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Airplane Food Taste: हवाई जहाज में खाना बेस्वाद क्यों लगता है? जानिए इसके पीछे का विज्ञान
Airplane Food Taste: हवाई जहाज में जमीन जैसा स्वादिष्ट खाना भी फीका क्यों लगता है? जानिए ऊंचाई, कम नमी, हवा का दबाव, इंजन का शोर और नाक की सूंघने की क्षमता का स्वाद पर असर।
Why Airplane Food Tastes Bland | Why Does Food Taste Different on a Plane | Newstrack Hindi News
Airplane Food Taste: हवाई जहाज़ में सफर करते समय आपने शायद महसूस किया होगा कि जमीन पर जो खाना स्वादिष्ट लगता है, वही आसमान में खाने पर कुछ फीका-सा महसूस होता है। टमाटर का सूप कम चटपटा लगता है, सब्जियों का स्वाद उतना उभरकर नहीं आता और कई बार मीठी चीजें भी सामान्य से कम मीठी लगती हैं। सवाल यह है कि क्या विमान में खाना बनाने का तरीका अलग होता है या फिर हजारों फीट की ऊंचाई पर हमारे शरीर की स्वाद पहचानने की क्षमता ही बदल जाती है?
इसका जवाब है कि ऊंचाई पर खाने का स्वाद महसूस करने का हमारा अनुभव बदल जाता है। इसमें सबसे बड़ी भूमिका नाक की होती है, लेकिन केबिन की कम नमी, हवा का दबाव और भोजन को दोबारा गर्म करने का तरीका भी योगदान देते हैं।
क्या स्वाद और फ्लेवर एक ही चीज हैं?
आमतौर पर हम खाने के स्वाद की बात करते समय मीठा, नमकीन, खट्टा और कड़वा जैसी अनुभूतियों को एक साथ मिला देते हैं। लेकिन विज्ञान की नजर से स्वाद (Taste) और फ्लेवर (Flavor) में अंतर है।
हमारी जीभ पर मौजूद स्वाद कलिकाएं (Taste Buds) मुख्य रूप से मीठा, नमकीन, खट्टा, कड़वा और उमामी यानी प्रोटीन से जुड़े स्वाद को पहचानती हैं। जब हम खाना खाते हैं, तो उसमें मौजूद रासायनिक पदार्थ लार में घुलकर स्वाद कलिकाओं के रिसेप्टर से संपर्क करते हैं। इससे दिमाग तक संकेत पहुंचते हैं और हमें स्वाद का अनुभव होता है।
लेकिन किसी खाने का पूरा फ्लेवर केवल जीभ से तय नहीं होता। इसमें नाक की सूंघने की क्षमता, खाने की बनावट, तापमान और यहां तक कि उसकी आवाज भी योगदान देती है। उदाहरण के लिए, जब आप इलायची वाली खीर खाते हैं, तो उसकी मिठास जीभ पहचानती है, जबकि इलायची की खास खुशबू नाक महसूस करती है। दोनों अनुभव मिलकर खीर का पूरा फ्लेवर बनाते हैं।
यही वजह है कि सर्दी-जुकाम में नाक बंद होने पर खाना अक्सर बेस्वाद लगने लगता है। जीभ मिठास और नमकीनपन पहचान सकती है, लेकिन खाने की खुशबू ठीक से न पहुंचने के कारण उसका पूरा फ्लेवर महसूस नहीं होता।
विमान में नाक की सूंघने की क्षमता क्यों प्रभावित होती है?
