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Paris Hindu Temple: पेरिस से 30 KM दूर बना भव्य हिंदू मंदिर, जानिए कब होगा उद्घाटन
Paris Hindu Temple: पेरिस के पास Bussy-Saint-Georges में BAPS स्वामीनारायण मंदिर सितंबर 2026 में खुलेगा। जानें उद्घाटन, 13 दिन के Festival of Culture और खास वास्तुकला की कहानी।
Paris Hindu Temple: France’s First Traditional Mandir to Open Near Paris in September
Paris Hindu Temple: सनातन परंपरा और हिंदू संस्कृति से जुड़ी आस्था की जड़ें केवल भारत तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में सदियों से इसकी मौजूदगी दिखाई देती है। कंबोडिया के प्राचीन हिंदू मंदिरों से लेकर इंडोनेशिया के बाली, नेपाल, मलेशिया, श्रीलंका, बांग्लादेश, अमेरिका और संयुक्त अरब अमीरात तक हिंदू धर्म से जुड़े धार्मिक स्थल और समुदाय इसकी वैश्विक पहुंच की कहानी कहते हैं। अब इसी सांस्कृतिक यात्रा में फ्रांस का नाम भी एक नई पहचान के साथ जुड़ने जा रहा है। पेरिस से करीब 30 किलोमीटर दूर बुसी-सेंट-जॉर्जेस में तैयार BAPS स्वामीनारायण हिंदू मंदिर का सितंबर 2026 में उद्घाटन होने वाला है। पेरिस से करीब 30 किलोमीटर दूर बुसी-सेंट-जॉर्जेस में तैयार BAPS स्वामीनारायण हिंदू मंदिर सितंबर 2026 में औपचारिक रूप से खुलेगा। मंदिर के उद्घाटन के साथ 2 से 14 सितंबर तक 13 दिन का ‘फेस्टिवल ऑफ कल्चर’ आयोजित किया जाएगा, जिसमें भारतीय परंपरा, संगीत, कला और आध्यात्मिक संस्कृति की झलक देखने को मिलेगी।
फ्रांस की राजधानी पेरिस आमतौर पर एफिल टावर, लूव्र और नोट्रे-डाम जैसे ऐतिहासिक स्थलों के लिए जानी जाती है। अब इसी शहर के आसपास भारतीय स्थापत्य और हिंदू संस्कृति का एक नया केंद्र भी आकार ले चुका है। पेरिस के पूर्वी उपनगर बुसी-सेंट-जॉर्जेस में बना BAPS स्वामीनारायण हिंदू मंदिर सितंबर 2026 में श्रद्धालुओं और आम लोगों के लिए खास आकर्षण बनने जा रहा है। BAPS के अनुसार, यह फ्रांस का पहला पारंपरिक उद्देश्य-निर्मित हिंदू मंदिर है।
2 से 14 सितंबर तक चलेगा भारतीय संस्कृति का उत्सव
मंदिर के उद्घाटन को सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम तक सीमित नहीं रखा गया है। इसके साथ 2 सितंबर से 14 सितंबर 2026 तक 13 दिन का ‘फेस्टिवल ऑफ कल्चर’ आयोजित होगा। BAPS के मुताबिक, इस दौरान जल यात्रा, पेरिस में नगर यात्रा, बुसी-सेंट-जॉर्जेस में पालखी यात्रा, वैदिक महायज्ञ, मूर्ति प्रतिष्ठा समारोह और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। उत्सव में कीर्तन, महिला सम्मेलन और अन्य आध्यात्मिक-सांस्कृतिक आयोजन भी शामिल हैं।
इस आयोजन का उद्देश्य भारतीय संस्कृति को केवल धार्मिक नजरिए से पेश करना नहीं, बल्कि कला, संगीत, परंपराओं और सामुदायिक जीवन से जोड़कर लोगों तक पहुंचाना भी है। आयोजकों के अनुसार, दुनियाभर से श्रद्धालुओं और शुभचिंतकों के इसमें पहुंचने की उम्मीद है। कार्यक्रम में शामिल होने के लिए पंजीकरण अनिवार्य बताया गया है।
भारत में तराशे गए पत्थरों से तैयार हुआ मंदिर
