Funny Bone Pain: कोहनी में चोट लगते ही करंट क्यों दौड़ता है? छोटी-सी नस में छिपा है बड़ा रहस्य

Funny Bone Pain Explained: कोहनी टकराते ही बिजली जैसा झटका क्यों लगता है? जानिए Funny Bone क्या है, Ulnar Nerve कैसे काम करती है और छोटी उंगली तक झनझनाहट क्यों पहुंचती है।

Yogesh Mishra
Published on: 5 Nov 2026 2:49 PM IST
Funny Bone Pain Explained in Hindi | Newstrack Special Hindi
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Funny Bone Pain Explained in Hindi | Newstrack Special Hindi 

Funny Bone Pain Explained: कभी मेज, दरवाजे या कुर्सी के किनारे से कोहनी टकराई हो, तो उसका दर्द याद होगा। शरीर के दूसरे हिस्सों में चोट लगने पर सामान्यतः दर्द होता है, लेकिन कोहनी के एक खास स्थान पर चोट लगते ही कुछ अलग अनुभव होता है। अचानक बिजली के झटके जैसी सनसनाहट उठती है। दर्द कोहनी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि बाँह से होता हुआ हाथ की छोटी उँगली और उसके बगल वाली उँगली तक दौड़ सकता है। कुछ क्षणों के लिए लगता है कि हाथ सुन्न हो गया है या उसके भीतर करंट दौड़ रहा है। अंग्रेज़ी में इस स्थान को 'फनी बोन' कहा जाता है। लेकिन सबसे आश्चर्यजनक बात यह है कि इस विचित्र अनुभूति का कारण वास्तव में कोई हड्डी नहीं, बल्कि एक नस है। इसका नाम 'अल्नर नर्व' है। यह नस कोहनी के भीतर एक ऐसे स्थान से गुजरती है जहाँ हड्डी और त्वचा के बीच इसकी सुरक्षा अपेक्षाकृत कम होती है। हल्की-सी टक्कर इस नस को दबा सकती है और मस्तिष्क तक असामान्य विद्युत संकेत पहुँच सकते हैं। कोहनी की एक और विशेषता है। यह केवल हाथ मोड़ने वाला जोड़ नहीं, बल्कि ऐसी जटिल व्यवस्था है जिससे हम हाथ सीधा कर सकते हैं और हथेली को ऊपर-नीचे घुमा सकते हैं। इसी जोड़ से गुजरने वाली नसें हाथ की पकड़, उँगलियों की संवेदना और सूक्ष्म गतिविधियों को नियंत्रित करती हैं। लेकिन क्या कोहनी पर लगने वाला झटका खतरनाक हो सकता है? क्या बार-बार ऐसी झनझनाहट नस के दबने की बीमारी का संकेत है? और हमारी छोटी उँगली का संबंध कोहनी से इतना गहरा क्यों है?

कोहनी में आखिर ऐसा क्या है जो इसे दूसरे जोड़ों से अलग बनाता है?

मनुष्य की कोहनी तीन हड्डियों के मिलने से बनती है। पहली है ह्यूमरस, जो कंधे से कोहनी तक आती है। दूसरी अल्ना और तीसरी रेडियस है। ये दोनों हड्डियाँ कोहनी से कलाई तक जाती हैं।अल्ना हाथ की छोटी उँगली वाली दिशा में होती है, जबकि रेडियस अंगूठे वाली दिशा में होती है।

तीनों हड्डियाँ मिलकर ऐसी व्यवस्था बनाती हैं जो दो तरह की गतिविधियों में योगदान देती है। पहली है हाथ को मोड़ना और सीधा करना। दूसरी है अग्रबाहु को घुमाना, जिससे हथेली ऊपर या नीचे हो सकती है।इसलिए कोहनी को केवल दरवाजे के कब्जे जैसा जोड़ समझना पर्याप्त नहीं है। इसमें कब्जे जैसी गति के साथ घूमने की व्यवस्था भी जुड़ी है।

हड्डियों के सिरों पर चिकनी उपास्थि अर्थात कार्टिलेज होती है। मजबूत लिगामेंट उन्हें सही स्थिति में रखते हैं। मांसपेशियाँ और टेंडन हाथ की गतिविधियों में सहायता करते हैं। इसके आसपास रक्तवाहिकाएँ और महत्त्वपूर्ण नसें गुजरती हैं।अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑर्थोपेडिक सर्जन्स के अनुसार कोहनी एक संयुक्त हिंज और पिवट व्यवस्था है, जो हाथ मोड़ने-सीधा करने तथा अग्रबाहु घुमाने में योगदान देती है।

कोहनी की नुकीली हड्डी क्या है?

