बेड़ी हनुमान मंदिर: जंजीरों में क्यों बंधे हैं संकटमोचन? समुद्र भी मानता है आदेश

Bedi Hanuman Temple Puri: पुरी के बेड़ी हनुमान मंदिर का रहस्य जानें, जहां हनुमान जी जंजीरों में बंधे हैं। कथा, महत्व और मान्यताएं पढ़ें।

Jyotsana Singh
Published on: 2 May 2026 10:14 AM IST
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Bedi Hanuman Temple Puri

Bedi Hanuman Mandir: पुरी की पावन धरती पर हर दिशा में भगवान जगन्नाथ से जुड़ी आस्था की गूंज सुनाई देती है। यहां श्रीजगन्नाथ मंदिर की महिमा जितनी विशाल है, उतनी ही अद्भुत हैं उससे जुड़ी मान्यताएं, परंपराएं और यहां मौजूद देवस्थल भी है । इन्हीं पवित्र स्थलों में एक है बेड़ी हनुमान मंदिर, जहां भगवान हनुमान जी को जंजीरों से बंधे स्वरूप में पूजा जाता है। यह दृश्य पहली बार देखने वाले श्रद्धालुओं को आश्चर्यचकित भी करता है और भावुक भी, की जो बजरंग बली सबके जीवन के संकट मोचक हैं वो स्वयं जंजीरों में जकड़े हुए हैं। कहा जाता है कि यहां विराजमान हनुमान जी स्वयं पुरी नगरी को समुद्र के प्रकोप से बचाते हैं। इसलिए यह मंदिर श्रद्धा, सुरक्षा, विश्वास और भक्ति का जीवंत प्रतीक माना जाता है।

कहां स्थित है बेड़ी हनुमान मंदिर

बेड़ी हनुमान मंदिर ओडिशा के प्रसिद्ध तीर्थ नगरी पुरी में चक्रतीर्थ रोड पर समुद्र तट के समीप स्थित है। यह श्रीजगन्नाथ मंदिर से लगभग 3.5 किलोमीटर पूर्व दिशा में है। मंदिर का स्थान ऐसा है जहां एक ओर समुद्र की लहरों का संगीत सुनाई देता है और दूसरी ओर मंदिर की घंटियों की मधुर ध्वनि मन को शांत करती है। यही कारण है कि यहां पहुंचते ही श्रद्धालुओं को एक अलग आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव होता है।

पुरी शहर के किसी भी हिस्से से यहां टैक्सी, ऑटो या स्थानीय साधनों से आसानी से पहुंचा जा सकता है। जगन्नाथ मंदिर आने वाले अधिकांश श्रद्धालु इस मंदिर के दर्शन भी अवश्य करते हैं।

नाम के पीछे छिपी रोचक कथा

इस मंदिर के नाम में ही इसकी सबसे बड़ी विशेषता छिपी हुई है। बेड़ी शब्द का अर्थ होता है जंजीर या बंधन। मान्यता है कि भगवान हनुमान जी को यहां स्वर्ण जंजीरों से बांधा गया था, इसलिए इस मंदिर का नाम बेड़ी हनुमान मंदिर पड़ा। इसे दरिया महावीर मंदिर भी कहा जाता है। दरिया का अर्थ समुद्र और महावीर भगवान हनुमान का एक प्रसिद्ध नाम है। यानी वे वीर देवता जो समुद्र को नियंत्रित करते हैं और भक्तों की रक्षा करते हैं।

लोककथाओं के अनुसार, एक समय पुरी नगरी को समुद्र के बढ़ते जल से खतरा रहता था। समुद्र की लहरें नगर की सीमा तक पहुंच जाती थीं और लोगों में भय का वातावरण बना रहता था। तब भगवान जगन्नाथ ने अपने परम भक्त और सेवक हनुमान जी को आदेश दिया कि वे समुद्र को नियंत्रित करें और पुरी की रक्षा करें।

