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Ukraine Salt Crisis: यूक्रेन में नमक संकट! दुनिया का सप्लायर बना खरीदार
Ukraine Salt Crisis: रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद यूक्रेन की नमक उद्योग पर गहरा असर पड़ा। कभी दुनिया को नमक निर्यात करने वाला देश अब आयात पर निर्भर हो गया है। जानिए सोलेदर की कहानी।
Ukraine Salt Crisis
Ukraine Salt Industry: नमक खनिक से सैनिक बने रुस्लन का कहना था, 'नमक ने हमें काम ही नहीं, जीवन भी दिया। 45 वर्षीय रुस्लन यूरोप की सबसे बड़ी नमक खदानों में से एक में धरती के 1,000 फीट नीचे काम कर रहे थे, जब रूसियों ने पूरी ताकत के साथ यूक्रेन पर हमला बोला था। लगभग एक साल बाद, जब रूसियों ने रुस्लन के गृहनगर और उसकी खदान पर कब्जा कर लिया, तो वह पूर्वी यूक्रेन में बख्मत शहर के पास रूसी सैनिकों से लड़ रहे थे। यह पूछे जाने पर, कि जब सोलेदर पर रूस का कब्जा हो गया, तो उसे कैसा लगा, रुस्लन ने बताया कि 'मैं उस बारे में कुछ कह नहीं सकता। सब कुछ जो मुझे प्रिय था, वह सब कुछ जिसे मैं प्यार करता था, जिसके लिए काम करता था और सपने देखता था, पल भर में ही बिखर गया। सोलेदर के पतन से रूस के लिए लगभग 40 मील दूर दक्षिण में बख्मत पर हमला करना आसान हो गया। महज 10,000 की आबादी वाला छोटा-सा शहर सोलेदर यूक्रेन की अर्थव्यवस्था और इतिहास में विशेष स्थान रखता था।
यहां की नमक खदान से देश में 90 फीसदी से अधिक नमक की आपूर्ति होती थी। यही नहीं, नमक उत्पादन करने वाली सरकारी कंपनी आर्टेमसिल 20 से अधिक देशों को नमक निर्यात करती थी। पर अब यूक्रेन अपने आधुनिक इतिहास में पहली बार आयातित नमक पर निर्भर है। दरअसल यूक्रेन का नमक से जुड़ाव अर्थशास्त्र से भी गहरा है।
रूसी हमला शुरू होने के तुरंत बाद सोलेदर बम धमाकों की जद में आ गया। उत्पादन ठप होने के कारण पिछली गर्मियों में भंडार की आलमारियों से नमक गायब हो गया, पर 20 टन स्टॉक, जिसे सरकार और कंपनी फिर से हासिल करने में कामयाब रही, अब युद्ध की खातिर धन जुटाने के लिए यूक्रेन में बेचा जा रहा है। पर पैसा खोई हुई 2,500 से अधिक नौकरियों की जगह नहीं ले सकता है, या जो चीज बमबारी में नष्ट हो गई है, उसका पुनर्निर्माण नहीं कर सकता। यह अलग बात है कि इस पैसे से शहर को वापस जीतने के लिए यूक्रेनी सेना के लिए ड्रोन खरीदा जाएगा।
सोलेदर का ध्वंस यूक्रेनी अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने के रूस के व्यापक लक्ष्य का हिस्सा है। अनाज उत्पादन करने वाली जमीन पर रूसी कब्जे ने कृषि क्षेत्र को तबाह कर दिया है। रूरलन का कहना था कि रूसियों के आने के बाद से उसने सोलेदर में किसी से संवाद नहीं किया, क्योंकि वहां कोई नहीं बचा था। रूसी हमले से पहले ही रुस्लन की पत्नी, बेटे और बेटी को शहर से निकाल लिया गया था, पर परिवार को नहीं पता कि रुस्लन युद्ध के मोर्चे से कब वापस आएगा।
( साभार ‘ द न्यूयार्क टाइम्स’ एव ‘ अमर उजाला’।)
-मार्क सेंटोरा


