Monsoon Trip 2026: जंगल, झरने और दुर्लभ जीवों का खजाना है कुद्रेमुख नेशनल पार्क, एक बार जरूर करें सफर

Kudremukh National Park Travel Guide 2026: घने जंगल, खूबसूरत झरने, दुर्लभ वन्यजीव और रोमांचक ट्रैकिंग, जानें कर्नाटक के इस शानदार मानसून डेस्टिनेशन की पूरी जानकारी।

Jyotsana Singh
Published on: 5 Jun 2026 3:36 PM IST (Updated on: 5 Jun 2026 3:39 PM IST)
Kudremukh National Park Karnataka with waterfalls and lush green hills monsoon trip 2026
X
Kudremukh National Park Monsoon Trip 2026

Kudremukh National Park Travel Guide 2026: इस बार मानसून के मौसम में अगर आप भीड़भाड़ से दूर प्रकृति के बीच कुछ दिन बिताना चाहते हैं, तो कर्नाटक का कुद्रेमुख नेशनल पार्क आपके लिए एक यादगार रोमांचक विकल्प हो सकता है। पश्चिमी घाट की हरियाली, बादलों से ढकी पहाड़ियां, घने जंगल, दुर्लभ वन्यजीव और रोमांचक ट्रैकिंग रूट्स इस पार्क को देश के सबसे चर्चित खूबसूरत राष्ट्रीय उद्यानों में शामिल करते हैं। करीब 600 वर्ग किलोमीटर में फैला यह पार्क सालभर पर्यटकों का स्वागत करने के लिए खुला रहता है और प्रकृति प्रेमियों से लेकर एडवेंचर पसंद लोगों तक, हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करता है।

पश्चिमी घाट की गोद में बसा है कुद्रेमुख नेशनल पार्क

कुद्रेमुख नेशनल पार्क कर्नाटक के चिकमंगलूर जिले में स्थित है। यह इलाका पश्चिमी घाट का हिस्सा है, जिसे यूनेस्को ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण जैव विविधता क्षेत्रों में शामिल किया है। वर्ष 1987 में इसे राष्ट्रीय उद्यान का दर्जा दिया गया था। आज यह कर्नाटक के सबसे बेहतर संरक्षित जंगलों में गिना जाता है। यह पार्क अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। यहां फैले घास के मैदान, सदाबहार वन, पहाड़ी झरने और धुंध से ढकी चोटियां पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देती हैं। मानसून के दौरान यहां की हरियाली अपने चरम पर होती है, जबकि सर्दियों में मौसम ट्रैकिंग और वन्यजीवों को देखने के लिए आदर्श माना जाता है।

क्यों पड़ा इसका नाम कुद्रेमुख?

स्थानीय कन्नड़ भाषा में कुद्रे का अर्थ घोड़ा और मुख का अर्थ चेहरा होता है। पार्क की सबसे ऊंची पहाड़ी दूर से देखने पर घोड़े के चेहरे जैसी दिखाई देती है, इसलिए इसका नाम कुद्रेमुख पड़ा। यह पर्वत लगभग 1,894 मीटर (6,214 फीट) ऊंचा है और कर्नाटक की दूसरी सबसे ऊंची चोटी मानी जाती है। यह चोटी ट्रैकर्स के बीच काफी लोकप्रिय है और यहां से पश्चिमी घाट का अद्भुत दृश्य दिखाई देता है।

दुर्लभ वन्यजीवों का सुरक्षित आश्रय है ये विशाल पार्क

कुद्रेमुख नेशनल पार्क जैव विविधता के लिहाज से बेहद समृद्ध है। यहां कई ऐसी प्रजातियां पाई जाती हैं जो देश के अन्य हिस्सों में बेहद कम दिखाई देती हैं।

पार्क में शेरपूंछ मकाक, मालाबार विशाल गिलहरी, सांभर, भौंकने वाला हिरण, गौर, जंगली कुत्ते और तेंदुए जैसे वन्यजीव देखे जा सकते हैं। पक्षी प्रेमियों के लिए भी यह जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं है। यहां अनेक दुर्लभ और रंग-बिरंगी पक्षी प्रजातियां देखने को मिलती हैं। वन विभाग के अनुसार यह क्षेत्र कई संकटग्रस्त जीवों के संरक्षण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

