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सावन में उमड़ती है भक्तों की भीड़, इस शिव मंदिर में फूल नहीं बल्कि भोलेनाथ को चढ़ाए जाते हैं जिंदा केकड़े
Rundhanath Shiva Temple: गुजरात के सूरत स्थित इस अनोखे शिव मंदिर में मन्नत पूरी होने पर भगवान शिव को जिंदा केकड़े चढ़ाए जाते हैं। जानिए सावन में इस परंपरा का इतिहास, मान्यता और धार्मिक महत्व। सावन में उमड़ती है भक्तों की भीड़, इस शिव मंदिर में फूल नहीं बल्कि भोलेनाथ को चढ़ाए जाते हैं जिंदा केकड़े
Rundhanath Shiva Temple: Why Live Crabs Are Offered to Lord Shiva at This Unique Temple
Rundhanath Shiva Temple: भारत में भगवान शिव के हजारों प्राचीन मंदिर हैं और हर मंदिर की अपनी अलग परंपरा, इतिहास और मान्यता है। कहीं भोलेनाथ का अभिषेक दूध, दही, घी और गंगाजल से किया जाता है तो कहीं बेलपत्र और भांग, धतूरा चढ़ाने की परंपरा है। लेकिन गुजरात के सूरत में स्थित रुंधनाथ महादेव मंदिर (Rundhanath Shiva Temple) एक ऐसी अनोखी परंपरा के लिए प्रसिद्ध है, जिसके बारे में सुनकर अधिकांश लोग हैरान रह जाते हैं। यहां भगवान शिव को फूलों की माला नहीं, बल्कि जिंदा केकड़े चढ़ाए जाते हैं। यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और स्थानीय लोगों की गहरी आस्था से जुड़ी हुई है। खास बात यह है कि यहां केकड़े हर दिन नहीं चढ़ाए जाते, बल्कि एक विशेष अवसर पर मन्नत पूरी होने के बाद श्रद्धालु भगवान शिव को जीवित केकड़े अर्पित करते हैं।
सावन पर इस मंदिर का बढ़ जाता है महत्व
सावन का महीना आते ही सूरत के रुंधनाथ महादेव मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या कई गुना बढ़ जाती है। सोमवार और सावन के विशेष दिनों पर सुबह से ही मंदिर में भक्तों की लंबी कतारें लग जाती हैं। भगवान शिव के जलाभिषेक, रुद्राभिषेक और विशेष पूजा-अर्चना के साथ पूरा मंदिर परिसर 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' के जयघोष से गूंज उठता है।
इसी दौरान मन्नत पूरी होने वाले श्रद्धालु अपनी पारंपरिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव को जिंदा केकड़े अर्पित करते हैं। यह अनोखी परंपरा देखने के लिए आसपास के इलाकों के अलावा दूसरे राज्यों से भी लोग पहुंचते हैं। मंदिर परिसर को फूलों और रंग-बिरंगी सजावट से सजाया जाता है तथा भक्त भगवान शिव के दर्शन के लिए घंटों इंतजार करते हैं।
सावन के अवसर पर यहां धार्मिक अनुष्ठानों, भजन-कीर्तन और सामूहिक पूजा का भी आयोजन होता है। स्थानीय लोगों के अनुसार, इस दौरान मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण बेहद विशेष होता है और श्रद्धालु पूरी श्रद्धा के साथ अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए भगवान शिव से प्रार्थना करते हैं। यही कारण है कि सावन में रुंधनाथ महादेव मंदिर आस्था, परंपरा और अनोखी धार्मिक मान्यता का अद्भुत संगम बन जाता है।
मन्नत पूरी होने पर चढ़ाए जाते हैं जिंदा केकड़े
रुंधनाथ महादेव मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं का मानना है कि भगवान शिव उनकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं। जब किसी भक्त की मन्नत पूरी हो जाती है तो वह अपनी श्रद्धा के अनुसार मंदिर में आकर जीवित केकड़े अर्पित करता है।
यह परंपरा विशेष रूप से उन लोगों में अधिक प्रचलित है जो कान से जुड़ी बीमारियों या अन्य शारीरिक समस्याओं से राहत मिलने की कामना लेकर यहां आते हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, भगवान शिव की कृपा से स्वास्थ्य लाभ मिलने पर श्रद्धालु केकड़े चढ़ाकर अपना व्रत पूरा करते हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार इस मंदिर में दूर-दूर से ऐसे लोग भी आते हैं जो लंबे समय से कान की बीमारी या सुनने से संबंधित समस्याओं से परेशान रहते हैं। श्रद्धालु इसे अपनी आस्था का केंद्र मानते हैं और इलाज के साथ भगवान शिव का आशीर्वाद भी प्राप्त करने की कामना करते हैं।
मन्नत पूरी होने के बाद श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर भगवान शिव के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और परंपरा के अनुसार जीवित केकड़े अर्पित करते हैं।
क्या है इस अनोखी परंपरा का इतिहास?
