Ambaji Temple Mystery: अंबाजी मंदिर में ऐसा क्या है जिसे खुली आंखों से देखना है वर्जित? जानिए श्री बीसा यंत्र का रहस्य

Ambaji Temple Mystery: गुजरात के अंबाजी मंदिर में देवी की मूर्ति की जगह श्री बीसा यंत्र की पूजा क्यों होती है? जानें आंखों पर पट्टी बांधकर पूजा करने की मान्यता, शक्तिपीठ का रहस्य और गब्बर हिल का महत्व।

Jyotsana Singh
Published on: 9 Oct 2026 10:09 AM IST (Updated on: 9 Oct 2026 10:09 AM IST)
Ambaji Temple Mystery: Why Is the Holy Bisa Yantra Not Seen Directly?
X

Ambaji Temple Mystery: Why Is the Holy Bisa Yantra Not Seen Directly?


Ambaji Temple Mystery: नवरात्रि के दिनों में अगर आप गुजरात घूमने का प्लान बना रही हैं, तो अंबाजी मंदिर की यात्रा आपके लिए बेहद खास हो सकती है। गुजरात के बनासकांठा जिले में अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित यह मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ अनोखी पूजा परंपरा के लिए भी प्रसिद्ध है। यहां पहुंचने वाले श्रद्धालु मां अंबा के दर्शन तो करते हैं, लेकिन मंदिर के गर्भगृह में उन्हें देवी की कोई पारंपरिक मूर्ति नजर नहीं आती। यही बात अंबाजी मंदिर को देश के दूसरे प्रमुख देवी मंदिरों से अलग बनाती है। यहां देवी के स्वरूप के रूप में श्री बीसा यंत्र की पूजा की जाती है। इस यंत्र को वस्त्र, मुकुट और चुनरी से सजाया जाता है, जिससे यह दूर से देवी के साकार स्वरूप जैसा दिखाई देता है। मंदिर से जुड़ी कई ऐसी परंपराएं भी हैं, जिन्हें जानकर इस धाम के प्रति श्रद्धा और जिज्ञासा दोनों बढ़ जाती हैं।

अरावली की पहाड़ियों के बीच बसा है मां अंबा का धाम

अंबाजी मंदिर गुजरात के बनासकांठा जिले के अंबाजी कस्बे में स्थित है। अरावली पर्वतमाला के बीच बसे इस तीर्थ का वातावरण सामान्य दिनों में भी आध्यात्मिक नजर आता है। मंदिर सफेद संगमरमर से बना है और इसके शिखर पर लहराता लाल ध्वज इसकी पहचान माना जाता है।

धार्मिक मान्यताओं में मां अंबा को यहां अरासुरी अंबा के नाम से भी जाना जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों से श्रद्धालु पूरे साल यहां पहुंचते हैं, लेकिन नवरात्रि के दौरान मंदिर और आसपास का क्षेत्र विशेष रूप से भक्तों से भर जाता है। अंबाजी सिर्फ गुजरात ही नहीं, बल्कि राजस्थान और देश के दूसरे राज्यों से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी महत्वपूर्ण तीर्थस्थल है।

देवी की मूर्ति की जगह क्यों होती है यंत्र की पूजा?

अंबाजी मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता इसका गर्भगृह है। यहां मां अंबा की कोई पारंपरिक प्रतिमा स्थापित नहीं है। इसके स्थान पर श्री बीसा यंत्र को देवी का स्वरूप मानकर पूजा की जाती है। धार्मिक परंपरा में यंत्र को देवी की शक्ति और दिव्य ऊर्जा का प्रतीक माना जाता है।

मंदिर में इस पवित्र यंत्र का विशेष तरीके से श्रृंगार किया जाता है। उसे वस्त्र, मुकुट और चुनरी से सजाया जाता है। यही कारण है कि श्रद्धालुओं को दूर से देखने पर ऐसा अनुभव होता है जैसे गर्भगृह में मां अंबा का ही स्वरूप विराजमान हो। इस मंदिर की पूजा पद्धति की खास बात यही है कि यहां देवी की आराधना किसी मानवीय आकृति वाली प्रतिमा के बजाय एक पवित्र यंत्र के माध्यम से की जाती है।

श्री बीसा यंत्र से जुड़ी है बेहद अनोखी परंपरा

अंबाजी मंदिर में श्री बीसा यंत्र को लेकर कई विशेष धार्मिक परंपराएं निभाई जाती हैं। मंदिर की मान्यता के अनुसार इस यंत्र को खुली आंखों से देखना वर्जित माना जाता है। यही वजह है कि मंदिर के पुजारी भी पूजा और श्रृंगार की प्रक्रिया विशेष नियमों के साथ करते हैं। मान्यता है कि मुख्य पुजारी आंखों पर पट्टी बांधकर पूजा की प्रक्रिया पूरी करते हैं। यह परंपरा मंदिर के सबसे रहस्यमयी पहलुओं में से एक मानी जाती है। गर्भगृह में श्री बीसा यंत्र की तस्वीर या वीडियो बनाने की अनुमति भी नहीं होती।

इस वजह से अंबाजी मंदिर के गर्भगृह से जुड़ी जानकारी श्रद्धालुओं तक मुख्य रूप से मंदिर की धार्मिक परंपराओं और मान्यताओं के जरिए ही पहुंचती है।

अंबाजी को क्यों माना जाता है शक्तिपीठ?

