Solar Panel Life: आज लगाया सोलर पैनल 10 साल बाद कितना काम आएगा? जानें

Solar Panel Life: 10 साल बाद सोलर पैनल की बिजली बनाने की क्षमता कितनी रह जाती है? जानें डिग्रेडेशन, 25 साल की उम्र और रखरखाव से जुड़ी जरूरी बातें।

Jyotsana Singh
Published on: 24 Aug 2026 2:34 PM IST
Solar Panel Life: How Much Power Will Your Panel Produce After 10 Years?
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Solar Panel Life: How Much Power Will Your Panel Produce After 10 Years?

Solar Panel Life: आज के समय में बिजली का बिल कम करने के लिए बड़ी संख्या में लोग घर की छत पर सोलर पैनल लगवा रहे हैं। सरकार की ओर से मिलने वाली सब्सिडी और सौर ऊर्जा को लेकर बढ़ती जागरूकता के कारण भी इसका चलन तेजी से बढ़ा है। सोलर पैनल लगवाने में एक बार अच्छा-खासा पैसा खर्च होता है, इसलिए लोगों के मन में यह सवाल जरूर रहता है कि आखिर यह पैनल कितने साल तक ठीक से काम करेगा और 10 साल बाद इसकी बिजली बनाने की क्षमता कितनी रह जाएगी।

अगर आप भी अपने घर पर सोलर पैनल लगवाने की तैयारी कर रहे हैं तो यह जानना जरूरी है कि समय के साथ पैनल की क्षमता जरूर कम होती है, लेकिन यह गिरावट अचानक नहीं आती। अच्छी गुणवत्ता वाले आधुनिक सोलर पैनल हर साल धीरे-धीरे अपनी थोड़ी क्षमता खोते हैं। सामान्य तौर पर करीब 0.5 प्रतिशत सालाना डिग्रेडेशन को एक सामान्य अनुमान माना जाता है। इसका मतलब यह है कि 10 साल बाद पैनल की क्षमता में मामूली कमी आती है, न कि वह अचानक बिजली बनाना बंद कर देता है।

10 साल बाद सोलर पैनल की क्षमता कितनी रह जाती है?

सोलर पैनल की क्षमता में कमी को समझने के लिए एक आसान उदाहरण लेते हैं। मान लीजिए आपने ऐसा पैनल लगाया जिसकी शुरुआती क्षमता 100 प्रतिशत है और उसमें हर साल करीब 0.5 प्रतिशत की गिरावट आती है। इस हिसाब से 10 साल में इसकी क्षमता लगभग 5 प्रतिशत तक कम हो सकती है। यानी 10 साल बाद पैनल करीब 95 प्रतिशत क्षमता के आसपास बिजली पैदा कर सकता है। इसी के साथ इसे हर सोलर पैनल पर लागू होने वाला तय आंकड़ा नहीं माना जा सकता। अलग-अलग कंपनियों और तकनीक वाले पैनल में डिग्रेडेशन रेट अलग हो सकता है। पैनल की गुणवत्ता, निर्माण तकनीक, मौसम और जिस जगह पर इसे लगाया गया है, उसका भी असर पड़ता है। इसलिए खरीदारी के समय कंपनी की ओर से बताई गई वार्षिक डिग्रेडेशन दर जरूर देखनी चाहिए।

समय के साथ सोलर पैनल की क्षमता क्यों घटती है?

सोलर पैनल सालों तक खुले आसमान के नीचे काम करता है। उसे तेज धूप, गर्मी, बारिश, नमी और तापमान में लगातार बदलाव का सामना करना पड़ता है। इन परिस्थितियों का असर धीरे-धीरे पैनल के सोलर सेल पर पड़ता है और इसकी बिजली उत्पादन क्षमता में कमी आने लगती है। इसी प्रक्रिया को सोलर पैनल का डिग्रेडेशन कहा जाता है।

हर बार बिजली का उत्पादन कम होने का मतलब यह नहीं होता कि पैनल पुराना हो गया है। कई बार धूल, मिट्टी और गंदगी जमा होने से भी पैनल पर पड़ने वाली धूप कम हो जाती है। ऐसे में अच्छी तरह सफाई करने के बाद उत्पादन में सुधार देखा जा सकता है। इसी तरह पैनल पर पड़ने वाली छाया भी बिजली उत्पादन को प्रभावित कर सकती है।