हवाई जहाज़ में खाना बेस्वाद लगने के पीछे एक प्रमुख कारण केबिन की बहुत कम नमी है। सामान्य तौर पर विमान जिस ऊंचाई पर उड़ते हैं, वहां बाहर की हवा बेहद ठंडी और शुष्क होती है। विमान के अंदर यात्रियों के लिए तापमान और दबाव को नियंत्रित किया जाता है, लेकिन केबिन की नमी फिर भी काफी कम रह सकती है।
कई विमानों में उड़ान के दौरान केबिन की सापेक्ष आर्द्रता (Relative Humidity) लगभग 10 से 20 प्रतिशत के आसपास हो सकती है। तुलना करें तो घर के अंदर यह अक्सर इससे कहीं अधिक होती है।
कम नमी के कारण नाक और मुंह की श्लेष्मा झिल्ली (Mucous Membrane) सूख सकती है। इससे नाक में मौजूद संवेदनशील सतहों पर असर पड़ता है और कुछ लोगों को खुशबू पहचानने में कठिनाई महसूस हो सकती है। जब खाने से निकलने वाले सुगंधित अणु नाक तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंचते, तो उसका फ्लेवर कम महसूस होता है। इसका असर खासतौर पर उन खाद्य पदार्थों पर दिखाई देता है जिनका स्वाद उनकी खुशबू पर काफी निर्भर करता है। कॉफी, मसालेदार करी, सूप और बेकरी उत्पाद इसके उदाहरण हैं।
कम हवा का दबाव स्वाद पहचानने की क्षमता को कैसे बदलता है?
विमान के केबिन में हवा का दबाव समुद्र तल के मुकाबले कम रखा जाता है। आमतौर पर लंबी दूरी के विमानों में केबिन का दबाव लगभग 6,000 से 8,000 फीट की ऊंचाई पर मिलने वाले वायुमंडलीय दबाव के बराबर हो सकता है, भले ही विमान उससे कहीं अधिक ऊंचाई पर उड़ रहा हो।
कम दबाव और कम नमी का संयुक्त प्रभाव हमारी सूंघने और स्वाद महसूस करने की क्षमता को प्रभावित कर सकता है। कुछ वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि विमान जैसी परिस्थितियों में मीठे और नमकीन स्वाद की संवेदनशीलता कम हो सकती है। यानी जिस मात्रा में नमक या चीनी जमीन पर पर्याप्त लगती है, वही मात्रा हवा में सफर करते समय कम प्रभावशाली महसूस हो सकती है।
क्या विमान में मीठा और नमकीन स्वाद सबसे ज्यादा प्रभावित होता है?
मीठे और नमकीन स्वाद की संवेदनशीलता विमान जैसी परिस्थितियों में कम हो सकती है। यही कारण है कि उड़ान के दौरान कुछ मीठे और नमकीन व्यंजन जमीन की तुलना में कम स्वादिष्ट लगते हैं। लेकिन सभी स्वादों पर इसका असर एक जैसा नहीं होता। खट्टे, कड़वे और उमामी स्वाद की अनुभूति अलग-अलग तरह से प्रभावित हो सकती है। इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि हवा में हर तरह का स्वाद समान मात्रा में कम हो जाता है।
उदाहरण के लिए, टमाटर, मशरूम और पके हुए मांस में मौजूद उमामी स्वाद कुछ व्यंजनों को अधिक स्वादिष्ट बनाए रखने में मदद कर सकता है। वहीं, किसी हल्की मिठाई या कम मसाले वाले व्यंजन का फ्लेवर कम उभर सकता है।
क्या विमान का शोर भी खाने के स्वाद को प्रभावित करता है?
हां, विमान के इंजन और हवा से पैदा होने वाला लगातार शोर भी खाने के अनुभव को प्रभावित कर सकता है। इसे विज्ञान में साउंडस्केप (Soundscape) और मल्टीसेंसरी परसेप्शन से जोड़कर समझा जाता है।
कुछ प्रयोगों में पाया गया है कि तेज आवाज के बीच खाने पर मीठे और नमकीन स्वाद की अनुभूति कम हो सकती है, जबकि उमामी स्वाद अपेक्षाकृत अधिक उभर सकता है। इसका एक कारण यह हो सकता है कि दिमाग एक ही समय में कई इंद्रियों से मिलने वाले संकेतों को मिलाकर भोजन का अनुभव तैयार करता है। विमान के केबिन में लगातार गूंजती आवाज खाने के स्वाद को सीधे बदलने के बजाय हमारी स्वाद संबंधी अनुभूति को प्रभावित कर सकती है। इसलिए शांत कमरे में खाया गया वही भोजन विमान के शोर के बीच कुछ अलग महसूस हो सकता है।
एयरलाइन का खाना जमीन के खाने से अलग क्यों तैयार किया जाता है?