ट्रैकिंग और प्रकृति प्रेमियों के लिए स्वर्ग

कुद्रेमुख केवल वन्यजीवों के लिए ही नहीं बल्कि ट्रैकिंग के शौकीनों के लिए भी एक बेहतरीन गंतव्य है। यहां कई प्राकृतिक ट्रेल्स मौजूद हैं जो जंगलों, घास के मैदानों और पहाड़ियों के बीच से होकर गुजरते हैं।

सुबह-सुबह बादलों के बीच ट्रैकिंग करना और पहाड़ियों से सूर्योदय देखना पर्यटकों के लिए यादगार अनुभव बन जाता है। फोटोग्राफी के शौकीनों को भी यहां शानदार प्राकृतिक दृश्य कैद करने का मौका मिलता है।

खनन क्षेत्र से राष्ट्रीय उद्यान बनने तक का सफर

बहुत कम लोग जानते हैं कि कुद्रेमुख क्षेत्र कभी लौह-अयस्क खनन के लिए प्रसिद्ध था। यहां बड़े पैमाने पर खनन गतिविधियां चलती थीं। जिसके उपरांत पर्यावरण विशेषज्ञों और संरक्षणवादियों ने खनन से हो रहे नुकसान को लेकर लगातार आवाज उठाई।

लंबे अभियान और कानूनी प्रयासों के बाद खनन गतिविधियों को सीमित किया गया और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी गई। इसका परिणाम यह हुआ कि आज यह इलाका देश के महत्वपूर्ण वन्यजीव संरक्षण क्षेत्रों में शामिल है।

यहां घूमने का सबसे अच्छा समय

कुद्रेमुख नेशनल पार्क पूरे साल पर्यटकों के लिए खुला रहता है, लेकिन अक्टूबर से मार्च के बीच का समय सबसे सुखद माना जाता है। इस दौरान मौसम ठंडा और साफ रहता है, जिससे जंगल सफारी, ट्रैकिंग और दर्शनीय स्थलों की यात्रा का आनंद दोगुना हो जाता है। मानसून के मौसम में भी यहां का नजारा बेहद खूबसूरत होता है, लेकिन लगातार बारिश के कारण कुछ ट्रैकिंग मार्गों पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है।

टिकट और समय की जानकारी

कुद्रेमुख नेशनल पार्क में प्रवेश के लिए भारतीय पर्यटकों को 200 रुपये प्रति व्यक्ति शुल्क देना होता है। विदेशी पर्यटकों के लिए यह शुल्क 1,000 रुपये प्रति व्यक्ति है। पार्क सुबह 6 बजे से शाम 6 बजे तक खुला रहता है। पूरे दिन के दौरान पर्यटक यहां प्रकृति, वन्यजीवों और खूबसूरत पहाड़ी दृश्यों का आनंद ले सकते हैं।

कैसे पहुंचें कुद्रेमुख?

अगर आप ट्रेन से यात्रा करना चाहते हैं तो सबसे नजदीकी प्रमुख रेलवे स्टेशन मंगलूर सेंट्रल है। यहां से कुद्रेमुख की दूरी लगभग 100 किलोमीटर है। स्टेशन से बस, टैक्सी और अन्य स्थानीय परिवहन सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं। हवाई मार्ग से आने वाले पर्यटक मंगलूर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे तक पहुंच सकते हैं। इसके बाद सड़क मार्ग से कुद्रेमुख जाया जा सकता है। कर्नाटक के प्रमुख शहरों जैसे बेंगलुरु, मंगलूर और चिकमंगलूर से भी यहां सड़क मार्ग द्वारा आसानी से पहुंचा जा सकता है।

क्यों बन रहा है पर्यटकों की पहली पसंद?

आज के समय में जब लोग भीड़भाड़ वाले पर्यटन स्थलों से हटकर प्राकृतिक और शांत जगहों की तलाश कर रहे हैं, तब कुद्रेमुख नेशनल पार्क तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। यहां का शांत वातावरण, स्वच्छ हवा, अनोखी जैव विविधता और रोमांचक ट्रैकिंग अनुभव इसे परिवार, प्रकृति प्रेमियों और एडवेंचर यात्रियों के लिए एक आदर्श डेस्टिनेशन बनाते हैं।

अगर आप इस बार मानव। प्रकृति को करीब से महसूस करना चाहते हैं और पश्चिमी घाट की असली खूबसूरती देखना चाहते हैं, तो कुद्रेमुख नेशनल पार्क आपकी मानसून यात्रा सूची में जरूर होना चाहिए।

Jyotsana Singh
ABOUT THE AUTHOR

Jyotsana Singh

Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

Next Story