी खीर का सेवन करने से अमृत के समान लाभ होते हैं। साथ ही, शरद पूर्णिमा को भगवान कृष्ण की रास लीला से भी जोड़ा जाता है जो वृंदावन में इसी रात हुई थी। खीर को भगवान कृष्ण और मां लक्ष्मी को अर्पित करने की परंपरा है, ताकि वे प्रसन्न होकर घर में सुख, शांति और समृद्धि का आशीर्वाद दें।

खीर के स्वास्थ लाभ

शरद पूर्णिमा की खीर सिर्फ स्वाद में ही नहीं बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बहुत फायदेमंद होती है। इसमें दूध, चावल और चीनी जैसे पौष्टिक तत्व होते हैं जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं। चावल में मौजूद स्टार्च और दूध में लैक्टोज पाचन में मदद करते हैं और कब्ज या अपच जैसी समस्याओं को दूर रखते हैं। खीर में डालने वाले मेवे जैसे बादाम, काजू, पिस्ता और केसर शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाते हैं क्योंकि इनमें विटामिन ई, जिंक और एंटीऑक्सिडेंट्स मौजूद होते हैं। चीनी तुरंत ऊर्जा देती है जिससे थकान कम होती है। माना जाता है कि शरद पूर्णिमा की खीर खाने से त्वचा रोग, अस्थमा और हृदय से जुड़ी समस्याओं में भी लाभ मिलता है।

परंपरा और प्रतीकात्मकता

शरद पूर्णिमा की खीर को चांदी के बर्तन में रखना शुभ माना जाता है क्योंकि चांदी चंद्रमा का प्रतीक है और इससे खीर के औषधीय गुण बढ़ जाते हैं। खीर के हर तत्व का भी एक प्रतीकात्मक मतलब होता है - दूध शांति का, चावल पोषण का और चीनी जीवन की मिठास का प्रतीक है। इस तरह खीर सिर्फ एक प्रसाद नहीं बल्कि समृद्धि, स्वास्थ्य और आध्यात्मिक शांति का संदेश भी देती है। इसे खाने से तन और मन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।

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Shivani Jawanjal is a former Senior Content Writer at Newstrack.com.

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