हनुमान जी समुद्र तट पर रहकर अपना दायित्व निभाने लगे। लेकिन वे प्रभु जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा के दर्शन किए बिना रह नहीं पाते थे। इसलिए समय-समय पर वे जगन्नाथ मंदिर की ओर चले जाते थे। मान्यता है कि जब हनुमान जी नगर की ओर आते, तो समुद्र भी उनके पीछे-पीछे पुरी में प्रवेश करने लगता था। इससे नगरवासियों को परेशानी होने लगी। तब भगवान जगन्नाथ ने प्रेमपूर्वक हनुमान जी को स्वर्ण बेड़ियों से बांध दिया, ताकि वे अपने स्थान पर रहकर समुद्र को नियंत्रित करें। तभी से यहां स्थापित हनुमान जी बेड़ी हनुमान कहलाए।

प्रतिमा की विशेषता और दिव्य स्वरूप

मंदिर में स्थापित भगवान हनुमान जी की प्रतिमा लगभग चार फीट ऊंची मानी जाती है। उनका मुख पूर्व दिशा की ओर है, जिसे शुभ दिशा माना जाता है। पूर्व दिशा ज्ञान, प्रकाश और जागरण का प्रतीक मानी जाती है। भक्त मानते हैं कि हनुमान जी इस दिशा में देखकर सदैव सतर्क रहते हैं और पुरी की रक्षा करते हैं।

प्रतिमा का स्वरूप अत्यंत प्रभावशाली है। दर्शन करते समय भक्तों को शक्ति, साहस और सुरक्षा का भाव अनुभव होता है। यहां हनुमान जी को कई अन्य नामों से भी पुकारा जाता है, जैसे चारि-चक्र हनुमान, अष्टभुजा हनुमान और दरिया महावीर।

इतिहास और धार्मिक महत्व

हालांकि मंदिर की स्थापना की सटीक तिथि स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं है, लेकिन यह मंदिर सदियों पुराना माना जाता है और पुरी की धार्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जगन्नाथ संस्कृति में भगवान हनुमान को विशेष स्थान प्राप्त है। पुरी में हनुमान जी के कई रूपों की पूजा होती है, लेकिन बेड़ी हनुमान का स्वरूप सबसे अनोखा और प्रसिद्ध है।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर ने वर्षों से पुरी को समुद्री आपदाओं से बचाने का प्रतीकात्मक दायित्व निभाया है। यही कारण है कि यहां केवल स्थानीय लोग ही नहीं, बल्कि देशभर से श्रद्धालु दर्शन करने आते हैं।

मंदिर की पूजा परंपरा

इस मंदिर में प्रतिदिन सुबह से शाम तक नियमित पूजा-अर्चना होती है। प्रातःकाल मंगला आरती से दिन की शुरुआत होती है। इसके बाद भोग, मंत्रोच्चार और विशेष पूजा होती है। शाम के समय आरती में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं।

मंगलवार और शनिवार को यहां विशेष भीड़ रहती है क्योंकि ये दिन हनुमान जी की पूजा के लिए अत्यंत शुभ माने जाते हैं। भक्त सिंदूर, नारियल, लाल वस्त्र, चमेली का तेल और प्रसाद चढ़ाते हैं। कई लोग यहां बैठकर हनुमान चालीसा और सुंदरकांड का पाठ भी करते हैं। माना जाता है कि यहां सच्चे मन से प्रार्थना करने पर भय, संकट, शत्रु बाधा और मानसिक परेशानियां दूर होती हैं।

प्रमुख उत्सव और विशेष आयोजन

हनुमान जयंती के अवसर पर मंदिर का दृश्य अत्यंत भव्य होता है। मंदिर को फूलों, दीपों और रंगीन सजावट से सजाया जाता है। सुबह से रात तक भजन, कीर्तन, सुंदरकांड पाठ और विशेष पूजा का आयोजन होता है। हजारों श्रद्धालु इस दिन दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

