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World Organ Donation Day: मौत के बाद भी जिन्दगी देने का एक नेक संकल्प, जानें कैसे करें अंगदान
World Organ Donation Day: विश्व अंगदान दिवस पर जानें अंगदान का महत्व, भारत में अंग प्रत्यारोपण की स्थिति, दुनिया के पहले सफल अंग प्रत्यारोपण का इतिहास और अंगदाता बनने की पूरी प्रक्रिया।
Organ Donation
World Organ Donation Day: हर साल 13 अगस्त को अंगदान दिवस मनाया जाता है। इसका उद्देश्य लोगों को अंगदान के प्रति जागरूक करना, इससे जुड़ी भ्रांतियों को दूर करना और जरूरतमंद मरीजों की जीवन रक्षा के लिए अंगदान की शपथ लेने के लिए प्रेरित करना है। भारत में मृतक अंगदान की दर प्रति 10 लाख आबादी पर एक व्यक्ति से भी कम है। हालांकि, वर्ष 2025 में देशभर में कुल 20,138 अंग प्रत्यारोपण किए गए।
आखिर अंगदान क्यों जरूरी है?
भारत में ऐसे बहुत से लोग हैं, जो गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं और अपनी जिंदगी बचाने के लिए अंग प्रत्यारोपण का इंतजार कर रहे हैं। अंगदान के जरिए ऐसे कई लोगों की जान बचाई जा सकती है। लेकिन आज भी लोगों में अंगदान को लेकर पर्याप्त जागरूकता नहीं है और कई लोग इसे गंभीरता से नहीं लेते। एक अंगदान किसी जरूरतमंद व्यक्ति के लिए जीवन और मृत्यु के बीच का अंतर साबित हो सकता है।
मृत्यु के बाद किए गए अंगदान से जरूरतमंद मरीजों को किडनी, लीवर, हृदय, फेफड़े और अन्य अंग प्रत्यारोपित किए जा सकते हैं। इसके साथ ही आंखों और ऊतकों का भी दान किया जा सकता है, जिससे कई लोगों को नई जिंदगी और बेहतर जीवन जीने का अवसर मिल सकता है। इसलिए अंगदान को लेकर फैली भ्रांतियों को दूर करना और लोगों को इसके महत्व के प्रति जागरूक करना बेहद जरूरी है।
कहां और कब हुआ था दुनिया का पहला सफल अंग प्रत्यारोपण?
दुनिया का पहला सफल मानव अंग प्रत्यारोपण 23 दिसंबर 1954 को अमेरिका के बोस्टन स्थित पीटर बेंट ब्रिघम अस्पताल में हुआ था। इसमें रोनाल्ड हेरिक ने अपनी एक किडनी अपने जुड़वां भाई रिचर्ड हेरिक को दान की थी। इस ऐतिहासिक प्रत्यारोपण का नेतृत्व सर्जन डॉ. जोसेफ मरे ने किया था।
वहीं भारत में पहला सफल मृत दाता हृदय प्रत्यारोपण 3 अगस्त 1994 को दिल्ली स्थित ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) में किया गया था। यह भारत में अंग प्रत्यारोपण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जाती है और इसके बाद देश में मृत दाताओं से अंगदान और प्रत्यारोपण की व्यवस्था को बढ़ावा मिला।
भारत में अंगदान की प्रक्रिया क्या है? कैसे बन सकते हैं अंगदाता
18 वर्ष या उससे अधिक आयु का कोई भी स्वस्थ व्यक्ति अंगदान का संकल्प ले सकता है, हालांकि इसके लिए कुछ प्रावधान हैं। जीवित रहते हुए व्यक्ति अपनी चिकित्सकीय स्थिति और नियमों के अनुसार एक किडनी या लीवर का एक हिस्सा दान कर सकता है। वहीं, मृत्यु के बाद हृदय, यकृत, फेफड़े, अग्न्याशय, आंत, त्वचा और विभिन्न ऊतकों का दान किया जा सकता है।
अंगदान की इच्छा व्यक्त करने के लिए व्यक्ति सरकारी पोर्टल या संबंधित रजिस्ट्री पर ऑनलाइन पंजीकरण कर अंगदान की प्रतिज्ञा ले सकता है। पंजीकरण के बाद डोनर कार्ड जारी किया जाता है। हालांकि, मृत्यु के बाद अंगदान की प्रक्रिया में परिवार की सहमति और चिकित्सकीय व कानूनी प्रावधानों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। इसलिए व्यक्ति को अपने परिवार के सदस्यों को पहले से अपनी अंगदान की इच्छा के बारे में जानकारी देना चाहिए, ताकि जरूरत पड़ने पर वे उसके निर्णय से अवगत हों।


