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‘मेरे तो गिरधर गोपाल...’ जहां राधा नहीं, मीरा के साथ विराजते हैं भगवान श्रीकृष्ण
Jagat Shiromani Temple: जयपुर के आमेर स्थित इस मंदिर में श्रीकृष्ण के साथ राधा नहीं, मीरा बाई की पूजा होती है। जानें इतिहास, मान्यता और खासियत।
Jagat Shiromani Temple: Where Lord Krishna Is Worshipped With Meera, Not Radha
Jagat Shiromani Temple: 'मेरे तो गिरधर गोपाल, दूजो न कोई...' मीरा बाई का यह अमर भजन सुनते ही कृष्ण के प्रति उनकी अनन्य भक्ति, समर्पण और आस्था की एक तस्वीर सी आंखों के सामने उतर आती है। मीरा के लिए कृष्ण सिर्फ आराध्य नहीं, बल्कि उनके जीवन का एकमात्र सहारा और प्रेम थे। राजस्थान की धरती पर आज भी मीरा और कृष्ण की इसी अद्भुत भक्ति की कहानी से जुड़ा एक ऐसा मंदिर मौजूद है, जो अपनी अनूठी परंपरा के कारण देश ही नहीं, दुनिया भर में खास पहचान रखता है। जयपुर के आमेर में स्थित जगत शिरोमणि मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के साथ राधा नहीं, बल्कि उनकी परम भक्त मीरा बाई विराजमान हैं। यही वजह है कि आमेर का यह प्राचीन मंदिर कृष्ण-भक्ति की उस अनोखी परंपरा को जीवंत करता है, जहां भक्त और भगवान के रिश्ते को सदियों से आस्था के साथ पूजा जाता रहा है।
आमेर की पहाड़ियों के बीच स्थित जगत शिरोमणि मंदिर आस्था के साथ-साथ इतिहास, स्थापत्य और लोककथाओं का भी अनूठा संगम है। खास बात यह है कि मंदिर में स्थापित कृष्ण की मूर्ति को लेकर मान्यता है कि यही वह प्रतिमा है जिसकी पूजा कभी मीरा बाई किया करती थीं।
1599 में शुरू हुआ मंदिर का निर्माण
जगत शिरोमणि मंदिर का इतिहास करीब चार सदियों पुराना है। उपलब्ध ऐतिहासिक जानकारी के अनुसार इसका निर्माण आमेर के शासक महाराजा मानसिंह प्रथम के शासनकाल में कराया गया था। मंदिर की नींव वर्ष 1599 में रखी गई और इसका निर्माण 1608 में पूरा हुआ। बताया जाता है कि महारानी कनकवती की इच्छा पर महाराजा मानसिंह प्रथम ने अपने पुत्र जगत सिंह की स्मृति में इस मंदिर का निर्माण कराया था। इसी वजह से इसे ‘जगत शिरोमणि’ नाम मिला।
मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं था, बल्कि उस दौर की स्थापत्य कला का भी शानदार उदाहरण है। निर्माण में स्थानीय पीले पत्थर के साथ सफेद और काले संगमरमर का इस्तेमाल किया गया है। मंदिर की नक्काशी में हाथी, घोड़े, देवी-देवताओं और पौराणिक कथाओं से जुड़े प्रसंग दिखाई देते हैं।
कृष्ण के साथ मीरा की पूजा है सबसे खास
इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता गर्भगृह में विराजमान श्रीकृष्ण और मीरा बाई की प्रतिमाएं हैं। आमतौर पर कृष्ण मंदिरों में राधा को उनके साथ देखा जाता है, लेकिन यहां कृष्ण के साथ मीरा की पूजा होती है। यही वजह है कि जगत शिरोमणि मंदिर को कृष्ण-मीरा भक्ति परंपरा से जुड़ा बेहद खास स्थल माना जाता है।
मंदिर के पुजारी गौरी शंकर शर्मा के अनुसार, यहां भगवान विष्णु की भी पूजा होती है। स्थानीय मान्यता के मुताबिक मंदिर में स्थापित कृष्ण प्रतिमा वही प्रतिमा है, जिसकी मीरा बाई पूजा करती थीं। हालांकि इस दावे को ऐतिहासिक रूप से प्रमाणित तथ्य की बजाय स्थानीय धार्मिक मान्यता के रूप में देखा जाता है।
मंदिर की वास्तुकला भी खींचती है ध्यान