राम नवमी के अवसर पर भी यहां विशेष पूजा होती है क्योंकि भगवान हनुमान को श्रीराम का परम भक्त माना जाता है। दीपावली पर मंदिर दीपों की रोशनी से जगमगा उठता है।

पुरी की विश्वप्रसिद्ध रथ यात्रा के दौरान भी इस मंदिर का महत्व बढ़ जाता है। देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालु जगन्नाथ दर्शन के साथ बेड़ी हनुमान के दर्शन को भी शुभ मानते हैं।

रहस्य और लोकविश्वास

बेड़ी हनुमान मंदिर से कई लोकविश्वास जुड़े हुए हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि जब भी समुद्र उग्र होता है, हनुमान जी पुरी की रक्षा करते हैं। कुछ लोग यह भी मानते हैं कि समुद्र की सीमा से पुरी सुरक्षित रहने में इस मंदिर की दिव्य शक्ति का योगदान है।

भक्तों का विश्वास है कि यहां मनोकामना मांगने पर कार्य सिद्ध होते हैं। जो लोग भय, बाधा, शत्रु कष्ट या मानसिक तनाव से परेशान होते हैं, वे यहां आकर विशेष शांति अनुभव करते हैं। इस मंदिर का वातावरण भी रहस्यमय और शांत माना जाता है। समुद्र तट के समीप स्थित होने के कारण यहां ध्यान और भक्ति का अनुभव और गहरा हो जाता है।

पर्यटन की दृष्टि से क्यों खास है यह मंदिर

बेड़ी हनुमान मंदिर धार्मिक महत्व के साथ-साथ पर्यटन की दृष्टि से भी बेहद आकर्षक है। यहां आने वाले पर्यटक केवल दर्शन ही नहीं करते, बल्कि मंदिर की कथा और समुद्र किनारे स्थित इसकी सुंदरता को भी अनुभव करते हैं।

जो लोग पुरी घूमने आते हैं, वे श्रीजगन्नाथ मंदिर, समुद्र तट, चक्रतीर्थ और बेड़ी हनुमान मंदिर को अपनी यात्रा में शामिल करते हैं। यहां का शांत वातावरण परिवारों, बुजुर्गों और आध्यात्मिक यात्रियों के लिए विशेष रूप से अनुकूल माना जाता है। सुबह और शाम का समय यहां आने के लिए सबसे सुंदर माना जाता है। उस समय समुद्र की ठंडी हवा और मंदिर का वातावरण मन को प्रसन्न कर देता है।

कैसे पहुंचें

पुरी रेलवे स्टेशन देश के कई बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है। स्टेशन से मंदिर तक टैक्सी और ऑटो आसानी से मिल जाते हैं। निकटतम हवाई अड्डा भुवनेश्वर में है, जो लगभग 60 किलोमीटर दूर है। वहां से सड़क मार्ग द्वारा पुरी पहुंचा जा सकता है।

पुरी शहर के भीतर स्थानीय परिवहन सुविधाएं अच्छी हैं, इसलिए श्रद्धालुओं को यहां पहुंचने में कोई कठिनाई नहीं होती।

यात्रा का उचित समय

सर्दियों का समय यहां आने के लिए सबसे अच्छा माना जाता है। इस दौरान मौसम सुहावना रहता है और समुद्र तट पर घूमने का आनंद भी बढ़ जाता है। लेकिन गर्मियों में भी दर्शन किए जा सकते हैं, बस दोपहर के समय गर्मी अधिक रहती है।

रथ यात्रा और हनुमान जयंती के समय यहां विशेष उत्साह देखने को मिलता है, हालांकि भीड़ भी अधिक रहती है। यदि आप कभी जगन्नाथ पुरी जाएं, तो इस अद्भुत मंदिर के दर्शन अवश्य करें। यहां का अनुभव जीवनभर स्मरणीय रहेगा।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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