Moti Dungri Mehndi: जयपुर की इस ‘चमत्कारी मेहंदी’ के लिए क्यों मची मारामारी? राज जानकर रह जाएंगे हैरान

Moti Dungri Mehndi: जयपुर के मोती डूंगरी गणेश मंदिर की मेहंदी को शादी की मनोकामना से जोड़कर देखा जाता है। जानें 200 साल पुरानी परंपरा और पूरी कहानी।

Jyotsana Singh
Published on: 15 Sept 2026 10:45 AM IST (Updated on: 15 Sept 2026 10:45 AM IST)
Moti Dungri Mehndi: Why Devotees Queue for This Jaipur Ganesh Temple Henna
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Moti Dungri Mehndi: Why Devotees Queue for This Jaipur Ganesh Temple Henna

Moti Dungri Mehndi: जयपुर में इन दिनों एक खास तरह की मेहंदी चर्चा में है। गणेश चतुर्थी से पहले मोती डूंगरी गणेश मंदिर में मिलने वाली इस मेहंदी को लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। कई लोग घंटों कतार में खड़े रहे तो कहीं भीड़ संभालने की स्थिति बन गई। खास बात यह है कि इस मेहंदी को लेकर मान्यता शादी से जुड़ी है। कहा जाता है कि भगवान गणेश को अर्पित की गई यह मेहंदी लगाने से विवाह में आ रही रुकावटें दूर होती हैं और शादी के योग जल्दी बनते हैं।

आइए जानते है कि जयपुर की आखिर इस मेहंदी में ऐसा क्या खास होता है? क्या वाकई यह चमत्कारी है या इसके पीछे सदियों से चली आ रही आस्था और परंपरा है? जानते हैं पूरी कहानी।

200 साल से चली आ रही है मेहंदी चढ़ाने की परंपरा

जयपुर का मोती डूंगरी गणेश मंदिर शहर के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शामिल है। सरकारी पर्यटन पोर्टल के अनुसार, मंदिर का निर्माण सेठ जय राम पालीवाल ने कराया था और इससे जुड़ी एक प्रसिद्ध कथा में भगवान गणेश की प्रतिमा को बैलगाड़ी से लाए जाने का जिक्र मिलता है। जहां बैलगाड़ी रुकी, वहीं मंदिर बनाए जाने की मान्यता है। मंदिर में गणेश चतुर्थी से पहले सिंजारा उत्सव मनाया जाता है। इसी दौरान भगवान गणेश को मेहंदी अर्पित करने की परंपरा है। मंदिर से जुड़े लोगों और स्थानीय रिपोर्टों के मुताबिक यह रस्म करीब 200 वर्षों से चली आ रही है। पहले भगवान को लगभग सवा किलो मेहंदी चढ़ाई जाती थी, लेकिन श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने के साथ इसका पैमाना भी लगातार बढ़ता गया।

इस बार 35 क्विंटल मेहंदी की व्यवस्था

2026 के सिंजारा उत्सव के लिए करीब 35 क्विंटल यानी 3,500 किलो मेहंदी मंगाए जाने की जानकारी सामने आई है। यह मेहंदी राजस्थान के पाली जिले के सोजत क्षेत्र से लाई जाती है, जो मेहंदी उत्पादन के लिए प्रसिद्ध है। भगवान गणेश को मेहंदी अर्पित करने के बाद इसे प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं में बांटा जाता है। यही वजह है कि मेहंदी वितरण के समय मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में बड़ी भीड़ दिखाई देती है। इस साल भी श्रद्धालु रात से ही कतार में पहुंचने लगे थे और खासकर अविवाहित युवक-युवतियों में इसे पाने को लेकर काफी उत्साह देखा गया।

‘सिद्ध मेहंदी’ को लेकर क्या है मान्यता?

इस मेहंदी को लेकर सबसे चर्चित मान्यता विवाह की मनोकामना से जुड़ी है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि गणेशजी को अर्पित मेहंदी का प्रसाद हाथों में लगाने से शादी में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। कुछ लोगों के बीच तो यह विश्वास भी प्रचलित है कि इससे जल्द विवाह के योग बनते हैं। इसी वजह से कुंवारे युवक-युवतियां और उनके परिवार इस मेहंदी को लेने पहुंचते हैं।

मनोकामना पूरी होने के बाद कुछ श्रद्धालु अगले साल मंदिर पहुंचकर भगवान गणेश को अपनी शादी का पहला निमंत्रण पत्र चढ़ाते हैं। इस तरह मेहंदी की परंपरा सिर्फ प्रसाद लेने तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह परिवारों की व्यक्तिगत आस्था और मनौती से भी जुड़ जाती है।

क्या सच में मेहंदी से शादी पक्की होती है?

भगवान गणेश को हिंदू परंपरा में विघ्नहर्ता यानी बाधाओं को दूर करने वाला माना जाता है। इसी धार्मिक विश्वास के साथ विवाह की इच्छा रखने वाले लोग गणेशजी के चरणों में मेहंदी अर्पित प्रसाद को शुभ मानते हैं। यही आस्था धीरे-धीरे एक बड़ी सामाजिक और धार्मिक परंपरा में बदल गई।

सोशल मीडिया ने देशभर में पहुंचाया ‘चमत्कारी मेहंदी’ का नाम

पहले इस परंपरा में मुख्य रूप से जयपुर और आसपास के लोग शामिल होते थे। अब सोशल मीडिया पर वीडियो और पोस्ट वायरल होने के बाद दूसरे शहरों और राज्यों से भी लोग यहां पहुंचने लगे हैं। 2026 में वायरल हुए वीडियो ने इस परंपरा को एक बार फिर चर्चा में ला दिया और मंदिर में मेहंदी लेने वालों की भीड़ ने लोगों का ध्यान इस ओर खींचा है।

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Jyotsana Singh is an Tech/Auto and Tourism Desk Content Writer at Newstrack.com.

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