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Lucknow Jagannath Rath Yatra 2026: रंग-बिरंगे रथ पर निकले भगवान जगन्नाथ, जयघोष और भक्ति से गूंजा लखनऊ
Lucknow Jagannath Rath Yatra 2026: लखनऊ के ऐशबाग स्थित श्री गौड़ीय मठ से भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की भव्य रथयात्रा निकली। हजारों श्रद्धालुओं ने रथ खींचकर पुण्य लाभ अर्जित किया।
Lucknow Jagannath Rath Yatra 2026
Lucknow Jagannath Rath Yatra 2026: लखनऊ में ऐशबाग स्थित मोतीनगर के श्री गौड़ीय मठ से गुरुवार को भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा श्रद्धा और उत्साह के साथ निकाली गई। भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ फूलों से सजे लकड़ी के रथ पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देने नगर भ्रमण पर निकले। हजारों श्रद्धालुओं ने रथ खींचकर पुण्य लाभ अर्जित किया। पूरे मार्ग में भजन-कीर्तन, संकीर्तन, पुष्पवर्षा और 'जय जगन्नाथ' के जयघोष से वातावरण भक्तिमय बना रहा।
विधि-विधान से हुआ रथयात्रा का शुभारंभ
रथयात्रा का शुभारंभ श्री गौड़ीय मठ के मठाध्यक्ष श्रीपाद भक्ति सुलभ श्रमण महाराज (सुधा सिंधु महाराज) ने वैदिक मंत्रोच्चार और पूजा-अर्चना के साथ किया। उन्होंने भगवान को झूला झुलाया, चंदन और कपूर मिश्रित जल का छिड़काव कर रथ का पूजन किया और आरती उतारी। इसके बाद हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की काष्ठ प्रतिमाओं को अपने कंधों पर उठाकर फूलों से सजे रथ पर विराजमान किया।
दिव्य श्रृंगार बना आकर्षण का केंद्र
भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा का रत्नजड़ित पगड़ी, पीतांबर वस्त्र और आकर्षक आभूषणों से विशेष श्रृंगार किया गया। रंग-बिरंगे वस्त्रों और फूलों से सजे रथ पर विराजमान भगवान के दिव्य स्वरूप के दर्शन के लिए सड़क के दोनों ओर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी।
भजन-कीर्तन और जयघोष से गूंजा शहर
रथयात्रा में सबसे आगे संतगण माता तुलसी को सिर पर विराजमान कर चल रहे थे, जबकि उनके पीछे चैतन्य महाप्रभु का भव्य चित्र था। मृदंग की थाप, बैंडबाजों और संकीर्तन मंडलियों के बीच श्रद्धालु 'जय जय जगन्नाथ स्वामी', 'हरि बोल', 'राधे-राधे' और अन्य भजनों का गायन करते हुए पूरे मार्ग में भक्ति का संदेश देते रहे।
श्रद्धालुओं ने खींचा भगवान का रथ
यात्रा मार्ग पर हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान के स्वागत में झाड़ू लगाई और अपने हाथों से रथ खींचा। धार्मिक मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ के रथ को खींचने से पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इसी आस्था के साथ हर आयु वर्ग के लोग रथयात्रा में शामिल हुए।
जगह-जगह हुआ स्वागत और प्रसाद वितरण
ऐशबाग के शकुंतलम भवन के भक्तों ने भगवान का कमल की माला अर्पित कर स्वागत किया तथा फल और मिष्ठान का भोग लगाया। गणेशगंज में मित्तल परिवार की ओर से भगवान जगन्नाथ की महाआरती और विशेष पूजा की गई। मंदिर समिति की ओर से श्रद्धालुओं के बीच पूड़ी, बूंदी और मीठे चावल का प्रसाद वितरित किया गया। आयोजन के समन्वय और व्यवस्थाओं में अनुपम मित्तल ने भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभाई।
इन मार्गों से होकर निकली रथयात्रा
रथयात्रा श्री गौड़ीय मठ, मोतीनगर से शुरू होकर ऐशबाग रोड, नाका हिण्डोला, बांसमंडी चौराहा, लाटूश रोड, श्रीराम रोड, अमीनाबाद रोड, गणेशगंज, आर्यानगर और मोतीनगर चौराहा होते हुए पुनः श्री गौड़ीय मठ पहुंचकर संपन्न हुई। पूरे मार्ग में श्रद्धालुओं ने पुष्पवर्षा कर भगवान का स्वागत किया।
पुरी की परंपरा का जीवंत स्वरूप
मठाध्यक्ष सुधा सिंधु महाराज ने कहा, 'बद्रीनाथ, केदारनाथ और अमरनाथ जैसी यात्राओं में भक्त भगवान के दर्शन के लिए जाते हैं, लेकिन भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा की विशेषता यह है कि स्वयं भगवान अपने भक्तों को दर्शन देने नगर भ्रमण पर निकलते हैं।' उन्होंने बताया कि यह रथयात्रा जगन्नाथ पुरी की परंपरा पर आधारित है और सामाजिक समरसता, एकता तथा समानता का संदेश देती है। इस अवसर पर असम, कोलकाता, ओडिशा, मुंबई, दिल्ली, कुरुक्षेत्र, मथुरा, वृंदावन, पटना, मुगलसराय, काशी और प्रयागराज सहित देश के विभिन्न हिस्सों से आए संतों और श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ की पूजा-अर्चना कर रथयात्रा में सहभागिता निभाई।


