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Strange Body Signals: आंख फड़कने से पैर में ऐंठन तक, शरीर के ये अजीब संकेत क्यों आते हैं?
Strange Body Signals: आंख की पलक फड़कने को आम तौर पर “आई ट्विच” कहा जाता है। इसमें पलक की छोटी-सी मांसपेशी अपने आप बार-बार सिकुड़ने लगती है।
Strange Body Signals
Strange Body Signals: कभी अचानक आंख की पलक फड़कने लगती है। कुछ सेकंड या मिनट तक आंख के आसपास की मांसपेशी अपने आप हिलती रहती है और हम सोचने लगते हैं कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है। कभी रात में सोते-सोते पैर की मांसपेशी इतनी जोर से ऐंठती है कि नींद खुल जाती है। कभी अचानक शरीर के किसी हिस्से में झनझनाहट होने लगती है, कभी हाथ-पैर सुन्न पड़ जाता है और कभी बिना किसी साफ वजह के मांसपेशी फड़कने लगती है।
इनमें से ज्यादातर अनुभव डरावने लग सकते हैं, लेकिन हर अजीब संकेत किसी बीमारी का इशारा नहीं होता। शरीर में हर समय हजारों छोटी-बड़ी प्रक्रियाएं चल रही होती हैं। नसें मांसपेशियों को संकेत भेजती हैं, मांसपेशियां सिकुड़ती और ढीली होती हैं, खून का प्रवाह बदलता है और शरीर पानी व अलग-अलग खनिजों का संतुलन बनाए रखता है। कभी-कभी इसी व्यवस्था में थोड़ी देर के लिए गड़बड़ी होती है और हमें कोई अजीब एहसास महसूस होता है।
आंख की पलक बार-बार क्यों फड़कती है?
आंख की पलक फड़कने को आम तौर पर “आई ट्विच” कहा जाता है। इसमें पलक की छोटी-सी मांसपेशी अपने आप बार-बार सिकुड़ने लगती है। ज्यादातर मामलों में यह कुछ समय बाद अपने आप ठीक हो जाता है। इसके पीछे कई सामान्य कारण हो सकते हैं। नींद पूरी न होना, तनाव, ज्यादा थकान, लंबे समय तक स्क्रीन देखने की वजह से आंखों पर जोर पड़ना और बहुत ज्यादा कैफीन लेना इसके आम कारणों में शामिल हैं। आंखों में सूखापन या जलन भी कभी-कभी पलक फड़कने की वजह बन सकती है।
इसका मतलब यह नहीं है कि शरीर में कैल्शियम या किसी खास विटामिन की कमी है। यह बात अक्सर कही जाती है, लेकिन हर बार पलक फड़कने को किसी पोषक तत्व की कमी से जोड़ना सही नहीं है। अगर पलक कभी-कभार फड़के और कुछ समय बाद ठीक हो जाए तो आमतौर पर चिंता की बात नहीं होती। लेकिन अगर यह लंबे समय तक बना रहे, चेहरे के दूसरे हिस्सों में भी अनियंत्रित हरकत होने लगे या आंख से जुड़ी दूसरी परेशानी भी हो तो डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।
पैर में अचानक ऐंठन क्यों पड़ती है?
पैर में ऐंठन यानी मांसपेशी का अचानक जोर से सिकुड़ जाना सबसे आम परेशानियों में से एक है। यह खासकर रात में सोते समय पिंडली की मांसपेशियों में हो सकती है। ऐंठन के दौरान मांसपेशी अचानक इतनी जोर से सिकुड़ती है कि तेज दर्द होता है और कुछ सेकंड से लेकर कई मिनट तक पैर को सीधा करना मुश्किल लग सकता है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। ज्यादा व्यायाम या लंबे समय तक खड़े रहना, शरीर में पानी की कमी, बहुत ज्यादा पसीना आना और कुछ दवाओं का असर इसकी वजह बन सकता है। उम्र बढ़ने के साथ भी रात में पैर में ऐंठन की समस्या कुछ लोगों में ज्यादा हो सकती है। लोग अक्सर इसे सिर्फ पोटैशियम, कैल्शियम या मैग्नीशियम की कमी से जोड़ते हैं, लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता। मांसपेशियों, नसों, पानी और शरीर के इलेक्ट्रोलाइट संतुलन के बीच कई तरह की प्रक्रियाएं काम करती हैं। ऐंठन पड़ने पर मांसपेशी को धीरे-धीरे स्ट्रेच करने और हल्की मालिश से राहत मिल सकती है। अगर ऐंठन बार-बार हो रही है या बहुत ज्यादा दर्द के साथ होती है तो इसके पीछे की वजह जानना जरूरी है।
हाथ या पैर में झनझनाहट क्यों होती है?