इस मंदिर की सबसे खास बात इसकी निर्माण शैली है। BAPS के अनुसार, मंदिर में इस्तेमाल होने वाले पत्थरों को भारत में तैयार और बारीकी से तराशा गया है। सदियों पुरानी पत्थर तराशने की तकनीकों का इस्तेमाल करते हुए इन पर नक्काशी की गई और फिर इन्हें फ्रांस पहुंचाकर मंदिर की संरचना में जोड़ा गया। यहां भारतीय कारीगरों के साथ फ्रांस के विशेषज्ञों ने भी काम किया। मंदिर की वास्तुकला में पारंपरिक हिंदू मंदिर शैली की छाप दिखाई देती हैं। पत्थर की नक्काशी, स्तंभ, शिखर और पारंपरिक डिजाइन इसे पेरिस की आधुनिक वास्तुकला से अलग पहचान देते हैं। यही वजह है कि मंदिर को फ्रांस के वास्तु और सांस्कृतिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण परियोजना के रूप में भी देखा गया है। 2025 में पेरिस की ‘सेक्रेड प्लेसेस: बिल्डिंग, सेलिब्रेटिंग, कोएक्जिस्टिंग’ प्रदर्शनी में भी इस मंदिर की वास्तुकला और इसकी बहुधार्मिक स्थिति को जगह दी गई थी।
अलग-अलग धर्मों के धार्मिक स्थलों के बीच बना है मंदिर
BAPS स्वामीनारायण हिंदू मंदिर बुसी-सेंट-जॉर्जेस के एस्प्लानेड दे रेलिजियों ए दे कल्चर में बनाया गया है। यह ऐसा क्षेत्र है जहां अलग-अलग धार्मिक समुदायों के पूजा स्थल मौजूद हैं। BAPS के अनुसार, यहां मंदिर की मौजूदगी को अंतरधार्मिक संवाद, विविधता और सामुदायिक मेलजोल से भी जोड़ा जा रहा है।
यानी यह मंदिर केवल हिंदू समुदाय के धार्मिक जीवन का केंद्र नहीं होगा, बल्कि भारतीय संस्कृति और फ्रांस के बहुसांस्कृतिक समाज के बीच संवाद का एक माध्यम भी होगा।
1970 में आया था फ्रांस में मंदिर का विचार
इस मंदिर की कहानी हाल के कुछ वर्षों से नहीं, बल्कि करीब पांच दशक पुरानी है। BAPS के अनुसार, फ्रांस में मंदिर स्थापित करने की कल्पना 1970 में शुरू हुई थी। 1990 के दशक में इस विचार को आगे बढ़ाने के लिए योजनाएं तैयार की गईं। बाद में बुसी-सेंट-जॉर्जेस में परियोजना के लिए जमीन उपलब्ध हुई और निर्माण की दिशा में औपचारिक कदम बढ़े।
सितंबर 2022 में मंदिर का शिलान्यास समारोह हुआ था। इसके बाद 4 जून 2024 को साइट पर नींव की पाइलिंग का काम शुरू हुआ, जिसे निर्माण प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण माना गया। यानी 1970 में देखे गए एक विचार से लेकर 2026 में मंदिर के उद्घाटन तक की यात्रा में कई दशक लगे।
BAPS का दुनिया भर में बड़ा मंदिर नेटवर्क
BAPS यानी बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था एक वैश्विक हिंदू सामाजिक-आध्यात्मिक संस्था है। इसके मंदिरों में पूजा और धार्मिक गतिविधियों के अलावा भाषा, संगीत, नृत्य, संस्कृति, बच्चों और युवाओं से जुड़े कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते हैं। BAPS के मौजूदा आंकड़ों के अनुसार, उसका नेटवर्क दुनिया भर में 1,300 से अधिक मंदिरों और करीब 5,025 केंद्रों तक फैला है।
भारत में दिल्ली का स्वामीनारायण अक्षरधाम और गांधीनगर का अक्षरधाम परिसर BAPS की सबसे चर्चित परियोजनाओं में शामिल हैं। विदेशों में लंदन का BAPS मंदिर भी भारतीय पारंपरिक मंदिर वास्तुकला के लिए जाना जाता है।
पेरिस में भारतीय संस्कृति की नई पहचान
फ्रांस में BAPS स्वामीनारायण हिंदू मंदिर का उद्घाटन इसलिए भी खास है क्योंकि यह भारतीय धार्मिक वास्तुकला को यूरोप के एक प्रमुख सांस्कृतिक केंद्र में स्थायी रूप से स्थापित करता है। सितंबर का 13 दिवसीय ‘फेस्टिवल ऑफ कल्चर’ इस परियोजना को केवल मंदिर के उद्घाटन से आगे ले जाएगा। पेरिस आने वाले भारतीय मूल के लोगों के लिए यह अपनी संस्कृति और परंपराओं से जुड़ने की जगह होगी, जबकि फ्रांसीसी और दूसरे देशों के लोगों के लिए भारतीय वास्तुकला, संगीत, कला और आध्यात्मिक परंपरा को करीब से समझने का अवसर बन सकता है। BAPS ने इसे फ्रांस में पहला पारंपरिक हिंदू मंदिर बताते हुए इसके उद्घाटन को एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक अवसर के रूप में पेश किया है।


