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Baghpat: गन्ना भुगतान में लगातार पिछड़ रही मलकपुर शुगर चीनी मिल, किसानों की दिवाली भी रही फीकी
Baghpat News: मलकपुर शुगर मिल में गन्ना किसानों के भुगतान में लगातार देरी, किसानों की दिवाली भी फीकी रही
गन्ना भुगतान में लगातार पिछड़ रही मलकपुर शुगर चीनी मिल (photo: social media )
Baghpat News: गन्ना किसानों को उनका हक दिलाने की बात करने वाली राजनीतिक पार्टियाँ हर मंच पर बड़े-बड़े दावे करती हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही तस्वीर दिखाती है। विशेषकर बागपत क्षेत्र की मलकपुर शुगर चीनी मिल से जुड़े किसानों का दर्द लगातार बढ़ता ही जा रहा है। हैरानी की बात यह है कि किसानों की बात करने वाली राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) भी इस गंभीर मुद्दे पर पिछले कई वर्षों से कोई ठोस हस्तक्षेप करती नहीं दिख रही है।
लगातार भुगतान में देरी से किसान परेशान
मलकपुर शुगर चीनी मिल का इतिहास किसानों के भुगतानों को लेकर हमेशा विवादों में रहा है। हर पेराई सत्र की शुरुआत करोड़ों के पुराने बकाए के साथ होती है और सत्र समाप्त होते-होते यह बकाया और बढ़ जाता है। सूत्रों के अनुसार, मलकपुर चीनी मिल क्षेत्र में लगभग 23,000 हेक्टेयर में गन्ना बोया जाता है और करीब 35,000 किसान इस मिल में गन्ना आपूर्ति करते हैं। पिछला पेराई सत्र 2024-25 समाप्त होने पर मिल पर 400 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया था। अब जबकि 2025-26 का पेराई सत्र 30 अक्टूबर से शुरू होने वाला है, तब भी 184 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किसानों का अटका हुआ है।
सबसे चिंताजनक बात यह है कि मिल के गोदामों में चीनी का स्टॉक शून्य बताया जा रहा है। यानी भुगतान के लिए मिल को या तो नया ऋण उठाना पड़ेगा या फिर अगले सत्र में बनने वाली चीनी बेचकर किसानों को पैसा देना होगा—जिसका मतलब है कि भुगतान में और भी लंबा इंतज़ार।
प्रशासन और नेताओं की चुप्पी पर सवाल
किसानों का कहना है कि मिल प्रशासन से लेकर जिला गन्ना विभाग तक कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे रहा। वहीं, किसानों की पार्टी कहलाने वाली रालोद की ओर से भी कोई ठोस दबाव की कार्रवाई नज़र नहीं आ रही।
इस बार तो पैसे न मिलने की वजह से कई किसानों की दिवाली तक बेरौनक बीत गई, लेकिन फिर भी राजनीतिक स्तर पर केवल बयानबाजी ही सुनने को मिल रही है।
डॉ. अजय कुमार (विधायक, छपरौली) का कहना है कि गन्ना किसान नीति को नुकसान पहुँचाने वाली मिलों पर कार्रवाई जारी है। शासन और प्रशासन स्तर पर दबाव बनाया जा रहा है ताकि किसान जल्द अपना भुगतान प्राप्त कर सकें।
डॉ. कुलदीप उज्ज्वल (राष्ट्रीय सचिव, रालोद) ने बताया कि पुराने बकाए को अनुपात में लाया गया है। जो भी भुगतान शेष है, उसे जल्द निपटाने की कोशिश की जाएगी। मिल चाहे जैसे भी भुगतान का इंतज़ाम करे, यह उसकी जिम्मेदारी है।
वही किसानों को अब भी उम्मीद है कि इस बार सत्र शुरू होने से पहले कुछ ठोस कदम उठेंगे। लेकिन जब तक कागज़ी आश्वासनों की जगह ज़मीनी कार्रवाई नहीं होती, तब तक मलकपुर से जुड़े हजारों किसानों की आर्थिक परेशानी कम होती दिखाई नहीं दे रही है ।


