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MP K Radhakrishnan Wikipedia: लोकशक्ति के सच्चे प्रतिनिधि- CPI(M) सांसद के. राधाकृष्णन का सामाजिक संघर्ष
MP K Radhakrishnan Wikipedia: राधाकृष्णन की राजनीति की नींव छात्र संगठनों में रखी गई। SFI से जुड़ने के बाद वे चेलक्कारा क्षेत्र के सचिव और त्रिशूर जिला सचिवालय के सदस्य बने।
Kerala MP K Radhakrishnan Wikipedia
MP K Radhakrishnan Wikipedia: भारतीय राजनीति में ऐसे चंद ही नेता हैं जिन्होंने न केवल जमीन से जुड़कर संघर्ष किया बल्कि सामाजिक न्याय और दलित उत्थान के लिए जीवन समर्पित कर दिया। केरल से भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के वरिष्ठ नेता के. राधाकृष्णन ऐसे ही व्यक्तित्व हैं। जिन्होंने छात्र राजनीति से लेकर केंद्रीय राजनीति तक अपनी स्पष्ट विचारधारा और जनसंवेदनशील कार्यों से गहरी छाप छोड़ी। 2024 के लोकसभा चुनाव में भारी मतों से अलाथुर से निर्वाचित होकर वह न सिर्फ 18वीं लोकसभा के सदस्य बने बल्कि सीपीआई (एम) संसदीय दल के नेता की भूमिका भी निभा रहे हैं।
के. राधाकृष्णन जन्म : 24 मई 1964 केरल, इडुक्की जिला पुल्लिक्कनम, वागामोन गांव
राजनीतिक दल: भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी)
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा
के. राधाकृष्णन का जन्म 24 मई, 1964 को केरल के इडुक्की जिले के पुल्लिक्कनम, वागामोन गांव में हुआ। एक साधारण दलित परिवार में जन्मे राधाकृष्णन ने बचपन से ही सामाजिक भेदभाव और वंचना को नजदीक से महसूस किया। शिक्षा के क्षेत्र में उन्होंने श्री केरल वर्मा कॉलेज, त्रिशूर से स्नातक की पढ़ाई की। यहीं से उनकी राजनीतिक चेतना आकार लेने लगी और वे स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) में सक्रिय हुए। कॉलेज में SFI इकाई सचिव के रूप में उनकी पहली जिम्मेदारी ने ही उनमें एक जुझारू नेतृत्व कौशल को विकसित किया।
राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति से पंचायत तक
राधाकृष्णन की राजनीति की नींव छात्र संगठनों में रखी गई। SFI से जुड़ने के बाद वे चेलक्कारा क्षेत्र के सचिव और त्रिशूर जिला सचिवालय के सदस्य बने। बाद में वे डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) के राज्य समिति सदस्य के रूप में भी चुने गए। 1991 में वे त्रिशूर जिला परिषद के वल्लथोल नगर डिवीजन से निर्वाचित हुए, जिसने उनकी राजनीतिक यात्रा को संस्थागत पहचान दिलाई।
विधानसभा में पांच बार के विधायक और मंत्री पदों की जिम्मेदारी
राधाकृष्णन 1996, 2001, 2006, 2011 और 2021 में चेलाक्कारा विधानसभा क्षेत्र से निर्वाचित हुए। उन्होंने 1996-2001 के दौरान ई. के. नयनार के नेतृत्व वाली सरकार में अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग कल्याण और युवा मामलों के मंत्री के रूप में कार्य किया। इस कार्यकाल में उन्होंने शिक्षा, रोजगार, और सामाजिक सुरक्षा से संबंधित कई योजनाओं की शुरुआत की। 2001-2006 तक वे केरल विधानसभा में विपक्ष के मुख्य सचेतक रहे और लगातार वंचित तबकों की आवाज को उठाते रहे।
2006-2011 तक वे केरल विधानसभा के अध्यक्ष रहे और संसदीय मर्यादाओं को दृढ़ता से कायम रखा। 2021 में फिर से विधायक बनने के बाद उन्होंने देवस्वोम, अनुसूचित जाति-जनजाति कल्याण, पिछड़ा वर्ग और संसदीय कार्य मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाली। इस अवधि में उन्होंने मंदिर प्रशासन में दलितों की भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु कई ऐतिहासिक निर्णय लिए।
लोकसभा में ऐतिहासिक जीत और राष्ट्रीय राजनीति में भूमिका