अंबाजी मंदिर को हिंदू धार्मिक परंपरा में प्रमुख शक्तिपीठों में शामिल किया जाता है। पौराणिक मान्यता के अनुसार, जब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से देवी सती के शरीर को खंडित किया था, तब उनका हृदय इसी स्थान पर गिरा था। इसी धार्मिक मान्यता के कारण अंबाजी को शक्तिपीठ का दर्जा प्राप्त है।

हालांकि सती के अंगों से जुड़ी शक्तिपीठों की कथा धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं पर आधारित है। अलग-अलग धार्मिक ग्रंथों और परंपराओं में शक्तिपीठों की संख्या और उनसे जुड़ी कथाओं में अंतर भी मिलता है। इसलिए इसे आस्था और धार्मिक परंपरा के संदर्भ में ही देखा जाता है।

गब्बर हिल के बिना अधूरी मानी जाती है अंबाजी की यात्रा

अंबाजी मंदिर के दर्शन के बाद श्रद्धालु अक्सर गब्बर हिल की ओर भी जाते हैं। यह पहाड़ी मुख्य मंदिर से कुछ दूरी पर स्थित है और मां अंबा की आराधना में इसका विशेष महत्व माना जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार गब्बर को मां अंबा का प्राचीन और मूल स्थान माना जाता है।

गब्बर पहाड़ी पर अखंड ज्योत के दर्शन श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखते हैं। पहाड़ी तक पहुंचने के लिए सीढ़ियों के साथ रोपवे की सुविधा भी उपलब्ध है। मंदिर आने वाले कई भक्त मुख्य मंदिर के दर्शन के बाद गब्बर हिल जाकर अपनी यात्रा पूरी करते हैं।

गब्बर से जुड़ी पौराणिक कथाएं भी इसे सामान्य पहाड़ी से अलग धार्मिक स्थल बनाती हैं। यही कारण है कि अंबाजी आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर और गब्बर हिल दोनों महत्वपूर्ण पड़ाव माने जाते हैं।

नवरात्रि में अंबाजी का नजारा हो जाता है खास

नवरात्रि के दौरान अंबाजी मंदिर में भक्तों की भीड़ काफी बढ़ जाती है। मां अंबा की आराधना के साथ गुजरात की पारंपरिक संस्कृति भी यहां दिखाई देती है। मंदिर परिसर और आसपास के इलाके में धार्मिक आयोजन और सांस्कृतिक गतिविधियों का माहौल बना रहता है।

गुजरात में नवरात्रि और गरबा का विशेष महत्व है। ऐसे में अंबाजी में नवरात्रि का अनुभव केवल मंदिर दर्शन तक सीमित नहीं रहता। यहां आने वाले श्रद्धालु भक्ति के साथ गुजरात की पारंपरिक संस्कृति की झलक भी देख सकते हैं।

यही वजह है कि नवरात्रि के दौरान गुजरात घूमने वाले लोगों की यात्रा सूची में अंबाजी का नाम अक्सर शामिल रहता है।

अंबाजी मंदिर कैसे पहुंचें?

अंबाजी सड़क मार्ग से गुजरात और राजस्थान के कई प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। रेल से आने वाले यात्रियों के लिए आबू रोड रेलवे स्टेशन एक सुविधाजनक विकल्प है, जो अंबाजी से लगभग 20 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां से टैक्सी या दूसरे स्थानीय साधनों के जरिए मंदिर तक पहुंचा जा सकता है। पालनपुर भी क्षेत्र का एक प्रमुख रेलवे कनेक्शन है।

अगर आप हवाई यात्रा करना चाहती हैं तो अहमदाबाद का सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्रमुख विकल्प है। एयरपोर्ट से अंबाजी की दूरी करीब 180 किलोमीटर है। यहां से कैब या टैक्सी लेकर सड़क मार्ग से मंदिर पहुंचा जा सकता है।

मूर्ति नहीं, फिर भी मां के साक्षात स्वरूप जैसी आस्था

अंबाजी मंदिर की सबसे बड़ी खासियत यही है कि यहां देवी की पारंपरिक मूर्ति के बजाय श्री बीसा यंत्र को मां अंबा का स्वरूप मानकर पूजा जाता है। आंखों पर पट्टी बांधकर पूजा करने की परंपरा, गर्भगृह की तस्वीरें लेने पर रोक, शक्तिपीठ से जुड़ी पौराणिक मान्यता और गब्बर हिल की धार्मिक महत्ता इस मंदिर को देश के दूसरे देवी धामों से अलग पहचान देती है। नवरात्रि में अगर आप गुजरात की यात्रा पर निकल रहे हैं, तो अंबाजी मंदिर के दर्शन आस्था, परंपरा और रहस्यमयी धार्मिक मान्यताओं को करीब से महसूस करने वाला अनोखा और यादगार अवसर साबित हो सकता है।

Jyotsana Singh
ABOUT THE AUTHOR

Jyotsana Singh

Content Writer Mail ID - jyotsana.b.singh@gmail.comjyotsana.b.singh@gmail.com

Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

Next Story