Azamgarh News: अंग्रेजी हुकूमत के दौरान तरवा थाना फूंक दिया गया था, महान स्वतंत्रता सेनानी तेज बहादुर ने किया था नेतृत्व

Azamgarh News: तेजबहादुर ने क्रांतिकारी नौजवान साथियों को उत्साहित किया और कहा कि "जब तुम लोग नदी नहीं तैर सकते हो तो थाने पर कैसे कब्जा करोगे।"

Shravan Kumar
Published on: 15 Aug 2025 7:19 PM IST
Tarwa Thana was Fired British rule leadership of great freedom fighter Tej Bahadur
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महान स्वतंत्रता सेनानी तेज बहादुर के नेतृत्व में अंग्रेजी हुकूमत के दौरान तरवां थाना फूंक दिया गया था (Photo- Newstrack)

Azamgarh News: अंग्रेजों की गुलामी से आजाद होने पर प्रति वर्ष 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाया जाता है। आज देश आजादी के जश्न में डूबा हुआ है। आजादी के लिए अनेकों क्रांतिकारियों ने अपने प्राणों का बलिदान दिया था। उनकी कुर्बानी के बल पर ही आज हम आजाद हवा में सांस ले रहे हैं। हमें देश की उन्नति के लिए आजादी के लिए अपने प्राणों की कुर्बानी देने वाले शहीदों के दिखाए मार्ग पर अग्रसर होना चाहिए।

'अंग्रेजों भारत छोड़ो' के नारे के बाद 1942 में नौजवानों में देश प्रेम के भाव उठने लगे। देश की आजादी के लिए पूरा देश आंदोलित हो गया था। क्रन्तिकारियो ने रेल की पटरियां उखाड़ी, तो वही अंग्रेजी हुकूमत के सरकारी संस्थान भी क्रांतिकारियों के निशाने पर थे।

इस क्रांतिकारी आंदोलन में आजमगढ़ जनपद के तहसील लालगंज के अंतर्गत ऐरा कला निवासी महान स्वतंत्रता सेनानी तेज बहादुर की बहादुर एवं योगदान को आज भी लोग याद करते हैं। स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले थाना तरवां कांड के नायक स्वतंत्रता संग्राम सेनानी तेज बहादुर 1942 में 17 अगस्त को नागपंचमी के दिन तहसील क्षेत्र के डुभांव ग्राम स्थित बाराहजी के मंदिर पर मेला लगा था।

कहीं दंगल हो रहा था तो कहीं लोग झूले का आनंद ले रहे थे। वहीं बगल के घर में उत्साही नौजवानों की तेज बहादुर के नेतृत्व में बैठक चल रही थी। देर रात तक चली बैठक में निर्णय लिया गया कि कल ही तरवां थाना फूंक दिया जाए। तेज बहादुर के नेतृत्व में नौजवानों ने कूबा के जागरूक लोगों को कल के निर्णय की सूचना की सूचना देनी थी।

उस दौरान उदंती नदी बढ़ाव पर थी जिसके दोनों तरफ मीलों तक पानी ही पानी दिखाई पड़ रहा था। बैठक में उपस्थित कई लोगों ने कहा कि हमें तैरना नहीं आता। इस पर तेजबहादुर ने क्रांतिकारी नौजवान साथियों को उत्साहित किया और कहा कि "जब तुम लोग नदी नहीं तैर सकते हो तो थाने पर कैसे कब्जा करोगे। उनकी ललकार से बहादुर सेनानियों ने रात 10 बजे भरी हुई बरसाती नदी के विशाल पाट को तैर कर रसूलपुर के जगदीश यादव के यहां पहुंच गए।"

वहां से उन्हें साथ लेकर लगभग एक बजे रात में रामनगर के रामान्द को साथ लेकर आगे सिधौना संदेश देने के बाद रोआंपार होते हुए मेहनाजपुर क्षेत्र के अनेक लोगों जिनमें ओमदत्त मिश्र, बच्चा बाबू, संकठा रमाकांत तिवारी, नंदकिशोर कोसड़ा आदि को सूचित कर रात में ही तरवां निकल गए।

तरवा गांव में तेज बहादुर के नेतृत्व में कुछ नौजवानों का दल तेजबहादुर "सह के साथ हो लिये। यह दल दिन में 10 बजे तरवां स्कूल पहुंचा। जनसमूह एकत्र करने के लिए विभिन्न गांवों की ओर अलग-अलग रवाना हो गई थी। निर्णय के आधार पर योजनाबद्ध ढंग से चारों ओर से हजारों की संख्या में लोगों ने थाना घेर लिया।

अनेक लोगों के हाथों में मिट्टी के तेल थे। दारोगा संतबख्श ¨सह अपने हमराहियों के साथ राइफलों को तान कर खड़ा हो गया, लेकिन हजारों की भीड़ के आगे उसकी हिम्मत नहीं पड़ी। सरेंडर होने के बाद दारोगा ने कहा कि आप लोग चाहते क्या हैं। तेज बहादुर ने कहा पहले सभी असलहे हमें दे दो, हम लोग थाना में आग लगाएंगे।

तेजबहादुर ने दिखाई मानवीय संवेदना

थानेदार ने कहा कि हमारे परिवार का क्या होगा। नेता तेजबहादुर ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए दारोगा के परिवार को एक तांगा बुलवाकर खरिहानी उसके किसी रिश्तेदार के यहां भेजवाया। इसके बाद थानेदार सहित सभी आरक्षी पुलिसजनों को एक अलग कमरे में बंदकर पूरे थाना को आग के हवाले कर दिया।

थानेदार का घोड़ा लेकर तेज बहादुर क्षेत्र में चले गए। उसकी बाद डाकखाना भी फूंक दिया गया। यही नहीं पूरा क्षेत्र 15 दिन तक अंग्रेजी शासन से मुक्त रहा। कामरेड बसंता ने बताया कि महान स्वतंत्रता सेनानी तेज बहादुर बाद में कम्युनिस्ट विचारधारा से जुड़ गए।

वे जात- पात व मजहब से ऊपर उठकर लोगों की मदद करते थे।

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Shashi kant gautam

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