जगत शिरोमणि मंदिर का स्थापत्य इसे दूसरे मंदिरों से अलग पहचान देता है। मंदिर का मंडप दो मंजिला है। ऊपरी हिस्से में भगवान विष्णु की प्रतिमा है, जबकि निचले हिस्से में श्रीकृष्ण और मीरा बाई विराजमान हैं।
मुख्य कक्ष के सामने भगवान विष्णु के वाहन गरुड़ की विशाल प्रतिमा हाथ जोड़े खड़ी है। मंदिर के प्रवेश द्वार पर संगमरमर के खूबसूरत तोरण बने हैं और दोनों ओर हाथियों की प्रतिमाएं इसकी भव्यता बढ़ाती हैं। दीवारों और छतों पर बनी नक्काशी और भित्तिचित्र यहां आने वाले पर्यटकों का ध्यान खींचते हैं।
11.70 लाख रुपये में बना था पूरा मंदिर
आज जिस मंदिर की ऐतिहासिक भव्यता पर्यटकों को आकर्षित करती है, उसके निर्माण पर उस समय बड़ी रकम खर्च हुई थी। टूरिस्ट गाइड महेश शर्मा के अनुसार मंदिर का निर्माण तीन प्रमुख चरणों में हुआ था।
गर्भगृह वाले हिस्से के निर्माण पर करीब 9.72 लाख रुपये, गरुड़ छतरी पर लगभग 1.25 लाख रुपये और तोरण द्वार के निर्माण पर करीब 80 हजार रुपये खर्च हुए थे। इस तरह उस समय मंदिर के निर्माण की कुल लागत लगभग 11.70 लाख रुपये बताई जाती है। 16वीं-17वीं सदी के दौर के हिसाब से यह काफी बड़ी राशि थी।
फिल्मों की शूटिंग का भी रहा आकर्षण
ऐतिहासिक खूबसूरती के कारण जगत शिरोमणि मंदिर केवल श्रद्धालुओं और इतिहास प्रेमियों को ही आकर्षित नहीं करता। यह फिल्म निर्माताओं के लिए भी पसंदीदा लोकेशन रहा है। यहां ‘धड़क’, ‘लम्हे’, ‘तलाश’, ‘हमराज’ और ‘भूल भुलैया’ जैसी फिल्मों की शूटिंग किए जाने की जानकारी मिलती है। मंदिर और आमेर की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि कई डॉक्यूमेंट्री के लिए भी इस्तेमाल की गई है।
जन्माष्टमी पर उमड़ते हैं श्रद्धालु
जन्माष्टमी के मौके पर इस मंदिर का माहौल खास हो जाता है। सुबह से ही श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है। दूर-दराज से लोग श्रीकृष्ण और मीरा बाई के दर्शन के लिए आमेर पहुंचते हैं। भक्तों के बीच यह भी मान्यता है कि यहां सच्चे मन से प्रार्थना करने पर मनोकामना पूरी होती है। आमेर आने वाले पर्यटकों के लिए भी यह मंदिर एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। यहां इतिहास, भक्ति और राजस्थानी स्थापत्य एक ही जगह दिखाई देते हैं। यही वजह है कि जगत शिरोमणि मंदिर आज भी आमेर की पहचान से जुड़े उन विरासत स्थलों में शामिल है, जहां श्रीकृष्ण के साथ मीरा की भक्ति की कहानी पत्थरों और प्रतिमाओं के जरिए जीवंत नजर आती है।
जन्माष्टमी पर भक्ति में डूब जाता है जगत शिरोमणि मंदिर
जन्माष्टमी के मौके पर जगत शिरोमणि मंदिर का माहौल भक्ति, उल्लास और कृष्ण प्रेम से सराबोर हो उठता है। सुबह से ही मंदिर में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो जाता है। दूर-दराज से आए भक्त भगवान श्रीकृष्ण और उनकी अनन्य भक्त मीरा बाई के दर्शन के लिए कतार में खड़े नजर आते हैं। मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन और कृष्ण नाम के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो जाता है। आधी रात को श्रीकृष्ण के जन्म के समय होने वाली विशेष पूजा और आरती उत्सव का सबसे भावपूर्ण क्षण होती है। ऐतिहासिक स्थापत्य और दीपों से सजे मंदिर के बीच जन्माष्टमी का अद्भुत मनोहारी दृश्य देखने के लिए असंख्य श्रद्धालुओं की भीड़ एकत्र होती है।