जब हम कोहनी मोड़ते हैं, तो उसके पीछे एक नुकीला, कठोर भाग महसूस होता है। इसे 'ओलेक्रेनॉन' कहते हैं। यह अल्ना हड्डी का ऊपरी हिस्सा है।इस उभरी हुई हड्डी पर अपेक्षाकृत कम नरम ऊतक होते हैं। इसीलिए सीधे इसी स्थान पर चोट लगने से हड्डी और उसके आसपास की संरचनाओं में तेज दर्द हो सकता है।लेकिन बिजली के झटके जैसी प्रसिद्ध सनसनाहट सामान्यतः इस नुकीली हड्डी के ठीक सिरे पर चोट लगने से नहीं, बल्कि कोहनी के अंदरूनी हिस्से में स्थित अल्नर नस के दबने से होती है।

यह अंतर बहुत महत्त्वपूर्ण है। हर कोहनी की चोट 'फनी बोन' वाली चोट नहीं होती। कोहनी के पिछले हिस्से, बाहरी हिस्से और अंदरूनी हिस्से में चोट लगने पर अलग-अलग संरचनाएँ प्रभावित हो सकती हैं।

'फनी बोन' वास्तव में हड्डी नहीं, तो क्या है?

कोहनी के भीतर, शरीर की ओर वाले हिस्से में ह्यूमरस हड्डी का एक उभरा हुआ स्थान होता है। इसे 'मीडियल एपिकॉन्डाइल' कहते हैं।इसी उभार के पीछे से अल्नर नस गुजरती है। यहाँ वह त्वचा की सतह के अपेक्षाकृत निकट रहती है और उसके नीचे कठोर हड्डी होती है।यदि इस विशेष स्थान पर टक्कर लगती है, तो नस कुछ क्षणों के लिए हड्डी तथा बाहरी वस्तु के बीच दब सकती है।

यही दबाव असामान्य तंत्रिका संकेत पैदा करता है, जिन्हें हम बिजली के झटके, झनझनाहट या जलन के रूप में अनुभव करते हैं।क्लीवलैंड क्लिनिक के अनुसार जिसे आम तौर पर 'फनी बोन' कहा जाता है, वह वास्तव में अल्नर नस की प्रतिक्रिया है। इस नस पर अचानक दबाव पड़ने से बिजली जैसा झटका और सुन्नपन महसूस हो सकता है।

अल्नर नस कहाँ से आती है और कहाँ जाती है?

अल्नर नस शरीर के परिधीय तंत्रिका तंत्र का हिस्सा है। इसकी जड़ें गर्दन के निचले हिस्से और ऊपरी वक्षीय रीढ़ से संबंधित तंत्रिका नेटवर्क में होती हैं। वहाँ से तंत्रिकाओं का एक जाल बनता है, जिसे 'ब्रेकियल प्लेक्सस' कहा जाता है।इसी नेटवर्क से अल्नर नस बाँह की दिशा में जाती है। वह कोहनी के अंदरूनी हिस्से के पीछे से गुजरती है, फिर अग्रबाहु के भीतर से होती हुई हाथ तक पहुँचती है।

यह नस केवल संवेदना नहीं पहुँचाती, बल्कि कुछ मांसपेशियों की गतिविधियों को भी नियंत्रित करती है।हाथ की कई छोटी मांसपेशियाँ, जिनकी सहायता से हम उँगलियों की सूक्ष्म गतिविधियाँ करते हैं, अल्नर नस से संकेत प्राप्त करती हैं।इसलिए इस नस को केवल दर्द पहुँचाने वाली नस मानना गलत होगा। यह हाथ की संवेदना और उसकी कार्यक्षमता का महत्त्वपूर्ण हिस्सा है।

कोहनी में चोट लगने पर छोटी उँगली तक झनझनाहट क्यों दौड़ती है?

