Bal Safed Hone Ke Karan: बाल अचानक सफेद क्यों होते हैं? क्या तनाव सच में बालों को सफेद कर सकता है?

Bal Safed Hone Ke Karan: बालों का सफेद होना सिर्फ उम्र बढ़ने की निशानी नहीं है। तनाव, मेलानोसाइट स्टेम सेल, जेनेटिक्स, Vitamin B12 और थायरॉइड जैसे कई कारक इसमें भूमिका निभा सकते हैं।

Neel Mani Lal
Published on: 12 Sept 2026 9:03 PM IST
Bal Safed Hone Ke Karan Stress Causes Gray Hair
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Bal Safed Hone Ke Karan Stress Causes Gray Hair 

Bal Safed Hone Ke Karan: एक मशहूर किस्सा है कि फ्रांसीसी क्रांति के दौरान, गिलोटिन पर चढ़ने से ठीक पहले रानी मैरी एंटोनेट के बाल रातोंरात पूरी तरह सफेद हो गए थे। सदियों से यह किस्सा तनाव और सफेद बालों के बीच के रिश्ते का सबसे मशहूर उदाहरण बना हुआ है। लेकिन क्या सच में तनाव इतनी तेजी से बालों का रंग छीन सकता है? और क्या "रातोंरात बाल सफेद होना" सिर्फ एक किस्सा है, या इसके पीछे असली विज्ञान भी है? हाल के सालों में हार्वर्ड के वैज्ञानिकों ने इस पुरानी पहेली को आखिरकार सुलझा दिया है।

बालों को रंग मिलता कहां से है?

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि बालों का रंग असल में आता कहां से है। हर बाल के जड़ (फॉलिकल) में कुछ खास कोशिकाएं होती हैं, जिन्हें "मेलानोसाइट स्टेम सेल" कहा जाता है। ये कोशिकाएं मेलानिन नाम का पिगमेंट बनाती हैं, जो बालों को उनका प्राकृतिक रंग देता है। जैसे-जैसे नए बाल उगते हैं, ये स्टेम सेल बार-बार सक्रिय होकर मेलानिन बनाती रहती हैं, ताकि हर नया बाल भी उसी रंग का उगे।

समस्या तब शुरू होती है जब यह मेलानोसाइट स्टेम सेल का भंडार खत्म होने लगता है। जब यह भंडार खाली हो जाता है, तो बाल का फॉलिकल अब मेलानिन बना ही नहीं पाता, और नया उगने वाला बाल बिना रंग के, यानी सफेद या धूसर निकलता है। उम्र बढ़ने के साथ स्वाभाविक रूप से यही होता है, धीरे-धीरे यह स्टेम सेल भंडार कम होता जाता है, जिससे ज्यादातर लोगों के तीसवें दशक से लेकर पचास की उम्र तक काफी मात्रा में सफेद बाल दिखने लगते हैं।

बालों में सफेदी आना उम्र बढ़ने का सबसे पहला, सबसे साफ दिखने वाला संकेत माना जाता है, क्योंकि त्वचा और शरीर के अंदरूनी अंगों के मुकाबले बाल ही सबसे आसानी से बाहर से नजर आने वाला टिश्यू है, जहां उम्र बढ़ने की जैविक प्रक्रिया सीधे आंखों के सामने दिखाई देती है।

क्या तनाव सच में इस प्रक्रिया को तेज कर सकता है?

अब आते हैं इस पूरे विषय की सबसे बड़ी और सबसे दिलचस्प वैज्ञानिक खोज पर। 2020 में हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की स्टेम सेल वैज्ञानिक या-चीह सू और उनकी टीम ने इस सवाल का पहली बार पक्का, वैज्ञानिक जवाब खोज निकाला, जो प्रतिष्ठित पत्रिका "नेचर" में प्रकाशित हुआ। उन्होंने चूहों पर किए गए प्रयोगों में पाया कि चाहे शारीरिक हो या मानसिक तनाव, वह मेलानोसाइट स्टेम सेल के तेजी से खत्म होने की प्रक्रिया को सीधे तौर पर तेज कर देता है।

सबसे दिलचस्प बात यह रही कि शोधकर्ताओं को शुरुआत में लगा था कि इसके पीछे या तो शरीर का इम्यून सिस्टम जिम्मेदार होगा, या फिर तनाव हार्मोन कॉर्टिसोल (जिसे चूहों में कॉर्टिकोस्टेरोन कहा जाता है)। लेकिन जब उन्होंने ऐसे चूहों पर प्रयोग किया जिनमें इम्यून सेल या एड्रिनल ग्रंथि ही मौजूद नहीं थी, तब भी उनके बाल सफेद होते रहे। इससे पता चला कि असली वजह कहीं और छिपी है।

