2028 तक एशिया बनेगा दुनिया का सबसे बड़ा डेटा नेटवर्क, ‘कैंडल’ प्रोजेक्ट बदलेगा इंटरनेट की रफ्तार

मेटा का 8,000 किमी लंबा ‘कैंडल’ प्रोजेक्ट एशिया-प्रशांत क्षेत्र में इंटरनेट कनेक्टिविटी की नई परिभाषा लिखने जा रहा है। यह सबमरीन केबल जापान, ताइवान, फिलीपींस, इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर को जोड़ेगी। 570 टेराबिट प्रति सेकंड की क्षमता वाली यह केबल 58 करोड़ से अधिक लोगों को तेज़ और भरोसेमंद इंटरनेट देगी, जिससे व्यवसाय, शिक्षा और AI तकनीक में क्रांति आएगी।

Jyotsana Singh
Published on: 8 Oct 2025 8:30 AM IST
Meta Candle Project
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Meta Candle Project (Image Credit-Social Media)

Meta Candle Project: डिजिटल युग में संचार की बढ़ती व्यापकता के साथ अब दुनिया भर में इस तकनीक के बिना विकास की बात करना बेमानी साबित होता है। इस तकनीक के पीछे इंटरनेट इसका अगला सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।

दुनिया भर में कई इंटरनेट सेवा प्रदाता कंपनियां हैं, जिनमें कॉमकास्ट, AT&T, वेरिज़ोन, चार्टर कम्युनिकेशंस और ड्यूश टेलीकॉम जैसी दूरसंचार और केबल कंपनियां शामिल हैं जो इंटरनेट सेवाएं प्रदान करती हैं। इसके अतिरिक्त, जियो, एयरटेल, वोडाफोन आइडिया, NTT और चाइना मोबाइल जैसी कंपनियां भी प्रमुख हैं। स्पेसएक्स स्टारलिंक जैसे अन्य सैटलाइट इंटरनेट प्रदाता भी हैं। वही अब इस लिस्ट फेसबुक और इंस्टाग्राम की मूल कंपनी मेटा का भी नाम शामिल होने जा रहा है। मेटा ने ऐसा कदम उठाया है जो इंटरनेट की असली नींव को बदलने वाला है। कंपनी ने घोषणा की है कि वह एशिया-प्रशांत क्षेत्र में समुद्र के नीचे 8,000 किलोमीटर लंबी 'Candle' नामक केबल बिछाएगी। जिसकी डेटा क्षमता 570 टेराबिट प्रति सेकेंड होगी। यह सिर्फ एक तकनीकी प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि आने वाले दशक के डिजिटल युग की रूपरेखा है। जो 58 करोड़ से ज़्यादा लोगों को तेज़, भरोसेमंद और सस्ती इंटरनेट कनेक्टिविटी मुहैया कराएगी।

एशिया-प्रशांत क्षेत्र की डिजिटल लाइफलाइन बनेगी 'Candle'

मेटा की यह नई अंडर वाटर सबमरीन केबल जापान, ताइवान, फिलीपींस, इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर जैसे देशों को जोड़ते हुए एशिया-प्रशांत क्षेत्र की डिजिटल लाइफलाइन बनेगी। इन देशों में इंटरनेट यूज़र्स की संख्या लगातार बढ़ रही है और Candle उसी रफ्तार को संभालने के लिए तैयार की जा रही है। कंपनी के मुताबिक, यह केबल 24 फाइबर-पेयर तकनीक से लैस होगी।


यह वही तकनीक है जो इसकी पिछली सबसे शक्तिशाली केबल 'Anjana' में इस्तेमाल की गई थी। इस तकनीक से न केवल बैंडविथ बढ़ेगी बल्कि डेटा के ट्रांसमिशन में सुगमता और स्थिरता भी आएगी। सबसे ख़ास बात यह है कि मेटा इस प्रोजेक्ट को क्षेत्रीय टेलीकॉम कंपनियों के साथ मिलकर बना रही है, ताकि इसका प्रभाव स्थानीय स्तर पर भी उपलब्ध किया जा सके।

असल में एशिया-प्रशांत इलाका दुनिया के 58 प्रतिशत इंटरनेट यूज़र्स का घर है। यहां का डिजिटल विकास सीधा-सीधा रोजगार, शिक्षा और व्यापार से जुड़ा है। Candle इस पूरे नेटवर्क को मजबूती देने का काम करेगी, ताकि इंटरनेट की रफ़्तार और पहुंच दोनों में गुणात्मक रूप से दुगुनी तेजी के साथ सुधार हो सके।

बाधा रहित डेटा के आदान-प्रदान की गति बढ़ने से व्यवसायों को भी फायदा

Candle के आने से इंटरनेट का अनुभव पहले से कहीं ज़्यादा तेज़ और सुचारु होगा। इतनी बड़ी क्षमता वाली केबल से डेटा ट्रैफिक अब और आसानी से बह सकेगा। इसका मतलब है कि अब बिना रुकावट वीडियो कॉल की सुविधा, स्ट्रीमिंग में बफरिंग नहीं और ऑनलाइन क्लास या मीटिंग्स में इंटरनेट स्पीड अब कोई बाधा नहीं बनेगी। डेटा के आदान-प्रदान की गति बढ़ने से व्यवसायों को भी फायदा होगा। क्लाउड सर्विस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग जैसी टेक्नोलॉजी पर काम करने वाली कंपनियों के लिए यह एक वरदान साबित हो सकती है। इससे न सिर्फ बड़े शहरों, बल्कि छोटे कस्बों और द्वीपों में भी डिजिटल सुविधा का विस्तार होगा।

