TRENDING TAGS :
Water Expiry Date: पानी की ‘एक्सपायरी डेट’ नहीं, हमारी सोच की सीमा तय करती है उसकी कीमत
Water Expiry Date: क्या पानी की सचमुच कोई एक्सपायरी डेट होती है? जानिए पानी की उपयोगिता, जल संरक्षण और हमारी सोच से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें इस विशेष लेख में।
Water Expiry Date (Image Credit-Social Media)
Water Expiry Date: पानी को लेकर समाज में एक बेहद दिलचस्प लेकिन चिंताजनक मानसिकता विकसित हो गई है। हम अक्सर अपनी सुविधा, उपलब्धता और आदतों के आधार पर पानी की ‘एक्सपायरी डेट’ तय कर लेते हैं, जबकि वैज्ञानिक दृष्टि से पानी की उपयोगिता केवल समय से नहीं। बल्कि उसकी स्वच्छता, भंडारण की स्थिति और प्रदूषण के स्तर से तय होती है। यही कारण है कि कई बार हम सहज उपलब्ध पानी को ‘बासी’ कहकर बहा देते हैं, जबकि संकट की स्थिति में वही पानी अमृत के समान मूल्यवान लगने लगता है।
शहरों की मानसिकता और पानी की बर्बादी
शहरी जीवन में जहाँ घरों में प्रतिदिन नल का पानी उपलब्ध हो जाता है, वहाँ अक्सर पिछले दिन का बचा पानी बेकार मान लिया जाता है। कई घरों में रात भर रखा पानी सुबह फेंक दिया जाता है। यह केवल आदत नहीं बल्कि संसाधनों के प्रति हमारी बदलती संवेदनहीनता का उदाहरण भी है।
इसी तरह विवाह समारोहों, सामाजिक आयोजनों और बड़े कार्यक्रमों में अक्सर लोग नई पैक्ड पानी की बोतल लेते ही पुरानी आधी भरी बोतल छोड़ देते हैं। हजारों लीटर पानी केवल इस मानसिकता के कारण व्यर्थ चला जाता है कि ‘ताजा पानी’ केवल वही है जो अभी-अभी खोला गया हो।
जहाँ पानी दुर्लभ है, वहाँ हर बूंद अनमोल
इसके बिल्कुल विपरीत, देश के कई ग्रामीण और रेगिस्तानी क्षेत्रों में पानी कई-कई दिनों के अंतराल पर उपलब्ध होता है। वहाँ लोग उसी पानी को सावधानी से सहेजकर रखते हैं और पूरी जिम्मेदारी से उपयोग करते हैं। रेगिस्तान में यात्रा करने वाला व्यक्ति जानता है कि पानी की हर बूंद जीवन बचा सकती है। वहाँ पानी की ‘ताजगी’ नहीं, उसकी उपलब्धता और उपयोगिता महत्वपूर्ण होती है।
प्रकृति भी हमें यही सिखाती है। बांधों, तालाबों और झीलों में संग्रहित पानी महीनों तक उपयोग में लाया जाता है। सूखे की स्थिति में यही जल स्रोत वर्षों तक जीवन का आधार बनते हैं। भूमिगत जल, जिसे हम बोरवेल या कुओं से निकालते हैं, कई बार सैकड़ों वर्षों से धरती के भीतर सुरक्षित रहता है। वैज्ञानिक परीक्षणों के बाद वही पानी पीने योग्य माना जाता है।
क्या सचमुच पानी की कोई ‘एक्सपायरी डेट’ होती है?
विशेषज्ञों के अनुसार शुद्ध पानी की कोई निश्चित ‘एक्सपायरी डेट’ नहीं होती। यदि पानी स्वच्छ पात्र में सुरक्षित रखा जाए और उसमें बैक्टीरिया, रसायन या अन्य प्रदूषक न मिलें, तो वह लंबे समय तक उपयोग योग्य रह सकता है। दरअसल बोतलबंद पानी पर लिखी ‘एक्सपायरी डेट’ अक्सर पानी की नहीं।बल्कि प्लास्टिक पैकेजिंग और गुणवत्ता मानकों की होती है।
यानी पानी का मूल्य समय नहीं। बल्कि परिस्थितियाँ तय करती हैं। जब पानी सहज उपलब्ध होता है, तब हम उसे सामान्य वस्तु मान लेते हैं। लेकिन जैसे ही जल संकट सामने आता है, वही पानी जीवन का सबसे बड़ा आधार बन जाता है।
बदलनी होगी सोच
जल संकट आज केवल भविष्य की आशंका नहीं। बल्कि वर्तमान की वास्तविकता बनता जा रहा है। देश के कई शहरों और गांवों में भूजल स्तर तेजी से गिर रहा है। नदियाँ सिकुड़ रही हैं और स्वच्छ पेयजल की उपलब्धता लगातार चुनौती बनती जा रही है। ऐसे समय में पानी को लेकर हमारी सोच और व्यवहार दोनों बदलने की आवश्यकता है।
पानी बचाना केवल सरकारी योजनाओं या अभियानों की जिम्मेदारी नहीं है। यह हर व्यक्ति का नैतिक दायित्व है। यदि हम छोटी-छोटी आदतों में बदलाव लाएँ—जैसे आधी भरी बोतलें न फेंकना, जरूरत भर पानी लेना और जल स्रोतों को प्रदूषित न करना—तो आने वाली पीढ़ियों के लिए बहुत बड़ा योगदान दे सकते हैं।
जल संरक्षण ही भविष्य की सुरक्षा
यह संदेश केवल भावनात्मक अपील नहीं। बल्कि एक गंभीर सामाजिक चेतावनी भी है। जिस दिन स्वच्छ पानी की उपलब्धता गंभीर संकट में बदल जाएगी, उस दिन हमें समझ आएगा कि पानी की असली कीमत क्या थी। इसलिए आवश्यक है कि हम आज ही जिम्मेदारी और संयम के साथ जल का उपयोग करें।
‘जल ही जीवन है’ केवल एक नारा नहीं। बल्कि मानव सभ्यता का सबसे बड़ा सत्य है। यदि जल सुरक्षित रहेगा, तभी आने वाला कल सुरक्षित रहेगा।
(साभार— जल संरक्षण से संबंधित सार्वजनिक जागरूकता सामग्री एवं पर्यावरण विषयक सामान्य अध्ययन)


