VPN से होटल और कार किराये की बुकिंग में 10–30% तक बचत? जानिए इस Travel Hack का सच

VPN Hotel Booking Process: क्या सिर्फ VPN की लोकेशन बदलने से होटल या कार किराये की कीमत कम हो जाती है? जानिए Geo-Based Pricing, Currency, Taxes, Membership Rates और Booking Conditions का पूरा खेल और समझें कि VPN से मिलने वाली बचत कब वास्तविक होती है।

Yogesh Mishra
Published on: 12 Sept 2026 8:01 PM IST
VPN Hotel Booking Process Explained in Hindi
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VPN Hotel Booking Process Explained in Hindi

VPN Hotel Booking Process: विदेश घूमने की योजना बनाते समय होटल या किराये की कार की कीमत देखकर अक्सर लगता है कि शायद इससे सस्ता सौदा मिल सकता था। तभी इंटरनेट पर एक ट्रैवल हैक खूब वायरल होता है कि बुकिंग करने से पहले VPN चालू करिए, अपनी ऑनलाइन लोकेशन किसी दूसरे देश की कर दीजिए और वही होटल या कार आपको काफी सस्ती मिल सकती है। कई वेबसाइटें दावा करती हैं कि इस तरीके से 10, 20 या यहां तक कि 30 प्रतिशत तक की बचत हो सकती है।

लेकिन क्या सच में सिर्फ VPN लगाने से होटल सस्ता हो जाता है? जवाब है, कभी-कभी हां, लेकिन हर बार नहीं। और यही इस पूरे ट्रैवल हैक का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। VPN खुद कीमत कम नहीं करता। वह कुछ मामलों में आपको किसी दूसरे देश के ग्राहक के लिए उपलब्ध कीमत देखने का मौका दे सकता है। अगर उस बाजार में वही कमरा या कार कम कीमत पर उपलब्ध है, तभी आपकी बचत हो सकती है। यानी यह तरकीब संभावना है, गारंटी नहीं।

पहले समझिए VPN आखिर करता क्या है?

जब आप मोबाइल या कंप्यूटर से किसी होटल की वेबसाइट खोलते हैं तो वेबसाइट को आपके इंटरनेट कनेक्शन से जुड़ी कुछ जानकारी मिलती है। इसमें आपका इंटरनेट पता यानी आईपी पता (IP address) भी शामिल होता है। इससे वेबसाइट को आपके कनेक्शन की अनुमानित भौगोलिक स्थिति का अंदाजा लग सकता है।

मान लीजिए आप भारत में बैठे हैं और किसी होटल की वेबसाइट खोलते हैं। वेबसाइट को आपका इंटरनेट कनेक्शन भारत से आता हुआ दिखाई दे सकता है। लेकिन अगर आप VPN के जरिए जापान के किसी सर्वर से इंटरनेट चलाते हैं तो वेबसाइट को आपका सार्वजनिक आईपी पता जापान का दिखाई दे सकता है। हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि वेबसाइट को यह विश्वास हो गया कि आप सचमुच जापान के निवासी हैं। आपका पासपोर्ट, स्थायी पता या बैंक खाता जापानी नहीं हो जाता। आपने मुख्य रूप से वेबसाइट को दिखाई देने वाली अपनी नेटवर्क लोकेशन बदली है। यहीं से इस ट्रैवल हैक की शुरुआत होती है।

एक ही होटल की कीमत अलग-अलग देशों में क्यों हो सकती है?

यह समझना जरूरी है कि ऑनलाइन यात्रा बाजार में किसी होटल के कमरे की एक ही वैश्विक कीमत होना जरूरी नहीं है। होटल अपनी कीमत तय करते समय सिर्फ कमरे को नहीं देखता। तारीख, मौसम, छुट्टियां, किसी शहर में होने वाला बड़ा आयोजन, कमरे की उपलब्धता, मांग और बुकिंग का समय जैसे कई कारक कीमत को बदल सकते हैं।

इसके अलावा होटल और ऑनलाइन यात्रा कंपनियां अलग-अलग देशों के लिए अलग प्रचार योजनाएं भी चला सकती हैं। किसी बाजार में ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए विशेष छूट दी जा सकती है, जबकि दूसरे बाजार में वही कमरा सामान्य दर पर बेचा जा सकता है।

