Nana Patekar: 1.5 करोड़ की कार छोड़ किसानों के लिए क्या कर गए नाना पाटेकर? सीएम योगी भी रह गए थे हैरान

Nana Patekar ने 1.5 करोड़ की कार खरीदने का फैसला क्यों बदला? जानिए किसानों के लिए उनकी मदद, NAAM Foundation और सीएम योगी से जुड़े इस किस्से की पूरी कहानी।

Jyotsana Singh
Published on: 8 Oct 2026 2:19 PM IST (Updated on: 8 Oct 2026 3:01 PM IST)
Nana Patekar: Why Did He Give Up a ₹1.5 Crore Car to Help Farmers?
X

Nana Patekar: Why Did He Give Up a ₹1.5 Crore Car to Help Farmers?


Nana Patekar: हिंदी सिनेमा के अब तक के लंबे सफर में अनेक दिग्गज कलाकारों ने अपने शानदार अभिनय से अमिट पहचान छोड़ी है जिनमें से एक नाम नाना पाटेकर का भी शुमार है। लेकिन नाना पाटेकर द्वारा निभाए गए अभिनय का अंदाज ही जुदा था, जो कि थियेटर में सीखने से नहीं बल्कि जीवन में मिली चुनौतियों और ठोकरो से ही निखरता और परिपक्व होता है। यही वजह है कि नाना ने जिस रोल को निभाया वह दर्शकों के सीधे दिल तक उतर गया। किसी के भी जमीर को हिला कर रख देने वाला सशक्त कसा हुआ अभिनय करना हर किसी के बस की बात नहीं ये तो बस यदाकदा ही विश्वनाथ गजानन पाटेकर जैसे विरले ही ऐसा हुनर रखते हैं। ये वही अभिनेता है जो सिर्फ रील में ही नहीं बल्कि रियल लाइफ में भी किसी हीरो से कम नहीं थे। तभी तो किसानों की आत्म हत्या हो या उनकी विधवाओं और बच्चों से जुड़ी रोजी रोजगार की समस्या... इन्हें बेचैन कर के रख देती थी। ग्लैमर की इस चकाचौंध से निकल कर आज के दौर में खेत की मिट्टी और किसानों की तकलीफ से जुड़ने की कहां लोगों के पास फ़ुर्सत है। लेकिन इसी सिल्वर स्क्रीन का एक चितेरा... एक देश का लाल जिसे परवाह थी देश के किसानों की उन अनाथ परिवार की। यही वजह है कि, नाना पाटेकर ने न सिर्फ बड़े पर्दे पर अपनी दमदार एक्टिंग के जरिए अलग पहचान बनाई, बल्कि अपने शांत, लगातार किए जाने वाले सामाजिक कार्यों, खासतौर पर भारत के किसानों और जल संकट से जूझते गांवों के लिए दशकों तक सेवा की. सूखाग्रस्त गांवों में किसानों की सुसाइड के मामलों के बीच NAAM फाउंडेशन बनाया और उनकी आवाज बने। बॉलीवुड की चकाचौंध से दूर एक ऐसा अभिनेता, जिसने पर्दे पर तो लाखों किरदार जिए, लेकिन असल जिंदगी में सबसे पहले उन लोगों के लिए खड़ा रहा, जिनकी आवाज अक्सर सत्ता और शोहरत के शोर में दब जाती है। यही सादगी और सेवा भाव उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी छू गया था। नाना पाटेकर का 75 साल की उम्र में निधन हो गया है। उनके जाने की खबर से बॉलीवुड ही नहीं, बल्कि देशभर में उनके प्रशंसकों के बीच शोक की लहर है। सीएम योगी आदित्यनाथ ने भी नाना पाटेकर के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए उनके सामाजिक कार्यों को याद किया। उन्होंने कहा कि पद्म श्री नाना पाटेकर का निधन कला जगत की अपूरणीय क्षति है। मुख्यमंत्री ने उनके अभिनय के साथ-साथ ‘नाम फाउंडेशन’ के जरिए किसानों के लिए किए गए निस्वार्थ काम की भी सराहना की।

जब नाना पाटेकर किसानों के काम के लिए सीएम योगी से मिलने पहुंचे

नाना पाटेकर की सादगी का एक किस्सा खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सुनाया था। मुख्यमंत्री के मुताबिक, जब नाना पाटेकर किसानों के लिए किए जा रहे अपने काम को लेकर उनसे मिलने आए और उन्होंने अपना परिचय दिया, तो वह कुछ देर के लिए हैरान रह गए।

योगी आदित्यनाथ ने बताया था कि सामने इतना बड़ा फिल्म अभिनेता था, लेकिन बातचीत का केंद्र उसकी फिल्में या शोहरत नहीं, बल्कि किसान थे। नाना पाटेकर किसानों की समस्याओं को लेकर काम कर रहे थे और वह भी बिना किसी दिखावे के। सीएम योगी ने उनकी इसी बात को खास तौर पर रेखांकित किया था कि इतना बड़ा अभिनेता किसानों के लिए काम कर रहा है, लेकिन उसने इसके लिए प्रचार या पब्लिसिटी का सहारा नहीं लिया। वह चुपचाप अपना काम करते रहे। यही सादगी मुख्यमंत्री को सबसे ज्यादा प्रभावित करने वाली बातों में से एक थी।

