Hanuman Sanjeevani Hill Mystery: जहां गिरी थी हनुमान जी की लाई संजीवनी! दक्षिण भारत की इस पहाड़ी का रहस्य आज भी कायम

Hanuman Sanjeevani Hill Mystery 2026: कन्याकुमारी की इस पवित्र पहाड़ी को आज भी माना जाता है द्रोणगिरि पर्वत का हिस्सा। जानिए इसकी रहस्यमयी कथा और धार्मिक महत्व।

Jyotsana Singh
Published on: 14 May 2026 1:52 PM IST (Updated on: 14 May 2026 1:54 PM IST)
Sanjeevani hill Hanuman temple South India Kanyakumari mystery Ramayan 2026
X

Hanuman Sanjeevani Hill Mystery Soth India 2026 

Hanuman Sanjeevani Hill Mystery South India: देश दुनिया में अपने सांस्कृतिक और धार्मिक महत्व के लिए लोकप्रिय दक्षिण भारत की धरती पर एक ऐसी पवित्र पहाड़ी मौजूद है, जो दुर्लभ औषधियों का खजाना मानी जाती है। जिसके बारे में मान्यता है कि यह वही स्थान है जहां भगवान हनुमान द्वारा लाए गए द्रोणगिरि पर्वत का एक हिस्सा आकर गिरा था। कन्याकुमारी से तिरुवनंतपुरम जाने वाले रास्ते पर स्थित यह छोटी-सी पहाड़ी 'मारुत मलै' आज भी श्रद्धा, आस्था और रहस्य का अनोखा संगम मानी जाती है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यहां आज भी दुर्लभ और प्राणदायिनी जड़ी-बूटियां पाई जाती हैं, जिनकी खुशबू वातावरण को आध्यात्मिक बना देती है। रामायण से जुड़ी यह कथा केवल एक धार्मिक विश्वास नहीं, बल्कि दक्षिण भारत की सांस्कृतिक पहचान का अहम हिस्सा भी बन चुकी है। इसी पहाड़ी पर स्थित हनुमान मंदिर में हर साल हजारों श्रद्धालु पहुंचते हैं और संकटमोचन के दर्शन कर जीवन की परेशानियों से मुक्ति की कामना करते हैं।

रामायण से जुड़ी है मारुत मलै की मान्यता

रामायण के अनुसार, जब लंका युद्ध के दौरान मेघनाद के शक्तिबाण से भगवान श्रीराम के छोटे भाई लक्ष्मण मूर्छित हो गए थे, तब वैद्य सुषेण ने हिमालय स्थित द्रोणगिरि पर्वत से संजीवनी बूटी लाने को कहा था। वीर हनुमान संजीवनी पहचान नहीं पाए, इसलिए पूरा पर्वत ही उठाकर लंका की ओर चल पड़े। मान्यता है कि उसी दौरान द्रोणगिरि पर्वत का एक छोटा हिस्सा दक्षिण भारत में गिर गया, जिसे आज मारुत मलै के नाम से जाना जाता है। 'मारुत' शब्द का संबंध पवन से माना जाता है और इसे पवनपुत्र हनुमान की उपस्थिति का प्रतीक भी कहा जाता है। तमिल भाषा में 'मलै' का अर्थ पहाड़ी होता है।

स्थानीय लोगों का दावा है कि इस पहाड़ी पर आज भी कई दुर्लभ औषधीय पौधे पाए जाते हैं। यही वजह है कि आयुर्वेद और सिद्ध चिकित्सा पद्धति से जुड़े लोग भी इस स्थान को विशेष महत्व देते हैं।

प्रकृति और आस्था का अद्भुत संगम

मारुत मलै केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि प्राकृतिक सुंदरता का भी अद्भुत उदाहरण है। पहाड़ी के आसपास हरियाली, शांत वातावरण और समुद्री हवाएं श्रद्धालुओं को एक अलग ही सुकून देती हैं। यहां पहुंचते ही ऐसा महसूस होता है मानो प्रकृति स्वयं ध्यान और भक्ति में लीन हो। सुबह और शाम के समय यहां का दृश्य बेहद मनमोहक दिखाई देता है। पहाड़ी से दूर-दूर तक फैला हरियाली भरा दृश्य और मंदिर में गूंजते हनुमान चालीसा के स्वर श्रद्धालुओं को भावुक कर देते हैं।