मुद्रा, स्थानीय कर, शुल्क, सदस्यता छूट, मोबाइल ऐप की दर और होटल तथा ऑनलाइन यात्रा एजेंसी के बीच हुए व्यावसायिक समझौते भी अंतिम कीमत को प्रभावित कर सकते हैं। इसलिए अगर भारत से किसी कमरे की कीमत अमेरिका से दिखाई देने वाली कीमत से अलग है तो तुरंत यह निष्कर्ष निकालना सही नहीं होगा कि “वेबसाइट ने भारतीय ग्राहक को महंगा कमरा दिखाया।” कीमत में अंतर के पीछे कई दूसरे कारण भी हो सकते हैं।

होटल की कीमत सिर्फ आपके आईपी पते से तय नहीं होती

यह इंटरनेट पर चलने वाली सबसे बड़ी गलतफहमियों में से एक है कि वेबसाइट आपका आईपी पता देखकर तय कर लेती है कि आपको कितना भुगतान करना चाहिए।

वास्तविकता इससे कहीं अधिक जटिल है। ऑनलाइन बुकिंग प्रणाली में आपकी चुनी हुई मुद्रा, देश, भाषा, लॉग-इन स्थिति, सदस्यता, मोबाइल या वेबसाइट से की गई बुकिंग और उपलब्ध प्रचार जैसी कई चीजें भूमिका निभा सकती हैं। कुछ वेबसाइटों की शर्तों में भी यह स्पष्ट होता है कि अलग-अलग ग्राहकों को कुछ विशेष प्रस्ताव या शर्तें अलग दिखाई दे सकती हैं। अंतिम कीमत में कर और शुल्क भी शामिल हो सकते हैं।

इसलिए किसी होटल की पहली स्क्रीन पर दिखाई देने वाली कीमत देखकर फैसला करना ठीक नहीं है। असली तुलना तब होगी जब एक ही कमरा, एक ही तारीख, एक ही नीति और समान कर-शुल्क के साथ भुगतान के अंतिम चरण तक जाकर कीमत देखी जाए।

तो क्या 10–30 प्रतिशत बचत सच है?

अलग-अलग स्थानों से होटल खोजने के कुछ स्वतंत्र परीक्षणों में पाया गया कि ज्यादातर मामलों में कीमत लगभग समान रही। कई जगहों पर अंतर कुछ डॉलर का था या बिल्कुल नहीं था। लेकिन कुछ होटल और बुकिंग मंचों पर उल्लेखनीय अंतर भी दिखाई दिया।

यानी ऐसा नहीं है कि VPN लगाने पर हमेशा कीमत कम होगी। लेकिन यह भी कहना गलत होगा कि VPN के जरिए कीमत में कभी अंतर नहीं आता। यहां एक और सावधानी जरूरी है। VPN कंपनियों से जुड़ी वेबसाइटें अक्सर अपने परीक्षणों में 20, 30 प्रतिशत या उससे भी अधिक बचत के उदाहरण दिखाती हैं। ऐसे परिणाम संभव जरूर हैं, लेकिन उन्हें स्वतंत्र वैज्ञानिक प्रमाण की तरह नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि VPN बेचने वाली कंपनी को इस तरह के ट्रैवल हैक के प्रचार से व्यावसायिक फायदा हो सकता है। इसलिए ज्यादा सटीक बात यह है कि VPN से कुछ बुकिंग में 10–30 प्रतिशत तक की बचत हो सकती है, लेकिन इसकी कोई गारंटी नहीं है। कई बार आपको एक रुपये का भी फायदा नहीं मिलेगा।

कार किराये में अंतर कभी-कभी ज्यादा बड़ा क्यों दिखता है?

