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Chandauli News: वनांचल शिक्षा की हकीकत: निरीक्षण में उजागर कमियां
Chandauli: निरीक्षण के दौरान बच्चों से सीधा संवाद करते हुए शिक्षा की वास्तविक तस्वीर सामने ला दी।
वनांचल शिक्षा की हकीकत: निरीक्षण में उजागर कमियां (photo: social media )
Chandauli News: जिले के वनांचल और अति पिछड़े क्षेत्र नौगढ़ की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। खंड विकास अधिकारी अमित कुमार ने शनिवार को देवखत, अमृतपुर और बाघी गांव के प्राथमिक विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान बच्चों से सीधा संवाद करते हुए उन्होंने शिक्षा की वास्तविक तस्वीर सामने ला दी।
बच्चों से संवाद, पढ़ाई पर सवाल
निरीक्षण के दौरान पांचवीं कक्षा के बच्चों से गणित, अंग्रेजी और हिंदी के बुनियादी प्रश्न पूछे गए। कुछ बच्चों ने उत्तर देने का प्रयास किया, परंतु अधिकांश बच्चे न तो सवाल को समझ पाए और न ही लिखकर स्पष्ट कर सके। शिक्षा का यह स्तर चिंताजनक है, खासकर तब जब बच्चों ने यह माना कि वे विषयवस्तु जानते तो हैं, पर लिखने और समझाने में अक्षम हैं।
स्कूलों की जमीनी सच्चाई
अधिकारी के निरीक्षण में यह भी सामने आया कि विद्यालयों में नामांकन तो है, लेकिन वास्तविक ज्ञान और कौशल बच्चों में विकसित नहीं हो पा रहा। कमोबेश यही हाल इन सभी स्कूलों का रहा। शिक्षा का स्तर सतही है और बच्चों की समझ कमजोर। यह स्थिति न केवल शिक्षा विभाग के लिए चुनौती है, बल्कि अभिभावकों और स्थानीय समाज के लिए भी चिंता का विषय है।
शिक्षा की नींव को मजबूत करने की जरूरत
वनांचल के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता है। केवल नामांकन या उपस्थिति से शिक्षा का उद्देश्य पूरा नहीं होगा। निरीक्षण से साफ है कि अध्यापकों को अपनी जिम्मेदारी और अधिक गंभीरता से निभानी होगी। यदि बुनियादी पढ़ाई में ही बच्चे कमजोर रहेंगे तो भविष्य की पढ़ाई का आधार डगमगा जाएगा।
चंदौली का यह दृश्य केवल नौगढ़ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सवाल पूरे प्राथमिक शिक्षा तंत्र पर खड़ा करता है। शिक्षा को केवल योजना और कागजी आंकड़ों से नहीं, बल्कि बच्चों की वास्तविक समझ से परखा जाना चाहिए। वनांचल की यह सच्चाई बताती है कि "शिक्षा का उजाला" अभी भी वहां के बच्चों तक अधूरा ही पहुंचा है।


