Delhi Building Collapse: कल फिर गिरेगी इमारत

Delhi Building Collapse: अरुण श्रीवास्तव की यह मार्मिक कविता अवैध निर्माण, प्रशासनिक लापरवाही, भ्रष्टाचार और हादसों के बाद होने वाली खानापूर्ति पर तीखा सवाल उठाती है।

Arun Srivastava
Published on: 9 Sept 2026 1:33 AM IST
Delhi Building Collapse: कल फिर गिरेगी इमारत
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अब भी बैठे हैं गिद्ध उन्हीं दरख्तों पर,

अब भी उधेड़ सकते हैं

तुम्हारा जिस्म—

अगर मलबे में

कुछ बचा हो।

कल गिरी थी इमारत,

कल फिर गिरेगी।

दिल्ली के हृदय में

गिरी थी कल

एक अवैध इमारत,

और उसके नीचे

दबा था

देश का भविष्य।

भविष्य—

जिसे बचाने के लिए

बड़े-बड़े भाषण होते हैं,

नई-नई योजनाएँ बनती हैं,

और पुराने कागजों पर

नई मुहरें लगती हैं।

कल दौड़ी थीं

मंत्रियों की चमचमाती गाड़ियाँ,

धूल उड़ाती हुईं—

कल भी दौड़ेंगी

धूल उड़ाती हुईं।

कल भी कैमरों के सामने

चेहरे गंभीर थे,

आँखों में चिंता थी,

आवाज़ में संवेदना थी—

बस,

मलबे के नीचे

दबी चीखें

माइक तक नहीं पहुँच पाईं।

कल हुई थी

मृतकों के परिजनों के लिए

मुआवज़े की घोषणा।

कल फिर होगी।

कल सस्पेंड हुए थे

थोक में छोटे कर्मचारी—

क्योंकि बड़ी मछलियों को

पकड़ने के लिए

जाल बहुत छोटा था।

कल फिर होंगे

निलंबन,

जाँच समितियाँ,

रिपोर्टें

और रिपोर्टों पर

एक और समिति।

कल इकट्ठी हुई थी मीडिया,

मलबे के चारों ओर—

कल फिर इकट्ठी होगी।

कल फिर पूछे जाएँगे सवाल,

कल फिर जवाब दिए जाएँगे,

कल फिर सवाल बदल जाएँगे,

और कल फिर

सब कुछ सामान्य हो जाएगा।

किसी फाइल में लिखा होगा—

“दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा।”

किसी भाषण में कहा जाएगा—

“भविष्य की ऐसी घटनाएँ

रोकने के लिए

कड़े कदम उठाए जाएँगे।”

और किसी दफ्तर में

किसी दूसरी इमारत की

फाइल खुलेगी—

वही नक्शा,

वही रिश्वत,

वही अनुमति,

वही अनदेखी।

कल के बाद

सामान्य हो गया था सब कुछ।

कल के बाद

फिर सामान्य हो जाएगा सब कुछ।

बस फर्क इतना होगा—

मलबे के नीचे दबा

देश का भविष्य

अगली बार

किसी और इमारत में होगा।

और गिद्ध?

वे वहीं बैठे रहेंगे

उन्हीं दरख्तों पर।

उन्हें मालूम है—

इमारतें गिरती रहती हैं,

लाशें मिलती रहती हैं,

मुआवज़े बँटते रहते हैं,

और देश का भविष्य

हर बार

मलबे में ही मिलता है।

कल फिर गिरेगी इमारत।

और हम फिर कहेंगे—

“बहुत दुखद घटना है।”

फिर चुप हो जाएँगे।

( लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं। देहरादून में निवास करते हैं।)

Arun Srivastava
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Arun Srivastava

arun.Srivastava06@gmail.com
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