Smartphone Side Effect: स्मार्ट फोन ने बढ़ा दिए डाक्टरों के मरीज़!

Smartphone Side Effect: सोशल मीडिया और स्मार्टफोन की दीवानगी पर व्यंग्य, जहां आंख, दिल, दिमाग और हड्डी के डॉक्टर बढ़ते मरीजों पर दिलचस्प अंदाज में चर्चा करते दिखे।

Naved Shikoh
Published on: 15 May 2026 10:17 PM IST
Smart phones increased doctors
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स्मार्ट फोन ने बढ़ा दिए डाक्टरों के मरीज़! (Photo- Social Media)

Smartphone Side Effect: जैसे साधू-संत पहाड़ों पर बैठकर हाथ में माला लेकर तपस्या में लीन रहते थे अब हर कोई हाथ में स्मार्ट फोन लेकर सोशल मीडिया की दुनिया में लीन है। कोई रील देख रहा है तो कोई वाट्सऐप यूनिवर्सिटी की पढ़ाई कर रहा है। फेसबुक, इंस्टाग्राम की आभासी दुनिया में खोए लोग अस्ल ज़िन्दगी को भूल गए हैं।

नब्बे फीसद लोगों के लिए ये सब घातक है तो दस फीसद पेशेवर लोग सोशल मीडिया,रील, इंटरनेट डाटा और स्मार्ट फोन से जुड़े रहने की दीवानगी के दौर का फायदा भी उठा रहे हैं।

स्मार्ट फोन बनाने वाले, टेलिकॉम कंपनियां, फेसबुक, इंस्टाग्राम, वाट्सएप के मालिक खुश हैं तो इंटरनेट/डाटा का बाजार भी खूब झूम रहा है।

(Photo- Social Media)

आम इंसान की ज़िन्दगी जीने की दो जरुरतें पूरी हो रही हैं-

डाटा और आटा

गरीब से गरीब को आटा फ्री में मयस्सर हो रहा है और तीन-चार सौ रुपए महीना डाटा का इंतेज़ाम भी कहीं ना कहीं से तो हो ही जाता है। कुछ नहीं तो चुनावी मौसम में शुरू हुई आर्थिक सहायता की रेवड़ी ही डाटा का मामूली खर्च पूरा कर देती है।

डाटा और आटा से पर्याप्त आनंदमय ज़िन्दगी जीने के दौर में डाटा/स्मार्टफोन की लत से नुकसान की बात कर मूड खराब करने की गुस्ताखी ना करके स्मार्टफोन और सोशल मीडिया के नशे से किसको क्या क्या फायदा है बस इसी पर बात करेंगे।

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आंखों देखा हाल-

एक अस्पताल में लंच टाइम सब डाक्टर इकट्ठा थे। आंख का डाक्टर इतराकर बोला- ये दौर हमारा है, एक जमाना था जब आंख के डाक्टर को हल्के में लिया जाता था। आज मोबाइल में चिपके रहकर आंखें खराब करने के दौर में सबसे ज्यादा पेशेंट हमारे पास लाइन लगाए रहते हैं।

(Photo- Social Media)

इस बीच दिमाग का डाक्टर बोला- पगले! सबसे ज्यादा पेशेंट मेरे बढ़े हैं,सोशल मीडिया ने सबको पागल भी कर दिया है।

दिल और पेट के डाक्टर झट से बोले अरे बेवकूफों तुम क्या समझते हो स्मार्टफोन और सोशल मीडिया लोगों की सिर्फ आंखें और दिमाग ही खराब कर रहा, दिल और पेट की बीमारियों ने भी हमारे पेशेंट्स का खूब इजाफा किया है।

सोशल मीडिया के नशे से लोगों का चलना-फिरना, घूमना-फिरना, वर्जिश ..सब छूट गया है। डाटा और आटा तक सीमित जीवन पेट और दिल की बीमारियों से कमजोर पड़ता जा रहा है।

ये सब सुन कर हड्डी का डाक्टर भी खामोश नहीं रहा - अपनी-अपनी बात करते रहोगे या दूसरे की भी सुनोगे। मेरी भी बल्ले-बल्ले है। हर दिन हड्डी तुड़वाकर दो चार पेशेंट हर रोज आ ही जाते हैं। कोई मोबाइल देखते हुए ड्राइव करने में दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है तो कोई रील बनाने में हड्डियां तोड़ लेता है।

सुन कर सभी डाक्टरों की ठहाकों से अस्पताल गूंज जाता है। अस्पताल का लंच ब्रेक खत्म होते ही हर तरफ मरीजों की कतारें लंबी हो चुकी हैं। सभी डाक्टर अपना-अपना पुराने जमाने का बटन वाला मोबाइल हैंड सेट उठाकर अपने अपने मरीजों को देखने पहुंच जाते हैं।

Shashi kant gautam

Shashi kant gautam

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