विमान में खाने का स्वाद कम महसूस होने की जानकारी एयरलाइंस को भी है। इसलिए उड़ान के दौरान परोसे जाने वाले भोजन को इस तरह तैयार किया जाता है कि कम स्वाद संवेदनशीलता के बावजूद वह अच्छा लगे।
अक्सर भोजन में मसालों, जड़ी-बूटियों, सॉस और उमामी स्वाद देने वाली सामग्री का संतुलित इस्तेमाल किया जाता है। इसका उद्देश्य केवल नमक या मिर्च बढ़ाना नहीं, बल्कि खाने का पूरा फ्लेवर बेहतर बनाना होता है।
इसके अलावा, विमान में भोजन अधिकतर जमीन पर ही तैयार किया जाता है। फिर उसे ठंडा करके सुरक्षित तापमान पर रखा जाता है और उड़ान के दौरान विशेष ओवन में दोबारा गर्म किया जाता है। इस प्रक्रिया में भोजन की नमी, बनावट और खुशबू प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि विमान में परोसा गया खाना ताजा पकाए गए भोजन से थोड़ा अलग लग सकता है।
क्या टमाटर का जूस विमान में ज्यादा स्वादिष्ट लगता है?
कई यात्रियों को विमान में टमाटर का जूस जमीन की तुलना में अधिक स्वादिष्ट लगता है। इसके पीछे केवल एक कारण नहीं है। टमाटर में प्राकृतिक रूप से उमामी स्वाद देने वाले तत्व मौजूद होते हैं, जो विमान जैसी परिस्थितियों में भी अपेक्षाकृत अच्छी तरह महसूस हो सकते हैं। इसके अलावा, टमाटर के जूस में नमक और खट्टेपन का संतुलन होता है। विमान के केबिन में स्वाद की अनुभूति बदलने पर भी ये विशेषताएं उसे दिलचस्प बना सकती हैं।
कुछ शोधों में विमान जैसी परिस्थितियों में टमाटर के जूस और उमामी स्वाद के बेहतर अनुभव की ओर संकेत किया गया है। हालांकि, इसका अर्थ यह नहीं कि हर यात्री को विमान में टमाटर का जूस जमीन से ज्यादा स्वादिष्ट ही लगेगा। यह व्यक्ति की पसंद और स्वाद संवेदनशीलता पर भी निर्भर करता है।
क्या विमान में खाने का स्वाद बेहतर बनाने का कोई तरीका है?
अगर आपको उड़ान के दौरान खाना फीका लगता है, तो कुछ छोटी आदतें खाने के अनुभव को बेहतर बना सकती हैं। सबसे पहले पर्याप्त पानी पीना उपयोगी है, क्योंकि केबिन की शुष्क हवा के कारण मुंह और नाक सूख सकते हैं। इससे स्वाद और खुशबू महसूस करने में परेशानी बढ़ सकती है। इसके अलावा, बहुत ज्यादा भारी या अत्यधिक तला हुआ भोजन खाने के बजाय हल्का और संतुलित भोजन चुनना बेहतर हो सकता है। जिन लोगों को मसालेदार खाना पसंद है, वे अपनी पसंद के अनुसार उपलब्ध सॉस या मसालों का इस्तेमाल कर सकते हैं। हालांकि, ज्यादा नमक या मसाले डालना हर किसी के लिए सही उपाय नहीं है।
खाने को धीरे-धीरे चबाना और उसकी खुशबू पर ध्यान देना भी अनुभव को बेहतर बना सकता है। फिर भी यह समझना जरूरी है कि विमान के केबिन की परिस्थितियों को पूरी तरह बदलना यात्री के हाथ में नहीं होता।
इसलिए अगली बार जब विमान में आपकी पसंदीदा डिश कुछ फीकी लगे, तो जरूरी नहीं कि रसोई में कोई गलती हुई हो। संभव है कि हजारों फीट की ऊंचाई पर आपका शरीर उसी खाने को जमीन से थोड़ा अलग तरीके से महसूस कर रहा हो।