कमजोर नेटवर्क क्षेत्र बनेंगे Candle की मदद से डिजिटल रूप से सशक्त

यह केबल एशिया-प्रशांत के देशों को जोड़ने वाला एक आधुनिक डिजिटल पुल बनेगी। जापान से सिंगापुर तक फैले इस नेटवर्क से डेटा प्रवाह में स्थिरता आएगी और इंटरनेट कनेक्टिविटी का दायरा कई गुना बढ़ जाएगा। मेटा का उद्देश्य केवल इंटरनेट तेज़ करना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि तकनीक हर व्यक्ति तक समान रूप से पहुंचे। इस नई कनेक्टिविटी से शिक्षा, ई-कॉमर्स, स्वास्थ्य सेवाओं और उद्यमिता के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुलेंगी। कई ऐसे क्षेत्र, जहां अब तक नेटवर्क कमजोर था, Candle की मदद से डिजिटल रूप से सशक्त बन पाएंगे।

भरोसेमंद नेटवर्क सुरक्षा की रणनीति


समुद्र के नीचे बिछाई जाने वाली केबलें आमतौर पर नेटवर्क का सबसे भरोसेमंद हिस्सा मानी जाती हैं, लेकिन यहां सबसे ज्यादा गहराई के बीच जोखिम को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है। Candle इस चुनौती को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है। समुद्र की गहराइयों के अलावा यह केबल पुराने मार्गों से अलग रास्ते पर भी बिछाई जाएगी, ताकि अगर किसी एक जगह तकनीकी समस्या आए, तो डेटा दूसरे मार्ग से आसानी से प्रवाहित हो सके।

इस 'रिडंडेंसी सिस्टम' से इंटरनेट का बैकबोन पहले से कहीं अधिक मजबूत होगा। इसका मतलब है कि भूकंप, तूफान या किसी आकस्मिक घटना के बावजूद इंटरनेट सेवाओं पर बड़ा असर नहीं पड़ेगा।

ये हैं मेटा की अन्य और परियोजनाएं- 'Bifrost' और 'Waterworth'

मेटा के Candle प्रोजेक्ट के साथ ही इस कंपनी की अन्य परियोजनाएं भी काफी आकर्षक हैं। इसका Bifrost केबल सिस्टम, जो पहले से चालू है, सिंगापुर, इंडोनेशिया, फिलीपींस और अमेरिका को जोड़ता है। 2026 तक यह मेक्सिको तक पहुंच जाएगा। यह केबल 260 Tbps की क्षमता के साथ ट्रांस-पैसिफिक डेटा ट्रैफिक को नई दिशा दे रही है। इसके अलावा, मेटा ने हाल ही में Project Waterworth की घोषणा की है। यह दुनिया की सबसे लंबी सबमरीन केबल परियोजना होगी, जो पांच महाद्वीपों को जोड़ेगी। इसकी लंबाई लगभग 50,000 किलोमीटर होगी और इसमें भी 24 फाइबर-पेयर तकनीक का इस्तेमाल होगा। इसे मेटा का अब तक का सबसे महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट माना जा रहा है, जो उसके भविष्य के AI नेटवर्क और डेटा सेंटरों की नींव बनेगा।


इन सभी पहलों से साफ है कि मेटा अब सिर्फ सोशल मीडिया कंपनी नहीं रही। वह खुद को एक वैश्विक नेटवर्क इन्फ्रास्ट्रक्चर कंपनी के रूप में स्थापित कर रही है। जो डिजिटल युग की सड़कें और पुल बना रही है, जिनसे पूरा इंटरनेट चलेगा।

हालांकि इतनी विशाल परियोजनाओं को पूरा करना आसान नहीं होता। हर देश में अलग-अलग नियम, परमिट और समुद्री मंज़ूरियां लेनी पड़ती हैं। समुद्र के नीचे केबल बिछाने के दौरान प्राकृतिक आपदाओं, भूकंप या तकनीकी गड़बड़ियों का जोखिम भी हमेशा बना रहता है। इतनी बड़ी परियोजनाएं अरबों डॉलर की लागत पर बनती हैं, जिनका रखरखाव और सुरक्षा दोनों चुनौतीपूर्ण होते हैं। साथ ही, समुद्री केबलों के ज़रिए डेटा जासूसी या साइबर अटैक का खतरा भी बना रहता है। लेकिन इन सारी चुनौतियों के बावजूद भी Candle, Bifrost और Waterworth जैसी परियोजनाएं मेटा को 'सोशल नेटवर्क' से अब आगे बढ़कर ' ग्लोबल नेटवर्क' निर्माता कंपनी के रूप में एक नई पहचान दे रही हैं।

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Shweta Srivastava

Shweta Srivastava

Content Writer

मैं श्वेता श्रीवास्तव 15 साल का मीडिया इंडस्ट्री में अनुभव रखतीं हूँ। मैंने अपने करियर की शुरुआत एक रिपोर्टर के तौर पर की थी। पिछले 9 सालों से डिजिटल कंटेंट इंडस्ट्री में कार्यरत हूँ। इस दौरान मैंने मनोरंजन, टूरिज्म और लाइफस्टाइल डेस्क के लिए काम किया है। इसके पहले मैंने aajkikhabar.com और thenewbond.com के लिए भी काम किया है। साथ ही दूरदर्शन लखनऊ में बतौर एंकर भी काम किया है। मैंने लखनऊ यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया एंड फिल्म प्रोडक्शन में मास्टर्स की डिग्री हासिल की है। न्यूज़ट्रैक में मैं लाइफस्टाइल और टूरिज्म सेक्शेन देख रहीं हूँ।

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