रुंधनाथ महादेव मंदिर की इस परंपरा के पीछे कई स्थानीय मान्यताएं प्रचलित हैं। कहा जाता है कि त्रेतायुग में भगवान श्रीराम ने वनवास के दौरान इस स्थान पर भगवान शिव की आराधना की थी। इसी कारण यह स्थान अत्यंत पवित्र माना जाता है।
एक अन्य लोककथा के अनुसार, प्राचीन समय में जहां आज मंदिर स्थित है, वहां कभी समुद्र का विस्तार हुआ करता था। समुद्र तट होने के कारण यहां केकड़ों की बहुतायत थी। समय के साथ स्थानीय लोगों ने इसे भगवान शिव से जोड़ दिया और केकड़े चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई, जो आज भी श्रद्धापूर्वक निभाई जाती है।
इन कथाओं का कोई प्रमाणित ऐतिहासिक दस्तावेज उपलब्ध नहीं है, लेकिन स्थानीय समाज इन्हें पीढ़ियों से अपनी धार्मिक परंपरा के रूप में मानता आ रहा है।
फूलों की जगह केकड़े चढ़ाने की परंपरा क्यों?
आमतौर पर भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, आक के फूल, जल और दूध अर्पित किए जाते हैं। लेकिन रुंधनाथ महादेव मंदिर में जीवित केकड़े चढ़ाने की परंपरा इस मंदिर को देश के अन्य शिव मंदिरों से अलग पहचान देती है।
श्रद्धालु इसे भगवान के प्रति अपनी कृतज्ञता और आस्था का प्रतीक मानते हैं। मंदिर परिसर में आने वाले लोग इस अनोखी परंपरा को देखने के लिए भी बड़ी संख्या में पहुंचते हैं।
मंदिर के पास स्थित श्मशान घाट की भी है अलग मान्यता
रुंधनाथ महादेव मंदिर के निकट स्थित श्मशान घाट भी अपनी एक विशेष धार्मिक मान्यता के कारण जाना जाता है। स्थानीय परंपरा के अनुसार, एक विशेष दिन मृतकों के परिजन यहां पहुंचकर अपने प्रियजनों की आत्मा की शांति के लिए पूजा-अर्चना करते हैं।
इस अवसर पर वे मृतक की पसंद की वस्तुएं भी श्रद्धा के साथ अर्पित करते हैं। यदि किसी व्यक्ति को जीवनकाल में कोई विशेष भोजन, मिठाई या अन्य वस्तु पसंद थी तो उसके परिजन उसे प्रतीकात्मक रूप से अर्पित करते हैं। कुछ परिवार बीड़ी, सिगरेट या अन्य पसंदीदा वस्तुएं भी श्रद्धा के भाव से रखते हैं। यह धार्मिक आस्था और स्थानीय परंपरा का हिस्सा माना जाता है, जिसका उद्देश्य दिवंगत आत्मा के प्रति सम्मान और स्मरण व्यक्त करना है।
देश के सबसे अनोखे शिव मंदिरों में गिनी जाती है यह परंपरा
भारत में अनेक मंदिर अपनी विशिष्ट परंपराओं के लिए प्रसिद्ध हैं, लेकिन भगवान शिव को जीवित केकड़े चढ़ाने की परंपरा बेहद दुर्लभ मानी जाती है। इसी वजह से रुंधनाथ महादेव मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ जिज्ञासा का भी केंद्र बन चुका है। हर वर्ष विशेष अवसर पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। स्थानीय लोगों के मन में गहरी आस्था का प्रतीक बन चुकी साथ ही वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ इस मंदिर में निभाई जा रही है।