कभी लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठने या सोने के बाद हाथ या पैर में “चींटियां चलने” जैसा एहसास होने लगता है। इसे झनझनाहट या पिन-एंड-नीडल्स जैसा अनुभव कहा जाता है। अक्सर इसकी वजह किसी नस पर कुछ समय के लिए दबाव पड़ना होती है।
जब आप लंबे समय तक पैर मोड़कर बैठते हैं या हाथ के नीचे सिर रखकर सो जाते हैं तो नस और आसपास के ऊतकों पर दबाव पड़ सकता है। इससे उस हिस्से तक जाने वाले तंत्रिका संकेत कुछ समय के लिए बदल जाते हैं। जैसे ही दबाव हटता है, नस सामान्य तरीके से काम करने लगती है और झनझनाहट महसूस हो सकती है। इसी वजह से कुछ सेकंड या मिनट बाद हाथ-पैर सामान्य हो जाता है। लेकिन अगर बिना किसी स्पष्ट वजह के बार-बार झनझनाहट हो, लंबे समय तक बनी रहे या शरीर के एक ही हिस्से में लगातार होती रहे तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। मधुमेह, नसों से जुड़ी समस्या या दूसरी स्थितियां भी इसका कारण हो सकती हैं।
कभी मांसपेशी अपने आप क्यों फड़कती है?
आंख की पलक के अलावा शरीर के दूसरे हिस्सों में भी कभी-कभी मांसपेशी अपने आप फड़क सकती है। इसे मांसपेशी फड़कना या फासिकुलेशन कहा जाता है। कई बार यह तनाव, थकान, नींद की कमी, ज्यादा कैफीन या बहुत ज्यादा व्यायाम के बाद हो सकता है। कुछ लोगों में बिना किसी गंभीर वजह के भी कभी-कभार मांसपेशी फड़क सकती है। मांसपेशियों को हिलाने का आदेश नसों से मिलता है। जब नस और मांसपेशी के बीच संकेतों में थोड़ी अनियमितता होती है तो हमें अचानक हल्की-सी फड़फड़ाहट दिखाई या महसूस हो सकती है। अगर यह कभी-कभार हो रहा है और अपने आप ठीक हो जाता है तो आमतौर पर चिंता की वजह नहीं होती। लेकिन अगर मांसपेशियों की फड़फड़ाहट लगातार बनी रहे और उसके साथ कमजोरी या मांसपेशियों के आकार में कमी जैसी समस्या भी दिखाई दे तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
अचानक शरीर में सिहरन या कंपकंपी क्यों होती है?
कभी ठंड न होने के बावजूद शरीर में अचानक सिहरन दौड़ जाती है। कभी किसी डरावनी बात, तनाव या तेज भावना के दौरान भी शरीर कांपने लगता है। इसका संबंध शरीर के “फाइट या फ्लाइट” सिस्टम से हो सकता है। जब दिमाग किसी स्थिति को खतरे या तनाव के रूप में पहचानता है तो शरीर में कुछ हार्मोन तेजी से सक्रिय होते हैं। दिल की धड़कन बढ़ सकती है, मांसपेशियां तनाव में आ सकती हैं और शरीर ज्यादा सतर्क स्थिति में पहुंच सकता है। ठंड में कंपकंपी का एक अलग काम है। मांसपेशियों की तेज-तेज छोटी हरकतें शरीर में गर्मी पैदा करने में मदद करती हैं। यानी कांपना हमेशा कमजोरी का संकेत नहीं है। कई बार यह शरीर का सामान्य बचाव तंत्र होता है।
अचानक हिचकी क्यों आती है?
हिचकी भी शरीर के अजीब लेकिन आम संकेतों में से एक है। इसमें डायफ्राम नाम की मांसपेशी अचानक सिकुड़ती है और उसके तुरंत बाद गले के पास मौजूद संरचना तेजी से बंद होती है। इसी से “हिक” जैसी आवाज निकलती है। बहुत जल्दी खाना, ज्यादा खाना, गैस वाले पेय, अचानक तापमान में बदलाव, हंसी या भावनात्मक उत्तेजना जैसी चीजें कुछ लोगों में हिचकी शुरू कर सकती हैं। ज्यादातर हिचकी थोड़ी देर में अपने आप रुक जाती है। लेकिन अगर हिचकी बहुत लंबे समय तक बनी रहे तो उसके पीछे कोई दूसरी वजह हो सकती है और तब चिकित्सकीय सलाह जरूरी हो सकती है।
कभी अचानक कान क्यों बजने लगता है?
