Sardar Vallabhbhai Patel: सरदार पटेल की वो दूरदर्शिता, जिसे समझने में देश को लग गए कई दशक

Sardar Vallabhbhai Patel: सरदार वल्लभभाई पटेल ने आजादी के बाद 500 से अधिक रियासतों के एकीकरण में अहम भूमिका निभाई। जानिए उनका जीवन, बारडोली सत्याग्रह, चीन को लेकर चेतावनी और राष्ट्रीय एकता में योगदान।

Mrityunjay Dixit
Published on: 30 Oct 2026 3:24 PM IST (Updated on: 31 Oct 2026 8:44 AM IST)
Sardar Vallabhbhai Patel: सरदार पटेल की वो दूरदर्शिता, जिसे समझने में देश को लग गए कई दशक
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Sardar Vallabhbhai Patel: ब्रिटिश राज के अंत के बाद स्वतंत्र देश की अस्थिर स्थिति को स्थिर करने वाले महान प्रशासक लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के नडियाद के ग्राम करमसद में हुआ था। इनके पिता झबेरभाई पटेल ने 1857 में रानी झांसी के समर्थन में युद्ध किया था और अत्यंत आध्यात्मिक प्रवृत्ति के थे। इनकी मां का नाम लाडोबाई था।

पटेल की प्रारम्भिक शिक्षा गांव के ही एक विद्यालय में हुई जहाँ कक्षा चार तक की पढ़ाई होती थी। इसके पश्चात वे अपने गांव से छह से सात किमी की दूरी पेटलाद गांव के विद्यालय में जाने लगे। वल्लभभाई को बचपन से ही पढ़ने लिखने में विशेष रुचि थी। वल्लभभाई की हाईस्कूल की शिक्षा उनके ननिहाल में हुई यहीं उनके जीवन का वास्तविक विकास भी आरम्भ हुआ।

उनमें बचपन से ही कुशल नेतृत्व की क्षमता दिखाई देती थी। वे पढ़ाई में तो तेज थे ही गीत- संगीत व खेलकूद में भी आगे थे। इसी कारण विद्यालय के समय से ही वे अपने साथियों के बीच लोकप्रिय हो गये थे तथा उनका नेतृत्व करने लगे थे। पटेल बहुत ही कुशाग्र बुद्धि के थे। बचपन में एक बार वे विद्यालय से लौटे समय पीछे रह गये। कुछ साथियों ने जाकर देखा तो ये धरती पर गड़े एक नुकीले पत्थर को उखाड़ रहे थे। पूछने पर बोले,” इसने मुझे चोट पहुंचायी है अब मैं इसे उखाड़कर ही मानूंगा” और वे काम पूरा करके ही घर आये। इसी तरह एक बार उनकी बगल में फोड़ा निकल आया। उन दिनों गांवों में इसके लिए लोहे की सलाख को आग पर लाल करके उससे फोड़े को दाग दिया जाता था। नाई ने सलाख को भट्ठी में रखकर गरम तो कर लिया पर वल्लभभाई जैसे छोटे बालक को दागने की हिम्मत नहीं पड़ी। इस पर वल्लभभाई ने सलाख अपने हाथ में लेकर उसे फोड़े में घुसा दिया। आसपास बैठे लोग चीख पड़े लेकिन उनके मुंह से उफ तक नहीं निकला।

वल्लभभाई आगे की शिक्षा के लिए इंग्लैंड चले गए तथा बैरिस्टर की परीक्षा उत्तीर्ण की।1926 में उनकी भेंट गांधी जी से हुई और वे स्वाधीनता आंदोलन में कूद पड़े और स्वदेशी जीवन शैली अपना ली। सरदार पटेल ने गुजरात के प्रमुख किसान आंदोलन बारडोली सत्याग्रह मेनका नेतृत्व किया। उस समय प्रांतीय सरकार ने किसानों के लगान में तीस प्रतिशत तक की वृद्धि कर दी थी। आन्दोलन के फलस्वरूप न्यायिक अधिकारी ब्लूमफील्ड ने मामले की जांच कर 22 प्रतिशत लगान वृद्धि को गलत बताते हुए उसे घटाकर 6.03 प्रतिशत कर दिया था। इस आंदोलन का सफल नेतृत्व करने के कारण उनको सरदार की उपाधि प्राप्त हुई।

स्वतंत्रता के बाद नेहरू मंत्रिपरिषद में सरदार पटेल गृहमंत्री बने और चार वर्ष इस पद पर कार्य किया। यह चार वर्ष न केवल पटेल अपितु भारत देश के लिए ऐतिहसिक वर्ष रहे। उन्होनें बिना किसी रक्तपात रियासतों का विलय करवाया, जिसमें जूनागढ़ और हैदराबाद जैसी रियासतें शामिल थीं। सरदार की प्रेरणा से ही जूनागढ़ में विद्रोह हुआ और वह भारत में मिल गया जबकि हैदराबाद में बड़ी पुलिस कार्यवाही करनी पड़ी। जम्मू कश्मीर का मामला नेहरू ने अपने पास रख लिया जो वर्तमान गृहमंत्री अमित शाह के आने तक देश का सिरदर्द बना रहा। वर्तमान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में वर्तमान गृहमंत्री अमित शाह ने 5 अगस्त 2019 को धारा 370 समाप्त कर जम्मू कश्मीर का मुद्दा हल किया।

सरदार पटेल कर्त्तव्य निर्वहन में अत्यंत कठोर और निजी जीवन में अत्यंत सहज उदार थे । समय के अनुसार निर्णय लेने में सक्षम थे। वे तत्कालीन प्रधानमंत्री नेहरू जी को समय- समय पर उचित परामर्श भी दिया करते थे। जब चीन तिब्बत पर अपना अधिकार जता रहा था और नेहरू जी तत्कालीन चीनी नेतृत्व के प्रति काफी उदार थे और चीन की विस्तारवादी नीति का विरोध नहीं कर रहे थे तब सरदार पटेल ने चीन के प्रति सर्वाधिक संदेह प्रकट करते हुए कहा था कि यदि चीन तिब्बत पर अधिकार कर लेता है तो यह भविष्य में भारत की सुरक्षा के लिए सबसे बड़ा खतरा होगा। उस समय नेहरु जी ने पटेल का सुझाव नहीं माना, तिब्बत पर चीन ने अधिकार कर लिया और आज सरदार पटेल की चिंता सत्य सिद्ध हुई है।

दुर्भाग्यवश कांग्रेस की सरकारों ने पटेल को उनके कृतित्व के तुल्य सम्मान नहीं दिया और प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में आने से पूर्व वे एक उपेक्षित महापुरुष की भांति रहे। आज स्थिति बदल चुकी है । गुजरात में तेवतिया में सरदार पटेल का भव्य स्मारक बन गया है। सरदार पटेल की मूर्ति “स्टैच्यू ऑफ़ यूनिटी” विश्व की सबसे ऊँची मूर्तियों में है जिसकी ऊचाई 240 मीटर तथा आधार 58 मीटर है । गुजरात के वल्लभ विद्यासागर में सरदार पटेल विश्वविद्यालय हैं। गुजरात में ही सरदार सरोवर बांध है। सरदार पटेल की प्रेरणा से ही वर्तमान समय में एक भारत श्रेष्ठ भारत अभियान चलाया जा रहा है और काशी -तमिल संगमम जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। नए संसद भवन में अखंड भारत का मानचित्र बनाया गया है। उनकी जन्मतिथि पर संपूर्ण भारत में राष्ट्रीय एकता दिवस का आयोजन किया जाता है।

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