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RBI Report 2026: विदेश घूमने का शौक पड़ा फीका, भारतीयों ने खर्च में लगाई कटौती
RBI Report 2026: RBI रिपोर्ट के अनुसार भारतीयों का विदेश यात्रा खर्च घटा है। जानें क्यों लोग अब विदेश घूमने की बजाय घरेलू पर्यटन को प्राथमिकता दे रहे हैं।
RBI Report 2026 Indians Cut Foreign Travel Spending
RBI Report Foreign Travel Spending 2026: आज के दौर में शादी ब्याह जैसे पारिवारिक फंग्शन महज रश्मों रिवाजों और रिश्तेदारों, मित्रों के बीच एक चहल-पहल और खुशियों से भरा उत्सव तक सीमित नहीं रह गए हैं अब लोग इन्हें खूबसूरत नजारों और राजसी ठाठ-बाठ के बीच फिल्मी अंदाज में मनाना पसंद करते हैं जिसके लिए लोगों के बीच विदेशों में पॉपुलर वेडिंग डेस्टिनेशन साइट्स पर जाकर शादी करने का क्रेज जोर पकड़ता जा रहा था लेकिन इधर लगातार बढ़ती महंगाई ने अब लोगों का मोह भंग कर दिया है। कमर तोड़ महंगाई, बजट के बाहर बढ़ते खर्च और बदलती प्राथमिकताओं के दौर में अब भारतीयों की विदेश यात्राओं का ट्रेंड लगातार बदलता नजर आ रहा है। कभी विदेश में छुट्टियां मनाना स्टेटस सिंबल माना जाता था, लेकिन अब लोग खर्चों को लेकर ज्यादा सतर्क हो गए हैं। इसी बीच भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के ताजा आंकड़ों ने एक बड़ा संकेत दिया है कि भारतीयों का विदेश यात्रा पर खर्च लगातार घट रहा है। दिलचस्प बात यह है कि यह गिरावट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 'देखो अपना देश' और 'वेड इन इंडिया' जैसी अपीलों से पहले ही दिखाई देने लगी थी। आरबीआई की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक मार्च 2026 में भारतीयों द्वारा विदेश यात्रा पर किया गया खर्च घटकर 1.09 अरब डॉलर रह गया। इससे पहले जनवरी में यह खर्च 1.65 अरब डॉलर और फरवरी में 1.30 अरब डॉलर था। यानी सिर्फ दो महीनों में विदेशी यात्रा खर्च में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। यह आंकड़े आरबीआई की उदारीकृत धन प्रेषण योजना Liberalised Remittance Scheme (LRS) के तहत जारी किए गए हैं। इस योजना के तहत कोई भी भारतीय नागरिक एक वित्तीय वर्ष में अधिकतम 2.50 लाख डॉलर तक विदेश भेज सकता है। इसमें पढ़ाई, इलाज, यात्रा, निवेश और रिश्तेदारों को भेजी जाने वाली रकम शामिल होती है।
विदेश यात्रा पर खर्च घटने की क्या है बड़ी वजह?
विशेषज्ञों का मानना है कि विदेश यात्रा खर्च में गिरावट के पीछे कई कारण एक साथ काम कर रहे हैं। सबसे बड़ा कारण बढ़ती महंगाई और रुपये की कमजोरी को माना जा रहा है। डॉलर मजबूत होने से विदेश में होटल, खाना, टिकट और शॉपिंग सब कुछ महंगा हो गया है। इसके अलावा कई देशों के वीजा नियम पहले की तुलना में सख्त हुए हैं। लंबी वीजा प्रक्रिया और बढ़ते एयरफेयर ने भी लोगों की जेब पर असर डाला है। यही वजह है कि अब मध्यम वर्ग का बड़ा हिस्सा घरेलू पर्यटन की ओर रुख कर रहा है। भारत में भी पिछले कुछ वर्षों में पर्यटन सुविधाओं में तेजी से सुधार हुआ है। कश्मीर, उत्तराखंड, हिमाचल, उत्तर-पूर्व, अंडमान और दक्षिण भारत जैसे पर्यटन स्थलों पर अब बड़ी संख्या में लोग छुट्टियां बिताना पसंद कर रहे हैं।
मार्च में कुल कितना पैसा विदेश भेजा गया?
