Chandauli News: पुत्रों की लंबी उम्र के लिए माताओं ने रखा 'जीवित्पुत्रिका' का कठिन व्रत

Chandauli News: चंदौली में जीवित्पुत्रिका पर्व श्रद्धा और उत्साह से मनाया गया। माताओं ने पुत्रों की लंबी उम्र के लिए कठिन निर्जला व्रत रखकर भगवान से प्रार्थना की।

Sunil Kumar
Published on: 14 Sept 2025 7:03 PM IST
Mothers kept difficult vow of Jivitputrika for longevity of sons
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पुत्रों की लंबी उम्र के लिए माताओं ने रखा 'जीवित्पुत्रिका' का कठिन व्रत (Photo- Newstrack)

Chandauli News: चंदौली जिले में 'जीवित्पुत्रिका' का पावन पर्व बड़े ही जोश और श्रद्धा के साथ मनाया गया। माताओं ने अपने बच्चों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए इस कठिन और निर्जला व्रत को रखा। यह पर्व मुख्य रूप से बिहार, उत्तर प्रदेश और झारखंड जैसे राज्यों में बहुत धूमधाम से मनाया जाता है।

चेयरमैन आभा जायसवाल ने भी किया व्रत

सैयदराजा नगर पंचायत की चेयरमैन आभा जायसवाल ने भी इस अवसर पर तालाब पर पूजा-अर्चना की। उन्होंने बताया कि इस व्रत में महिलाएं अपने बच्चों की सलामती के लिए भगवान जिउतबन्धन से प्रार्थना करती हैं। यह व्रत माताओं की अपने बच्चों के प्रति गहरी आस्था और प्यार का प्रतीक है।

व्रत के नियम और महत्व

'जीवित्पुत्रिका' व्रत अश्विन महीने के कृष्ण पक्ष की अष्टमी के दिन मनाया जाता है। इसे 'जिउतिया' भी कहते हैं। इस व्रत को बेहद पवित्र माना जाता है। महिलाएं व्रत के दौरान एक बूंद पानी भी नहीं पीती हैं। यह व्रत सबसे कठिन व्रतों में से एक माना जाता है, जिसमें माताएं पूरे दिन और रात बिना कुछ खाए-पिए रहती हैं।

नौगढ़ और सैयदराजा में दिखा उत्साह

नौगढ़ और सैयदराजा में भी इस पर्व को लेकर काफी उत्साह देखा गया। महिलाओं ने तालाबों को सजाया और विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस दौरान सैयदराजा के तालाब पर एक छोटा सा मेला भी लगा, जहाँ बच्चों ने खिलौनों का आनंद लिया।

इस खास मौके पर नगर पंचायत प्रतिनिधि राजेश कुमार 'बाढू' जायसवाल, अयोध्या के नगर आयुक्त भरत भार्गव, पूर्व चेयरमैन अरविंद कुमार सहित कई गणमान्य लोग मौजूद रहे। लोगों की सुरक्षा और सुविधा के लिए सैयदराजा पुलिस प्रशासन और नगर पंचायत के कर्मचारी भी पूरी तरह मुस्तैद थे।

नौगढ़ में ग्राम प्रधान नीलम ओहरी और ग्राम प्रधान प्रतिनिधि दीपक गुप्ता ने भी इस पर्व की तैयारियों में अहम भूमिका निभाई। यह पर्व दिखाता है कि कैसे हमारी परंपराएं और आस्था आज भी लोगों को एक-दूसरे से जोड़कर रखती हैं।

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Shashi kant gautam

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