होटल की तुलना में किराए की कार का बाजार कुछ मामलों में और दिलचस्प है। अलग-अलग देशों के ग्राहकों के लिए उपलब्ध दरों में अंतर कुछ परिस्थितियों में काफी बड़ा हो सकता है। एक चर्चित परीक्षण में अलग-अलग देशों की आभासी लोकेशन से कई कार किराया कंपनियों और एक तुलना मंच पर समान बुकिंग की कीमतें देखी गईं। कुछ मामलों में सबसे कम और सबसे ज्यादा दिखाई गई कीमत के बीच बहुत बड़ा अंतर पाया गया। एक उदाहरण में अंतर 80 प्रतिशत से भी ज्यादा बताया गया, जबकि दूसरे उदाहरणों में भी 15, 35 और 70 प्रतिशत से अधिक के अंतर सामने आए।

लेकिन यहां भी सावधानी जरूरी है। ऐसा परीक्षण किसी व्यापक स्वतंत्र अकादमिक अध्ययन के बराबर नहीं माना जा सकता। इसलिए इससे यह निष्कर्ष निकालना गलत होगा कि VPN लगाकर हर कार किराये में 30, 50 या 80 प्रतिशत बचाया जा सकता है। बल्कि इसका मतलब सिर्फ इतना है कि कार किराये में अलग बाजारों की दरों की तुलना करना कभी-कभी काफी फायदेमंद हो सकता है।

क्या दोनों सौदे सचमुच एक जैसे हैं?

मान लीजिए भारत से कार की कीमत ₹8,000 दिखाई दे रही है और किसी दूसरे देश की लोकेशन से वही कार ₹5,500 में मिल रही है। पहली नजर में लगता है कि आपने ₹2,500 बचा लिए।

लेकिन ये भी पूछिये कि क्या दोनों में बीमा समान है? क्या दोनों में असीमित किलोमीटर शामिल हैं? ईंधन भरने की नीति एक जैसी है? जमा राशि कितनी है? दुर्घटना होने पर ग्राहक की जिम्मेदारी कितनी है? अतिरिक्त चालक की फीस है या नहीं? बुकिंग रद्द करने पर पैसा वापस मिलेगा या नहीं?

अगर सस्ती दर में बीमा नहीं है और महंगी दर में बीमा शामिल है तो दोनों कीमतों की सीधी तुलना ही गलत है।

होटल में भी यही बात लागू होती है। ₹32,000 की दर सस्ती लग सकती है, लेकिन अगर वह गैर-वापसी योग्य है और ₹40,000 वाली दर पूरी तरह वापस होने योग्य है तो आपने समान चीज पर 20 प्रतिशत नहीं बचाया। आपने अलग शर्तों वाला कमरा खरीदा है।

यही कारण है कि किसी भी VPN बचत को तभी वास्तविक बचत मानना चाहिए जब दोनों विकल्पों की शर्तें भी समान हों।

क्या वेबसाइट को पता चल सकता है कि आप VPN इस्तेमाल कर रहे हैं?

वेबसाइटें सिर्फ आईपी पते पर निर्भर नहीं रहतीं। आपके खाते में दर्ज देश, भुगतान की जानकारी, चुनी गई मुद्रा, भाषा और दूसरी तकनीकी सूचनाएं भी उनके लिए संकेत हो सकती हैं। इसलिए अगर VPN लगाते ही किसी दूसरे देश की सस्ती कीमत दिखाई देती है, तो जरूरी नहीं कि भुगतान करते समय भी वही कीमत बनी रहे।

और यहां एक कानूनी या अनुबंध संबंधी फर्क भी समझना जरूरी है। VPN से किसी दूसरे देश के बाजार में दिखाई जाने वाली कीमत देखना एक बात है। लेकिन अगर किसी विशेष दर की शर्त साफ तौर पर कहती है कि वह सिर्फ उस देश के निवासियों के लिए है और आप गलत निवास जानकारी देकर उसे लेने की कोशिश करते हैं, तो यह अलग मामला है। ऐसी बुकिंग बाद में रद्द हो सकती है या सेवा लेते समय अतिरिक्त भुगतान की मांग हो सकती है।

VPN को हैक नहीं, तुलना का औजार मानिए

अगर आप इस तरीके को आजमाना चाहते हैं तो इसे किसी गुप्त हैक की तरह इस्तेमाल करने के बजाय मूल्य तुलना के औजार की तरह देखना ज्यादा समझदारी है।

पहले सामान्य इंटरनेट कनेक्शन से होटल खोजिए। तारीख, कमरा और रद्द करने की नीति समान रखिए और अंतिम भुगतान पृष्ठ तक जाकर कीमत नोट कर लीजिए।

इसके बाद निजी ब्राउज़िंग विंडो में एक-दो अलग देशों की VPN लोकेशन से वही खोज कीजिए। कोशिश करें कि मुद्रा भी एक ही रखें, ताकि सिर्फ मुद्रा बदलने से होने वाला भ्रम पैदा न हो।