2024 के आम चुनावों में राधाकृष्णन ने अलाथुर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा और अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 20,111 वोटों से पराजित किया। यह जीत न केवल उनके जनाधार का प्रमाण है। बल्कि यह भी दर्शाती है कि सामाजिक न्याय की राजनीति अभी भी जनमानस में गहरी पैठ रखती है। 18वीं लोकसभा में वे सीपीआई (एम) संसदीय दल के नेता बनाए गए। जिससे यह स्पष्ट होता है कि पार्टी नेतृत्व उनके अनुभव और वैचारिक प्रतिबद्धता को किस स्तर पर महत्व देता है।
संगठनात्मक भूमिका और सामाजिक सक्रियता
राधाकृष्णन भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की केंद्रीय समिति के सदस्य हैं। वे दलित शोषण मुक्ति मंच (DSMM) के अखिल भारतीय अध्यक्ष हैं, जो देशभर में दलितों के अधिकारों के लिए संघर्ष करता है। वे केरल पट्टिकाजति क्षेम समिति (PKS) के संस्थापक राज्य अध्यक्ष भी हैं। एक ऐसी संस्था जो दलित समाज के लिए सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक कल्याण कार्यक्रम चलाती है।
वह सीआईटीयू से संबद्ध फार्म वर्कर्स यूनियन और केरल क्ले पॉटरी वर्कर्स यूनियन के राज्य अध्यक्ष भी हैं। उनके नेतृत्व में इन यूनियनों ने श्रमिक अधिकारों के मुद्दों को लेकर प्रभावशाली आंदोलनों का संचालन किया।
महत्वपूर्ण पद व जिम्मेदारियां
विधान सभा सदस्य, चेलाक्कारा (5 बार)
अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण, पिछड़ा वर्ग, युवा मामलों के मंत्री (1996-2001),
विपक्षी मुख्य सचेतक, केरल विधानसभा (2001-2006),
केरल विधानसभा अध्यक्ष (2006-2011),
,देवस्वोम व सामाजिक न्याय मंत्री (2021-2024),
सीपीआई(एम) त्रिशूर के जिला सचिव (2016-2018),
एलडीएफ त्रिशूर के जिला संयोजक (2012-2018),
केंद्रीय समिति सदस्य, सीपीआई(एम)
संसद सदस्य, अलाथुर (2024 से),
सीपीआई(एम) संसदीय दल के नेता, 18वीं लोकसभा सदस्य, संयुक्त संसदीय समिति ‘एक राष्ट्र, एक चुनाव’ विधेयक 2024 ।
सामाजिक सरोकार और वैचारिक प्रतिबद्धता
राधाकृष्णन हमेशा से ही वंचित वर्गों के अधिकारों के प्रबल पक्षधर रहे हैं। उन्होंने अपने मंत्रित्वकाल में दलित छात्रवृत्ति योजनाओं को व्यापक बनाया, मंदिर प्रशासन में प्रतिनिधित्व का मार्ग प्रशस्त किया और अनुसूचित जाति समुदाय के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए योजनाएं लागू कीं। उनकी राजनीति में विचारधारा की स्पष्टता और जमीनी कार्यकर्ताओं से गहरा जुड़ाव है। उन्होंने कभी भी सत्ता को अपने सिद्धांतों पर हावी नहीं होने दिया। राधाकृष्णन की राजनीति "संविधानिक लोकतंत्र में सामाजिक न्याय" की अवधारणा को मजबूती देने वाली है। राधाकृष्णन अविवाहित हैं। उनका जीवन पूरी तरह जनसेवा और राजनीतिक सक्रियता को समर्पित रहा है। साधारण जीवनशैली, सौम्य व्यवहार और स्पष्ट वक्ता के रूप में वे अपने समर्थकों और विरोधियों दोनों के बीच सम्मान पाते हैं। के. राधाकृष्णन की राजनीतिक यात्रा उस विचारधारा और सामाजिक प्रतिबद्धता का प्रतीक है, जिसकी आज के भारत में नितांत आवश्यकता है। उनकी लोकसभा में उपस्थिति केवल एक प्रतिनिधित्व नहीं, बल्कि एक विचार की उपस्थिति है। समानता, न्याय और संविधान की मूल आत्मा की। एक दलित नेता के रूप में उन्होंने न केवल सत्ता के उच्च स्तरों को छुआ, बल्कि दलित समाज के सपनों और आकांक्षाओं को संसद में सशक्त आवाज भी दी। ऐसे नेता हमारे लोकतंत्र की सबसे मजबूत नींव होते हैं। उनकी यात्रा यह बताती है कि प्रतिबद्धता, संघर्ष और जनसरोकारों से जुड़ाव हो तो किसी भी सामाजिक बाधा को पार किया जा सकता है।


