Governor Role In Government Formation: जब राज्यपाल राजनीति करने लगें तो ...

Governor Role In Government Formation: तमिलनाडु में सरकार गठन को लेकर राज्यपाल की भूमिका पर सवाल खड़े हुए हैं। लेख में संवैधानिक परंपराओं और आयोगों की सिफारिशों का जिक्र किया गया है।

Arun Srivastava
Published on: 11 May 2026 5:55 PM IST (Updated on: 11 May 2026 6:32 PM IST)
Governor Role tamilnadu-Government Formation Controversy
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जब राज्यपाल राजनीति करने लगें तो ...(Photo- Social Media)

Governor Role In Government Formation: कहावत है कि, जब रक्षक ही भक्षक बन जाए', तो आम आदमी कहां जाएं? लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार के तीनों अंग विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला झाड़ लें तो इसकी कल्पना मात्र कष्टदाई है। पर जब देखो तब इस तरह की नौटंकी देखने को मिलती है। ताज़ा मामला तमिलनाडु का है। यहां पर संवैधानिक जिम्मेदारी जिस पद की है वही संवैधानिक संकट खड़ा कर रहा है। फ़िलहाल बात तमिलनाडु के राज्यपाल की। उन्होंने वहां की सबसे बड़ी पार्टी को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं किया। अब तक की परंपरा रही है कि परिणाम आने के बाद सबसे बड़ी पार्टी या गठबंधन का मुखिया राज्यपाल के सामने सरकार बनाने का दावा पेश करते हैं या फिर राज्यपाल बुलाते हैं। पर तमिलनाडु में इस बार ऐसा नहीं हुआ‌‌। वहां सबसे बड़ी पार्टी (108) टीवीके के मुखिया विजय कांग्रेस का समर्थन पत्र लेकर पहुंचे पर राज्यपाल ने सरकार बनाने के लिए आमंत्रित नहीं किया।

सरकार के गठन में राज्यपाल की भूमिका

इतिहास गवाह है कि जब-जब विरोधी दल सबसे ज्यादा सीटें जीतते हैं किन्तु बहुमत से दूर होते हैं, तब-तब राज्यपाल का संरक्षक होने के बावजूद अपने पसंदीदा दल की तरफ झुकाव झलकते हुए दिखाई दिया। जो पद की गरिमा (सब कुछ लिपिबद्ध नहीं है) के अनुरूप स्थिरता नहीं देता। इसके उलट केंद्र सरकार की पार्टी के प्रति उमड़ा उनका मोह त्रिशंकु विधानसभा के समय दिखलाई देता है। चाहे केंद्र में कांग्रेस की सरकार रही हो या भाजपा की। तबके राज्यपाल रहे बीडी (बासप्पा दानप्पा) जत्ती मार्गदर्शक कहे जा सकते हैं तो पश्चिम बंगाल में राज्यपाल जगदीप धनखड़ उन्हीं के नक्शे कदम पर चले, तो महाराष्ट्र में इसी पद को सुशोभित करने वाले भगतसिंह कोश्यारी 'ब्रह्म मुहूर्त' में शपथ दिलाने के जानें जाते हैं तो उत्तर प्रदेश में राज्यपाल रहे रमेश भंडारी रात में सीएम बदलने के रूप में। आरएन रवि, कमला बेनीवाल, बूटा सिंह व बनवारी लाल जोशी का 'विवेक' भी राज्यों को संवैधानिक संकट में डालता रहा। इसी तरह राज्यपाल पी.सी. अलेक्जेंडर ने जानकी रामचंद्रन को मुख्यमंत्री पद की शपथ दिलाते हुए उन्हें बहुमत साबित करने का अवसर दिया था।

(Photo- Social Media)

​उस दौरान सदन में भारी हंगामा हुआ था, बाद केंद्र ने अनुच्छेद 356 लगाकर सरकार बर्खास्त कर दी थी। राज्यों में 'त्रिशंकु' विधानसभा की स्थिति में सरकार के गठन में राज्यपाल की भूमिका पर मदन मोहन पुंछी के नेतृत्व में गठित आयोग ने गाइड लाइन तय की थी।

जिसके अनुसार ​राज्यपाल को सबसे पहले 'चुनाव पूर्व गठबंधन' को बुलाना चाहिए। ​यदि वह नहीं है, तो 'सबसे बड़े एकल दल' को इस शर्त पर बुलाना चाहिए कि वह दूसरों के सहयोग का दावा पेश करे। ​राज्यपाल को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि सरकार गठन की प्रक्रिया में 'देरी' न हो, क्योंकि देरी ही 'हॉर्स ट्रेडिंग' को जन्म देती है।

गौर करने वाली बात है ये है कि राज्यपाल की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं राज्यपाल को अपनी रिपोर्ट राष्ट्रपति को देनी होती है प्रधानमंत्री को देनी होती है पर राज्यपाल हाजिरी प्रधानमंत्री के दरबार में लगाता है। रिपोर्ट के अनुसार राज्यपालों की नियुक्ति के लिए प्रधानमंत्री, गृहमंत्री लोकसभा अध्यक्ष की सहमति से होनी चाहिए और संबंधित राज्य के मुख्यमंत्री इसके सदस्य होने चाहिए‌। नियुक्त से पहले उप राष्ट्रपति लोकसभा अध्यक्ष और प्रधानमंत्री से परामर्श किया जाना चाहिए‌‌।

सरकारिया आयोग का सुझाव

राज्यपाल गैर दलीय होना चाहिए‌‌। जिसे सार्वजनिक जीवन प्रशासन में लंबा अनुभव हो। अब आयोग की रिपोर्ट के अमल पर एक नज़र। किस राज्यपाल की नियुक्ति में इन सुझावों का पालन किया गया है? चयन कमेटी में वहां के मुख्यमंत्री शामिल किए गए थे? जैसे जगदीप धनखड़ को राज्यपाल बनाते समय ममता बनर्जी नियुक्त कमेटी में शामिल थीं? सरकारिया आयोग का एक और सुझाव था कि, राज्यपाल गैर दलीय होना चाहिए। तो क्या राजस्थान के राज्यपाल रहे कल्याण सिंह, महाराष्ट्र में राज्यपाल रहे भगत सिंह कोश्यारी, आनंदी बेन व कलराज़ मिश्र गैरदलीय थे?

यदि तत्कालीन राष्ट्रपति ने अटल बिहारी वाजपेई से ‘पहले बहुमत ले आइए’ कह दिया होता, तो वे 13 दिन वाले पीएम न बन पाते और कल्याण सिंह, जीतन राम मांझी, पुष्कर सिंह धामी, मनोहर लाल खट्टर व नीतीश कुमार मुख्यमंत्री बन पाते?

अरुण श्रीवास्तव देहरादून।

Shashi kant gautam

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