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सावधान! आपके बायोमीट्रिक डॉक्यूमेंट्स से जारी हो रहे फर्जी सिम, कंबोडिया और चीन से हो रही डिजिटल अरेस्ट ठगी
Fake SIM Card KYC Scam: नया सिम कार्ड खरीदते समय सतर्क रहें। फर्जी KYC के जरिए साइबर ठग आपके नाम पर सिम एक्टिवेट कर डिजिटल अरेस्ट और ऑनलाइन फ्रॉड को अंजाम दे रहे हैं। जानें पूरा मामला और सुरक्षित रहने के जरूरी उपाय।
Cyber fraud
Fake SIM Card KYC Scam: यदि आप नया सिम कार्ड खरीदने जा रहे हैं, तो बेहद सतर्क रहने की आवश्यकता है। आपके पहचान पत्र और बायोमीट्रिक पहचान का इस्तेमाल कर साइबर जालसाज फर्जी सिम कार्ड एक्टिवेट कर रहे हैं, जिनका इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध और 'डिजिटल अरेस्ट' जैसी बड़ी ठगी में किया जा रहा है। हाल ही में लखनऊ में पूर्व एयरपोर्ट डायरेक्टर से हुई 70 लाख रुपये की सनसनीखेज ठगी के मामले में पुलिसिया कार्रवाई के दौरान इस पूरे गठजोड़ का पर्दाफाश हुआ है।
कैसे शुरू होता है जालसाजी का खेल?
साइबर ठगों और टेलीकॉम दुकानदारों/डिस्ट्रीब्यूटर्स की मिलीभगत से यह फर्जीवाड़ा बेहद शातिराना ढंग से अंजाम दिया जाता है:
दोहरी केवाईसी का झांसा: जब कोई ग्राहक दुकान या डिस्ट्रीब्यूटर के पास नया सिम लेने पहुँचता है, तो वहाँ मौजूद कर्मचारी किसी न किसी बहाने से उसे बरगलाते हैं। तकनीकी खराबी का बहाना बनाकर एक ही दस्तावेज से दो बार सत्यापन (KYC) करा लिया जाता है।
एक ग्राहक को, दूसरा ठगों के पास: दो बार हुई सत्यापन प्रक्रिया के जरिए दो अलग-अलग सिम एक्टिवेट कर लिए जाते हैं। एक सिम असली ग्राहक को दे दिया जाता है, जबकि दूसरा फर्जी सिम दुकानदार या डिस्ट्रीब्यूटर अपने पास एक्टिवेट रख लेता है।
ई-सिम में कन्वर्जन और कंबोडिया-चीन सप्लाई: बाद में इस सक्रिय सिम को ई-सिम (e-SIM) में बदला जाता है और उसका क्यूआर (QR) कोड जनरेट कर टेलीग्राम ऐप के माध्यम से कंबोडिया और चीन में बैठे साइबर माफियाओं को बेच दिया जाता है। इन्हीं भारतीय नंबरों के ज़रिए विदेश में बैठे ठग भारतीयों को शिकार बनाकर 'डिजिटल अरेस्ट' और अन्य फाइनेंशियल फ्रॉड को अंजाम देते हैं।
पूर्व एयरपोर्ट डायरेक्टर से 70 लाख की ठगी का खुलासा
लखनऊ में एयरपोर्ट के पूर्व निदेशक भोलानाथ प्रसाद भगत से हुई 70 लाख रुपये की डिजिटल अरेस्ट ठगी की जांच के दौरान इस नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ:
कड़ी से कड़ी जुड़ी: मामले में पकड़े गए आरोपी सुमित ने खुलासा किया कि वह एयरटेल के सर्विस प्रोवाइडर ईशु यादव से अवैध रूप से एक्टिवेटेड सिम प्राप्त करता था।
₹325 में होता था सौदा: इसके बाद सुमित इन सिमों को प्रवीण नाम के व्यक्ति को 325 रुपये प्रति सिम के हिसाब से बेच देता था। प्रवीण इन सिमों को ई-सिम में बदलकर उनका क्यूआर कोड चीन और कंबोडिया भेजता था।
पुलिस और टेलीकॉम कंपनी का रुख: पुलिस अब फरार आरोपी ईशु यादव की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। उधर, एयरटेल कंपनी प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ऐसे आपराधिक मामलों में संलिप्त डिस्ट्रीब्यूटरों की फ्रेंचाइजी और सदस्यता तुरंत रद्द कर दी जाती है तथा उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाती है।
नया सिम लेते समय बरतें ये जरूरी सावधानियां
अपर पुलिस उपायुक्त (अपराध) किरन यादव ने नागरिकों को पहचान पत्रों के दुरुपयोग से बचने के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं:
एक ही बार कराएं सत्यापन: नया सिम लेते समय यह सुनिश्चित करें कि आपका बायोमीट्रिक या कागजी सत्यापन (KYC) केवल एक ही बार किया जाए।
ओटीपी खुद दर्ज करें: प्रक्रिया के दौरान आपके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर आने वाला ओटीपी (OTP) किसी के साथ शेयर न करें, उसे स्वयं ही दर्ज करें।
सक्रिय सिमों की जांच करें: नया सिम शुरू होने के बाद यह जांच लें कि आपके पहचान पत्र पर केवल एक ही नया नंबर चालू हुआ है, न कि एक से अधिक।
अधिकृत वेंडर्स से ही लें सिम: अपनी व्यक्तिगत पहचान और पहचान पत्रों की प्रतियां केवल आधिकारिक और प्रामाणिक स्टोर्स पर ही सौंपें।
संदेह होने पर तुरंत करें शिकायत: यदि आपको अपने दस्तावेजों के दुरुपयोग का थोड़ा भी संदेह हो, तो बिना देर किए राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं।
अदृश्य विदेशी ठगों के इस पूरे गिरोह की सबसे पहली कड़ी आपकी स्थानीय सिम दुकान ही है। थोड़ी सी जागरूकता और सतर्कता आपको और आपके पहचान पत्रों को इस प्रकार के गंभीर अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराधों का हिस्सा बनने से बचा सकती है।