अब देखिए कि क्या वास्तव में अंतिम भुगतान राशि बदलती है। अगर सामान्य कीमत ₹25,000 है और दूसरे बाजार से वही कमरा ₹21,000 का मिल रहा है तो यह दिलचस्प अंतर है। लेकिन अगर ₹21,000 वाली कीमत में नाश्ता नहीं है, कर अलग हैं या बुकिंग रद्द नहीं की जा सकती तो बचत का हिसाब फिर बदल जाएगा।

होटल की अपनी वेबसाइट जरूर देखिए

कई लोग VPN के प्रयोग में इतना उलझ जाते हैं कि होटल की अपनी वेबसाइट देखना भूल जाते हैं। यह बड़ी गलती हो सकती है। ऑनलाइन यात्रा एजेंसी पर दिखाई देने वाली कीमत और होटल की अपनी वेबसाइट पर मिलने वाली कीमत अलग हो सकती है। कभी-कभी होटल अपनी वेबसाइट पर सदस्यता छूट, मोबाइल दर या सीधी बुकिंग का विशेष प्रस्ताव देता है।

इसलिए बेहतर क्रम यह है कि पहले सामान्य कीमत देखिए, फिर होटल की अपनी वेबसाइट देखिए, उसके बाद सदस्य या मोबाइल दर देखिए और फिर जरूरत हो तो अलग देशों की कीमतों की तुलना कीजिए।

क्या इनकॉग्निटो मोड से होटल सस्ता हो जाता है?

यह भी एक लोकप्रिय इंटरनेट सलाह है कि होटल को बार-बार मत खोजिए, वरना वेबसाइट समझ जाएगी कि आप कमरा लेना चाहते हैं और कीमत बढ़ा देगी। कुकी मिटाइए या निजी ब्राउज़िंग खोलिए और सस्ता कमरा मिल जाएगा।

लेकिन इसके लिए जितना पक्का दावा इंटरनेट पर किया जाता है, वैज्ञानिक प्रमाण उतने मजबूत नहीं हैं। होटल की कीमतें वैसे ही लगातार बदल सकती हैं। कमरे कम होते जा रहे हों, किसी आयोजन के कारण मांग बढ़ गई हो या बुकिंग की तारीख करीब आ रही हो तो कीमत बढ़ सकती है। इसलिए आपने एक घंटे पहले ₹10,000 देखा और अब ₹11,000 दिख रहा है तो जरूरी नहीं कि वेबसाइट ने आपकी खोज देखकर कीमत बढ़ाई हो। फिर भी निजी ब्राउज़िंग तुलना के लिए उपयोगी हो सकती है। इससे पुराने सत्र, लॉग-इन स्थिति या कुछ कुकी आधारित प्रभावों को कम करके ज्यादा साफ तुलना की जा सकती है। लेकिन इसे कीमत कम करने की गारंटी नहीं, बल्कि तुलना को थोड़ा नियंत्रित करने का तरीका समझना चाहिए।

सबसे सस्ता देश कौन-सा है?

कहीं आपको बताया जाएगा कि तुर्की चुनिए, कहीं अर्जेंटीना, कहीं भारत और कहीं पोलैंड। लेकिन सच यह है कि कोई एक देश हमेशा सबसे सस्ता नहीं होता।

आज किसी लंदन होटल में भारत की लोकेशन से बेहतर दर मिल सकती है। कल उसी होटल में ब्रिटेन की स्थानीय दर सबसे कम हो सकती है। किसी तीसरे होटल में सभी देशों से एक जैसी कीमत दिखाई दे सकती है।

दरअसल कीमत होटल की बाजार रणनीति, मांग, उपलब्धता, प्रचार और वितरण व्यवस्था पर निर्भर करती है। इसलिए VPN का असली फायदा किसी “सस्ते देश” को खोजने में नहीं है। इसका फायदा यह देखने में है कि क्या किसी दूसरे बाजार में उसी समय वही चीज कम कीमत पर उपलब्ध है।

मुद्रा बदलने से मिलने वाली बचत असली है या सिर्फ भ्रम?