यह इस घटना की सबसे दिलचस्प विशेषता है।अल्नर नस हाथ की छोटी उँगली और अनामिका अर्थात रिंग फिंगर के छोटी उँगली वाले लगभग आधे हिस्से की संवेदना से संबंधित है। यह हथेली तथा हाथ के पिछले भाग के छोटी उँगली की ओर स्थित कुछ हिस्सों से भी संवेदना ले जाती है।

जब कोहनी पर नस को दबाव या चोट लगती है, तो उसमें पैदा होने वाले असामान्य संकेत मस्तिष्क तक पहुँचते हैं।मस्तिष्क इन संकेतों की अनुभूति उस क्षेत्र से संबंधित मान सकता है जहाँ से अल्नर नस सामान्यतः संवेदनाएँ लेकर आती है।

इसीलिए झटका कोहनी पर लगता है, लेकिन सनसनाहट छोटी उँगली और अनामिका तक महसूस हो सकती है।

यह कोई वास्तविक बिजली का प्रवाह नहीं है जो कोहनी से उँगली तक दौड़ रहा हो। यह तंत्रिका संकेतों और मस्तिष्क की संवेदना संबंधी प्रक्रिया का परिणाम है।

अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑर्थोपेडिक सर्जन्स के अनुसार अल्नर नस छोटी उँगली और अनामिका के आधे हिस्से की संवेदना तथा हाथ की अनेक मांसपेशियों के नियंत्रण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

सामान्य दर्द और कोहनी में उठने वाले बिजली के झटके में क्या अंतर है?

जब शरीर के किसी हिस्से पर चोट लगती है, तो वहाँ मौजूद दर्द-संवेदी तंत्रिका अंत सक्रिय हो सकते हैं। वे ऊतकों में संभावित नुकसान या हानिकारक दबाव की जानकारी तंत्रिका तंत्र तक पहुँचाते हैं।मस्तिष्क इन संकेतों को दर्द के अनुभव के रूप में समझता है।लेकिन अल्नर नस पर सीधे दबाव पड़ने की स्थिति कुछ अलग है। यहाँ चोट केवल त्वचा या मांसपेशी के दर्द-संवेदी हिस्सों को प्रभावित नहीं कर रही होती, बल्कि स्वयं एक प्रमुख परिधीय नस को यांत्रिक रूप से उत्तेजित कर सकती है।

तंत्रिका कोशिकाएँ अपनी झिल्ली पर विद्युत विभव में परिवर्तन के माध्यम से संदेश भेजती हैं। इन संदेशों को 'एक्शन पोटेंशियल' कहा जाता है।

जब नस पर असामान्य दबाव पड़ता है, तो उसकी कुछ तंत्रिका तंतुओं में अस्थायी असामान्य गतिविधि हो सकती है। इससे स्पर्श, झनझनाहट, जलन या बिजली के झटके जैसी अनुभूतियाँ उत्पन्न हो सकती हैं।इस तरह की असामान्य संवेदना को चिकित्सकीय भाषा में 'पैरेस्थीसिया' कहा जाता है।इसका अर्थ यह नहीं कि कोहनी में कोई प्राकृतिक बैटरी या विशेष विद्युत भंडार मौजूद है। शरीर की लगभग सभी नसें विद्युत-रासायनिक संकेतों से काम करती हैं। कोहनी की विशेषता यह है कि एक प्रमुख नस यहाँ आसानी से बाहरी दबाव के संपर्क में आ सकती है।

क्या नस को छूते ही मस्तिष्क गलत संदेश प्राप्त करता है?

