Kailash Mansarovar: 1000 श्रद्धालुओं का चयन, जानें कब और किस रास्ते से होंगे बाबा कैलाश के दर्शन

Kailash Mansarovar Yatra 2026: कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 के लिए 1000 श्रद्धालुओं का चयन किया गया है। जानिए यात्रा की तारीख, लिपुलेख और नाथू ला रूट, आदि कैलाश की नई सुविधा और पूरी यात्रा से जुड़ी अहम जानकारी।

Jyotsana Singh
Published on: 13 Jun 2026 6:30 AM IST
Kailash Mansarovar Yatra 2026 1000 Pilgrims Selected, Check Route, Schedule and Darshan Details
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Kailash Mansarovar Yatra 2026

Kailash Mansarovar Yatra 2026: हिमालय की गोद में बसे कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील के दर्शन को करोड़ों श्रद्धालु जीवन का सबसे बड़ा आध्यात्मिक सौभाग्य मानते हैं। यह केवल एक तीर्थयात्रा नहीं, बल्कि आस्था, तपस्या और आत्मिक अनुभूति का ऐसा सफर है जो नेपाल और तिब्बत के मनमोहक प्राकृतिक दृश्यों, बर्फ से ढके पहाड़ों, निर्मल झीलों और विशाल खुले आसमान के बीच से होकर गुजरता है। इस पवित्र यात्रा का सबसे विशेष क्षण 'चरण स्पर्श' माना जाता है, जब श्रद्धालुओं को कैलाश पर्वत के आधार तक पहुंचकर उसकी दिव्य उपस्थिति को करीब से महसूस करने का अवसर मिलता है। ऐसे में भगवान शिव के पवित्र धाम कैलाश मानसरोवर के दर्शन का सपना संजोए हजारों श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशखबरी है। करीब पांच साल तक बाधित रहने के बाद दोबारा शुरू हुई कैलाश मानसरोवर यात्रा अब और व्यवस्थित रूप में आगे बढ़ रही है। वर्ष 2026 की यात्रा के लिए विदेश मंत्रालय ने कंप्यूटरीकृत ड्रा के जरिए 1000 तीर्थयात्रियों का चयन कर लिया है। वहीं उत्तराखंड में स्थित आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा पर जाने वालों के लिए भी राहत भरी व्यवस्था की गई है, जिससे यात्रा की प्रक्रिया पहले के मुकाबले काफी आसान हो जाएगी।

4 जुलाई से शुरू होगी कैलाश मानसरोवर यात्रा

विदेश मंत्रालय के अनुसार कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 का आयोजन जुलाई से अगस्त के बीच किया जाएगा। यात्रा की शुरुआत 4 जुलाई से होगी और अगस्त तक विभिन्न जत्थे कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील के दर्शन के लिए रवाना होंगे।

इस बार कुल 1000 श्रद्धालुओं को यात्रा की अनुमति दी गई है। सभी यात्रियों का चयन कंप्यूटर आधारित पारदर्शी और यादृच्छिक प्रक्रिया के माध्यम से किया गया है। मंत्रालय का कहना है कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह निष्पक्ष और लैंगिक संतुलन को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।

लिपुलेख और नाथू ला दर्रों से जाएगी यात्रा

इस वर्ष यात्रा दो प्रमुख मार्गों से संचालित होगी। पहला मार्ग उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे से होकर जाता है, जबकि दूसरा मार्ग सिक्किम के नाथू ला दर्रे से होकर तिब्बत क्षेत्र में प्रवेश करता है। चयनित श्रद्धालुओं को 50-50 यात्रियों के 20 समूहों में विभाजित किया गया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों मार्ग अब वाहन योग्य हैं, जिससे यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुगम हो गई है। हालांकि कुछ हिस्सों में श्रद्धालुओं को पैदल ट्रैकिंग भी करनी होगी।

क्यों खास है कैलाश मानसरोवर यात्रा?

