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देश का सबसे बड़ा महा त्रिशूल अब अयोध्या में, दर्शन को उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
Ayodhya Maha Trishul:500 साल पुराने विघ्नेश्वर धाम में स्थापित हुआ 60 फीट ऊंचा महा त्रिशूल, दर्शन के लिए उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
Ayodhya Maha Trishul: India's Largest Maha Trishul Installed in Ayodhya, Devotees Gather
Ayodhya Maha Trishul:सावन के पवित्र महीने में जब चारों दिशाएं महादेव के प्रति आस्था और भक्ति से गुंजाएमान हो रही हैं ऐसे में अयोध्या की धार्मिक धरती एक ऐतिहासिक क्षण की साक्षी बनी। शहर से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित पांच सौ वर्ष पुराने विघ्नेश्वर धाम शिवाला मंदिर में 60 फीट ऊंचे और 11 फीट चौड़े विशाल महा त्रिशूल की स्थापना की गई। दावा किया जा रहा है कि यह देश का सबसे बड़ा महा त्रिशूल है। वैदिक मंत्रों, हर-हर महादेव के जयघोष और हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी ने इस भव्य त्रिशूल की स्थापना के अवसर पर आस्था, श्रद्धा और सनातन परंपरा का भव्य उत्सव देखने को मिला।
शिव भक्ति के जयघोष से गूंज उठा प्राचीन विघ्नेश्वर धाम शिवाला मंदिर
अयोध्या के शाहगंज बाजार के पास रमपुरवा गांव स्थित प्राचीन विघ्नेश्वर धाम शिवाला मंदिर में सोमवार को महा त्रिशूल की स्थापना विधि-विधान के साथ संपन्न हुई। लगभग 500 वर्ष पुराने इस मंदिर में स्थापित 60 फीट ऊंचा और 11 फीट चौड़ा महा त्रिशूल श्रद्धालुओं के आकर्षण का नया केंद्र बन गया है। मंदिर प्रबंधन का दावा है कि यह देश का सबसे बड़ा महा त्रिशूल है। हजारों की संख्या में पहुंचे श्रद्धालुओं ने इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनकर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त किया।
दो दिन तक चला धार्मिक अनुष्ठान
महा त्रिशूल की स्थापना केवल एक निर्माण कार्य नहीं बल्कि विस्तृत धार्मिक अनुष्ठानों के बाद संपन्न हुई। रविवार सुबह से 24 घंटे का अखंड 'ॐ नमः शिवाय' जप शुरू हुआ। सोमवार सुबह जप पूर्ण होने के बाद सुबह 8 बजे से 10 बजे तक 365 पुजारियों ने एक साथ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन, पूजन और पुष्प-अक्षत अर्पित किए।
इसके बाद सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे के बीच विशेष पूजा के साथ क्रेन की सहायता से विशाल महा त्रिशूल को उसके निर्धारित स्थान पर स्थापित किया गया। स्थापना पूर्ण होने के बाद संतों और विद्वानों ने श्रद्धालुओं को धर्म और सनातन संस्कृति का संदेश दिया।
भंडारे में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब
महा त्रिशूल की स्थापना के बाद मंदिर परिसर में विशाल भंडारे का आयोजन किया गया। हजारों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया। सुबह से ही भक्त शिवलिंग पर जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए मंदिर पहुंचते रहे। सावन के महीने में पहले से ही इस मंदिर में श्रद्धालुओं की अच्छी संख्या रहती है, लेकिन इस विशेष आयोजन के कारण भक्तों की भीड़ कई गुना अधिक रही।
क्या है त्रिशूल का धार्मिक महत्व?
सनातन धर्म में त्रिशूल भगवान शिव का प्रमुख आयुध माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार त्रिशूल के तीन फलक सृष्टि के तीन मूल तत्वों सृजन, पालन और संहार का प्रतीक हैं। इन्हें ब्रह्मा, विष्णु और महेश के स्वरूप से भी जोड़ा जाता है। एक अन्य मान्यता के अनुसार त्रिशूल मनुष्य के तीन प्रकार के कष्ट दैहिक, दैविक और भौतिक के नाश का प्रतीक है। शिव मंदिरों में स्थापित त्रिशूल केवल धार्मिक पहचान नहीं बल्कि नकारात्मक शक्तियों से रक्षा और सकारात्मक ऊर्जा के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है।
500 साल पुराना है विघ्नेश्वर धाम
विघ्नेश्वर धाम शिवाला मंदिर अयोध्या क्षेत्र के प्राचीन शिव मंदिरों में शामिल माना जाता है। मंदिर की पहचान केवल इसकी प्राचीनता से नहीं, बल्कि यहां की विशिष्ट परंपराओं से भी जुड़ी है। मंदिर के पुजारी अमित योगी के अनुसार यहां 365 पुजारियों की सेवा व्यवस्था लंबे समय से चली आ रही है, जो इस धाम की विशेष पहचान है। सावन, महाशिवरात्रि और अन्य शिव पर्वों पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन और जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं।
सनातन संस्कृति का नया प्रतीक बनेगा महा त्रिशूल
मंदिर के पुजारी अमित योगी का कहना है कि महा त्रिशूल की स्थापना केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सनातन संस्कृति और शिवभक्ति के संदेश को आगे बढ़ाने का प्रयास है। उनका विश्वास है कि यह विशाल त्रिशूल आने वाले समय में देशभर के शिवभक्तों और धार्मिक पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा।
उन्होंने बताया कि इस आयोजन के लिए लंबे समय से तैयारियां चल रही थीं और श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए मंदिर परिसर तथा आसपास व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी।
कई प्रमुख लोग रहे मौजूद
इस धार्मिक आयोजन में गोसाईंगंज के पूर्व विधायक इंद्रप्रताप तिवारी 'खब्बू', पूर्व विधायक गोरखनाथ बाबा, अमित योगी, अनिल उपाध्याय, मेडिकल कॉलेज के विभागाध्यक्ष डॉ. विनोद आर्य, शरद तिवारी, दिग्विजय सिंह, डॉ. राकेश गुप्त, धर्मेंद्र सिंह सहित अनेक संत, सामाजिक कार्यकर्ता और हजारों शिवभक्त शामिल हुए। धार्मिक जानकारों का मानना है कि 60 फीट ऊंचे महा त्रिशूल की स्थापना से विघ्नेश्वर धाम की पहचान राष्ट्रीय स्तर पर और मजबूत होगी। अयोध्या में भगवान श्रीराम मंदिर के बाद धार्मिक पर्यटन लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में यह नया आकर्षण शिवभक्तों के साथ-साथ देशभर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को भी अपनी ओर आकर्षित कर सकता है।