इसे मस्तिष्क का पूरी तरह गलत संदेश समझने के बजाय असामान्य स्थान पर तंत्रिका की उत्तेजना कहना अधिक सही होगा।सामान्य परिस्थितियों में यदि छोटी उँगली की त्वचा को छुआ जाए, तो वहाँ मौजूद संवेदना ग्रहण करने वाली संरचनाएँ अल्नर नस के माध्यम से मस्तिष्क तक सूचना पहुँचाती हैं।लेकिन यदि उसी सूचना मार्ग को कोहनी पर अचानक उत्तेजित कर दिया जाए, तो व्यक्ति को छोटी उँगली में भी झनझनाहट महसूस हो सकती है।

अर्थात संकेतों की शुरुआत उस जगह नहीं हुई जहाँ संवेदना महसूस हो रही है।

ऐसी प्रक्रिया शरीर की दूसरी नसों में भी दिखाई दे सकती है। उदाहरण के लिए कलाई पर किसी विशेष नस के दबने से हाथ की कुछ उँगलियों में झनझनाहट हो सकती है।

यही सिद्धांत नसों पर दबाव से उत्पन्न अनेक रोगों को समझने में सहायता करता है।

क्या कोहनी की नस पर कोई सुरक्षा परत नहीं होती?

अल्नर नस पूरी तरह असुरक्षित नहीं होती। शरीर में नसों के चारों ओर संयोजी ऊतक की परतें होती हैं। उनके आसपास की मांसपेशियाँ और दूसरी संरचनाएँ भी विभिन्न स्थानों पर सुरक्षा देती हैं।लेकिन कोहनी के अंदरूनी हिस्से में, मीडियल एपिकॉन्डाइल के पीछे, नस अपेक्षाकृत सतह के निकट रहती है।यहाँ कठोर हड्डी उसके ठीक पास होती है और ऊपर नरम ऊतकों की परत सीमित होती है।

इसका अर्थ है कि बाहरी टक्कर के समय नस के दबने की संभावना अधिक हो सकती है।बाँह के दूसरे हिस्सों में यही नस मांसपेशियों और अपेक्षाकृत गहरे ऊतकों के बीच से गुजरती है, जहाँ सामान्य हल्की टक्कर से सीधे प्रभावित होने की संभावना कम हो सकती है।यही शारीरिक अंतर कोहनी की उस प्रसिद्ध सनसनाहट का प्रमुख कारण है।

कोहनी मोड़ने पर अल्नर नस के साथ क्या होता है?

कोहनी मोड़ना साधारण गतिविधि लगती है, लेकिन उसके दौरान जोड़ के आसपास की अनेक संरचनाएँ अपनी स्थिति बदलती हैं।अल्नर नस कोहनी में एक संकरे रास्ते से गुजरती है जिसे 'क्यूबिटल टनल' कहा जाता है।जब हम कोहनी मोड़ते हैं, तो नस को मीडियल एपिकॉन्डाइल के आसपास के घुमाव के अनुरूप खिंचना पड़ सकता है। इस स्थिति में उसके आसपास तनाव और दबाव बढ़ सकता है।

सामान्य व्यक्ति में शरीर इस गतिविधि को अच्छी तरह सहन कर लेता है। लेकिन लंबे समय तक कोहनी मोड़कर रखने या लगातार उस पर दबाव डालने से कुछ लोगों में नस में जलन और झनझनाहट पैदा हो सकती है।इसीलिए कुछ व्यक्तियों को रात में सोते समय, जब कोहनी लंबे समय तक मुड़ी रहती है, छोटी उँगली और अनामिका में सुन्नपन महसूस होता है।

अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑर्थोपेडिक सर्जन्स के अनुसार लगातार कोहनी मोड़कर रखने से अल्नर नस में तनाव और उसके रक्त प्रवाह पर प्रभाव पड़ सकता है, जिससे दबाव संबंधी लक्षण उत्पन्न या अधिक गंभीर हो सकते हैं।

मोबाइल फोन पर देर तक बात करने से छोटी उँगली सुन्न क्यों हो सकती है?

