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Rajasthan News: किताबों, विचारों और संवाद के 20 साल- जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का ऐतिहासिक सफर
Rajasthan News: जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल का 20वां संस्करण 14 से 18 जनवरी 2027 तक होगा, 22 भाषाओं के संगम के साथ साहित्य और विचारों की दो दशक लंबी यात्रा का जश्न मनेगा।
Rajasthan News: जयपुर, गुलाबी नगरी एक बार फिर दुनिया के सबसे बड़े वैचारिक और सांस्कृतिक महाकुंभ की गवाह बनने जा रही है। राजस्थान सरकार के निरंतर सहयोग और वेदांता की प्रस्तुति के साथ, जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (JLF) 14 से 18 जनवरी 2027 तक अपने ऐतिहासिक 20वें संस्करण का आयोजन करने जा रहा है।
2006 में पाठकों और लेखकों की एक छोटी सी सालाना सभा के रूप में शुरू हुआ यह सफर आज दो दशकों बाद एक वैश्विक आंदोलन बन चुका है। "विचारों, कहानियों और संवाद के 20 साल" की थीम पर केंद्रित यह 20वां संस्करण साहित्य और संस्कृति की परिवर्तनकारी शक्ति का भव्य उत्सव है।
दो दशकों की ऐतिहासिक यात्रा: आंकड़ों की जुबानी
8,000+ वक्ता: नोबेल पुरस्कार विजेता, बुकर पुरस्कार विजेता, राष्ट्राध्यक्ष, अर्थशास्त्री, दार्शनिक और कलाकार मंच की शोभा बढ़ा चुके हैं।
50 लाख+ प्रत्यक्ष दर्शक: साहित्यानुरागियों की लगातार भागीदारी ने इसे एक जन-उत्सव का रूप दिया।
1 अरब+ की वैश्विक पहुँच: डिजिटल प्लेटफॉर्म, मीडिया और प्रसारण नेटवर्क के जरिए दुनिया भर में दस्तक।
15+ अंतरराष्ट्रीय संस्करण: अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, स्पेन, ऑस्ट्रेलिया, मध्य पूर्व, मालदीव और आयरलैंड तक भारतीय साहित्य व दृष्टि का प्रसार।
300+ साहित्यिक उत्सवों की प्रेरणा: भारत और दुनिया भर के 300 से अधिक साहित्यिक आयोजन JLF की खुली संवाद संस्कृति से प्रेरित हैं।
समावेशिता और 22 भाषाओं का संगम
साहित्यिक चर्चाओं को बौद्धिक गलियारों से निकालकर आम जनसंवाद के केंद्र में लाना JLF की सबसे बड़ी उपलब्धि रही है। इतिहास, राजनीति, विज्ञान, दर्शन, पर्यावरण, लैंगिक अध्ययन, प्रवासन और स्वास्थ्य जैसे परस्पर जुड़े विषयों पर यहाँ अविरल संवाद होता है।
इस 20वें मील के पत्थर के अवसर पर, फेस्टिवल की आधिकारिक घोषणा भारत की सभी 22 आधिकारिक भाषाओं में एक साथ जारी की गई है। बहुभाषी कार्यक्रमों, 'भाषा स्वरमाला' श्रृंखला और अनुवाद सत्रों के माध्यम से क्षेत्रीय साहित्य को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने का यह सशक्त प्रयास है।
राजस्थान सरकार का अटूट साथ
2008 से राज्य सरकार के निरंतर सहयोग, प्रशासनिक समर्थन और संसाधनों ने इस उत्सव को विश्वस्तरीय मंच प्रदान किया है। इस साझेदारी ने न केवल फेस्टिवल को एक शानदार सांस्कृतिक परिवेश दिया, बल्कि जयपुर और पूरे राजस्थान को दुनिया के सांस्कृतिक और साहित्यिक मानचित्र पर एक अमिट पहचान भी दिलाई है।
प्रमुख विचारकों व आयोजकों के बोल
"बीस वर्षों से, जयपुर लिटरेचर फ़ेस्टिवल इस सहज विश्वास पर कायम रहा है कि किताबों और विचारों में लोगों को साथ लाने की शक्ति होती है। हमारे लेखकों की उदारता, हमारे दर्शकों की जिज्ञासा, और भाषाओं, संस्कृतियों व दृष्टिकोणों के पार संवाद के प्रति एक साझा प्रतिबद्धता ने इस फ़ेस्टिवल को इतना सफल बनाया है। अपने बीसवें संस्करण में प्रवेश करते समय, हम इस यात्रा का उत्सव मनाते हुए, आगे आने वाले अनगिनत संवादों की प्रतीक्षा कर रहे हैं।"
— संजॉय के. रॉय (प्रबंध निदेशक, टीमवर्क आर्ट्स / निर्माता, JLF)
"भारत की आत्मा उसकी साहित्यिक विरासत और भाषाई विविधता में बसती है। यह उचित ही है कि हम अपनी भाषा स्वरमाला शृंखला के माध्यम से अनेक भाषाओं को याद करते हुए अपने ऐतिहासिक 20वें साल का उत्सव मना रहे हैं।"
— नमिता गोखले (सह-निदेशक, JLF)
"बीते दो दशकों में, यह मंच किताबों, विचारों और सार्थक संवाद की शक्ति के भरोसे खड़ा रहा है। हमारी यात्रा लेखकों, पाठकों और उन सभी साझेदारों व प्रायोजकों के सहयोग से संभव हुई है जो संस्कृति की परिवर्तनकारी भूमिका में विश्वास रखते हैं। हमारा लक्ष्य आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वतंत्र, समावेशी और वैश्विक रूप से प्रासंगिक मंच बनाए रखना है।"
— प्रीता सिंह (प्रमुख, टीमवर्क आर्ट्स)
भविष्य की ओर कदम
अपने तीसरे दशक में कदम रखते हुए, जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल भौगोलिक, भाषाई और पीढ़ीगत सीमाओं को तोड़कर ज्ञान और साहित्य को और अधिक सुलभ, सहभागी व प्रासंगिक बनाने के अपने संकल्प को दोहराता है।
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