मान लीजिए भारत में होटल ₹30,000 का दिखाई देता है और किसी दूसरे देश की मुद्रा में कीमत बदलने पर हिसाब लगाने से यह ₹28,800 बैठता है। आपको लगता है कि ₹1,200 बच गए। लेकिन भुगतान के समय बैंक ने विदेशी मुद्रा बदलने का शुल्क लगा दिया। कार्ड कंपनी ने अलग विनिमय दर लगाई और ₹1,200 की बचत लगभग खत्म हो गई। इसलिए सिर्फ वेबसाइट पर दिखाई देने वाली मुद्रा की कीमत को अंतिम कीमत न मानें। आपके कार्ड या बैंक खाते से वास्तव में कितनी रकम कटेगी, वही असली कीमत है।

एक लाख की यात्रा में कितनी बचत हो सकती है?

मान लीजिए छह रात के होटल की सामान्य कीमत ₹60,000 है। VPN के जरिए दूसरे बाजार में ठीक वही कमरा, वही कर और वही रद्दीकरण नीति ₹54,000 में मिलती है। तब आपकी वास्तविक बचत ₹6,000 यानी 10 प्रतिशत है। अगर वही बुकिंग ₹48,000 में मिलती है तो बचत ₹12,000 यानी 20 प्रतिशत है।

इस तरह की बचत संभव है। लेकिन अगर अलग-अलग देशों से कीमत ₹59,000 से ₹61,000 के बीच ही मिल रही है तो कई देशों के VPN सर्वर बदलते रहने में आधा घंटा लगाने का शायद कोई खास फायदा नहीं है।यानी 10–30 प्रतिशत को संभावित अवसर मानिए, मिलने वाली तय छूट नहीं।

कब VPN से कीमत जांचना सबसे ज्यादा फायदेमंद हो सकता है?

अगर आप एक रात के लिए ₹4,000 या ₹5,000 का होटल बुक कर रहे हैं तो सिर्फ VPN की वजह से कई देशों की कीमत जांचने में बहुत समय लगाना शायद उचित नहीं होगा।

लेकिन अगर आप विदेश में दस रात के लिए ₹2 लाख का होटल बुक कर रहे हैं और दूसरे बाजार से वही बुकिंग 10 प्रतिशत सस्ती मिल जाती है तो ₹20,000 की बचत हो सकती है। ऐसे मामले में कुछ मिनट की तुलना काफी फायदेमंद हो सकती है।

इसी तरह लंबी अवधि के कार किराये में भी थोड़ी कीमत का अंतर बड़ी रकम बन सकता है।

हालांकि इसके लिए अलग से महंगा VPN खरीदना जरूरी नहीं कि पहला कदम हो। पहले देखें कि होटल या कार कंपनी की वेबसाइट खुद अलग देश या मुद्रा चुनने का विकल्प देती है या नहीं। फिर सीधे कंपनी की कीमत, सदस्यता छूट और अन्य प्रस्ताव देखें। उसके बाद VPN से तुलना करना ज्यादा समझदार तरीका है।

इस ट्रिक को आजमाने का सबसे आसान तरीका

अगर आप वास्तव में जांच करना चाहते हैं कि VPN से बचत हो रही है या नहीं, तो पांच चीजें हमेशा समान रखें: तारीख, कमरा या कार की श्रेणी, यात्रियों की संख्या, भुगतान की शर्तें और रद्दीकरण नीति।

पहले अपनी सामान्य लोकेशन से कीमत देखिए। फिर दो-तीन अलग देशों की लोकेशन से वही बुकिंग दोबारा देखिए। मुद्रा को यथासंभव समान रखिए। उसके बाद होटल या कार कंपनी की सीधी वेबसाइट पर कीमत देखिए। फिर सिर्फ कमरे या कार की कीमत नहीं, बल्कि कर, शुल्क, बीमा, जमा राशि, नाश्ता, किलोमीटर सीमा, रद्दीकरण और भुगतान की अंतिम राशि मिलाइए।

अगर सब कुछ समान है और एक बाजार से सचमुच कम कीमत मिल रही है, तभी उसे वास्तविक बचत मानिए।

आखिर सच क्या है?