कुछ लोगों को लंबे समय तक मोबाइल फोन कान के पास रखने पर छोटी उँगली में झनझनाहट महसूस हो सकती है।इसका कारण हमेशा मोबाइल फोन का विकिरण नहीं होता। कई मामलों में अधिक साधारण शारीरिक कारण हो सकता है—कोहनी का लंबे समय तक मुड़ा रहना।

फोन कान के पास रखते हुए कोहनी काफी देर तक मुड़ी रह सकती है। इससे कुछ व्यक्तियों में क्यूबिटल टनल के भीतर अल्नर नस पर तनाव बढ़ सकता है।इसी तरह मेज पर कोहनी टिकाकर लंबे समय तक काम करना, कार की खिड़की पर कोहनी रखना या सोते समय हाथ को अत्यधिक मोड़कर रखना भी नस को परेशान कर सकता है।

क्लीवलैंड क्लिनिक ने इस प्रकार की समस्या के संदर्भ में बताया है कि लगातार कोहनी मुड़ी रहने से अल्नर नस पर दबाव बढ़ सकता है और छोटी उँगली तथा अनामिका में सुन्नपन या झनझनाहट हो सकती है। लेकिन प्रत्येक बार उँगली सुन्न होने का कारण कोहनी ही हो, यह आवश्यक नहीं। गर्दन, कलाई और दूसरी तंत्रिकाओं से संबंधित समस्याएँ भी समान लक्षण पैदा कर सकती हैं।

'क्यूबिटल टनल सिंड्रोम' क्या है?

कोहनी की सामान्य चोट से उठने वाली क्षणिक सनसनाहट और क्यूबिटल टनल सिंड्रोम में अंतर है।सामान्य स्थिति में कोहनी पर अचानक टक्कर लगती है। कुछ क्षण झटका महसूस होता है और फिर संवेदना सामान्य हो जाती है।

क्यूबिटल टनल सिंड्रोम में अल्नर नस पर लगातार या बार-बार दबाव और जलन होने लगती है।

इस स्थिति में छोटी उँगली तथा अनामिका में बार-बार सुन्नपन, झनझनाहट या जलन महसूस हो सकती है। कुछ व्यक्तियों में हाथ की पकड़ कमजोर पड़ सकती है।

यदि समस्या लंबे समय तक गंभीर बनी रहे, तो हाथ की कुछ छोटी मांसपेशियाँ भी प्रभावित हो सकती हैं। इससे उँगलियों को फैलाने, छोटी वस्तुएँ पकड़ने और सूक्ष्म गतिविधियाँ करने में कठिनाई हो सकती है।

यह समस्या केवल बुजुर्गों को नहीं होती। लंबे समय तक कोहनी मुड़ी रखने वाले या बार-बार दबाव पड़ने वाली गतिविधियाँ करने वाले लोगों में भी इसके लक्षण हो सकते हैं।लेकिन यह समझना आवश्यक है कि एक बार कोहनी टकराने पर दो-चार सेकंड झनझनाहट होने से क्यूबिटल टनल सिंड्रोम का निदान नहीं किया जा सकता।

क्या कोहनी की चोट से हाथ की ताकत भी प्रभावित हो सकती है?

हाँ, यदि चोट के कारण अल्नर नस को अधिक गंभीर नुकसान पहुँचे।यह नस हाथ की कई छोटी मांसपेशियों को नियंत्रित करती है। इनकी सहायता से हम उँगलियाँ फैलाते हैं, उन्हें एक-दूसरे के पास लाते हैं और कुछ प्रकार की पकड़ बनाते हैं।

इन मांसपेशियों में कमजोरी आने पर लिखना, शर्ट के बटन लगाना, चाबी घुमाना या छोटी वस्तु पकड़ना कठिन हो सकता है।गंभीर और लंबे समय तक नस दबने की स्थिति में हाथ की मांसपेशियों का आकार भी कम हो सकता है।

इसीलिए लगातार छोटी उँगली का सुन्न रहना केवल असुविधा नहीं है। यदि उसके साथ पकड़ कमजोर हो रही है, तो यह चिकित्सकीय मूल्यांकन का महत्त्वपूर्ण संकेत है।क्लीवलैंड क्लिनिक ने अल्नर नस से संबंधित समस्याओं में हाथ की कमजोरी, पकड़ घटने और उँगलियों की गतिविधि में कठिनाई को विशेष लक्षणों के रूप में पहचाना है।

क्या कोहनी के भीतर दूसरी नसें भी होती हैं?