हनुमान मंदिर में उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

मारुत मलै स्थित हनुमान मंदिर दक्षिण भारत के प्रसिद्ध आस्था केंद्रों में गिना जाता है। मंगलवार और शनिवार को यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। लोग नारियल, सिंदूर और तुलसी अर्पित कर बजरंगबली से सुख-समृद्धि की कामना करते हैं। कई श्रद्धालु मानते हैं कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मनोकामनाएं पूरी होती हैं। परीक्षा, नौकरी, स्वास्थ्य और पारिवारिक समस्याओं से परेशान लोग विशेष रूप से यहां दर्शन करने आते हैं।

हनुमान जयंती और रामनवमी जैसे पर्वों पर मंदिर परिसर भक्ति से सराबोर हो जाता है। दूर-दूर से आने वाले भक्त पूरी श्रद्धा के साथ पूजा-अर्चना करते हैं और संकटमोचन के जयकारों से वातावरण गूंज उठता है।

जड़ी-बूटियों को लेकर आज भी बना है रहस्य

मारुत मलै की सबसे खास बात यहां पाई जाने वाली औषधीय वनस्पतियां हैं। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यहां की मिट्टी और वनस्पतियों में विशेष औषधीय गुण मौजूद हैं।

हालांकि वैज्ञानिक रूप से संजीवनी बूटी के अस्तित्व की पुष्टि नहीं हो सकी है, लेकिन कई विशेषज्ञ मानते हैं कि इस क्षेत्र में दुर्लभ औषधीय पौधे अवश्य पाए जाते हैं। यही कारण है कि यह पहाड़ी धार्मिक ही नहीं, बल्कि वनस्पति विज्ञान के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है।

कई श्रद्धालु पहाड़ी की मिट्टी को भी पवित्र मानते हैं और उसे अपने साथ घर ले जाते हैं। उनका विश्वास है कि यह सकारात्मक ऊर्जा और स्वास्थ्य लाभ देती है।

पर्यटन और अध्यात्म का खास केंद्र बन चुका है यह स्थान

कन्याकुमारी घूमने आने वाले पर्यटकों के लिए मारुत मलै एक खास आकर्षण बन चुका है। यहां आने वाले लोग केवल मंदिर दर्शन ही नहीं करते, बल्कि पहाड़ी की प्राकृतिक सुंदरता का भी आनंद लेते हैं।

तिरुवनंतपुरम और कन्याकुमारी के बीच स्थित होने के कारण यहां पहुंचना भी आसान है। सड़क मार्ग से यह स्थान अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। कई लोग यहां आध्यात्मिक शांति पाने और प्रकृति के करीब समय बिताने के लिए आते हैं।

यहां आज भी जीवित है हनुमान की वह कथा

यहां रामायण काल की यह कहानी सदियों बाद भी लोगों की आस्था में उतनी ही जीवित है। मारुत मलै केवल एक पहाड़ी नहीं, बल्कि अपने भक्तों के बीच भगवान हनुमान की शक्ति, समर्पण और भक्ति, विश्वास का प्रतीक है। जब श्रद्धालु इस पहाड़ी पर खड़े होकर मंदिर की घंटियां सुनना ऐसा महसूस होता है मानो आज भी पवनपुत्र हनुमान इस धरती पर अपनी उपस्थिति का आशीर्वाद दे रहे हों। यही वजह है कि यहां एक बार जो भी घूम कर जाता है उसके मन मस्तिष्क में हमेशा के लिए मारुत मलै का नाम सुनते ही श्रद्धा और भक्ति की भावना उमड़ पड़ती है।

Jyotsana Singh

Jyotsana Singh

Editor

Next Story