VPN से होटल और कार किराये की बुकिंग सस्ती मिल सकती है। लेकिन यह कहना कि VPN लगाते ही हर बुकिंग 10–30 प्रतिशत सस्ती हो जाएगी, बढ़ा-चढ़ाकर किया गया दावा है। कुछ ऑनलाइन यात्रा बाजारों में अलग देशों के ग्राहकों के लिए अलग कीमतें या विशेष प्रस्ताव हो सकते हैं। VPN कभी-कभी आपको उस दूसरे बाजार की कीमत देखने में मदद कर सकता है। स्वतंत्र परीक्षणों में होटल की कीमतों में यह प्रभाव लगातार नहीं मिला—कई मामलों में कोई खास अंतर नहीं था, जबकि कुछ मामलों में अंतर काफी बड़ा था। कार किराये में भी कुछ परीक्षणों में बड़े अंतर सामने आए हैं, लेकिन उनके आधार पर हर बुकिंग के लिए 30–80 प्रतिशत बचत की उम्मीद करना ठीक नहीं होगा।

असल में इस पूरी कहानी का रहस्य VPN नहीं, बल्कि अलग-अलग बाजारों में कीमतों का अंतर है। VPN सिर्फ उस अंतर को देखने का एक माध्यम है।

इसलिए अगली बार महंगी होटल या कार बुकिंग करने से पहले कुछ मिनट तुलना जरूर कीजिए। अपनी सामान्य लोकेशन से कीमत देखिए, दो-तीन दूसरे बाजारों से भी देखिए, होटल या कंपनी की अपनी वेबसाइट जांचिए और सबसे आखिर में कर, शुल्क, बीमा, मुद्रा विनिमय और रद्दीकरण सहित अंतिम रकम मिलाइए।

अगर समान कमरे की कीमत ₹50,000 के बजाय ₹40,000 मिल रही है और शर्तें भी बिल्कुल समान हैं, तो यह सचमुच 20 प्रतिशत की बचत है।

लेकिन अगर सस्ती कीमत सिर्फ इसलिए है क्योंकि उसमें बीमा नहीं है, बुकिंग वापस नहीं हो सकती या वह केवल किसी खास देश के निवासियों के लिए है, तो VPN ने आपको सस्ता सौदा नहीं दिलाया बल्कि उसने आपको अलग शर्तों वाला सौदा दिखाया है। यही इस पूरे ट्रैवल हैक का सबसे सही निष्कर्ष है: VPN कीमत कम नहीं करता, लेकिन कभी-कभी वह आपको ऐसी कीमत दिखा सकता है जो आपकी सामान्य इंटरनेट लोकेशन से दिखाई नहीं दे रही थी।

Yogesh Mishra
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Yogesh Mishra

Founder & CEO Mail ID - mishrayogesh5@gmail.commishrayogesh5@gmail.com

Journalism for Yogesh Mishra is not a profession but a mission. In his career, spanning over 26 years, he has served just not as journalist but an educationist and literary as well. Looking at journalism as an instrument of change, he has also highlighted corruption and problems faced in various sectors like education, health, water, sanitation and agriculture. The exposes to his credit which deserve mention include largest tax evasion in the country by Hasan Ali and the fraud committed by 25 Indians, while he was working for the Outlook magazine as the UP Bureau Head. The amount involved was whopping Rs 18,000 crores. He was the first to report the PMO’s involvement in the ‘2G Spectrum Scam’, during the UPA regime. Another commendable work by him is exposing the Commonwealth Games Scam along with the video footage of a meeting before the beginning of the tournament. The issue of banning the video is sub judice. His news item, “Uttar Pradesh ke sau gaon bhi Nirmal Gram Pusaraskar ke layak nahi” exposed how the state government wrongly claimed prizes for 1,269 villages. It led to the cancellation of the prizes. Even UNICEF research testified and led to discontinuation of the NIRMAL GRAM AWARDS. He is, presently Member of Fee Review committee set up by the government of Uttar Pradesh to fight menace of arbitrary fee structure in private schools across the state. Many of his suggestions concerning electoral reforms have been adopted and implemented by the Election Commission of India. He was a member of the ‘Navoday Vidyalaya Samiti’, review committee constituted by Govt. of India for the implementation of Sarv Siksha Abhiyaan in UP. Besides writing in national and international newspapers and magazines, he has taken up teaching assignments and served as a visiting faculty in about a dozen universities. Author of ten books, he has also received prestigious Madhu Limaye and Yash Bharti awards. His new goal is to set up a new media house. A beginning has been already made as he has launched a multi-lingual news portal and a weekly magazine, Apna Bharat.

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