हाँ। कोहनी से होकर केवल अल्नर नस नहीं गुजरती।हाथ को संचालित करने वाली तीन प्रमुख परिधीय नसें हैं—अल्नर, मीडियन और रेडियल।मीडियन नस हाथ के कई हिस्सों की संवेदना और मांसपेशियों की गतिविधियों से संबंधित है। यह कलाई में 'कार्पल टनल सिंड्रोम' जैसी समस्या के कारण विशेष रूप से चर्चित है।

रेडियल नस हाथ और कलाई को सीधा करने वाली अनेक मांसपेशियों तथा त्वचा की कुछ संवेदनाओं से संबंधित है।इसलिए हाथ या उँगलियों में सुन्नपन होने पर किस नस की समस्या है, यह जानने में प्रभावित उँगलियों का वितरण उपयोगी हो सकता है।

छोटी उँगली और अनामिका के एक हिस्से का सुन्न होना अल्नर नस की समस्या की ओर संकेत कर सकता है। लेकिन अंगूठे, तर्जनी और मध्यमा में झनझनाहट होने पर चिकित्सक दूसरी नसों से संबंधित कारण भी देखते हैं।यह वितरण प्रारंभिक संकेत देता है, अंतिम निदान नहीं। गर्दन की तंत्रिका जड़ों पर दबाव तथा दूसरी चिकित्सकीय स्थितियाँ भी हाथ में समान लक्षण पैदा कर सकती हैं।

क्या कोहनी केवल हाथ मोड़ने का काम करती है?

नहीं। कोहनी का योगदान हमारी लगभग सभी दैनिक गतिविधियों में है।किसी गिलास को मुँह तक लाना, खाना खाना, कपड़े पहनना, लिखना, किसी व्यक्ति से हाथ मिलाना और किसी वस्तु को उठाना—इन सभी में कोहनी की भूमिका होती है।

हाथ का मुड़ना और सीधा होना मुख्यतः ह्यूमरस तथा अल्ना की संयुक्त संरचना से संबंधित है। दूसरी ओर रेडियस और अल्ना के बीच की गतिविधि की सहायता से अग्रबाहु घूमता है और हथेली की दिशा बदल सकती है।

उदाहरण के लिए जब हम हथेली ऊपर करके कोई वस्तु लेते हैं और फिर उसे नीचे की ओर पलटते हैं, तो यह केवल कलाई को घुमाने की क्रिया नहीं है। इसमें अग्रबाहु की हड्डियों की आपसी गति महत्त्वपूर्ण होती है।यह व्यवस्था मनुष्य को औजार पकड़ने, भोजन करने और अत्यंत सूक्ष्म हाथ संबंधी गतिविधियाँ करने में सहायता देती है।

कोहनी की हड्डियों के विशिष्ट आकार और मजबूत लिगामेंट उसे अपेक्षाकृत स्थिर बनाते हैं। अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑर्थोपेडिक सर्जन्स के अनुसार अन्य कई जोड़ों की तुलना में कोहनी के जोड़ में अस्थिक्षयजन्य गठिया अपेक्षाकृत कम देखा जाता है, जिसका एक कारण उसकी सुसंगत जोड़-सतह और स्थिरता है।

क्या कोहनी का अचानक मुड़ना या चोट लगना गंभीर भी हो सकता है?

हाँ। सामान्य हल्की टक्कर और गंभीर दुर्घटना में अंतर करना आवश्यक है।

यदि किसी व्यक्ति की कोहनी मेज से हल्के से टकराई और क्षणिक झनझनाहट के बाद सब सामान्य हो गया, तो सामान्यतः इसका अर्थ गंभीर नस क्षति नहीं होता।

लेकिन ऊँचाई से गिरने, खेल में जोरदार टक्कर लगने या दुर्घटना के बाद कोहनी की हड्डी टूट सकती है। जोड़ अपनी सामान्य स्थिति से खिसक सकता है या आसपास की नसों तथा रक्तवाहिकाओं को चोट पहुँच सकती है।