किसानों के असली हीरो थे नाना पाटेकर

अपनी गहरी और दमदार आवाज, लीक से हटकर बिल्कुल अलहदा अंदाज और संजीदा अभिनय से पहचान बनाने वाले नाना पाटेकर की जिंदगी का एक ऐसा पक्ष भी था, जो फिल्मों की चमक-दमक से बिल्कुल अलग था। वह था किसानों और जरूरतमंदों के लिए उनका लगातार काम करना। नाना पाटेकर के लिए किसान सिर्फ खबरों का हिस्सा नहीं थे। महाराष्ट्र के कई इलाकों में सूखे और कर्ज के कारण किसानों की आत्महत्या की खबरें सामने आती थीं। किसान परिवारों की बदहाली ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया था।

एक पुराने इंटरव्यू में भी वह किसानों की स्थिति, फसल खराब होने और आत्महत्या जैसे गंभीर मुद्दों पर बात करते हुए भावुक नजर आए थे। उन्हें इस बात की चिंता थी कि किसान के चले जाने के बाद उसके परिवार का क्या होगा? उसकी पत्नी और बच्चों के सामने जिंदगी कैसे चलेगी? यही सवाल आगे चलकर उनके सामाजिक काम की बड़ी वजह बना।

डेढ़ करोड़ की कार छोड़ किसानों के लिए लगा दिए पैसे

नाना पाटेकर से जुड़ा एक किस्सा उनके संवेदनशील व्यक्तित्व को समझने के लिए काफी है। बताया जाता है कि वह करीब 1.5 करोड़ रुपये की एक लग्जरी कार खरीदने की तैयारी कर रहे थे। इसके लिए उन्होंने पैसे भी जुटा लिए थे। इसी दौरान उन्होंने टीवी पर किसानों की आत्महत्या से जुड़ी खबरें देखीं। किसानों की स्थिति ने उन्हें इतना प्रभावित किया कि उन्होंने कार खरीदने का फैसला बदल दिया। कार के लिए जुटाई गई रकम किसानों की मदद में लगाने का निर्णय लिया।

यह फैसला केवल एक महंगी कार छोड़ने का नहीं था। बल्कि नाना पाटेकर जैसे अभिनेता की संजीदगी को भी दर्शाता है कि कैसे एक अभिनेता अपनी निजी खुशी से ज्यादा किसी जरूरतमंद परिवार की जिंदगी को महत्व देता है।

सिर्फ आर्थिक मदद नहीं, गांवों को पानी देने की कोशिश

नाना पाटेकर का सामाजिक काम केवल किसान परिवारों को आर्थिक सहायता देने तक सीमित नहीं रहा। NAAM Foundation ने महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त इलाकों में जल संरक्षण, नदियों और नालों के पुनर्जीवन, जलस्रोतों को मजबूत करने और गांवों में पानी की उपलब्धता बढ़ाने जैसे काम किए। फाउंडेशन के अनुसार, इन प्रयासों के जरिए बड़ी संख्या में जलस्रोतों को पुनर्जीवित किया गया और लाखों किसानों को लाभ मिला।नाना का मानना था कि किसान को सिर्फ सहानुभूति नहीं, बल्कि ऐसा सहारा चाहिए जिससे वह दोबारा अपने पैरों पर खड़ा हो सके। यही कारण है कि उनका काम धीरे-धीरे एक सामाजिक आंदोलन का रूप लेता गया।

2015 में शुरू किया ‘नाम फाउंडेशन’

महाराष्ट्र में सूखा, कर्ज और किसानों की आत्महत्या का संकट गंभीर था। ऐसे समय में नाना पाटेकर ने मराठी अभिनेता मकरंद अनासपुरे के साथ मिलकर 2015 में ‘नाम फाउंडेशन’ की शुरुआत की। पुणे से शुरू हुई इस पहल का उद्देश्य सूखे और कर्ज से प्रभावित किसानों तथा उनके परिवारों की मदद करना था। विदर्भ और मराठवाड़ा जैसे इलाकों में किसानों की समस्याओं को समझने और जरूरतमंद परिवारों तक मदद पहुंचाने का काम किया गया। नाना पाटेकर का जोर केवल आर्थिक मदद तक सीमित नहीं था। वह चाहते थे कि किसानों के परिवारों को ऐसा सहारा मिले जिससे वे दोबारा अपने पैरों पर खड़े हो सकें। जल संकट से जूझते गांवों में पानी से जुड़े काम और ग्रामीण जीवन को बेहतर बनाने की कोशिशें भी इसी सोच का हिस्सा रहीं।

लखनऊ में भी दिखी नाना की वही सादगी

नाना पाटेकर हाल ही में लखनऊ आए थे। यहां उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस के विशेष गीत ‘खाकी का सितारा’ की लॉन्चिंग कार्यक्रम में हिस्सा लिया था। इस दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था की भी खुलकर तारीफ की थी। उन्होंने कहा था कि करीब 25 करोड़ की आबादी वाले इतने बड़े राज्य में सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना आसान काम नहीं है। इसके लिए मजबूत नेतृत्व, स्पष्ट नीति और दृढ़ इच्छाशक्ति की जरूरत होती है। उन्होंने यह भी कहा था कि पिछले कई दशकों में उन्होंने उत्तर प्रदेश में काफी बदलाव देखा है। योगी सरकार के नेतृत्व में पुलिस को आधुनिक संसाधन, नई तकनीक और आत्मविश्वास मिला है।


Jyotsana Singh
ABOUT THE AUTHOR

Jyotsana Singh

Content Writer Mail ID - jyotsana.b.singh@gmail.comjyotsana.b.singh@gmail.com

Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

Next Story