आरबीआई के आंकड़ों के मुताबिक मार्च महीने में भारतीयों ने कुल 2.59 अरब डॉलर विदेश भेजे। इसमें सबसे बड़ी हिस्सेदारी यात्रा खर्च की रही। ‘अन्य यात्रा’ श्रेणी के तहत मार्च में 62.30 करोड़ डॉलर खर्च किए गए, जो कुल यात्रा खर्च का करीब 57 प्रतिशत हिस्सा था। इस श्रेणी में घूमने-फिरने के अलावा अंतरराष्ट्रीय क्रेडिट कार्ड से किए गए खर्च भी शामिल होते हैं। यह इस बात का प्रमाण है कि विदेश यात्रा पूरी तरह खत्म नहीं हुई है, लेकिन लोग अब पहले की तुलना में सोच-समझकर खर्च कर रहे हैं।
शिक्षा पर भी घटा खर्च
विदेश में पढ़ाई का सपना देखने वाले छात्रों और परिवारों पर भी बढ़ती लागत का असर दिखाई दे रहा है। मार्च महीने में शिक्षा संबंधी यात्रा पर 45.01 करोड़ डॉलर खर्च किए गए। वहीं ‘विदेश में अध्ययन’ श्रेणी का खर्च घटकर 15.17 करोड़ डॉलर रह गया, जबकि जनवरी में यह आंकड़ा 26.74 करोड़ डॉलर था। विशेषज्ञों के मुताबिक अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में पढ़ाई और रहने का खर्च काफी बढ़ गया है। इसके अलावा कई देशों में वीजा और नौकरी नियमों में बदलाव के कारण छात्र अब विदेश में पढ़ाई का फैसला लेने से पहले ज्यादा सोच-विचार कर रहे हैं।
विदेश में रहने वाले परिजनों को ज्यादा भेजी गई रकम
जहां यात्रा और पढ़ाई पर खर्च घटा, वहीं विदेश में रहने वाले परिजनों को भेजी जाने वाली राशि में बढ़ोतरी दर्ज की गई। मार्च में भारतीयों ने अपने रिश्तेदारों को 38.97 करोड़ डॉलर भेजे, जबकि फरवरी में यह आंकड़ा 26.61 करोड़ डॉलर था। इससे साफ है कि लोग निजी जरूरतों और परिवार की मदद को प्राथमिकता दे रहे हैं।
इसके अलावा व्यापार यात्रा, तीर्थयात्रा और चिकित्सा से जुड़े खर्चों पर करीब 2.13 करोड़ डॉलर खर्च हुए। वहीं विदेश में रियल एस्टेट खरीदने पर खर्च घटकर 3.86 करोड़ डॉलर रह गया।
पीएम मोदी की अपील का कितना असर?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पिछले कुछ समय से लगातार “देखो अपना देश” अभियान को बढ़ावा दे रहे हैं। उन्होंने लोगों से अपील की थी कि वे शादी, छुट्टियां और बड़े आयोजन विदेशों में करने के बजाय भारत के खूबसूरत पर्यटन स्थलों को प्राथमिकता दें। पीएम मोदी ने कहा था कि जब भारतीयों का पैसा देश के भीतर खर्च होगा तो इससे स्थानीय पर्यटन उद्योग को मजबूती मिलेगी। होटल, ट्रैवल, हस्तशिल्प और छोटे कारोबारों को फायदा होगा, जिससे रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। हालांकि RBI के आंकड़े बताते हैं कि विदेश यात्रा खर्च में गिरावट पीएम मोदी की अपील से पहले ही शुरू हो चुकी थी, लेकिन उनकी बातों ने घरेलू पर्यटन को लेकर लोगों की सोच को जरूर मजबूत किया है।
भारत में तेजी से बढ़ रहा घरेलू पर्यटन
कोविड के बाद भारत में घरेलू पर्यटन ने जबरदस्त रफ्तार पकड़ी है। लोग अब छोटे-छोटे ट्रिप, धार्मिक यात्राओं और प्राकृतिक पर्यटन स्थलों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। सरकार भी रेलवे, एक्सप्रेसवे, एयरपोर्ट और पर्यटन सुविधाओं पर लगातार निवेश कर रही है। वंदे भारत ट्रेन, नए एयरपोर्ट और बेहतर सड़क कनेक्टिविटी ने यात्रा को पहले से आसान बना दिया है। पर्यटन विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर यही ट्रेंड जारी रहा तो आने वाले वर्षों में भारत का घरेलू पर्यटन उद्योग दुनिया के सबसे बड़े बाजारों में शामिल हो सकता है।
बदल रही है भारतीयों की खर्च करने की आदत
RBI के आंकड़े सिर्फ विदेश यात्रा में कमी की कहानी नहीं बताते, बल्कि यह भारतीयों की बदलती आर्थिक सोच की भी तस्वीर पेश करते हैं। अब लोग दिखावे की बजाय जरूरत और बजट को प्राथमिकता दे रहे हैं। परिवार, शिक्षा और भविष्य की बचत जैसे मुद्दे पहले से ज्यादा अहम हो गए हैं। यही कारण है कि विदेश घूमने का आकर्षण धीरे-धीरे कम होता दिखाई दे रहा है, जबकि भारत के भीतर घूमने और अपने देश को करीब से जानने का उत्साह बढ़ रहा है।