ऐसी स्थिति में तेज दर्द, सूजन, हाथ की असामान्य बनावट और कोहनी हिलाने में कठिनाई हो सकती है।कोहनी की हड्डी टूटने या जोड़ खिसकने के मामलों में तुरंत चिकित्सकीय मूल्यांकन आवश्यक हो सकता है।अमेरिकन एकेडमी ऑफ ऑर्थोपेडिक सर्जन्स के अनुसार कोहनी की गंभीर चोटें उसकी गति को प्रभावित कर सकती हैं और कुछ परिस्थितियों में हड्डियों, नसों तथा रक्तवाहिकाओं के नुकसान का जोखिम होता है।

सामान्य टक्कर लगने पर क्या करना चाहिए?

यदि कोहनी पर हल्की चोट लगने के बाद केवल कुछ क्षण की सनसनाहट हुई है और हाथ सामान्य रूप से चल रहा है, तो सामान्यतः थोड़ी देर आराम करना पर्याप्त हो सकता है।चोट वाले स्थान पर लगातार दबाव नहीं डालना चाहिए। यदि हल्की सूजन या दर्द हो, तो कपड़े में लपेटकर ठंडी सिकाई सीमित समय के लिए की जा सकती है। बर्फ सीधे त्वचा पर नहीं रखनी चाहिए।

कोहनी को बार-बार जानबूझकर उस संवेदनशील स्थान पर दबाकर झटका पैदा करना उचित नहीं है। नस को बार-बार परेशान करने से जलन या दबाव संबंधी समस्या बढ़ सकती है।यदि झनझनाहट बार-बार होती है, तो लंबे समय तक कोहनी मोड़कर रखना और कठोर सतह पर उसे टिकाए रखना कम करना उपयोगी हो सकता है।

क्यूबिटल टनल सिंड्रोम के कुछ मामलों में गतिविधियों में बदलाव, रात में कोहनी को अत्यधिक मुड़ने से रोकने वाले उपाय और चिकित्सकीय सलाह के अनुसार स्प्लिंट उपयोगी हो सकते हैं। गंभीर मामलों में नस पर दबाव कम करने के लिए सर्जरी की आवश्यकता भी पड़ सकती है।

कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?

सामान्य क्षणिक सनसनाहट प्रायः अपने आप ठीक हो जाती है। लेकिन कुछ लक्षणों को सामान्य 'फनी बोन' वाली चोट मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

यदि छोटी उँगली और अनामिका में सुन्नपन लगातार बना रहे, बार-बार लौटे, हाथ की पकड़ कमजोर होने लगे या उँगलियों की सूक्ष्म गतिविधियाँ प्रभावित हों, तो डॉक्टर से मूल्यांकन कराना चाहिए।चोट के बाद बहुत तेज दर्द, स्पष्ट विकृति, अत्यधिक सूजन या हाथ को सामान्य रूप से हिलाने में असमर्थता होने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।

यदि चोट के बाद हाथ असामान्य रूप से ठंडा या पीला पड़ जाए, संवेदना अचानक बहुत कम हो जाए अथवा उँगलियाँ चलाना कठिन हो, तो यह आपातकालीन मूल्यांकन की स्थिति हो सकती है।लगातार तंत्रिका संबंधी लक्षणों में चिकित्सक शारीरिक परीक्षण के अतिरिक्त आवश्यकता अनुसार नर्व कंडक्शन स्टडी या इलेक्ट्रोमायोग्राफी जैसी जाँचों की सलाह दे सकते हैं।लेकिन केवल एक बार कोहनी टकराने पर कुछ सेकंड झनझनाहट होने के लिए ऐसी जाँचें सामान्यतः आवश्यक नहीं होतीं।

कोहनी की चोट का अनोखा एहसास शरीर की तंत्रिका प्रणाली का कमाल

कोहनी पर चोट लगते ही बिजली जैसी सनसनाहट उठना कोई रहस्यमय घटना नहीं है। यह शरीर की एक विशिष्ट शारीरिक संरचना का परिणाम है।कोहनी के अंदरूनी हिस्से में अल्नर नस त्वचा के अपेक्षाकृत निकट से गुजरती है। उसके ठीक पास हड्डी का कठोर उभार होता है। यदि इस स्थान पर चोट लगती है, तो नस अचानक दब सकती है और असामान्य विद्युत-रासायनिक संकेत उत्पन्न कर सकती है।