यह खोज इसलिए बेहद अहम मानी जाती है क्योंकि इससे पहले वैज्ञानिकों का अनुमान था कि तनाव सिर्फ शरीर के इम्यून सिस्टम को कमजोर करके ही नुकसान पहुंचाता है, लेकिन इस अध्ययन ने यह साबित कर दिया कि तनाव एक बिल्कुल अलग, सीधे नर्वस सिस्टम से जुड़े रास्ते के जरिए भी शरीर को स्थायी नुकसान पहुंचा सकता है।

असली विलेन कौन निकला? फाइट या फ्लाइट नर्वस सिस्टम

शोधकर्ताओं ने आखिरकार पाया कि असली वजह है शरीर का "सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम", यानी वही तंत्र जो शरीर को खतरे के समय "फाइट या फ्लाइट" (लड़ो या भागो) की स्थिति में डालता है। जब कोई व्यक्ति तेज तनाव का सामना करता है, तो यह नर्वस सिस्टम बेहद ज्यादा सक्रिय हो जाता है और "नॉरएपिनेफ्रिन" नाम का एक न्यूरोट्रांसमीटर भारी मात्रा में छोड़ता है।

यही नॉरएपिनेफ्रिन असली नुकसान की जड़ है। यह मेलानोसाइट स्टेम सेल को अत्यधिक सक्रिय कर देता है, जिससे वे सभी एक साथ, बहुत तेजी से पिगमेंट बनाने वाली कोशिकाओं में बदल जाती हैं। यह सुनने में अच्छा लग सकता है, लेकिन असल में यह एक आपदा है, क्योंकि इससे स्टेम सेल का पूरा भंडार समय से बहुत पहले ही पूरी तरह खाली हो जाता है। और एक बार यह भंडार खत्म हो जाए, तो यह नुकसान स्थायी हो जाता है, फॉलिकल अब कभी दोबारा मेलानिन नहीं बना पाता।

खुद शोध की मुख्य लेखिका या-चीह सू ने इस नतीजे पर हैरानी जताते हुए कहा कि उन्हें पहले से अंदाजा था कि तनाव शरीर के लिए बुरा है, लेकिन जो नुकसान उन्होंने खोजा, वह उनकी कल्पना से भी कहीं ज्यादा गहरा था। यह दिखाता है कि तनाव सिर्फ एक अस्थायी असुविधा नहीं, बल्कि यह शरीर की मूल, दोबारा न बन सकने वाली कोशिकाओं को स्थायी रूप से खत्म कर सकता है।

तो क्या रातोंरात बाल सफेद होना सच में मुमकिन है?

मैरी एंटोनेट की कहानी और जॉन मैक्केन (वियतनाम युद्ध के दौरान युद्धबंदी रहे अमेरिकी सीनेटर, जिनके बाल यातना झेलने के बाद अपना रंग खो बैठे थे) जैसे किस्से सदियों से इस मान्यता को बढ़ावा देते रहे हैं। लेकिन वैज्ञानिक तौर पर, बालों का रातोंरात पूरी तरह सफेद होना, यानी पहले से उगे हुए, रंगीन बालों का अचानक रंग खो देना, जैविक तौर पर लगभग नामुमकिन माना जाता है। क्योंकि एक बार बाल उग चुका है, तो उसके अंदर पहले से मौजूद मेलानिन को अचानक मिटाया नहीं जा सकता।

इस पहेली की एक ज्यादा संभावित वैज्ञानिक व्याख्या यह है कि तेज तनाव के दौरान, पहले से मौजूद, कुदरती रूप से सफेद हो चुके बाल (जो अक्सर काले बालों के बीच छिपे रहते हैं) अचानक झड़ने लगते हैं, या फिर बचे हुए रंगीन बाल तेजी से झड़ जाते हैं, जिससे बाकी बचे बाल, जो पहले से सफेद थे, अचानक बहुत ज्यादा नजर आने लगते हैं। इसे चिकित्सा जगत में कभी-कभी "मैरी एंटोनेट सिंड्रोम" भी कहा जाता है, और कुछ मामलों में इसे एक अलग स्थिति, "एलोपेशिया एरिएटा" (जिसमें अचानक, तेजी से बाल झड़ते हैं) से भी जोड़कर देखा गया है।

यानी असली विज्ञान के मुताबिक, यह रंग बदलना नहीं, बल्कि रंगीन बालों का चुनिंदा तौर पर झड़ जाना है, जो देखने में बिल्कुल वैसा ही लगता है जैसे बाल अचानक सफेद हो गए हों। यह असल घटना उतनी ही नाटकीय और चौंकाने वाली है, लेकिन इसके पीछे की जैविक प्रक्रिया मैरी एंटोनेट के मशहूर किस्से से थोड़ी अलग निकलती है।

क्या यह प्रक्रिया उलटी जा सकती है?

