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काशी विश्वनाथ मंदिर में बड़ा बदलाव, अब वैध ID दिखाकर पूरे दिन इस गेट से मिलेगा प्रवेश
Kashi Vishwanath Temple New Entry Rule 2026: वाराणसी के स्थानीय श्रद्धालुओं को दिनभर मिलेगा काशी द्वार से प्रवेश, जानें नई व्यवस्था
Kashi Vishwanath Temple 2026
Kashi Vishwanath Temple New Entry Rule: काशी विश्वनाथ धाम आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के बीच अब वाराणसी के स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिलने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन ने स्थानीय निवासियों के लिए दर्शन व्यवस्था में अहम बदलाव किया है। अब वाराणसी के निवासी वैध पहचान पत्र दिखाकर दिनभर 'काशी द्वार' (गेट संख्या 4-बी) से मंदिर में प्रवेश कर सकेंगे। इस नई व्यवस्था का उद्देश्य स्थानीय श्रद्धालुओं को सुविधा देना, भीड़ प्रबंधन को बेहतर बनाना और दर्शन प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाना है।
मुख्यमंत्री योगी के निर्देश पर बदली व्यवस्था
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को वाराणसी दौरे के दौरान श्री काशी विश्वनाथ मंदिर प्रशासन को स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए अलग दर्शन मार्ग विकसित करने के निर्देश दिए। इसके बाद मंदिर प्रशासन ने नई व्यवस्था लागू करने का फैसला किया। उप जिलाधिकारी एवं मंदिर अधिकारी शंभू शरण ने बताया कि अब वाराणसी के निवासी वैध पहचान पत्र दिखाकर सुबह 4:15 बजे से रात 10:45 बजे तक काशी द्वार (गेट संख्या 4-बी) के माध्यम से मंदिर में प्रवेश कर सकेंगे। इससे पहले यह सुविधा केवल सुबह 4 से 5 बजे और शाम 4 से 5 बजे तक सीमित थी।
प्रमुख पर्वों पर लागू नहीं होगी सुविधा
मंदिर प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यह विशेष व्यवस्था सामान्य दिनों के लिए होगी। महाशिवरात्रि, सावन, देव दीपावली, श्रावण सोमवार और अन्य प्रमुख धार्मिक अवसरों पर जब मंदिर में अत्यधिक भीड़ रहती है, तब स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए अलग प्रवेश की यह सुविधा उपलब्ध नहीं रहेगी।
ऐसे अवसरों पर सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण को प्राथमिकता देते हुए सामान्य व्यवस्था लागू रहेगी।
भीड़ प्रबंधन होगा और बेहतर
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर देश के सबसे व्यस्त धार्मिक स्थलों में शामिल है। प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यहां बाबा विश्वनाथ के दर्शन के लिए पहुंचते हैं, जबकि सावन, महाशिवरात्रि और त्योहारों के दौरान यह संख्या लाखों तक पहुंच जाती है। मंदिर प्रशासन का मानना है कि स्थानीय श्रद्धालुओं के लिए अलग प्रवेश मार्ग बनाए जाने से सामान्य श्रद्धालुओं की कतारों पर दबाव कम होगा। इससे भीड़ का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा और दर्शन व्यवस्था पहले की तुलना में अधिक व्यवस्थित होगी।
2024 में शुरू हुआ था 'काशी द्वार'
स्थानीय लोगों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए मंदिर ट्रस्ट ने वर्ष 2024 में 'काशी द्वार' यानी गेट संख्या 4-बी से प्रवेश की व्यवस्था शुरू की थी। हालांकि उस समय प्रवेश का समय केवल दो घंटे निर्धारित था। मुख्यमंत्री योगी के निर्देश के बाद अब इस व्यवस्था को पूरे दिन के लिए विस्तारित कर दिया गया है, जिससे वाराणसी के निवासियों को अपनी सुविधा के अनुसार बाबा विश्वनाथ के दर्शन करने का अवसर मिलेगा।
पहचान पत्र दिखाना होगा जरूरी
नई व्यवस्था का लाभ केवल वाराणसी के स्थायी निवासियों को मिलेगा। मंदिर में प्रवेश के समय श्रद्धालुओं को अपना वैध पहचान पत्र दिखाना होगा। पहचान सत्यापित होने के बाद ही उन्हें गेट संख्या 4-बी से प्रवेश की अनुमति मिलेगी। इस कदम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि सुविधा का लाभ केवल पात्र स्थानीय लोगों तक ही पहुंचे।
देश के सबसे प्रमुख शिव मंदिरों में शामिल है काशी विश्वनाथ
श्री काशी विश्वनाथ मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। धार्मिक मान्यता है कि यहां दर्शन और जलाभिषेक करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है। यही कारण है कि देश ही नहीं, विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु वाराणसी पहुंचते हैं। काशी विश्वनाथ धाम कॉरिडोर बनने के बाद मंदिर परिसर पहले की तुलना में कहीं अधिक विशाल और आधुनिक हो गया है। इससे श्रद्धालुओं की आवाजाही आसान हुई है और बड़ी संख्या में दर्शनार्थियों को संभालना भी पहले से अधिक व्यवस्थित हुआ है।
स्थानीय श्रद्धालुओं को मिलेगी बड़ी राहत
नई व्यवस्था लागू होने के बाद वाराणसी के लोगों को अब सीमित समय में दर्शन करने की बाध्यता नहीं रहेगी। वे पूरे दिन निर्धारित समय के भीतर अपनी सुविधा के अनुसार मंदिर पहुंच सकेंगे। माना जा रहा है कि इस फैसले से स्थानीय श्रद्धालुओं की लंबे समय से चली आ रही मांग पूरी होगी। साथ ही मंदिर प्रशासन पर भीड़ का दबाव भी संतुलित रहेगा और बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए भी दर्शन व्यवस्था पहले से अधिक सुचारु हो सकेगी। मुख्यमंत्री योगी के निर्देश के बाद किया गया यह बदलाव काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालु सुविधाओं को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।