चीन के तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र में स्थित कैलाश पर्वत और मानसरोवर झील को हिंदू धर्म में भगवान शिव का निवास माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि कैलाश पर्वत की परिक्रमा और मानसरोवर में स्नान करने से व्यक्ति को आध्यात्मिक शांति और पुण्य की प्राप्ति होती है।

सिर्फ हिंदू ही नहीं, बल्कि बौद्ध, जैन और बोन धर्म के अनुयायियों के लिए भी यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है। जैन धर्म में इसे पहले तीर्थंकर ऋषभदेव की तपस्थली माना जाता है, जबकि बौद्ध परंपरा में भी इसका विशेष महत्व है।

पांच साल बाद फिर पटरी पर लौटी यात्रा

कैलाश मानसरोवर यात्रा वर्ष 2020 में कोविड-19 महामारी के कारण स्थगित कर दी गई थी। इसके बाद भारत और चीन के बीच पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर उत्पन्न सैन्य तनाव के चलते भी यात्रा शुरू नहीं हो सकी। दोनों देशों के बीच संबंधों में धीरे-धीरे सुधार आने के बाद पिछले वर्ष इस यात्रा को दोबारा शुरू किया गया। अब 2026 में यात्रा का दायरा बढ़ाकर 1000 श्रद्धालुओं तक पहुंचाया गया है, जिसे धार्मिक पर्यटन के लिहाज से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

लिपुलेख मार्ग को लेकर नेपाल ने जताई थी आपत्ति

इस महीने की शुरुआत में नेपाल ने लिपुलेख दर्रे के जरिए यात्रा की तैयारियों पर आपत्ति जताई थी। नेपाल का दावा है कि यह क्षेत्र उसके अधिकार क्षेत्र में आता है। हालांकि भारत ने इस दावे को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि लिपुलेख भारत का अभिन्न हिस्सा है और यात्रा पूर्व निर्धारित व्यवस्था के अनुसार संचालित की जाएगी। इस विवाद का यात्रा कार्यक्रम पर कोई असर नहीं पड़ा है और तैयारियां निर्धारित योजना के अनुसार जारी हैं।

आदि कैलाश यात्रा के लिए नई सुविधा शुरू

कैलाश मानसरोवर यात्रा के साथ-साथ उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा भी लगातार लोकप्रिय हो रही है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए जिला प्रशासन ने एक महत्वपूर्ण सुविधा शुरू की है।

अब यात्रियों को इनर लाइन परमिट बनवाने के लिए अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। पिथौरागढ़ जिला अस्पताल में ही यह सुविधा उपलब्ध करा दी गई है।

मेडिकल जांच के तुरंत बाद मिलेगा परमिट

जिला पर्यटन अधिकारी कीर्ति चंद्र आर्य के अनुसार जिला अस्पताल के कमरा नंबर 10 में विशेष व्यवस्था की गई है। श्रद्धालु अनिवार्य स्वास्थ्य जांच पूरी करने के बाद उसी स्थान से अपना इनर लाइन परमिट प्राप्त कर सकेंगे। इस कदम का उद्देश्य आवेदन प्रक्रिया को तेज और सुविधाजनक बनाना है ताकि यात्रियों का समय बच सके और उन्हें बेहतर अनुभव मिल सके।

पीएम मोदी की यात्रा के बाद बढ़ी श्रद्धालुओं की संख्या

आदि कैलाश यात्रा पिछले कुछ वर्षों में तेजी से लोकप्रिय हुई है। अक्टूबर 2023 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आदि कैलाश दौरे के बाद यहां आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई। प्रशासन का मानना है कि नई व्यवस्थाओं से धार्मिक पर्यटन को और बढ़ावा मिलेगा तथा स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी फायदा पहुंचेगा।

क्या है श्रद्धालुओं के लिए संदेश?

कैलाश मानसरोवर और आदि कैलाश दोनों यात्राएं आध्यात्मिक आस्था के साथ-साथ कठिन पर्वतीय परिस्थितियों से जुड़ी हैं। ऐसे में श्रद्धालुओं को यात्रा से पहले स्वास्थ्य जांच, आवश्यक दस्तावेज और प्रशासनिक दिशानिर्देशों का पालन करना जरूरी है। बेहतर सड़क संपर्क, वाहन योग्य मार्ग और सरल परमिट व्यवस्था के कारण 2026 की यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुगम और सुविधाजनक मानी जा रही है।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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