कभी बिल्कुल शांत कमरे में भी कान में सीटी, घंटी या भनभनाहट जैसी आवाज सुनाई दे सकती है। इसे टिनिटस कहा जाता है। कई बार यह थोड़ी देर के लिए होता है और फिर अपने आप चला जाता है।
तेज आवाज सुनने, कान पर दबाव, कान में मैल या सुनने की क्षमता में बदलाव जैसी कई वजहें इसके पीछे हो सकती हैं। अगर कान में आवाज बार-बार आए, लगातार बनी रहे या सुनने की क्षमता कम होने के साथ दिखाई दे तो इसकी जांच कराना बेहतर होता है।
कभी अचानक छींक क्यों आती है?
छींक शरीर का एक तरह का सफाई तंत्र है। नाक के अंदर धूल, परागकण या कोई दूसरा पदार्थ पहुंचने पर शरीर उसे बाहर निकालने की कोशिश कर सकता है। नाक के अंदर मौजूद संवेदनशील नसें इस तरह के पदार्थों को महसूस करती हैं और दिमाग को संकेत भेजती हैं। इसके बाद शरीर एक तेज प्रतिक्रिया के जरिए हवा को बाहर निकालता है। इसी वजह से छींक सिर्फ सर्दी-जुकाम में नहीं आती। धूल, तेज रोशनी, परफ्यूम या दूसरे ट्रिगर भी कुछ लोगों में छींक शुरू कर सकते हैं।
कभी आंखों से पानी क्यों आने लगता है?
आंसू सिर्फ रोने के लिए नहीं होते। आंख की सतह को साफ और नम रखने के लिए भी लगातार आंसू बनते रहते हैं। अगर आंख में धूल चली जाए, कोई जलन पैदा करने वाली चीज पहुंच जाए या आंख बहुत सूख जाए तो आंसू ज्यादा बनने लग सकते हैं। यह शरीर की एक सुरक्षात्मक प्रतिक्रिया है। प्याज काटते समय आंखों से पानी आने की वजह भी कुछ ऐसी ही है। प्याज काटने पर एक रसायन बनता है जो आंखों को परेशान करता है और शरीर उसे आंसुओं के जरिए बाहर निकालने की कोशिश करता है।
अचानक शरीर में गर्मी क्यों महसूस हो सकती है?
कभी बिना मौसम गर्म हुए अचानक चेहरा या शरीर गर्म महसूस होने लगता है। इसके पीछे कई कारण हो सकते हैं। तनाव या शर्मिंदगी जैसी भावनाओं में शरीर का तंत्रिका तंत्र सक्रिय हो सकता है। व्यायाम, गर्म वातावरण और हार्मोन से जुड़े बदलाव भी शरीर के तापमान की अनुभूति को बदल सकते हैं। लेकिन अगर अचानक गर्मी महसूस होने की समस्या बार-बार हो रही हो और उसके साथ तेज पसीना, दिल की धड़कन बढ़ना या दूसरी परेशानी भी हो तो इसे सिर्फ सामान्य मानकर छोड़ना ठीक नहीं है।
शरीर के ये छोटे संकेत हमें क्या बताते हैं?
हमारा शरीर हर समय हमें संकेत देता रहता है। पलक का फड़कना, पैर में ऐंठन, हाथ-पैर में झनझनाहट, हिचकी, छींक या अचानक कंपकंपी जैसी चीजें अक्सर शरीर की सामान्य प्रक्रियाओं का हिस्सा होती हैं। इनमें से ज्यादातर संकेत थोड़े समय के लिए आते हैं और फिर चले जाते हैं। थकान, तनाव, नींद की कमी, पानी की कमी, ज्यादा व्यायाम या आसपास के वातावरण में बदलाव जैसी साधारण वजहें भी इनके पीछे हो सकती हैं।
लेकिन एक बात याद रखना जरूरी है कि किसी एक लक्षण को देखकर खुद से बीमारी तय करना सही नहीं है। खासकर अगर कोई लक्षण लगातार बना रहे, बार-बार लौटे, धीरे-धीरे बढ़ रहा हो या उसके साथ कमजोरी, तेज दर्द, सांस लेने में परेशानी, बेहोशी, बोलने में दिक्कत या शरीर के किसी हिस्से में अचानक बदलाव जैसे दूसरे संकेत हों तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। आखिरकार हमारा शरीर कोई बिल्कुल शांत मशीन नहीं है। यह हर सेकंड हजारों काम करता है और कई बार उन कामों की छोटी-सी आवाज हमें पलक फड़कने, मांसपेशी ऐंठने, झनझनाहट या हिचकी के रूप में सुनाई देती है। इसलिए अगली बार आंख फड़के या पैर में ऐंठन पड़े तो तुरंत डरने की जरूरत नहीं है। हो सकता है शरीर बस यह बता रहा हो कि उसे थोड़ी नींद, आराम, पानी या अपनी दिनचर्या पर ध्यान देने की जरूरत है। लेकिन अगर वही संकेत बार-बार आने लगे या उसके साथ दूसरे असामान्य लक्षण जुड़ जाएं, तो शरीर की इस “छोटी घंटी” को नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए।