25 साल बाद भी काम करता रहता है सोलर पैनल

सोलर पैनल की सबसे बड़ी खासियत इसकी लंबी उम्र है। अच्छी गुणवत्ता वाले पैनल आमतौर पर 25 साल या उससे अधिक समय तक बिजली पैदा कर सकते हैं। अमेरिकी ऊर्जा विभाग के अनुसार, ज्यादातर सोलर सिस्टम 25 साल तक अपनी शुरुआती बिजली उत्पादन क्षमता का कम से कम 80 प्रतिशत बनाए रखने के लिए डिजाइन किए जाते हैं। इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि 25 साल पूरे होते ही पैनल खराब हो जाएगा। 25 साल के बाद भी पैनल बिजली बनाता रह सकता है, लेकिन शुरुआती वर्षों के मुकाबले उसका उत्पादन कम हो सकता है। आज कई सोलर पैनल 25 से 35 साल तक उपयोग में रहने की क्षमता रखते हैं। वास्तविक उम्र पैनल की गुणवत्ता, स्थापना और रखरखाव पर काफी हद तक निर्भर करती है।

सिर्फ पैनल पुराना होने से बिजली उत्पादन कम नहीं होता

एक्सपर्ट्स के मुताबिक अगर 10 साल पुराने सोलर सिस्टम से बिजली कम बन रही है तो इसका कारण केवल पैनल का डिग्रेडेशन नहीं हो सकता। पूरे सोलर सिस्टम में पैनल के अलावा इन्वर्टर, वायरिंग और दूसरे उपकरण भी होते हैं। इनमें खराबी आने पर भी बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इन्वर्टर की उम्र आमतौर पर सोलर पैनल से कम होती है। कई मामलों में करीब 10 से 15 साल के बाद इन्वर्टर को बदलने की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए लंबे समय तक सोलर सिस्टम चलाने के लिए केवल पैनल पर ध्यान देना काफी नहीं है, बल्कि पूरे सिस्टम की समय-समय पर जांच जरूरी है।

धूल और छाया से भी कम हो सकती है बिजली

भारत के कई हिस्सों में धूल और मिट्टी की समस्या काफी ज्यादा रहती है। अगर सोलर पैनल की सतह पर लंबे समय तक धूल जमा रहे तो सूरज की रोशनी सोलर सेल तक कम पहुंचती है और बिजली उत्पादन प्रभावित हो सकता है। इसी तरह पेड़, पानी की टंकी, आसपास की इमारत या कोई अन्य वस्तु पैनल पर छाया डालती है तो उत्पादन में कमी आ सकती है।

इसलिए पैनल को साफ रखना और यह देखना जरूरी है कि उस पर अनावश्यक छाया न पड़े। कितनी बार सफाई करनी है, यह आपके इलाके में धूल और मौसम की स्थिति पर निर्भर करता है। सफाई के दौरान निर्माता के निर्देशों का पालन करना बेहतर रहता है।

सोलर पैनल खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान

अगर आप नया सोलर पैनल खरीदने जा रहे हैं तो सिर्फ उसकी कीमत देखकर फैसला न करें। कंपनी की ओर से दी जाने वाली प्रदर्शन वारंटी, उत्पाद वारंटी और हर साल होने वाली क्षमता में कमी यानी डिग्रेडेशन रेट की जानकारी जरूर लें। कम डिग्रेडेशन रेट वाला अच्छा पैनल लंबे समय में बेहतर उत्पादन बनाए रखने में मदद कर सकता है। इसके अलावा पैनल की सही दिशा और कोण पर स्थापना भी महत्वपूर्ण है। गलत जगह या ऐसी छत पर पैनल लगाने से जहां लंबे समय तक छाया रहती है, अच्छी क्षमता वाला पैनल भी अपेक्षित बिजली नहीं बना पाएगा। अगर पैनल अच्छी गुणवत्ता का है और उसका रखरखाव ठीक से किया गया है तो 10 साल बाद भी वह अपनी शुरुआती क्षमता का बड़ा हिस्सा बनाए रख सकता है।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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