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Coffee: दुनिया की सबसे महंगी कॉफी, जो जानवर के मल से तैयार होती है, कीमत जानकर हो जाएंगे हैरान
Kopi Luwak Coffee: कोपी लुवाक (सिवेट कॉफी) दुनिया की सबसे महंगी और विवादित कॉफी मानी जाती है। जानें यह कैसे बनती है, इसकी कीमत इतनी ज्यादा क्यों होती है, इसका स्वाद कैसे अलग होता है और सिवेट जानवर से जुड़े विवाद क्या हैं।
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Kopi Luwak Coffee: कॉफी पीना लगभग हर किसी को पसंद होता है। सुबह-सुबह एक कप गर्म कॉफी पूरे दिन को तरोताजा बना देती है। वैसे तो कॉफी की कई किस्में होती हैं, लेकिन एक ऐसी कॉफी भी है जो एक जंगली जानवर के मल से तैयार की जाती है। शायद आपने इसके बारे में पहले न सुना हो। इस अनोखी कॉफी का नाम कोपी लुवाक (Kopi Luwak) या सिवेट कॉफी (Civet Coffee) है। यह दुनिया की सबसे महंगी कॉफी मानी जाती है। इसके एक कप की कीमत लगभग 8-10 हजार रुपए तक पड़ती है
कोपी लुवाक कॉफी की कहानी
दक्षिण-पूर्व एशिया के जंगलों में पाम सिवेट (Palm Civet) नाम का एक जंगली स्तनधारी जीव पाया जाता है। यह मुख्य रूप से रात के समय सक्रिय रहता है और जंगलों में घूमकर अपना भोजन खोजता है। पहले यह विभिन्न प्रकार के फल खाता था, लेकिन जब दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों में बड़े पैमाने पर कॉफी की खेती शुरू हुई, तब इसने कॉफी की पकी हुई चेरी खाना भी शुरू कर दिया। समय के साथ कॉफी चेरी इसका पसंदीदा भोजन बन गई और इसी से कोपी लुवाक कॉफी की शुरुआत हुई।
कैसे बनती है कोपी लुवाक कॉफी?
पाम सिवेट केवल सबसे पकी और अच्छी गुणवत्ता वाली कॉफी चेरी चुनकर खाता है। उसके पाचन तंत्र में चेरी का गूदा तो पच जाता है, लेकिन उसके अंदर मौजूद कॉफी का बीज पूरी तरह नहीं पचता। यह बीज सिवेट के मल के साथ बाहर निकल जाता है।कई साल पहले कॉफी बागानों में काम करने वाले मजदूरों ने देखा कि सिवेट के मल के विघटित हो जाने के बाद भी कॉफी के बीज सुरक्षित पड़े रहते हैं। उन्होंने उन बीजों को इकट्ठा किया, अच्छी तरह साफ किया, सुखाया और फिर भूनकर उनसे कॉफी तैयार की। जब इस कॉफी का स्वाद चखा गया, तो यह सामान्य कॉफी की तुलना में कहीं अधिक मुलायम, सुगंधित और स्वादिष्ट निकली।
कोपी लुवाक कॉफी इतनी खास क्यों होती है?
कोपी लुवाक कॉफी की खासियत केवल इसकी दुर्लभता नहीं है, बल्कि इसका अनोखा स्वाद भी है। पाम सिवेट केवल सबसे अच्छी और पूरी तरह पकी हुई कॉफी चेरी का चयन करता है। जब कॉफी का बीज सिवेट के पाचन तंत्र से होकर गुजरता है, तो उसके पेट में मौजूद प्राकृतिक एंजाइम और अम्ल (Acids) बीज में मौजूद कुछ प्रोटीन को तोड़ देते हैं। इससे कॉफी की प्राकृतिक कड़वाहट कम हो जाती है और उसका स्वाद अधिक स्मूद, रिच और सुगंधित बन जाता है। यही कारण है कि दुनिया भर के कॉफी प्रेमियों के बीच यह कॉफी बेहद लोकप्रिय है।
सिवेट पर मंडराता संकट
कोपी लुवाक कॉफी की बढ़ती मांग और भारी मुनाफे के कारण आज कई जगहों पर पाम सिवेट को जंगलों से पकड़कर छोटे-छोटे पिंजरों में कैद कर दिया जाता है। उन्हें प्राकृतिक भोजन देने के बजाय केवल कॉफी चेरी खिलाई जाती है, ताकि अधिक से अधिक कॉफी बीज प्राप्त किए जा सकें। प्राकृतिक वातावरण से दूर, संकरे पिंजरों में रहने और असंतुलित भोजन के कारण ये जानवर अक्सर तनावग्रस्त हो जाते हैं, बीमार पड़ते हैं और कई बार समय से पहले ही उनकी मृत्यु हो जाती है। पशु अधिकार संगठनों ने इस अमानवीय व्यवहार का कई बार विरोध किया है। यही वजह है कि कोपी लुवाक कॉफी अपने स्वाद और कीमत के साथ-साथ पशु कल्याण से जुड़े विवादों के कारण भी अक्सर चर्चा में रहती है