मस्तिष्क इन संकेतों को झनझनाहट, जलन या बिजली जैसे झटके के रूप में अनुभव करता है। चूँकि यही नस छोटी उँगली और अनामिका के एक हिस्से की संवेदना से जुड़ी है, इसलिए चोट कोहनी पर लगने के बावजूद प्रभाव उँगलियों तक महसूस हो सकता है।कोहनी की दूसरी विशेषता उसकी जटिल यांत्रिक संरचना है। तीन हड्डियाँ मिलकर हाथ को मोड़ने, सीधा करने और अग्रबाहु घुमाने में योगदान देती हैं। उसके आसपास की नसें और मांसपेशियाँ हाथ की सूक्ष्म गतिविधियों को संभव बनाती हैं।

सामान्य हल्की टक्कर के बाद कुछ क्षण का झटका अधिकतर गंभीर समस्या का संकेत नहीं होता। लेकिन लगातार सुन्नपन, झनझनाहट या पकड़ कमजोर होना अल्नर नस पर दबाव से संबंधित बीमारी का संकेत हो सकता है।

इस तरह कोहनी हमें शरीर का एक बड़ा वैज्ञानिक तथ्य समझाती है—दर्द का अनुभव हमेशा उसी स्थान तक सीमित नहीं होता जहाँ चोट लगी है। हमारी नसें शरीर के विभिन्न हिस्सों से मस्तिष्क तक सूचना पहुँचाने वाले मार्ग हैं। यदि उस मार्ग के बीच में कहीं असामान्य दबाव पड़े, तो मस्तिष्क को शरीर के दूर स्थित हिस्से में भी झनझनाहट या दर्द महसूस हो सकता है।

यही कारण है कि कोहनी की छोटी-सी टक्कर का एहसास इतनी बड़ी और विचित्र अनुभूति पैदा कर देता है। इसे 'फनी बोन' कहा जाता है, लेकिन इसके पीछे छिपा विज्ञान हमारी तंत्रिका प्रणाली की अद्भुत संरचना को उजागर करता है।

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Yogesh Mishra

Founder & CEO Mail ID - mishrayogesh5@gmail.commishrayogesh5@gmail.com

Journalism for Yogesh Mishra is not a profession but a mission. In his career, spanning over 26 years, he has served just not as journalist but an educationist and literary as well. Looking at journalism as an instrument of change, he has also highlighted corruption and problems faced in various sectors like education, health, water, sanitation and agriculture. The exposes to his credit which deserve mention include largest tax evasion in the country by Hasan Ali and the fraud committed by 25 Indians, while he was working for the Outlook magazine as the UP Bureau Head. The amount involved was whopping Rs 18,000 crores. He was the first to report the PMO’s involvement in the ‘2G Spectrum Scam’, during the UPA regime. Another commendable work by him is exposing the Commonwealth Games Scam along with the video footage of a meeting before the beginning of the tournament. The issue of banning the video is sub judice. His news item, “Uttar Pradesh ke sau gaon bhi Nirmal Gram Pusaraskar ke layak nahi” exposed how the state government wrongly claimed prizes for 1,269 villages. It led to the cancellation of the prizes. Even UNICEF research testified and led to discontinuation of the NIRMAL GRAM AWARDS. He is, presently Member of Fee Review committee set up by the government of Uttar Pradesh to fight menace of arbitrary fee structure in private schools across the state. Many of his suggestions concerning electoral reforms have been adopted and implemented by the Election Commission of India. He was a member of the ‘Navoday Vidyalaya Samiti’, review committee constituted by Govt. of India for the implementation of Sarv Siksha Abhiyaan in UP. Besides writing in national and international newspapers and magazines, he has taken up teaching assignments and served as a visiting faculty in about a dozen universities. Author of ten books, he has also received prestigious Madhu Limaye and Yash Bharti awards. His new goal is to set up a new media house. A beginning has been already made as he has launched a multi-lingual news portal and a weekly magazine, Apna Bharat.

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