यह एक बेहद अहम, व्यावहारिक सवाल है। हार्वर्ड के शोध के मुताबिक, एक बार मेलानोसाइट स्टेम सेल का भंडार पूरी तरह खत्म हो जाए, तो यह नुकसान स्थायी माना जाता है, क्योंकि वे कोशिकाएं दोबारा पैदा नहीं होतीं। यानी अगर तनाव की वजह से बाल सफेद हो चुके हैं, तो सिर्फ तनाव कम करने से वे बाल अपने आप वापस पुराने रंग में नहीं लौटेंगे।

हालांकि, यह शोध एक उम्मीद की किरण भी दिखाता है, वैज्ञानिकों का मानना है कि अगर तनाव को बेहद शुरुआती चरण में ही पहचान लिया जाए, इससे पहले कि स्टेम सेल का भंडार पूरी तरह खत्म हो जाए, तो भविष्य में शायद ऐसी दवाएं या तरीके विकसित किए जा सकें, जो इस नर्वस सिस्टम की अतिसक्रियता को रोक सकें, और आगे होने वाले नुकसान को कम कर सकें। यह अभी भी शोध का एक शुरुआती, विकसित हो रहा क्षेत्र है।

कुछ अलग-अलग, छोटे स्तर के अध्ययनों में यह देखा गया है कि जब तनाव का स्तर काफी कम हो जाए (जैसे लंबी छुट्टी के बाद), तो कुछ लोगों के कुछ बाल आंशिक रूप से अपने पुराने रंग में वापस आते हुए भी देखे गए हैं, हालांकि यह अभी भी एक दुर्लभ, अच्छी तरह न समझी गई घटना मानी जाती है, और यह हार्वर्ड के मुख्य निष्कर्ष (कि यह नुकसान स्थायी है) से पूरी तरह मेल नहीं खाती। यानी इस विषय पर अभी भी वैज्ञानिक शोध जारी है।

क्या सिर्फ तनाव ही बालों को सफेद करता है?

यहां एक जरूरी संतुलन बनाना जरूरी है, तनाव अकेला कारण नहीं है। बालों के सफेद होने में सबसे बड़ी भूमिका जेनेटिक्स (आनुवंशिकता) की होती है, यानी अगर परिवार में लोगों के बाल कम उम्र में सफेद होने की परंपरा रही है, तो यह सबसे प्रभावशाली कारक माना जाता है। इसके अलावा विटामिन बी-12 की कमी, थायरॉइड की गड़बड़ी, धूम्रपान, और कुछ ऑटोइम्यून स्थितियां भी समय से पहले बाल सफेद होने से जुड़ी पाई गई हैं।

यही वजह है कि अगर किसी को बहुत कम उम्र में (जैसे बीस की उम्र से पहले ही) बड़ी मात्रा में सफेद बाल दिखने लगें, तो सिर्फ इसे तनाव या जेनेटिक्स मानकर नजरअंदाज करने की बजाय, एक बार डॉक्टर से थायरॉइड और विटामिन बी-12 के स्तर की जांच करवा लेना बेहतर रहता है, क्योंकि कई बार यह किसी अंदरूनी, आसानी से ठीक हो सकने वाली कमी का भी संकेत हो सकता है।

तनाव और सफेद बालों के बीच का रिश्ता अब सिर्फ एक पुरानी लोक-कथा नहीं, बल्कि यह हार्वर्ड के वैज्ञानिकों द्वारा सिद्ध किया गया, ठोस जैविक तथ्य है। तेज तनाव सच में शरीर के नर्वस सिस्टम के जरिए बालों की जड़ में मौजूद रंग बनाने वाली स्टेम कोशिकाओं को स्थायी रूप से खत्म कर सकता है। हालांकि रातोंरात बाल पूरी तरह सफेद होना उतना नाटकीय नहीं जितना मैरी एंटोनेट की कहानी में बताया जाता है, बल्कि यह अक्सर पहले से मौजूद सफेद बालों के अचानक ज्यादा नजर आने या रंगीन बालों के तेजी से झड़ने का नतीजा होता है। यह पूरा विषय एक बार फिर यही साबित करता है कि हमारा शरीर और दिमाग कितनी गहराई से आपस में जुड़े हैं, और तनाव सिर्फ एक मानसिक एहसास नहीं, बल्कि यह हमारे शरीर की सबसे गहरी कोशिकाओं तक असली, स्थायी बदलाव ला सकता है।

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